जय श्रीराम – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Tue, 30 Jan 2024 03:30:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg जय श्रीराम – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 अयोध्या धाम में रामलला के दर्शन को जाना चाहते हैं तो इसे जरूर पढ़ें https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87.html https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87.html#comments Tue, 30 Jan 2024 03:30:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2024/01/30/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87/ Read more

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Ram Mandir Ayodhya: विगत 22 जनवरी को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा (Ramlala Pran Pratishtha) के बाद से ही हम सभी के मन मे तीव्र इच्छा है कि हम भी रामलला के दर्शनों हेतु जल्दी से जल्दी अयोध्या (Ayodhya) जाएं, लेकिन ज्यादा भीड़ की चिंता के चलते अधिकतर लोग अभी अयोध्या धाम (Ayodhya Dham) जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। 
लेकिन हम आपको बताना चाहते हैं कि आप निश्चिन्त होकर अयोध्या जा सकते हैं। भीड़ तो अयोध्या नगरी में अब आने वाले लंबे समय तक रहेगी, लेकिन भीड़ के चलते वहां आपको रामलला के दर्शनों में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
अयोध्या धाम मे प्रतिदिन करीब 3 से 4 लाख लोग रामलला के दर्शन कर रहे है, प्रशासन की व्यवस्थाएं इतनी बेहतरीन और सुव्यवस्थित हैं कि आपको दर्शन पूजन में यहां कोई दिक्कत नही आएगी। 
बस आपको अयोध्या जाते समय नीचे दी गई कुछ बातों का ध्यान रखना होगा :-
1. अयोध्या धाम में बाहरी वाहनों का प्रवेश वर्जित है, अगर आप अपनी गाड़ी से अयोध्या जा रहे है तो आपको अपनी गाड़ी अयोध्या के बाहर ही मेन हाईवे से उतरते ही बनी पार्किंग में खड़ी करनी पड़ेगी वहां से मंदिर करीब 3 किलोमीटर दूर है। 
2. पार्किंग के बाहर से आपको ई रिक्शा मिल जाएगी जो आपको मन्दिर से करीब आधा किलोमीटर पहले उतार देगी। सुरक्षा के चलते रास्तों पर आवाजाही बदलती रहती है, तो हो सकता है कि आपको थोड़ा पैदल चलना पड़े, इसलिए कम से कम 2 से 3 किलोमीटर पैदल चलने के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से तैयार रहें।
3. अयोध्या धाम मे बड़ी संख्या में बजट होटल व धर्मशालाएं हैं, इसलिए सामान्य व्यवस्था में रुकने में कोई दिक्कत नहीं है। 
4. मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो कोशिश करें कि जेब में सिर्फ पैसे रखकर ले जाएं। क्योकि मन्दिर में मोबाइल, घड़ी, पेन, चाभी आदि ले जाना मना है। मन्दिर में सुरक्षा जांच से पूर्व लाकर रूम बने हैं जहां आप अपना सामान जमा करा के आगे जा सकते हैं। 
5. अगर आप लाकर रूम में सामान रखते हैं तो वहां भीड़ के चलते आपको करीब एक से डेढ़ घण्टे का समय लग सकता है वरना आप मात्र 20 से 30 मिनट में दर्शन करके बाहर आ सकते है।
6. सुरक्षा जांच के बाद जब आप मन्दिर में प्रवेश करते हैं तो मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते ही आपको रामलला दूर से ही दिखाई पड़ने लगते हैं, आप पहले हॉल से चलकर जाते हुए पांचवे हाल में रामलला के दर्शन करते है। भीड़ के चलते आपको वहां खड़े नही होने दिया जाएगा, लाइन चलती रहेगी और आप दर्शन करते रहेंगे। इसलिये पहले हॉल से ही अपने ध्यान को रामलला पर केंद्रित कर लीजिए ताकि आपको बाद में ये मलाल न हो की दर्शन ठीक से नहीं हुए।
7. मंदिर परिसर से बाहर आते समय आपको मंदिर प्रशासन की तरफ से नि:शुल्क प्रसाद दिया जाता है, निकास द्वार से बाहर आते समय इस बात का ध्यान रखें और अपना प्रसाद जरूर लें ले।
8. अयोध्या धाम में इस समय ठंड बहुत है, अपने कपड़ो की पैकिंग करते समय इस बात का ध्यान रखें।
और अंत में एक बात और ध्यान रखें कि मंदिर प्रशासन और पुलिस का व्यवहार व व्यवस्था बहुत ही शानदार है, तो उसके जवाब में हमारा आचरण भी विनम्र और सहयोगपूर्ण रहे। 
अयोध्या इस समय उत्सव नगरी बनी हुई है, इसलिए वहां जाएं तो उसी माहौल में उसी भाव के साथ रहें और बनाई गई व्यवस्थाओं के हिसाब से ही आचरण करें।
तो चिंता छोड़िए और बना लीजिए प्रोग्राम अयोध्या धाम जाकर रामलला के दर्शन करने का।
यदि जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे और लोगों को भी शेयर करें।
जय श्री राम!!

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प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम मोदी ने प्रभु श्रीराम से माफी क्यों मांगी? https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a5%80.html https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a5%80.html#respond Tue, 23 Jan 2024 14:45:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2024/01/23/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%a0%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%aa%e0%a5%80/ Read more

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विगत मार्च 2017 में मेरा अयोध्या जाना हुआ था. तमाम सुरक्षा चेकिंग के बाद किसी तरह रामलला के दर्शन का अवसर मिला. लोहे की जाली से की गई पतली बैरिकेटिंग से गुजरते हुए बहुत दूर टेंट में रामलला की झलक देख कितनी असहनीय पीड़ा महसूस हुई थी उसे शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है. स्थिति ये थी की आप बैरिकेटिंग में आगे बढ़ते रहिए, एक मिनट रुककर हाथ भी नहीं जोड़ सकते वरना वहां तैनात सुरक्षाकर्मी आपको डांटने लगते थे. स्थिति ये थी कि आप प्रभु श्रीराम की पूजा अर्चना तक नहीं कर सकते थे. एक हिंदू होने के नाते अपने आराध्य प्रभु श्रीराम को उस हाल में देख मुझे जो पीड़ा महसूस हुई थी शायद अधिकांश हिन्दुओं को हुई होगी. 
कल 22 जनवरी 2024 को जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभु श्रीराम से इतने वर्षों तक उन्हें टेंट में रखे जाने के लिए क्षमा भी मांगी. 
हर हिंदू को प्रभु श्रीराम से इस बात के लिए क्षमा तो मांगना ही चाहिए की हिन्दुस्तान में हिंदुओं के आराध्य प्रभु श्रीराम को कोर्ट में सबूत दिखाकर और लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी जन्मभूमि वापस लेनी पड़ी। यह एक बहुत बड़े अफसोस की बात तो है ही लेकिन इस देश की राजनीति जो न कराए।
पीएम मोदी ने कहा- “मैं अभी गर्भगृह में ईश्वरीय चेतना का साक्षी बनकर आपके सामने उपस्थित हुआ हूं। कितना कुछ कहने को है, लेकिन कंठ अवरुद्ध है। मेरा शरीर अभी भी स्पंदित है, चित्त अभी भी उस पल में लीन है। हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। हमारे रामलला अब इस दिव्य मंदिर में रहेंगे। मेरा पक्का विश्वास और अपार श्रद्धा है कि जो घटित हुआ है, इसकी अनुभूति देश के, विश्व के कोने-कोने में रामभक्तों को हो रही होगी। ये क्षण आलौकिक है, ये पल पवित्रतम है।”
 
पीएम मोदी ने आगे कहा- “22 जनवरी 2024 का ये सूरज एक अद्भुत आभा लेकर आया है। ये कैलेंडर पर लिखी एक तारीख नहीं, बल्कि ये एक नए कालचक्र का उद्गम है। राम मंदिर के भूमिपूजन के बाद से प्रतिदिन पूरे देश में उमंग और उत्साह बढ़ता ही जा रहा था। निर्माण कार्य देख देशवासियों में हर दिन एक नया विश्वास पैदा हो रहा था। आज हमें सदियों के उस धैर्य की धरोहर मिली है। आज हमें श्रीराम का मंदिर मिला है। गुलामी की मानसिकता को तोड़कर उठ खड़ा हुआ राष्ट्र, अतीत के हर दंश से हौसला लेता हुआ राष्ट्र ऐसे ही नव इतिहास का सृजन करता है। आज से हजार साल बाद भी लोग आज की इस तारीख की, आज के इस पल की चर्चा करेंगे।”
“मैं आज प्रभु श्रीराम से क्षमा याचना भी करता हूं। हमारे पुरुषार्थ, त्याग और तपस्या में कुछ तो कमी रह गई होगी कि हम इतनी सदियों तक ये कार्य कर नहीं पाए। आज वो कमी पूरी हुई है। मुझे विश्वास है कि प्रभु राम आज हमें अवश्य क्षमा करेंगे। भारत के संविधान की पहली प्रति में भगवान राम विराजमान हैं। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं आभार व्यक्त करूंगा भारत की न्यायपालिका का, जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु राम का मंदिर भी न्यायबद्ध”.
“आज गांव-गांव में एक साथ कीर्तन, संकीर्तन हो रहे हैं। आज मंदिरों में उत्सव हो रहे हैं, स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं, पूरा देश आज दीपावली मना रहा है। आज शाम घर-घर राम ज्योति प्रज्वलित करने की तैयारी है। अपने 11 दिन के व्रत-अनुष्ठान के दौरान मैंने उन स्थानों का चरणस्पर्श करने का प्रयास किया, जहां प्रभु राम के चरण पड़े थे। मेरा सौभाग्य है कि इसी पुनीत पवित्र भाव के साथ मुझे सागर से सरयू तक की यात्रा का अवसर मिला।”
“प्रभु राम तो भारत की आत्मा के कण-कण से जुड़े हुए हैं। राम भारतवासियों के अंतर्मन में विराजे हुए हैं। हम भारत में कहीं भी किसी की अंतरात्मा को छुएंगे तो इस एकत्व की अनुभूति होगी और यही भाव सब जगह मिलेगा। हर युग में लोगों ने राम को जिया है। हर युग में लोगों ने अपने-अपने शब्दों में, अपनी-अपनी तरह से राम को अभिव्यक्त किया है। ये रामरस जीवन प्रवाह की तरह निरंतर बहता रहता है।”
“प्राचीनकाल से भारत के हर कोने के लोग रामरस का आचमन करते रहे हैं। राम कथा असीम है और रामायण भी अनंत है। राम के आदर्श, मूल्य और शिक्षाएं सब जगह एक समान है। आज इस ऐतिहासिक समय में देश उन व्यक्तित्वों को भी याद कर रहा है, जिनके कार्य और समर्पण की वजह से आज हम ये शुभ दिन देख रहे हैं। राम के इस काम में कितने ही लोगों ने त्याग और तपस्या की पराकाष्ठा करके दिखाई है। उन अनगिनत रामभक्तों के, उन अनगिनत कारसेवकों के और उन अनगिनत.”
“आज का ये अवसर उत्सव का क्षण तो है ही, लेकिन इसके साथ ही ये क्षण भारतीय समाज की परिपक्वता के बोध का भी क्षण है। हमारे लिए ये अवसर सिर्फ विजय का नहीं, बल्कि विनय का भी है। वो भी एक समय था जब कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी। ऐसे लोग भारत के सामाजिक भाव की पवित्रता को नहीं जान पाए। रामलला के इस मंदिर का निर्माण भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का भी प्रतीक है। ये निर्माण किसी आग को नहीं बल्कि ऊर्जा को जन्म दे रहा…”
“मैं आज उन लोगों से आह्वान करूंगा, आइए आप महसूस कीजिये अपनी सोच पर पुनर्विचार कीजिए। राम आग नहीं है, राम ऊर्जा है। राम विवाद नहीं, राम समाधान है। राम सिर्फ हमारे नहीं, राम तो सबके हैं। आज मैं पूरे पवित्र मन से महसूस कर रहा हूं कि कालचक्र बदल रहा है। ये सुखद संयोग है कि हमारी पीढ़ी को एक कालजयी पथ के शिल्पकार के रूप में चुना गया है। हजार वर्ष बाद की पीढ़ी राष्ट्रनिर्माण के हमारे आज के कार्यों को याद करेगी। इसलिए मैं कहता हूं – यही समय है, सही समय है।”
“ये भव्य राम मंदिर साक्षी बनेगा- भारत के उत्कर्ष का, भारत के उदय का। ये भव्य राम मंदिर साक्षी बनेगा- भव्य भारत के अभ्युदय का, विकसित भारत का। संविधान के अस्तित्व में आने के बाद भी दशकों तक प्रभु श्रीराम के अस्तित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चली। मैं आभार व्य​क्त करूंगा भारत की न्यायपालिका का जिसने न्याय की लाज रख ली। न्याय के पर्याय प्रभु श्रीराम का मंदिर भी न्याय बद्ध तरीके से बना।”
 “वो भी एक समय था, जब कुछ लोग कहते थे कि राम मंदिर बना तो आग लग जाएगी। रामलला के इस मंदिर का निर्माण भारतीय समाज के शांति, धैर्य, आपसी सद्भाव और समन्वय का प्रतीक है। ये निर्माण आग को नहीं, ऊर्जा को जन्म दे रहा है। ये मंदिर, मात्र एक देव मंदिर नहीं है। ये भारत की दृष्टि का, भारत के दर्शन का, भारत के दिग्दर्शन का मंदिर है। ये राम के रूप में राष्ट्र चेतना का मंदिर है।”
“राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं, राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं, राम भारत की चेतना हैं”

पहली राम दिवाली पर भक्तो की मांग पूरी न कर सके कुम्हार, हलवाई, फलवाले और झंडे पताका बेचनेवाले. दीयों, मिठाई, झंडे पताकों और फल कम पड़ गए.
अगली बार राम दिवाली की तैयारी पहले ही हो जायेगी. अब तो राम दिवाली हर वर्ष मनाई जाएगी तभी तो आने वाली पीढ़ी को बताया जाएगा कि क्यों मनाई जाती है.
प्रभु श्रीराम 14 वर्ष के बनवास से लौटे थे तब हर वर्ष दीपावली मनाई जाती है. अब तो 500 वर्ष बाद हिंदुओ का सम्मान, आस्था और राम सभी बनवास से लौटे है. ये दिवाली तो सदा मनाई जाएगी और अपनी खुशी और जख्म सब स्मरण किए जायेंगे.
जय श्रीराम 🚩🚩

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भारत के भाग्य का नया सूर्योदय है अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af.html https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af.html#respond Thu, 18 Jan 2024 09:45:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2024/01/18/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af/ Read more

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अयोध्या में श्री राम मंदिर का पुनर्निर्माण और प्रभु श्री रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा मात्र एक धार्मिक आयोजन नहीं है बल्कि यह भारत के भाग्य का नया सूर्योदय है। यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण और अभ्युदय का अमृत काल भी है।
सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि से भरे हमारे देश में सांस्कृतिक धरोहर हमारी पहचान है। धर्म, भाषा, रूपरेखा, शैली और विविध संस्कृतियों और जीवन शैलियों के बाद भी भारत एक है। उसकी आत्मा एक है। हम सब एक दूसरे से अपनी सांस्कृतिक पहचान से जुड़े हुए हैं। इसी जुड़ाव को बढ़ाने की दिशा में प्रभु श्री राम के मंदिर का निर्माण एक महत्वपूर्ण कदम है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर हमें अपनी साझी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण रखने में मदद देगा।
राम भारतीय संस्कृति के प्रेरणा पुरुष हैं। एक आदर्श राजा, आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श मित्र हैं। हम भारतीय जिन सात्विक मानवीय गुणों को सदियों से पूजते आए हैं, वे सभी राम के व्यक्तित्व में निहित हैं। इसीलिए श्री राम, मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और हमारी आस्था के केंद्र में हैं, हमारे चेतन-अवचेतन मन में हैं और चिर काल से इस देश के मानस में बसे हुए हैं।
यहाँ राम सब के हैं और सब राम के हैं। चाहे पूरब हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण, राम हमारे मानस में समाये हुए हैं। देश के किसी भी हिस्से में जाएँ, आपको लोगों के नाम में राम मिलेगा – दक्षिण में रामय्या, रामचन्द्रन या रामनाथन हो या उत्तर में रामशरण, राम सिंह या रामदास, राम सभी में हैं। सुबह की राम राम से लेकर जय सिया राम और जय श्री राम हमारे लिए अभिवादन और अभिनन्दन हमारे व्यवहार में समाहित/ सन्निहित हैं।
भारत ही नहीं राम का संदेश भागौलिक सीमाओं से परे, सार्वभौम और कालातीत है। उनकी प्रासंगिकता महज भारतीय उपमहाद्वीप तक ही सीमित नहीं है। राम कथा के अनगिनत संस्करण दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों जैसे थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, म्यांमार, लाओस में आज भी प्रचलित हैं। आज भी भगवान राम और देवी सीता का चरित्र चित्रण इन देशों की लोक परंपराओं का हिस्सा हैं। आज यही राम हमारे मानस से निकल कर प्राकट्य में आ रहे हैं।
राम के आदर्शों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता एक लोकहितकारी न्यायपूर्ण शासन व्यवस्था को जिसमें सभी के लिए शांति, न्याय और समानता हो, सुनिश्चित करती है। इसीलिए राम मंदिर का निर्माण न केवल भारतीय सांस्कृतिक एकता का एक अद्वितीय प्रतीक है, यह सुशासन और सामाजिक समरसता की ओर प्रवृत्त करने की दिशा में एक महती प्रयास भी है।
मंदिर ही एक वह जगह होती है जहां सभी वर्गों, जातियों, और समुदायों के लोग एकत्र होते हैं और साझा व्यवहार करते हैं जिससे धर्मिक एकता का संवर्धन होता है। रामायण में श्रीराम की कथा ने सभी वर्गों और समुदायों को एक साथ लाने का संदेश दिया है तथा भारतीय समाज में धर्म, नैतिकता, और सत्य के मूल्यों को प्रोत्साहित किया है।
निःसंदेह समाज में एकता और सभी धर्म-सम्प्रदायों के बीच समरसता की ओर यह एक महत्वपूर्ण कदम है। 22 जनवरी को होने वाले प्रतिष्ठा समारोह में वाल्मिकी और रवि दास मंदिर के पुजारियों की उपस्थिति और महर्षि वाल्मिकी के नाम पर अयोध्या धाम हवाई अड्डे का नामकरण, माता शबरी के नाम पर भोजनालय, निषाद राज के नाम पर अतिथि निवास, सामाजिक एकता, न्याय और सद्भाव का ही एक उदाहरण है।
अयोध्या में नव निर्मित राममन्दिर करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और भारत के पुनर्जागरण का प्रतीक है बल्कि यह भारत की सोई अस्मिता और आत्मविश्वास के जागरण का प्रतीक भी है। श्री राम जन्म भूमि का आंदोलन हिन्दू समाज का आत्म साक्षात्कार है। यह इस बात का प्रमाण है कि अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हिन्दू साढ़े पाँच सौ बरस की लंबी लड़ाई लड़ और जीत सकते हैं। सच में अयोध्या में राम लला का भव्य राष्ट्र मंदिर का निर्माण सभी भारतीय नागरिकों के लिए सदियों पुराने सपने के पूरे होने जैसा है। पांच सौ वर्षों बाद रामनगरी का वैभव व कीर्ति लौट रही है।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख महंत श्री नृत्य गोपाल दास, के शब्दों में, “मंदिर निर्माण के साथ सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के भाग्य का नया सूर्य उदित होगा। नि:संदेह यह अवसर हर्ष और उल्लास का है। अयोध्या इस तरह प्रसन्न है, जैसे कि अपने आराध्य का पुन: प्राकट्य हो रहा हो।”
सच में सामूहिक चेतना से जो काम होते हैं, उनमें अलग ही आनंद की अनुभूति होती है। आज सम्पूर्ण देश प्रसन्न है, जन-मानस आह्लादित है। जिन असंख्य लोगों ने राममंदिर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी है, उनकी आत्माएं प्रसन्न हो रही होंगी, क्योंकि उनका बलिदान अब सार्थक होने जा रहा है। इसी के साथ मंदिर निर्माण आंदोलन की इति भी होगी जिसने भारतीय जनमानस की चेतना को लगभग तीन दशकों तक एक सूत्र में पिरोकर रखने का काम किया।
इसे विधि की व्यवस्था भी कह सकते हैं कि नव-निर्मित मंदिर में श्री राम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का शुभ कार्य राम जन्मभूमि आंदोलन के महानायक पूर्व उप प्रधानमंत्री और सबके सम्माननीय श्री लालकृष्ण आडवाणी और देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हो रहा है जो स्वयं भी राम जन्मभूमि आंदोलन के नायकों में से एक रहे हैं।
मंदिर निर्माण के न केवल धार्मिक व् सांस्कृतिक बल्कि अनेक अन्य पहलू भी हैं जिसमें सामाजिक और आर्थिक प्रमुख हैं। मंदिर से न केवल सामाजिक समरसता बढ़ेगी बल्कि आर्थिक संवर्धन भी होगा। अयोध्या हिन्दुओं का तीर्थस्थल पहले से है, लेकिन राम मंदिर निर्माण के बाद इसका दर्जा भी अमरनाथ जैसी तीर्थ यात्राओं जैसा हो जाएगा। यह आने वाले समय में हरिद्वार, ऋषिकेश, बद्रीनाथ, कामरूप, द्वारका, श्री जगन्नाथ पुरी जैसे हिंदू तीर्थ स्थलों के बीच स्थापित हो जायेगा।
महत्त्वपूर्ण बात यह भी है कि अयोध्या हिंदुओं के लिए ही नहीं, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए भी महत्त्व रखती है। ऐसे में अयोध्या अंतरराष्ट्रीय तीर्थ स्थल के तौर पर उभरेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है। धार्मिंक पर्यटन का मॉडल न केवल आस्था का संवर्धन करेगा बल्कि बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से पिछड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश की समृद्धि के द्वार खुल जाएंगे। सकारात्मक रूप से सोचें तो अयोध्या ने अपने विकास का मार्ग राम मंदिर के केंद्र में सुनिश्चित कर लिया है।
निस्संदेह राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक घटना है जो देश को एकता, सांस्कृतिक समृद्धि और सच्चे धर्मिक मूल्यों की दिशा में एकाग्र कर रही है। नव-निर्मित मंदिर ने भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक विवादों को सुलझाने का एक अप्रतिम उदाहरण स्थापित किया है जो भविष्य में देशवासियों को परस्पर सद्भाव के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। 
हमें पूर्ण विश्वास होना चाहिए कि राम मंदिर का निर्माण भारत के लिए एक नए युग का प्रादुर्भाव करेगा जो देश को सांस्कृतिक एकता, भ्रातृत्व और समरसता की दिशा में आगे ले जायेगा।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य का कहना है कि अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद निश्चित रूप से रामराज्य के आदर्श हमारे देश में आएंगे।
तो आइए हम सब मिलकर आगामी 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर पूरे देश में भव्य दीपोत्सव मनाएं और इस अभूतपूर्व उत्सव के साक्षी बनकर अपना जीवन धन्य करें।
जय सियाराम 🚩

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जानिए अयोध्या में श्रीराम के ननिहाल और ससुराल सहित कहां से क्या-क्या आया… https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be.html https://sanjayrajput.com/2024/01/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be.html#respond Sun, 07 Jan 2024 03:08:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2024/01/07/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be/ Read more

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Ram Mandir Inauguration: अयोध्या में तैयार हो रहे राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख 22 जनवरी बेहद नजदीक आ गई है. अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के लिए देशभर के साथ-साथ विदेशों से भी चीजें भेजी जा रही हैं.
राम लला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को होगी. इसके बाद भगवान को विशेष भोग लगाया जाएगा, जिसमें ननिहाल के चावल और ससुराल का मेवा शामिल होगा.
ननिहाल छत्तीसगढ़ से 3 हजार क्विंटल चावल अयोध्या आएगा. ये अब तक की सबसे बड़ी चावल की खेप होगी, जो अयोध्या पहुंचेगी. इसे छत्तीसगढ़ के जिलों से एकत्र किया गया है.
भगवान राम की ससुराल नेपाल के जनकपुर से वस्त्र, फल और मेवा 5 जनवरी को अयोध्या पहुंच चुका है. जिसके साथ उपहारों से सजे 1100 थाल भी हैं.
नेपाल से आभूषण, बर्तन, कपड़े और मिठाइयों के अलावा भार भी लाया गया है, जिसमें 51 प्रकार की मिठाइयां, दही, मक्खन और चांदी के बर्तन शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश के एटा जिले से रामलला के दरबार में अष्टधातु का 21 किलो का घंटा लाया गया है. दावा किया जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा घंटा होगा, जिसकी लागत 25 लाख रुपये है. इसे बनाने में 400 कर्मचारी जुटे थे.
यूपी के एटा से अयोध्या पहुंच रहे घंटे की चौड़ाई 15 फुट और अंदर की चौड़ाई 5 फुट है. इसका वजन 2100 किलो है. इसे बनाने में एक साल का समय लगा है.
प्राण प्रतिष्ठा के लिए गुजरात के वडोदरा से 108 फीट लंबी अगरबत्ती अयोध्या भेजी गई है. इसे पंचगव्य और हवन सामग्री के साथ गाय के गोबर से बनाया गया है. इसका वजन 3500 किलो है.
वडोदरा से अयोध्या पहुंच रही इस अगरबत्ती की लागत पांच लाख से ऊपर है. इसे तैयार करने में 6 महीने का समय लगा है.
इस अगरबत्ती को वड़ोदरा से अयोध्या के लिए 110 फीट लंबे रथ में भेजा गया है. अगरबत्ती बनाने वाले विहा भरवाड़ ने बताया कि एक बार इसे जलाने पर ये डेढ़ महीने तक लगातार जलती रह सकती है.
श्रीचल्ला श्रीनिवास शास्त्री ने इन श्रीराम पादुकाओं के साथ अयोध्या की 41 दिनों की परिक्रमा की थी. इसके बाद इन पादुकाओं को रामेश्वरम से बद्रीनाथ तक सभी प्रसिद्ध मंदिरों में ले जाया जा रहा है और विशेष पूजा की जा रही है. 
🚩 जय श्री राम 🚩
साभार– सोशल मीडिया

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क्या आप सीता माता के बारे में ये बातें जानते हैं? https://sanjayrajput.com/2023/06/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae.html https://sanjayrajput.com/2023/06/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae.html#respond Fri, 23 Jun 2023 06:39:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/06/23/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae/ Read more

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रामायण की कथा तो हर कोई जानता है लेकिन फिर भी कुछ ऐसे रहस्य हैं जिन्हें बहुत कम ही लोग जानते होंगे.
रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है, जो हर किसी को नहीं मालूम क्योंकि आज तक हमने हमारे ग्रंथो को सिर्फ पढ़ा है, कभी उन्हें समझने की कोशिश नहीं की है.
रावण जब सीता माता का हरण करके लंका ले गया तब लंका मे सीता जी वट वृक्ष के नीचे बैठ कर चिंतन करने लगी. रावण बार बार आकर सीता माता को धमकाता था, लेकिन सीता माता कुछ नहीं बोलती थी.
यहाँ तक की रावण ने श्रीराम की वेश भूषा मे आकर भी सीता माता को भ्रमित करने की बहुत कोशिश की लेकिन कभी सफल नहीं हुआ.
रावण थक हार कर जब अपने शयन कक्ष मे गया तो मंदोदरी ने उससे कहा कि आप तो राम का वेश धर कर गये थे, फिर क्या हुआ?
रावण बोला- जब मैं राम का रूप लेकर सीता के समक्ष गया तो सीता मुझे नजर ही नहीं आ रही थी.
रावण अपनी समस्त ताकत लगा चुका था लेकिन जिस जगत जननी मां सीता को आज तक कोई नहीं समझ सका, उन्हें रावण कैसे समझ पाता.
रावण एक बार फिर सीता माता के पास आया और बोला मैं तुमसे सीधे सीधे संवाद करता हूँ , लेकिन तुम कैसी नारी हो कि मेरे आते ही घास का तिनका उठाकर उसे ही घूर-घूर कर देखने लगती हो?
क्या घास का तिनका तुम्हें राम से भी ज्यादा प्यारा है? 
रावण के इस प्रश्न को सुनकर माँ सीता की आँखों से अविरल आसुओं की धार बह पड़ी.
इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि जब प्रभु श्रीराम का विवाह सीता के साथ हुआ, तब अयोध्या में सीता का बड़े आदर सत्कार के साथ गृह प्रवेश हुआ और अयोध्या में बहुत बड़ा उत्सव मनाया गया.
परंपरा के अनुसार नव वधू विवाह पश्चात जब ससुराल आती है तो उसके हाथ से कुछ मीठा पकवान बनवाया जाता है, ताकि जीवन भर घर में मिठास बनी रहे.
अत: सीता माता ने भी उस दिन अपने हाथों से खीर बनाई और समस्त परिवार, राजा दशरथ एवं तीनों रानियों सहित चारों भाई और साधु-संत, ऋषि-मुनि भी भोजन पर आमंत्रित किए गए.
माँ सीता ने सभी को खीर परोसना शुरू किया और भोजन शुरू ही होने वाला था की अचानक ज़ोर से एक हवा का झोंका आया. सभी ने अपनी अपनी पत्तलें सम्भाली, सीता जी बड़े गौर से ये सब देख रही थीं.
ठीक उसी समय राजा दशरथ की खीर पर एक छोटा सा घास का तिनका गिर गया, जिसे सीता जी ने देख तो लिया, लेकिन अब खीर मे हाथ कैसे डालें?
ऐसे में सीता जी ने दूर से ही उस तिनके को घूर कर देखा और वो तिनका तुरंत जलकर राख की एक छोटी सी बिंदु मात्र बनकर रह गया. 
सीता जी ने सोचा चलो अच्छा हुआ उन्हें ऐसा करते किसी ने नहीं देखा. लेकिन राजा दशरथ सीता के इस चमत्कार को देख रहे थे, फिर भी वे चुप रहे और भोजन के पश्चात अपने कक्ष में पहुचकर उन्होंने सीता को बुलवाया.
सीता जब वहां आईं तो उन्होंने कहा कि मैंने आज भोजन के समय आपके चमत्कार को देख लिया था. आप साक्षात जगत जननी स्वरूपा हैं, लेकिन मेरी एक बात आप हमेशा याद रखें.
आपने जिस नजर से आज उस तिनके को देखा था उस नजर से आप अपने शत्रु को भी कभी न देखें.
सीता जी ने राजा दशरथ को वचन दिया और वहां से चली गईं.
यही कारण था कि जब भी सीता जी के सामने रावण आता था तो वो उस घास के तिनके को उठाकर राजा दशरथ की उस बात को याद कर लेती थीं.
“तृण धर ओट कहत वैदेही
सुमिरि अवधपति परम् सनेही”
यही है उस तिनके का रहस्य…
सीता जी चाहती तो एक पल में ही रावण को राख़ कर सकती थी, लेकिन राजा दशरथ को दिये हुए वचन एवं प्रभु श्रीराम को रावण-वध का श्रेय दिलाने हेतु वो शांत रहीं.
“रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई”
ऐसी वचन का पालन करनेवाली और विशाल हृदय थीं जगत जननी सीता माता.
आज यदि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम घर घर में पूजे जाते हैं तो इसमें जगत जननी माता जानकी का बहुत बड़ा योगदान है. 
स्त्री ही इस सृष्टि की रचयिता, पोषक और पालनकर्ता है. बिना स्त्री के सहयोग और योगदान के कोई भी पुरुष कुछ नहीं है.
जय सियाराम!!
*Disclaimer– यह लेख धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं पर आधारित है.
©SanjayRajput.com

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