गोरखपुर – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Thu, 05 Jun 2025 06:16:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg गोरखपुर – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 Yogi Adityanath History in Hindi: गैंगस्टर्स के गढ़ गोरखपुर में कैसे उभरे योगी आदित्यनाथ? https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html#respond Fri, 23 May 2025 05:57:16 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1139 Read more

]]>

हाता और शक्ति सदन की लड़ाई में कैसे हुई योगी आदित्यनाथ की एंट्री?

Yogi Adityanath History in Hindi: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा नाम है जिसने न केवल अपनी छवि बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीतिक दिशा को भी बदला है—योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath)। उनकी कहानी केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे क्षेत्र की भी है जो कभी गैंगस्टर्स और अपराधियों के गढ़ के रूप में जाना जाता था। इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे गोरखपुर के उस माहौल से निकलकर योगी आदित्यनाथ ने खुद को स्थापित किया और राजनीति की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

योगी आदित्यनाथ: असली नाम और शुरुआत

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) का असली नाम है अजय सिंह बिष्ट, जो उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जन्मे थे। उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की और महंत अवैद्यनाथ के सान्निध्य में रहकर गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर से जुड़ गए। महंत अवैद्यनाथ के मार्गदर्शन में योगी ने न केवल धार्मिक गतिविधियों में बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

गोरखपुर, जो कभी अपराधियों और गैंगस्टरों का गढ़ था, वहां योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने धार्मिक और सामाजिक सुधारों के साथ-साथ राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई। उनके नेतृत्व में यह क्षेत्र धीरे-धीरे बदलने लगा।

गोरखपुर की राजनीतिक पृष्ठभूमि और अपराध की समस्या

गोरखपुर (Gorakhpur) का राजनीतिक इतिहास काफी जटिल रहा है। 1990 के दशक में यहां के हालात ऐसे थे कि अपराध और हिंसा आम बात थी। राजनीतिक दलों के बीच सत्ता संघर्ष और आपसी लड़ाइयों ने इस क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था।

इस दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन ने पूरे उत्तर भारत में राजनीतिक माहौल को गहरा प्रभावित किया। राम जन्मभूमि के मुद्दे ने हिंदू राष्ट्रवाद को बल दिया और उसी समय महंत अवैद्यनाथ जैसे धार्मिक नेताओं की भूमिका भी बढ़ी।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस संदर्भ में खुद को एक मजबूत हिंदू राष्ट्रवादी नेता के रूप में स्थापित किया। उन्होंने न केवल धार्मिक जनसमूह को संगठित किया, बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी अपनी पकड़ मजबूत की।

महंत अवैद्यनाथ और योगी आदित्यनाथ का संबंध

महंत अवैद्यनाथ, गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत और एक प्रभावशाली धार्मिक नेता थे, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के राजनीतिक करियर की नींव रखी। अवैद्यनाथ ने योगी को अपना उत्तराधिकारी बनाया और उन्हें गोरखपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।

महंत अवैद्यनाथ स्वयं भी राजनीति में सक्रिय रहे और उनके प्रभाव ने योगी के राजनीतिक सफर को गति दी। योगी ने महंत जी के नक्शेकदम पर चलते हुए गोरखपुर (Gorakhpur) की राजनीति को नई दिशा दी।

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक राजनीति: 1990 का दशक

1990 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम घटनाएं हुईं, जिनका योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के उभार पर गहरा प्रभाव पड़ा। उस समय के राष्ट्रपति शासन, मंडल आयोग की सिफारिशें, और तत्कालीन प्रधानमंत्रियों जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, राजीव गांधी के दौर ने प्रदेश की राजनीति को जटिल बना दिया।

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या के बाद राजनीतिक स्थिरता में कमी आई, जिससे उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की राजनीति और भी अस्थिर हो गई। इसी बीच योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक और सामाजिक आधार पर अपना जनाधार मजबूत किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक उदय

राम जन्मभूमि आंदोलन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। इस आंदोलन ने धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक ताकत में बदल दिया। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे अपनी राजनीतिक पहचान का आधार बनाया।

उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक मंच पर उठाया और हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूती से अपनाया। इस कारण वे उत्तर प्रदेश में बीजेपी के मजबूत चेहरों में से एक बने।

गोरखपुर से मुख्यमंत्री तक: योगी आदित्यनाथ का सफर

गोरखपुर से सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। उनके नेतृत्व में गोरखपुर का विकास हुआ, साथ ही सामाजिक सुधारों पर भी जोर दिया गया। वे लगातार 5 बार गोरखपुर सीट से सांसद चुने गए।

2017 में, योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास और धार्मिकता के मुद्दे प्रमुख रहे।

कानून-व्यवस्था में सुधार

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए योगी सरकार ने कई कदम उठाए। गैंगस्टर और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिससे प्रदेश में अपराध दर में कमी आई।

धार्मिक और सामाजिक सुधार

धार्मिक स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ योगी ने सामाजिक सुधारों पर भी ध्यान दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता और विकास के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।

राजनीतिक क़िस्से: गलतफहमियां और सुधार

राजनीतिक इतिहास में अक्सर गलतफहमियां और भ्रांतियां होती हैं। ऐसे मामलों में सत्य की खोज और सुधार आवश्यक होता है। यह दिखाता है कि राजनीति में तथ्यों की जांच और सही जानकारी का महत्व कितना बड़ा है। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के राजनीतिक सफर में भी कई बार गलतफहमियां और आलोचनाएं आईं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों से अपनी छवि मजबूत की।

निष्कर्ष: योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर की नई पहचान

गोरखपुर, जो कभी अपराध और अस्थिरता का केंद्र था, आज योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। उनकी धार्मिक जड़ों और राजनीतिक कुशलता ने इस क्षेत्र को न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी बदल दिया है।

योगी का सफर यह दिखाता है कि कैसे एक क्षेत्र की जटिल राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं को समझकर, सही नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उनकी कहानी न केवल गोरखपुर के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की भूमिका आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है, और उनकी कहानी राजनीतिक क़िस्सों में एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।

Yogi Adityanath History in Hindi, Cm Yogi, Yogi Adityanath, Gorakhpur, Virendra Shahi, Harishankar Tiwari, Gorakhnath mandir, shripraksh shukla, mafiya

]]>
https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html/feed 0 1139
अब गोरखपुर में दूध बेचने वालों को लेना होगा Fssai Food License https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html#respond Tue, 15 Oct 2024 13:37:45 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=767 Read more

]]>
हमारे देश में दूध एक ऐसा पदार्थ है जिसका सेवन अधिकतर सभी लोगों के द्वारा किया जाता है। इस कारण से भारत में दूध की बिक्री बहुत ज्यादा होती है। लेकिन दिन पर दिन कुछ लोगों के दूध में मिलावट किया जा रहा है और इसकी समस्या समय के साथ बढ़ते ही जा रही है। भारत के उत्तर प्रदेश में दूध में मिलावट समस्या बहुत ज्यादा आ रही है, इसमें गोरखपुर का नाम सबसे ऊपर है। इसके कारण भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई गाइडलाइन लागू किया है। इस गाइडलाइन के अंतर्गत दूध विक्रेताओं के लिए आईडी कार्ड जारी किया जाएगा और साथ  ही 500 से अधिक दूध बेचने वाले लोगों को Fssai Food License लेना अनिवार्य होगा।

ऐसे में इस लेख के द्वारा हम आपको बताने वाले हैं कि दूध विक्रेताओं को कौन सा लाइसेंस लेना होगा और साथ ही यह लाइसेंस कैसे मिल सकता है। अगर आप भी इन सभी बातों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लेख को अंत तक पढ़े।

दूध बेचने वालों को क्यों लेना होगा लाइसेंस।

हमारे देश में प्रतिदिन हजारों लीटर की दूध की बिक्री होती है। लेकिन कुछ समय से दूध और दूध से बने उत्पादों की पदार्थ में काफी ज्यादा मिलावट किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध और दूध से बने उत्पादों की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए कुछ गाइडलाइन जारी किया है, जिसके तहत सभी को आईडी कार्ड या लाइसेंस लेना होगा।

दूध विक्रेताओं को लाइसेंस लेने के लिए इसलिए कहा गया है ताकि सभी लोगों को शुद्ध दूध प्राप्त हो सके। आपको बता दे कि केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने हाल ही में लोकसभा में यह जानकारी दिया था कि उत्तर प्रदेश में दूध में मिलावट सबसे ज्यादा किया जा रहा है, और इसी के बाद से खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस विषय पर तेजी से अपना कार्य शुरू कर दिया है।

दूध में मिलावट की सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से सामने आ रही है, और गोरखपुर का नाम इसमें सबसे ऊपर है। ऐसे में गोरखपुर के सभी दूध विक्रेताओं को परिचय पत्र यानी आईडी कार्ड जारी करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा गोरखपुर में मौजूद वैसे दूध विक्रेताओं जो प्रतिदिन 500 लीटर से अधिक दूध की बिक्री करते हैं, उन्हें अब लाइसेंस लेना होगा।

दूध विक्रेताओं को कौन सा लाइसेंस लेना होगा?

आपको बता दे कि शहर के अंदर दूध बेचने वाले दूधियों का परिचय पत्र बनवाया जाएगा, वही परिचय पत्र बनवाने के लिए सभी को ₹100 का भुगतान जमा करना होगा। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिलावटी दूध को रोकने के लिए यह पहल किया गया है।

परिचय पत्र के चलते शहर में दूध बेचने वाले लोगों को आसानी से पहचान किया जा सकेगा। इसके अलावा 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले डेयरी संचालकों को खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा Fssai Food License लेना होगा। विभाग द्वारा जारी किया गया गाइडलाइन को पूर्ति करने के लिए कार्य किया जाना शुरू कर दिया गया है।

ऐसे में गोरखपुर के रहने वाले सभी दूध विक्रेताओं को अपना पहचान पत्र बनवाना होगा और 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले डायरी संचालकों को लाइसेंस लेना जरूरी है। अगर दूध विक्रेताओं सरकार के नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

दूध बेचने के लिए Fssai Food License कैसे प्राप्त करें?

अगर आप भी दूध बेचने के बिजनेस में लगे हुए हैं तो आपको सबसे पहले अपना पहचान पत्र यानी आईडी कार्ड बनवाना चाहिए, वहीं अगर आप 500 अधिक लीटर दूध बेचती है तो आपको Fssai Food License लेना अनिवार्य है। ऐसे में बहुत से लोगों की यह समस्या है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है की Fssai Food License कैसे प्राप्त किया जाता है।

इसीलिए हम आपको बता दे कि अगर आपको भी Fssai Food License लेना है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि खाद सुरक्षा विभाग की टीम दूध विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन करने के लिए शिविर आयोजित करने वाली है।

विभाग द्वारा इन शिवरो का आयोजन उसे स्थान पर किया जाएगा जहां सबसे ज्यादा दूध विक्रेता इकट्ठा होते हैं। गोरखपुर में जहां-जहां सबसे ज्यादा दूध विक्रेताएं एकत्रित होते हैं उसी स्थान पर सिविल आयोजित किया जाने वाला है, और यहीं से आप Fssai Food License प्राप्त कर सकते हैं।

पहचान पत्र और लाइसेंस के बिना दूध बेचने पर होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया इस गाइडलाइन को अगर कोई भी व्यक्ति फॉलो नहीं करता है तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दे की रजिस्ट्रेशन ना करवाने वाले विक्रेताओं पर सबसे पहले विभाग के द्वारा नोटिस भेजा जाएगा और साथ ही उनके दूध को जप्त कर लिया जाएगा।

अगर इतना होने के बाद भी वह नहीं मानते हैं तो दूध विक्रेताओं के खिलाफ न्यायालय में मामला दर्ज भी कराया जा सकता है। मामला दर्ज करवाने के बाद अगर दूध विक्रेताएं दोषी पाए जाते हैं तो उन पर ₹2,00,000 तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

गोरखपुर के सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा, डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि दुग्ध विक्रेताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए 100 रुपये की फीस तय की गई है। सभी दुग्ध विक्रेताओं को अपना पहचान पत्र साथ में रखना जरूरी होगा।

उन्होंने कहा कि दूध की शुद्धता को लेकर सतर्क न रहने वाले विक्रेताओं की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह कदम लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने और मिलावट को रोकने के लिए उठाए गए हैं। दूध बेचने वालों को साफ-सफाई और गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना होगा।

यह भी पढ़े :- क्या खाने पीने की चीजों में मिलावट करने वाले किसी हत्यारे से कम हैं?

निष्कर्ष:

हमारे देश में दूध और दूध से बने उत्पादों की डिमांड काफी ज्यादा होती है, लेकिन समय के साथ इन पदार्थों में काफी ज्यादा मिलावट किया जा रहा है, जिसके चलते खाद्य सुरक्षा विभाग कई गाइडलाइन जारी किया है। इस गाइडलाइन के अंतर्गत सभी दूध विक्रेताओं को अपना आईडी कार्ड प्राप्त करना होगा और 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले को Fssai Food License प्राप्त करना होगा। ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं की Fssai Food License कैसे प्राप्त करें तो इसके लिए ऊपर दिए गए लेख को अंत तक पढ़े। उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया, होगा sanjayrajput.com पर इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद।

]]>
https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html/feed 0 767
इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता में चयनित खिलाड़ियों को क्षत्रिय महासभा ने किया सम्मानित https://sanjayrajput.com/2024/07/kshatriya-mahasabha-honoured-to-candidates-selected-in-iskk.html https://sanjayrajput.com/2024/07/kshatriya-mahasabha-honoured-to-candidates-selected-in-iskk.html#respond Thu, 18 Jul 2024 16:19:01 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=495 Read more

]]>
-इंटरनेशनल सोतोकान कराटे डू- क्योंकाई यूपी के महासचिव दीपक शाही अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा खेलकूद प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष गोरखपुर मनोनीत

गोरखपुर। अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता (ISKK) में कराटे ट्रेनिंग सेंटर गोरखपुर के चयनित 12 खिलाड़ियों का गुरुवार को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

गगहा निवासी अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के मंडल सचिव अनिल सिंह के सिद्धार्थ एनक्लेव गोरखपुर स्थित आवास पर आयोजित एक सम्मान समारोह में इंटरनेशनल सोतोकान कराटे डू- क्योंकाई में गोरखपुर के ग्रामसभा गोला बाजार के 6 तथा ग्रामसभा बांसगांव के 6 चयनित खिलाड़ियों को क्षत्रिय महासभा ने सम्मानित किया।

इस अवसर पर एसोसिएशन के महासचिव दीपक शाही ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता (ISKK) में चयनित खिलाड़ी कोलकाता के नेताजी इनडोर स्टेडियम कोलकाता में 26, 27 और 28 जुलाई 2024 के बीच होने वाली अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। जिसमें भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मलेशिया, सऊदी अरबिया तथा ईरान के कराटे खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता (ISKK) में जिन 12 कराटे खिलाड़ियों का चयन हुआ है उनमें गोला बाजार के रतन कुमार (18), जितेंद्र कुमार (17), आबिद हुसैन (19), मंगेश कुमार (14), उदित विश्वकर्मा (11), राजकपूर (13) तथा बांसगांव क्षेत्र के शिवांश सिंह (16), आदित्य सिंह (15), आयुष कुमार सिंह (15), विशाल भारती (18), अनमोल राव (17) तथा सतीश मौर्य (18) हैं।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के गोरखपुर जिलाध्यक्ष ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता (ISKK) में चयनित होकर इन खिलाड़ियों ने अपने गांव, जिले और प्रदेश को गौरवान्वित किया है। इन खिलाड़ियों का सम्मान करके क्षत्रिय महासभा स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रही है।

इस अवसर पर क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष खेलकूद प्रकोष्ठ रंजीत शाही ने इंटरनेशनल सोतोकान कराटे डू- क्योंकाई यूपी के महासचिव दीपक शाही को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा खेलकूद प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष गोरखपुर मनोनीत भी किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष खेलकूद प्रकोष्ठ रंजीत शाही, जिलाध्यक्ष लालू सिंह, मंडल सचिव अनिल सिंह, जिला महामंत्री राजकुमार सिंह, मंडल अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ अनुज सिंह कटका, संगठन मंत्री प्रवीण सिंह सहित संगठन के दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम का वीडियो नीचे देखें-

]]>
https://sanjayrajput.com/2024/07/kshatriya-mahasabha-honoured-to-candidates-selected-in-iskk.html/feed 0 495
स्व. दिवाकर सिंह की पुण्यतिथि पर क्षत्रिय महासभा का गोरखपुर में फ्री हेल्थ चेकअप कैंप https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4.html https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4.html#respond Thu, 04 Jul 2024 13:23:00 +0000 Read more

]]>

-हर किसान, गरीब, पीड़ित और दबे कुचले की आवाज थे स्व. दिवाकर सिंह: लालू सिंह
गोरखपुर। किसान नेता स्व. दिवाकर सिंह की 15वीं पुण्यतिथि पर उनके गांव खडराइच में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा एक नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई।
इसे भी पढ़ें गैंग्स ऑफ गोरखपुर
इस स्वास्थ्य शिविर में गोरखपुर के शाही ग्लोबल हॉस्पिटल, संगम आई हॉस्पिटल, अथर्व चाइल्ड क्लिनिक एवं उमा डेंटल क्लिनिक के सौजन्य से लोगों के शुगर, बीपी, आंख, दांत आदि की नि:शुल्क जांच की गई तथा मुफ्त दवा का वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने कहा कि किसान नेता स्व. दिवाकर सिंह हर किसान, गरीब, पीड़ित और दबे कुचले की आवाज थे। उनकी पुण्यतिथि पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन कर हम उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने का प्रयास कर रहे हैं।
इस दौरान क्षत्रिय महासभा द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया। 
किसान नेता स्व. दिवाकर सिंह के पुत्र मानवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पिता की पुण्यतिथि पर आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया है।


इसे भी पढ़ें- सवर्ण कौन है?

इस अवसर पर मुख्य रूप से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय मंत्री ओंकार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री अरुण सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष (युवा) सूरज सिंह सेंगर, जिलाध्यक्ष लालू सिंह, मंडल अध्यक्ष (युवा) अनुज सिंह कटका, जिला महामंत्री राजकुमार सिंह, खोराबार ब्लॉक अध्यक्ष नवीन प्रताप सिंह सहित क्षत्रिय महासभा के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
इस पूरे कार्यक्रम का वीडियो नीचे देखें-

]]>
https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a3%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a4.html/feed 0 16
Yogi Adityanath Story in Hindi: जानिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के जीवन से जुड़ी ये खास बातें https://sanjayrajput.com/2021/06/yogi-adityanath-story-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2021/06/yogi-adityanath-story-in-hindi.html#respond Sat, 05 Jun 2021 09:19:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2021/06/05/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a6/ Read more

]]>

Yogi Adityanath Story in Hindi: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) 5 जून 2025 को 53 साल के हो गए हैं। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में  5 जून 1972 को एक राजपूत परिवार में जन्मे अजय सिंह बिष्ट (Ajay Singh Bisht) गोरखपुर (Gorakhpur) पहुंचकर योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) बन गए। देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता के सिंहासन पर योगी विराजमान हैं। महज 26 साल की उम्र में संसद पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) 45 साल की उम्र में यूपी के सीएम बने। आज उत्तरप्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत में उन्हें हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर जाना जाता है। उनके प्रशंसक उन्हें देश के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर भी देखते हैं।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के गोरखनाथ (Gorakhnath) मठ के पीठाधीश्वर से देश के सबसे ताकतवर सीएम बनने के सफर की कहानी भी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। तो आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी ये रोचक कहानी।

योगी आदित्यनाथ का जन्म (Yogi Adityanath Birth) yogi adityanath ka janm kab hua tha

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) का जन्म उत्तराखंड (Uttrakhand) के एक साधारण राजपूत परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम (Yogi Adityanath ke pita ka nam) आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम (Yogi Adityanath ki mata kanam) सावित्री देवी है.

शिक्षा (Yogi Adityanath Education)

(Yogi Adityanath ki padhai)
योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने 1989 में ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से 12वीं की परीक्षा पास की और 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University) से गणित में B.Sc की पढ़ाई पूरी की। इसी कॉलेज से उन्होंने M.Sc भी किया।

कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ को शुरूआत से ही राजनीति में लगाव था। वह अपने कॉलेज के दिनों में छात्र संघ का चुनाव भी लड़े। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन ये कौन जानता था कि एक छोटे से छात्रसंघ का चुनाव हारने वाला युवा नेता, भारत के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बनेगा। छात्र जीवन में ही वो राममंदिर आंदोलन (Ram Mandir Andolan) से जुड़ गए थे।

अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ

(Ajay Singh Bisht se Yogi Adityanath)
90 के दशक में राममंदिर आंदोलन (Ram Mandir Andolan) के दौरान ही योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) के महंत अवैद्यनाथ (Mahanth Awaidyanath) से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) के एक कार्यक्रम में हुई। इसके कुछ दिनों बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपने माता-पिता को बिना बताए गोरखपुर (Gorakhpur) जा पहुंचे, जहां संन्यास धारण करने का निश्चय लेते हुए गुरु दीक्षा ले ली। गोरखनाथ मठ के महंत अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के ही रहने वाले थे। महंत अवैद्यनाथ का शिष्य बनने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने धर्म से लेकर शास्त्र की शिक्षा ली। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की कई परीक्षाएं लेने के बाद महंत अवैद्यनाथ ने उत्तराधिकारी के लिए योगी आदित्यनाथ को चुना और अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। इस तरह वे गोरखनाथ (Gorakhnath) मठ के महंत बनकर अजय सिंह बिष्ट (Ajay Singh Bisht) से योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) बन गए।

राजनैतिक जीवन की शुरुआत

(Political Career of Yogi Adityanath)
गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) के महंत की गद्दी का उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया। गोरखपुर (Gorakhpur) से महंत अवैद्यनाथ चार बार सांसद रहे, उसी सीट से योगी 1998 में 26 वर्ष की उम्र में लोकसभा पहुंचे और फिर लगातार 2017 तक पांच बार सांसद रहे।
सियासत में कदम रखने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की छवि एक कठोर हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर उभरी। सांसद रहते हुए गोरखपुर (Gorakhpur) जिले को अपने नियम अनुसार चलाने और त्वरित फैसलों से उन्होंने सबको चकित किया। इसी के चलते योगी (Yogi) के सियासी दुर्ग को न तो मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का समाजवाद (Samajwad) भेद पाया और न ही मायावती (Mayawati) की सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) ही यहाँ काम आई। गोरखपुर (Gorakhpur) में हमेशा योगी का हिंदुत्व कार्ड ही हावी रहा। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपने 19 साल के सियासी कैरियर में न केवल गोरखपुर बल्कि पूर्वांचल की कई अन्य सीटों पर भी अपना प्रभाव कायम किया।

हिंदू युवा वाहिनी का गठन (Hindu Yuva Vahini)

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपनी निजी सेना हिंदू युवा वाहिनी (Hindu Yuva Vahini) का निर्माण किया जो धर्म रक्षा, गौ सेवा करने व हिंदू विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाई गई थी। हिंदू युवा वाहिनी ने गोरखपुर में ऐसा माहौल तैयार किया, जिसके चलते आज तक उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सका। एक तेजतर्रार राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी छवि योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बना ली थी।

यूपी का सीएम बनने तक का सफर (The Making of UP CM Yogi Adityanath)

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सबसे बड़ी खासियतों में एक है कि वह जनता से सीधा संवाद करने में विश्वास रखते हैं। 2017 में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला तो सीएम के लिए कई चेहरे दावेदार थे, लेकिन बाजी योगी के हाथ ही लगी।

कानून व्यवस्था पहली प्राथमिकता, अपराधियों में खौफ

योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने फैसलों से अपनी राजनीतिक इच्छा को जाहिर कर दिया। उनकी पहली प्राथमिकता थी यूपी को अपराध मुक्त कर लॉ एंड आर्डर सही करना। इसके लिए उन्होंने कुछ कड़े निर्णय भी लिए, हालांकि प्रदेश में हुए ताबड़तोड़ एनकाउंटरों के कारण विपक्ष ने उन पर उंगलियां भी उठाईं, लेकिन कानून-व्यवस्था पर सख्त योगी पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।
सीएम बनते ही योगी ने अपराधियों पर ऐसा शिकंजा कसा कि यूपी के सभी अपराधी और माफिया त्राहि त्राहि करने लगे। हालात ऐसे हो गए कि पिछली सरकारों में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बड़े बड़े माफिया सरगना नेस्तनाबूद हो गए। ऐसा पहली बार हुआ जब माफियाओं और अपराधियों की चल अचल संपत्तियों को तहस नहस करके कानून की हनक का अहसास कराया गया। योगी के सीएम बनने के बाद अपराधियों में इतना खौफ पैदा हो गया था कि वह खुद थाने जाकर सरेंडर कर रहे थे।
राज्य के अपराधी खासतौर से मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे माफिया जो दूसरे राज्यों से अपना नेटवर्क चला रहे थे, उन्हें प्रदेश में वापस लाया गया और उनके साम्राज्य को मिट्टी में मिला दिया गया।        ।

कोरोना काल में किया उत्कृष्ट प्रदर्शन

2020 के कोरोना संकट काल में सीएम योगी सीधे तौर पर सक्रिय नजर आए, जिससे उनकी लोकप्रियता में और भी इजाफा हुआ। वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने जिन्होंने कोरोना काल में लगातार अपनी जनता का हर तरह से ख्याल रखा। प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों से वापस लाने तथा उनके लिए आजीविका के संसाधन जुटाने में योगी ने जो उत्कृष्ट कार्य किया उसके लिए उनकी तारीफ पूरी दुनिया में हुई।

2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भी योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या में अन्य राज्यों की तुलना में बहुत बड़े 24 करोड़ आबादी वाले प्रदेश को जिस तरह संभाला है वह काबिले तारीफ है। दूसरी लहर में कोरोना से हुई मौतों के मामले में दिल्ली जैसे कम जनसंख्या वाले राज्यों से तुलना करें तो उत्तरप्रदेश की स्थिति काफी हद तक बेहतर रही।

खुद कोरोना की चपेट में आ जाने के बावजूद रिकवर होते ही लगातार एक दिन में कई कई जिलों का दौरा करके हर जिले में बेड, ऑक्सीजन, दवा, इंजेक्शन आदि की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का जो कार्य यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) ने किया है वह उत्कृष्ट और सराहनीय है।

विश्व भर में हिन्दुत्व का सबसे बड़ा चेहरा

योगी आदित्यनाथ सिर्फ यूपी में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हिन्दुत्व का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। साथ ही देश की राजनीति में भी एक प्रमुख चेहरा बन चुके है। ये सच है कि 2017 का यूपी विधान सभा चुनाव बीजेपी ने मोदी के चेहरे पर जीता था, लेकिन आज की तारीख में बीजेपी योगी को अनदेखा करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। योगी आदित्यनाथ का कद राजनीति में अब इतना बड़ा हो चुका है की भाजपा उन्हें किनारे लगाने के बारे में सोच भी नहीं सकती वरना देशभर से हिन्दुत्ववादी वोट भाजपा से एक झटके में दूर हो सकता है। नहीं भूलना चाहिए कि आदित्यनाथ भले ही कर्म से योगी हों, लेकिन जन्म से तो वह क्षत्रिय ही हैं और क्षत्रिय झुकने से अधिक टूट जाने में विश्वास करता है।
Copyright © 2021. All Rights Reserved.
UP CM Yogi Adityanath Story in hindi, Yogi adityanath history in hindi, yogi adityanath ki kahani hindi me, yogi adityanath ka birthday, yogi adityanath ka janmdin kab hai, yogi aditynath story hindi me, yogi adityanath ka janm kab hua tha, yogi adityanath ka janm kaha hua tha, yogi adityanath ki padhai kaha huyi, yogi adityanath kitna padhe hai, yogi adityanath aur gorakhnath mandir ka itihas, gorakhnath mandir ki kahani hindi me, gorakhnath story in hindi, gorakhpur ke gorakhnath mandir ki kahani hindi me, gorakhpur se yogi adityanath ka kya sambandh hai, essay on yogi adityanath in hindi, yogi adityanath par nibandh hindi me

 

]]>
https://sanjayrajput.com/2021/06/yogi-adityanath-story-in-hindi.html/feed 0 176
वो दौर जब गोरखपुर था ‘अपराधों की राजधानी’ https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html#respond Tue, 26 May 2020 12:26:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2020/05/26/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7/ Read more

]]>

योगी आदित्यनाथ का शहर गोरखपुर आज भले ही विकास का रोल मॉडल बनकर सीएम सिटी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है मगर 1970 के दशक में जब पूरे देश में जेपी आंदोलन जोरों पर था उन दिनों गोरखपुर सिर्फ जातीय संघर्षों, वर्चस्व की लड़ाई और गैंगवार के लिए ही बदनाम हुआ करता था। 
कई नए माफियाओं के उदय की भूमि होने के चलते गोरखपुर को ‘Crime Capital of North India’ कहा जाने लगा था। यहां की छात्र राजनीति भी दो गुटों में बँटी हुई थी और गोरखपुर यूनिवर्सिटी में ब्राह्मण और क्षत्रिय दो गुट हुआ करते थे। इन दोनों गुटों की आपसी रंजिश और मुठभेड़ से गोरखपुर में रोज अपराध की एक नई कहानी लिखी जाती थी।

उस वक्त जब देश भर के छात्र नेता देश को बदलने के जुनून में सड़कों पर आंदोलन करने में जुटे थे। वहीं गोरखपुर के छात्र नेता देशी तमंचे लहराते हुए अपने वर्चस्व को कायम करने में जुटे हुए थे। उस समय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दो छात्र नेता हुआ करते थे, ठाकुर गुट के रविन्द्र सिंह और ब्राह्मण गुट के हरिशंकर तिवारी। इन दोनों छात्र नेताओं में हमेशा वर्चस्व को लेकर लड़ाई ठनी रहती थी। वो एक ऐसा दौर था जब गोरखपुर यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र न होकर ब्राह्मण-ठाकुर जातीय संघर्ष का अखाड़ा बनकर रह गया था।

इन दोनों गुटों में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अपना-अपना वर्चस्व कायम करने हेतु आए दिन असलहे लहराना, मारपीट और बवाल होते रहते थे। इस बीच ठाकुरों के नेता रविन्द्र सिंह को वीरेंद्र प्रताप शाही नाम का एक नया और तेज तर्रार लड़का मिला जो कि उनकी ही जाति से था। 


यह वो दौर था जब जाति को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती थी। जिले में ब्राह्मण और ठाकुर दोनों गुट अपना-अपना वर्चस्व कायम करने में जुटे रहते थे। और इन दोनों गुटों की आपसी वर्चस्व की लड़ाई ने गोरखपुर का अमन चैन पूरी तरह छीन लिया था। उन दिनों आये दिन गोरखपुर की सड़कों पर मर्डर, फिरौती, रंगबाजी, डकैती का ही तांडव हुआ करता था। 


उन दिनों गोरखपुर के हालात ऐसे हुआ करते थे कि इन दोनों गुटों के लोग दुकान से सामान लेते और दुकानदार द्वारा पैसे मांगने पर गोली मार देते थे। गुंडई का आलम यह था कि यहाँ लोग पेट्रोल भराकर पैसे तक नहीं देते थे और पैसे मांगने पर गोली मार देते थे। ऐसी घटनाएं आम होने लगी थी। फिर इन दोनों गुटों को वर्चस्व के साथ-साथ पैसे की अहमियत भी समझ में आने लगी थी। उसी दौर में रेलवे के स्क्रैप की ठेकेदारी भी मिलने लगी थी और दोनों गुट अब अपने-अपने वर्चस्व का इस्तेमाल करके ठेकेदारी और अन्य कामों में लग गए। 
1980 में हरिशंकर तिवारी ने रेलवे के ठेके में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी।  हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही दोनों ने अपने-अपने गुट को मजबूत करना शुरू कर दिया था। इन दोनों ने अपने-अपनेे संगठित गैंग भी बना लिए थे। उन्हीं दिनों कई बार ऐसा हुआ जब दोनों माफियाओं के बीच जारी वर्चस्व की जंग में पूरा गोरखपुर शहर थर्रा गया था। 
तब पूर्वांचल में रोज कहीं न कहीं गैंगवार में चली गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती रहती थी। आए दिन दोनों गुटों के कुछ लोग मारे जाते थे। साथ ही कई निर्दोष लोग भी मरते थे। इसी दौरान ब्राह्मण-ठाकुर जातीय संघर्ष में लखनऊ और गोरखपुर विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके युवा विधायक रविंद्र सिंह की भी हत्या हो गई।

बताया जाता हैं कि इस घटना के बाद ठाकुरों के गुट ने वीरेंद्र प्रताप शाही को अपना नेता मान लिया। कुछ ही दिनों में वीरेंद्र शाही की तूती बोलने लगी और उन्हें ‘शेरे-पूर्वांचल’ तक कहा जाने लगा। अब गोरखपुर माफियाराज से पूरी तरह रूबरू हो चुका था और सरकारी सिस्टम यहाँ पूरी तरह फेल हो चुका था। इन दोनों गुटों की गैंगवार के चलते गोरखपुर ही नहीं आसपास के जिलों की कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह फेल हो गयी थी।
फिर जब दोनों गुटों ने ठेके आदि से खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बना लिया तब पूर्वांचल से निकलकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दोनों गुटों ने अपनी-अपनी एक समानांतर सरकार बना ली। इन लोगों के यहाँ अपनी अपनी बिरादरी के जनता दरबार भी लगने लगे। जमीनी विवाद से लेकर हर तरह के मुद्दे इनके दरबार में आने लगे थे। लोग अपने विवादों के निपटारे के लिए कोर्ट जाने से बेहतर इन माफियाओं के दरबार को समझने लगे थे।


इसी बीच 1985 में गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली। उनके लिए प्रदेश संभालने से महत्वपूर्ण माफियाओं को संभालना चुनौती थी। हर एक की निगाह वीर बहादुर सिंह पर ही थी। उन्होेंने इसके लिए गैंगेस्टर एक्ट लाया। लेकिन इन लोगों को सामाजिक स्वीकार्यता मिल चुकी थी। राजनीति में भी इनकी बराबर भागीदारी और स्वीकार्यता मिल चुकी थी। जानकार बताते हैं कि इनकी स्वीकार्यता का ही नतीजा है कि पंडित हरिशंकर तिवारी छह बार तो वीरेंद्र प्रताप शाही दो बार विधायक चुने गए। कानून व्यवस्था को दरबारी बनाने के लिए इन पर अंगुलियां उठी तो न जाने कितने इनके दर पर आकर न्याय पाकर दुआ देते हुए लौटे भी। अलग-अलग क्षेत्रों में दबंग छवि वालों को जनता अपना रहनुमा चुनने लगी। पूर्व विधायक अंबिका सिंह, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, पूर्व सांसद ओम प्रकाश पासवान, पूर्व सांसद बालेश्वर यादव आदि का उनके क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ने के साथ जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों के रहनुमा बन चुके थे।

राजनीति से अपराधियों के गठजोड़ की अपने देश में पुरानी परंपरा है। कहा जाता है किं यदि सौ गुनाह करने के बाद भी कानून की नजरों से बचना हो तो राजनीति का चोला ओढ़ लो। इसी फॉर्मूले को अपनाकर इन दोनों गुटों के माफियाओं ने भी बाद में पैसे के बल पर राजनीति की चादर ओढ़ ली और माफिया से माननीय बन गए। 


फिर 90 के दशक में गोरखपुर के गांव मामखोर के एक शिक्षक का लड़का श्रीप्रकाश शुक्ला सबको पीछे छोड़ते हुए जरायम की दुनिया में तेजी से उभरा। अपनी बहन को छेड़े जाने पर उसने पहली हत्या की और उसके बाद हरिशंकर तिवारी ने उसे बैंकॉक भेजकर उसे पुलिस के हाथों बचाया। अपनी बिरादरी के होने के नाते हरिशंकर तिवारी ने उसे गुनाह की दुनिया में अपने फायदे के लिए एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया। लेकिन महत्वाकांशी श्रीप्रकाश शुक्ला ने गुनाह की दुनिया में तिवारी से बगावत करते हुए AK-47 जैसे असलहों से लैस अपनी अलग गैंग बनाकर पूर्वांचल से बिहार, दिल्ली, ग़ाज़ियाबाद तक अपने खौफ का साम्राज्य फैलाना शुरू कर दिया। अब बिहार के माफिया डॉन और रेलवे के ठेकेदार सूरजभान का भी हाथ श्रीप्रकाश के सिर पर था। 1997 में श्रीप्रकाश शुक्ला ने वीरेंद्र शाही की लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी। उसका अगला टारगेट माफिया से माननीय बना हरिशंकर तिवारी ही था परन्तु इस बीच उसने सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी ले ली जिसके बाद यूपी एसटीएफ (STF) ने 1998 में श्रीप्रकाश शुक्ला को लखनऊ में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया। 

वीरेंद्र शाही की हत्या के बाद छोटे-छोटे गिरोह ने अपनी धमक बनानी शुरू कर दी। कुछ ने जरायम की दुनिया में हनक दिखाने के साथ राजनीति में भी कदम रखा। जो सिलसिला आज भी कायम है। कई आज की तारीख में सत्ता के लाभ वाले पद को भी सुशोभित कर रहे हैं।  
क्योंकि हमारे समाज में गुंडों को पूजने का पुराना रिवाज है इसलिए यहाँ लोग जेल से भी चुनाव लड़कर जीत जाते हैं। जब भी कोई माफिया, बाहुबली पैसों के बल पर जोर-शोर से लाव-लश्कर के साथ चुनाव लड़ता है तो वो बम्पर वोटों से जीत हासिल करता है। वहीं जब कोई साधारण और बेदाग छवि वाला आदमी बिना लाव-लश्कर के चुनाव लड़ता है तो उसकी जमानत तक जब्त हो जा्ती है।


योगी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद पूरे प्रदेश से गुंडाराज खत्म हुआ है और प्रदेश के साथ-साथ गोरखपुर में भी चलने वाले छोटे-बड़े गैंग या तो खत्म हो गए हैं या सभी अपराधी और गुंडे भूमिगत हो गए हैं। पहले जहाँ गोरखपुर में आये दिन सरेआम फिरौती, रंगबाजी और लूटपाट आम बात थी वहीं अब कानून व्यवस्था फिर से कायम हुई है। 

©Copyright 2020-22. All Rights Reserved.

]]>
https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html/feed 0 297