धार्मिक – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Tue, 18 Feb 2025 13:20:32 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg धार्मिक – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 राधा बाबा गौसेवा संस्थान में हुई भगवान शिव की प्राण प्रतिष्ठा, श्रमिकों को बांटे गए अंग वस्त्र https://sanjayrajput.com/2025/02/lord-shivas-life-consecration-took-place-in-radha-baba-gauseva-sansthan.html https://sanjayrajput.com/2025/02/lord-shivas-life-consecration-took-place-in-radha-baba-gauseva-sansthan.html#respond Tue, 18 Feb 2025 13:20:32 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1037 Read more

]]>

समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह (लालू सिंह) ने मंदिर निर्माण के श्रमिकों को बांटे कंबल और अंग वस्त्र

-गोवंश को संरक्षित करने के अभियान से जुड़ा है राधा बाबा गौ सेवा संस्थान

गोरखपुर। राधा बाबा गौ सेवा संस्थान मोतीराम अड्डा में भगवान भोलेनाथ के मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात सोमवार को प्राण प्रतिष्ठा की गई। जिसकी आधारशिला गोरखपुर के समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह (लालू सिंह) और मनीष कुमार मिश्रा (राजन मिश्रा) द्वारा रखी गई थी।

बता दें कि मझौली राज स्टेट से संबंधित प्रसून मल्ल के मोतीराम अड्डा स्थित फॉर्म हाउस पर स्थित राधा बाबा गौ सेवा संस्थान में राधा बाबा के नाम से देशी गायों के गोवंश को संरक्षित किया जाता है तथा काला नमक चावल और ऑर्गेनिक खेती भी की जाती है।

IMG 20250218 WA0032

इस अवसर पर समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह (लालू सिंह) ने कहा कि आज महादेव के विराजमान होने से राधा बाबा गौ सेवा संस्थान को नई ऊर्जा मिली है। हम उम्मीद करते हैं कि जिला, प्रदेश और देश में यह संस्थान एक मिसाल कायम करेगा। उन्होंने उन सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस मंदिर निर्माण में सहयोग किया।

मझौली राज स्टेट से संबंधित प्रसून मल्ल ने कहा कि- “मेरे जीवन का एक सपना आज पूर्ण हुआ। जितने लोग इसमें प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सहभागी हुए उन सभी के प्रति हृदय से कृतज्ञ हूं।”

इस अवसर पर एमपी इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य रामजन्म सिंह सहित तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे और इस मंदिर में कार सेवा करने वाले तमाम श्रमिकों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में प्रसून मल्ल, राजकुमार सिंह श्रीनेत, दीपक सिंह, अमित पाण्डेय, मोनिका धीमान तथा अन्य लोगों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।

]]>
https://sanjayrajput.com/2025/02/lord-shivas-life-consecration-took-place-in-radha-baba-gauseva-sansthan.html/feed 0 1037
बनारस के घाट: भारत की संस्कृति, कला, तप, कर्मकांड और आस्था के विराट रूप का दर्शन https://sanjayrajput.com/2025/01/varanasi-ghat-history-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2025/01/varanasi-ghat-history-in-hindi.html#respond Thu, 16 Jan 2025 04:08:20 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=984 Read more

]]>
स्वाद लिया केसर दूध, कुल्हड़ मलैया का। सहेलियों ने खूब कहा था कि वाराणसी से बनारसी साड़ी की शॉपिंग करके आना । अनगिनत साड़ी दुकानों के सामने गुजरते हुए मैं सोच रही थी कि साड़ी खरीदने में बहुत समय लगेगा। जितना समय बनारस में हूँ ज्यादा से ज्यादा वक्त घाट किनारे गंगा जी के बहाव को खुद के भीतर बहता महसूस करूँ तो यात्रा अधिक सार्थक हो।

मणिकर्णिका के घाट पर अनवरत जलते शव, घाट पर बैठे पंडे, दूर-दूर के शहरों से आए लोगों से गोलोक सिधारे उनके परिजनो के लिए अंतिम पूजन करवा रहे थे। सर मुंडाए लोग पालथी मोढ़, सामने जमीन पर फूल-पान, पूजन-सामग्री धरे, हाथ जोड़े उदास बैठे जाने क्या सोचते होंगे ? जाने वाले से उनका क्या रिश्ता होगा जिनके मोक्ष की चाह में वो लम्बा सफर करके मणिकर्णिका घाट पर मंत्रोचार कर रहे है ।

बनारस में अस्सी घाट हो, हरिचन्द्र या मणिकर्णिका….ये घाट भारत की संस्कृति, कला, तप, योग, कर्मकांड, ज्ञान, आस्था के विहंगम और विराट रूप का दर्शन कराते है।

20250116 093941

बनारसी साड़ी की असंख्य चमचमाती दुकानों के मोहजाल में ना फँसकर मैंने गंगा जी के किनारे बसे दुनिया के सबसे प्राचीन नगरी में से एक को पैदल ही नापने का निर्णय लिया। घाट की ऊँची-ऊँची सीढ़ियों से चढ़ते-उतरते हुए भीड़ में भीड़ का हिस्सा हो गयी मैं, नर मुंडों के बीच महज एक संख्या बन खो गयी मैं, बून्द ना होकर धार में अस्तित्वहीन घुल गयी मैं।

गंगा जी के किनारे-किनारे दिखे बाँसुरी बजाते वादक, साँप के टोकरे लिए सपेरे। आलू-पूरी की दुकानों की लंबी कतार नहाकते हुए बढ़ती गयी। कही कोई चित्रकार घाट की तस्वीरें बना रहा था तो कही पूजा के फूलों की टोकरी बेचते बच्चें लोगों के पीछा कर रहे थे।

नाव पर खड़े नाविक तट से गुजरते लोगों को आवाज़ देते है -100 रुपये में गंगा विहार कर लीजिये। नाव में बैठकर जब जरा दूरी से घाटों की तरफ देखों तो मन अजब सा खाली होता है। आँखों के सामने से धीरे-धीरे किनारे -किनारे बहने लगती है एक लबालब दुनिया। धू-धू लपटे उठाते शव, शवों से निकालकर बहाए गए नए गेरुवे कपड़े तैरते उफनते जा रहे होते है, घाटों पर चलता रंगीन कारोबार, अनगिनत छोटे-बड़े मंदिर, दाह संस्कार के लिए बिकने रखे लकड़ियों के ऊँचे गठ्ठर और पूजन सामग्री, प्रसाद की दुकानें, पीतल की भगवान की मूर्तियाँ सजी थी। इस सबसे अछूते थोड़ी दूर में सेल्फी लेते लोग, गंगा आरती में सामने की कतार में बैठने की होड़, रेहड़ी में माला-बाला, चूड़ी-आलता, टिक्की बिंदी खरीदती युवतियाँ, खिलौनों के लिए मचलते बच्चे और लगातार शवयात्रा के गूंजते स्वर “राम नाम सत्य” है। गंगा की धार में बहते हुए भी घाटों से नाव तक आती रहती है घण्टों और भजनों की स्वरलहरियाँ। अंधेरा घिरने पर साथ साथ चलती है लहरों पर रौशनी की थरथराती आकृतियाँ। पत्रा पढ़ते पंडित, इस कर्मकांडी संसार को फटी आंखों से निहारते विदेशी सैलानी और रेलम-पेलम श्रध्दालुओं की ये भीड़ किस दिशा जा रही समझ से परे। दीपदान के दीपक आजू- बाजू से बहते जाने किस लोक के अंधकार में विलीन हो जाते है।

सब कुछ एक साथ मेरी इन दो आँखों में कैसे समाए? मुंडन से लेकर दाह संस्कार, जीवन से लेकर मृत्यु तक का पूरा सफर इन घाटों पर है। हम इस दुनिया में क्यों आये है? इतने लोग मरकर कहाँ जा रहे है? भीतर से खाली कर देने वाला ये आदिम सवाल अचानक ही लुप्त होता है जब मल्लाह आवाज़ देता है ….चाय पीना है तो ले लीजिये।

अस्सी घाट पर वापस आकर नाव से उतरने के बाद बनारस की प्राचीन तंग और जरा चिपचिपी सी गलियों से गुजरते हुए मुख्य सड़क पर आ गयी तभी दिखा आधुनिकता से जगमग एक बुक स्टोर । बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी जैसे पुराने संस्थान वाले इस पारंपरिक शहर में “इंडिका बुक स्टोर” जो अस्सी घाट रोड में है के भीतर जाने का निर्णय लिया। साड़ियों का सारा बजट किताबों में खर्च करने का मन बन चुका था । कई किताबें जो बहुत दिनों से विश लिस्ट में थी आज खरीद लेनी है और खुद को तसल्ली दी कि साड़ी के पैसे यहाँ खर्च कर रही हूँ ।

बुक स्टोर के मालिक कम्प्यूटर में बैठे थे। सेल्स बॉय से उपन्यासों की अलमारियों के बारे में पता करके आगे बढ़ी। चार उपन्यास लेने के बाद अचानक “द्विवेदी विला” पर नज़र पड़ी। इसे देखकर मालूम हुआ कि मुझसे पहले मेरा उपन्यास बनारस पहुँचा चुका है । कितना सुकून होता है इतने बड़े नामों के बीच दो अक्षर का अपना छोटा नाम देखकर ।

किताबों की खरीददारी करके भारी बैग और भरे मन से बुक स्टोर से बाहर निकली। बनारस की भूल भुलैया वाली गलियों में फिर भीड़ बन गयी मैं। बनारसी लोगों के भौकाल, इनकी बतौलेबाज़ी, बनारसी पान, बनारसी साड़ी या कचौरी से भी बढ़कर संकरी गलियों और मोटी दीवारों वाले इस शहर में खोकर, खुद को पाने की यात्रा का मुसाफ़िर होना सुखद अनुभव है।

बनारस शहर नही, भाव का नाम है”

साभार: मधु (writer at film writer’s association Mumbai)

]]>
https://sanjayrajput.com/2025/01/varanasi-ghat-history-in-hindi.html/feed 0 984
छठ पूजा के दौरान पानी में महिला के पास पहुंचा करैत सांप, फिर जो हुआ हो गया वायरल https://sanjayrajput.com/2024/11/during-chhath-puja-a-krait-snake-approached-a-woman-in-water-what-happened-next-went-viral.html https://sanjayrajput.com/2024/11/during-chhath-puja-a-krait-snake-approached-a-woman-in-water-what-happened-next-went-viral.html#respond Sun, 10 Nov 2024 01:34:30 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=846 Read more

]]>
छठ पूजा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आजकल खूब वायरल हो रहा है, जिसमें नदी में छठ पूजा कर रही एक महिला ने एक जहरीले धारीदार सांप को पानी में अपनी ओर आते हुए देखा लेकिन वह घबराई नहीं बल्कि उसने सांप को अपने पास से जाने का रास्ता दे दिया। हालांकि इस दौरान महिला के आसपास के लोग वीडियो में चिल्लाते हुए सुनाई दे रहे हैं।

यहां देखिए ये वायरल वीडियो-

]]>
https://sanjayrajput.com/2024/11/during-chhath-puja-a-krait-snake-approached-a-woman-in-water-what-happened-next-went-viral.html/feed 0 846
Astro Tips: घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए करें ये उपाय https://sanjayrajput.com/2024/08/astro-tips-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2024/08/astro-tips-in-hindi.html#respond Fri, 09 Aug 2024 12:18:07 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=701 Read more

]]>
Astro Tips in Hindi: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बहुत कम परिवार ही ऐसे हैं जहां कोई कमी नहीं है। घर में धन दौलत, खुशियां, स्वास्थ्य हर कोई चाहता है लेकिन नकारात्मक ऊर्जा, ग्रहों की दशा और वास्तु दोष के कारण अधिकतर लोग परेशान हैं।

इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे आसान घरेलू उपाय, जिनसे आपके घर की नकारात्मक ऊर्जा, वास्तु दोष और ग्रह दोष दूर होकर घर में सुख शांति और समृद्धि आएगी।

घर में सुख-शांति बनाए रखने का उपाय

यदि आपके घर में कलह का वातावरण बना हुआ है अथवा सुख-समृद्धि में कमी आ रही है, तो ज्योतिष शास्त्र में इसका सरल उपाय सुझाया गया है. प्रतिदिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर तुलसी के पौधे को जल अर्पित करें. साथ ही शुद्ध घी का दीपक जलाएं. मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है.

घर में सुख समृद्धि का वास न हो तो जीवन कठिन हो जाता है, बहुत मेहनत करने पर भी यदि घर में धन की कमी बनी रहती हो तो व्यक्ति को प्रात: काल उठने के बाद सबसे पहले अपनी दोनों हथेलियों को जोड़ कर दर्शन करने चाहिए। हथेलियों के आगे के भाग में लक्ष्मी जी, बीच के भाग में सरस्वती जी और अंतिम भाग में विष्णु जी का वास होता है। जो व्यक्ति इस प्रकार करता है, उसके घर में धन दौलत बनी रहती है।

आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए घर की पहली रोटी गाय के लिए निकालनी चाहिए और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए। ऐसा माना जाता है कि गाय में सभी देवी देवताओं का वास होता है। गाय को पहली रोटी खिलाने से सभी देवी देवता प्रसन्न होकर धन वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

जिस घर में स्त्रियों का सम्मान होता है, उस घर में धन की कभी कमी नहीं रहती है। इसके अलावा घर में बुजुर्गों का भी पूरा सम्मान होना चाहिए। स्त्रियों और बुजुर्गों का सम्मान होने से घर कि सुख समृद्धि बनी रहती है। प्रतिदिन सुबह पूजा करने के बाद घर के बड़ों का आशीर्वाद लेने का संस्कार बच्चों और घर के सदस्यों का होना चाहिए। घर के बुजुर्गों के आशीर्वाद से बड़े से बड़े दुःख भी कट जाते हैं और खराब से खराब ग्रह की दशा भी सुधर जाती है।

शाम को कार्यस्थल से घर वापस आते हुए, खाली हाथ घर वापस न आएं। घर के बुजुर्गों, बच्चों और स्त्रियों के लिए यथासंभव कुछ न कुछ जरूर लेते जाएं।

तुलसी और पीपल के पेड़ की पूजा करने वाले के घर में लक्ष्मी जी की कृपा सदैव बनी रहती है। तुलसी जी स्वयं लक्ष्मी का स्वरुप हैं।

सायंकाल में तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना और पीपल के पेड़ को शनिवार की सुबह जल देना और सायंकाल में उसकी जड़ों के पास सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनि देव प्रसन्न रहते हैं और इससे घर में गरीबी, दुःख और क्लेश का वास नहीं रहता है।

सूर्य को प्रात: सूर्योदय के समय जल में रोली, फूल और अक्षत डालकर अर्घ्य देने से सूर्य ग्रह के फल शुभ रूप में प्राप्त होते हैं।

घर में प्रकाश की व्यवस्था सही रखें, अँधेरा न हो। दिन के समय सूर्य का प्रकाश घर में आता हो। यदि ऐसा सम्भव न हो तो घर में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर रहती है और सकारात्मक ऊर्जा घर में बनी रहती है।

चंद्र ग्रह को ठीक करने के लिए चांदी का मोटा कड़ा हाथ में धारण करना चाहिए। दूध का सेवन रात्रि में न करके प्रात: काल करें।

बुध ग्रह को ठीक करने के लिए सुबह हरी इलायची का पाउडर शहद में मिलकर पीएं। इससे बुध ग्रह की शुभता बढ़ती है।

बृहस्पति ग्रह को शुभ करने के लिए एकादशी के व्रत का पालन करना चाहिए। एकादशी के व्रत के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। भोजन में हल्दी और दालचीनी का प्रयोग करने से भी बृहस्पति ग्रह शुभ होता है। कुंडली में बृहस्पति ग्रह यदि अशुभ होकर स्थित हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करने से बचना चाहिए। साथ ही सोने के आभूषण धारण करने से भी बचना चाहिए।

शुक्र ग्रह को शुभ करने के लिए छोटी कन्याओं का सम्मान करना चाहिए। छोटी कन्याओं को कुछ न कुछ उपहार में वस्तुएं देने से शुक्र शुभ होता है। छोटी कन्यायों को शुक्रवार के दिन खीर बनाकर खिलाने से भी शुक्र ग्रह की शुभता बढ़ती है।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए गरीबों या जरूरतमंदों को शनिवार के दिन सरसों के तेल का दान करना चाहिए। छाया दान करने से भी शनि ग्रह की अशुभता दूर होती है। हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करने से शनि देव प्रसन्न रहते है, और उनकी दशा के फल शुभ रूप में प्राप्त होते है। हनुमान जी को माह में एक बार चौला चढाने से भी शनि देवी की कृपा बनी रहती है।स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए पीपल कि जड़ को तकिये के नीचे रखने से स्वास्थ्य में लाभ मिलता है।

धन वृद्धि के लिए दक्षिण दिशा की और सिर करके सोना चाहिए। उत्तर दिशा की और सिर करके सोने से भी स्वास्थ्य अनुकूल रहता है।

भंडार घर में कोयला और सभी धान्य किसी घड़े या बर्तन में भरकर रखने से भंडार कभी भी खाली नहीं होते हैं।

घर में ख़राब घड़ियाँ इधर उधर नहीं रखनी चाहिए। घड़ियाँ चलती होनी चाहिए। खराब होने पर उन्हें ठीक कराएं और ठीक न होने की स्थिति हो तो घर से बाहर कर दें।

जौ का आटा, काले तिल मिलाकर उसमें सरसों का तेल डालकर आटा गूंथ लें, इसकी रोटी बनाकर किसी भैंसे को खिला दें, इससे अकाल मृत्यु का भय टल जाता है।

घर में बच्चों की बुद्धि और विवेक अच्छा रहे, इसके लिए आवश्यक है कि घर में हर माह मंगलवार या शनिवार के दिन सुन्दरकाण्ड या रामायण का पाठ होता रहे।

बालक का मन पढाई में लगे इसके लिए सरस्वती माता का दर्शन पूजन करने की आदत बच्चे को डालनी चाहिए।

रविवार के दिन नमक का सेवन करने से बचें। और रविवार के दिन संभव हो तो व्रत का पालन करें।

शिवलिंग का प्रतिदिन अभिषेक करने से मानसिक रोग, क्रोध और आवेश में कमी होती है।

मंगलवार से लेकर शनिवार तक यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करे, तो उसके बड़े से बड़े संकट का समाधान होता है।

नजर दोष से बचाने के लिए सरसों के दाने और लाल मिर्च लेकर सिर से पैर तक घड़ी की विपरीत दिशा में सात बार घुमा कर जला देने या चौराहे पर फ़ेंक देने से नजर दोष दूर होता है।

हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करने से व्यक्ति का हर संकट दूर होता है।

घर में सुबह पूजा करने के बाद आरती में दो लौंग डालकर सारे घर में घुमाए, इससे घर की नकारात्मक शक्तियां दूर होती है।

रविवार की रात्रि दूध का भरा गिलास भरकर अपने सिरहाने रखे, और सुबह उठकर इसे किसी बबूल के पेड़ कि जड़ों में डाल दें।

आइए अब जानते हैं कि सप्ताह के सातों दिन घर से बाहर जाते समय क्या करना चाहिए :

  • सोमवार के दिन घर से बाहर काम के लिए जाते समय अपना चेहरा दर्पण में देख कर निकलें।
  • हनुमान जी कि कृपा पाने के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी को बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाकर घर से बाहर निकलें।
  • बुधवार के दिन घर से बाहर जाने से पहले धनिये की कुछ पत्तियां खाकर निकले।
  • गुरुवार के दिन सरसों के कुछ दाने चबाकर निकलने से दिन शुभ रहता है।
  • शुक्रवार के दिन दही खाकर घर से निकलने से दिन की शुभता बनी रहती है।
  • शनिवार के दिन को शुभ करने के लिए घर से निकलने से पहले अदरक चबा कर निकलें।
  • रविवार के दिन घर से बाहर जाने से पहले थोड़ा गुड़ खाकर निकलें।

जीवन की दौड़ में कभी आर्थिक परेशानी आ खड़ी होती है, तो कभी सफलता का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों से निजात पाने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं. हालांकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ज्योतिषीय उपायों का प्रभाव जातक की जन्मपत्री और ग्रहों की दशा पर निर्भर करता है. किसी भी उपाय को अपनाने से पूर्व किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित रहता है.

]]>
https://sanjayrajput.com/2024/08/astro-tips-in-hindi.html/feed 0 701
ये वास्तु टिप्स आपकी जिंदगी बदल देंगे, जरूर आजमाएं https://sanjayrajput.com/2023/12/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6.html https://sanjayrajput.com/2023/12/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6.html#respond Fri, 29 Dec 2023 04:17:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/12/29/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6/ Read more

]]>

वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान-स्थल का महत्व
उत्तर और पूर्व के बीच की दिशा को वास्तु में ईशान कोण (North East Corner) कहा गया है। यह दिशा-क्षेत्र किसी भी ईमारत का सबसे पवित्र स्थान होता है जिसमें ईश्वर का निवास स्थान होता है। ऐसा माना जाता है कि घर के ईशान कोण को हमेशा साफ़ सुथरा रखना चाहिए जिससे घर में सुख-शांति, आरोग्य और लक्ष्मी का वास हो।
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को बहुत ही शुभ बताया गया है, क्योंकि इस दिशा में देवी-देवताओं का वास माना जाता है। ऐसे में यदि आप धन की देवी मां लक्ष्मी की मूर्ति को घर की उत्तर-पूर्व (North East Corner) दिशा में रखते हैं, तो इससे आपके धन लाभ के योग बन सकते हैं। साथ ही व्यक्ति के आर्थिक परेशानियां भी दूर होती हैं।
कमरे में पूर्व व उत्तर दिशा के बीचवाले कोने से कमरे की पूर्वी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग व उत्तरी दीवाल की लम्बाई का एक तिहाई भाग लेकर जो आयताकार स्थल बनता है, वह ‘ईशान-स्थल’ कहलाता है । 12 X 18 के कमरे का ईशान-स्थल 4 X 6 का होगा । खुले भूमिखंड के विषय में भी ऐसे ही समझना चाहिए।
सुख-शांतिप्रदायक ईशान-स्थल
सुख-शांति और कल्याण चाहनेवाले बुद्धिमानों को अपने घर, दुकान या कार्यालय में ईशान-स्थल (North East Corner) पर अपने इष्टदेव, सदगुरु का श्रीचित्र लगा के वहाँ धूप-दीप, मंत्रोच्चार तथा साधना-ध्यान पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके करना चाहिए। यह विशेष सुख-शांतिदायक है ।
सुख-समृद्धि में वृद्धि हेतु
भूमिखंड के ईशान कोण (North East Corner) तथा पूर्व एवं उत्तर दिशा में खाली भाग अधिक होना चाहिए और इन भागों में अपेक्षाकृत वजन में हलके व कम ऊँचाईवाले पेड़-पौधे लगाने चाहिए । भूमिखंड के ईशान-स्थल में तुलसी, बिल्व व आँवला लगाना सुख-समृद्धिकारक है ।
विद्यार्थियों के लिए ईशान कोण का महत्त्व 
विद्यार्थियों के लिए भी ईशान कोण बड़े महत्त्व का है । पूर्व एवं उत्तर दिशाएँ ज्ञानवर्धक दिशाएँ तथा ईशान-स्थल ज्ञानवर्धक स्थल है। जो विद्यार्थी ईशान-स्थल पर बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पढ़ता है, उसे ज्ञानार्जन में विशेष सहायता मिलती है। पूर्व की ओर मुख करने से विशेष लाभ होता है। अध्ययन-कक्ष में सदगुरु या ब्रह्मज्ञानी महापुरुषों के श्रीचित्र लगाने चाहिए, इससे सत्प्रेरणा मिलती है ।
कुछ आसान वास्तु टिप्स (Vastu Tips in Hindi)
 
•घर में सप्ताह में एक बार गूगल का धुआं करना शुभ होता है।
 
•गेहूं में नागकेशर के 2 दाने तथा तुलसी की 11 पत्तियां डालकर पिसाया जाना शुभ है।
•घर में सरसों के तेल के दीये में लौंग डालकर लगाना शुभ है।
 
•हर गुरुवार को तुलसी के पौधे को दूध चढ़ाना चाहिए।
 
•तवे पर रोटी सेंकने के पूर्व दूध के छींटें मारना शुभ है।
 
•पहली रोटी गौ माता के लिए निकालें।
•मकान में 3 दरवाजे एक ही रेखा में न हों।
 
•सूखे फूल घर में नहीं रखें।
 
•संत-महात्माओं के चित्र आशीर्वाद देते हुए बैठक में लगाएं।
 
•घर में टूटी-फूटी, कबाड़, अनावश्यक वस्तुओं को नहीं रखें।
•दक्षिण-पूर्व दिशा के कोने में हरियाली से परिपूर्ण चित्र लगाएं।
 
•घर में टपकने वाले नल नहीं होना चाहिए।
 
•घर में गोल किनारों के फर्नीचर ही शुभ हैं।
 
•घर में तुलसी का पौधा पूर्व दिशा की गैलरी में या पूजा स्थान के पास रखें।
•वास्तु की मानें तो उत्तर या पूर्व दिशा में की गई जल की निकासी आर्थिक दृष्टि से शुभ होती है। इसलिए घर बनाते समय इस बात का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।
इन आसान वास्तु टिप्स को फॉलो करके आप भी अपने घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर अपने जीवन की समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं।
**************************************
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर
vastu tips in hindi
वास्तू शास्त्र नुसार घर
home vastu in hindi
home vastu shastra in hindi
वास्तु शास्त्र हिंदी में
400 vastu tips in hindi
home vastu tips in hindi
vastu shastra tips for home in hindi
ghar ka vastu shastra in hindi
vastu tips for money in hindi
रसोई घर का वास्तु
वास्तु शास्त्र के अनुसार
शास्त्र के अनुसार
bedroom vastu tips in hindi
kitchen vastu hindi
kitchen vastu tips in hindi
दक्षिणमुखी घर के लिए सेप्टिक टैंक वास्तु
वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई घर
bedroom vastu in hindi
kitchen direction as per vastu in hindi
vastu tips for shop in hindi
dr puneet chawla vastu tips in hindi
factory vastu in hindi
shop vastu shastra in hindi
south facing shop vastu in hindi
vastu shastra for factory in hindi
vastu tips for house in hindi
west face house vastu in hindi
office vastu tips in hindi
vastu direction in hindi
wall clock direction as per vastu in hindi
घर का वास्तु शास्त्र हिंदी में
सीढ़ियों का वास्तु शास्त्र
bed direction as per vastu in hindi
money plant vastu in hindi
office vastu in hindi
stairs vastu in hindi
toilet direction as per vastu in hindi
business vastu tips in hindi
kitchen vastu direction in hindi
south west direction vastu in hindi
staircase direction as per vastu in hindi
गृह वास्तु शास्त्र
घर का वास्तु शास्त्र
factory vastu tips in hindi
north east direction vastu in hindi
vastu shastra for money in hindi
vastu tips for factory in hindi
वास्तु शास्त्र इन हिंदी
वास्तुशास्त्रानुसार घर
bamboo plant vastu direction in hindi
east facing shop vastu in hindi
kitchen design vastu shastra in hindi
north east toilet vastu remedies in hindi
pooja room vastu in hindi
septic tank vastu in hindi
sleeping direction vastu in hindi
south east me toilet vastu remedies in hindi
south west facing shop vastu in hindi
वास्तु के
वास्तु ज्ञान इन हिंदी
सीढ़ी वास्तु के अनुसार
ghar ke main door ka vastu
wardrobe direction as per vastu in hindi
wind chimes vastu in hindi
छत का वास्तु
महा वास्तु शास्त्र इन हिंदी
महेश ज्ञानी वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र घर
bedroom direction as per vastu in hindi
kitchen according to vastu in hindi
kitchen vastu shastra in hindi
main gate vastu tips in hindi
south west entrance vastu in hindi
vastu tips for business growth in hindi
visiting card vastu tips in hindi
wall watch direction as per vastu in hindi
घर वास्तु शास्त्र
वास्तु के अनुसार घर
वास्तु शास्त्र अनुसार घर
bamboo plant vastu in hindi
basement vastu in hindi
clock direction as per vastu in hindi
gas stove direction as per vastu in hindi
kuber direction in vastu in hindi
shoe rack vastu shastra in hindi
south west kitchen vastu remedies in hindi
vastu tips for new home in hindi
wall clock vastu in hindi
घर वास्तु
वास्तु इन हिंदी
वास्तु शास्त्र अनुसार
7 horses painting vastu direction hindi
bamboo plant at home vastu in hindi
money plant in bedroom vastu in hindi
puja room as per vastu in hindi
south east bedroom vastu in hindi
south facing main door vastu remedies in hindi
south west face house vastu in hindi
south west facing main door vastu remedies in hindi
vastu tips for positive energy in home in hindi
what is ishan kon in vastu in hindi
best vastu tips for home in hindi
drawing room vastu in hindi
flat vastu tips in hindi
hospital vastu tips in hindi
kitchen in vastu in hindi
north direction vastu in hindi
puja room according to vastu in hindi
vastu shastra for home mandir in hindi
vastu shastra wall clock direction in hindi
vastu tips for home construction in hindi
vastu tips for money luck in hindi
vastu tips for south facing house in hindi
vastu tips for students in hindi
vastu tips for west facing house in hindi
wall clock as per vastu in hindi
wall clock kis direction as per vastu in hindi
wall watch vastu in hindi
west facing plot vastu in hindi
महेश ज्ञानी का वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र हिंदी
शयनकक्ष का वास्तु
हिंदी वास्तु शास्त्र
7 horse vastu shastra tips in hindi
best direction of house as per vastu in hindi
clock vastu in hindi
home design as per vastu in hindi
horse vastu shastra tips in hindi
kissing duck showpiece vastu in hindi
kitchen design according to vastu in hindi
plant vastu shastra in hindi
salt vastu tips in hindi
turtle vastu shastra in hindi
vastu direction for house in hindi
vastu for wall clock in hindi
vastu shastra for home entrance in hindi
vastu tips for career growth in hindi
vastu tips for flat in hindi
vastu tips for health in hindi
vastu tips for west facing factory in hindi
vastu tips to improve husband wife relationship in hindi
घर की वास्तु शास्त्र
घर के लिए वास्तु शास्त्र
घर बनाने में वास्तु शास्त्र
घर में वास्तु शास्त्र
वास्तु अनुसार घर
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में
basic vastu for home in hindi
bedroom as per vastu in hindi
horse painting vastu shastra tips in hindi
kitchen direction vastu in hindi
lal kitab vastu tips in hindi
room vastu shastra in hindi
vastu direction for kitchen in hindi
vastu for husband wife relationship in hindi
vastu for sofa set in hindi
vastu tips for east facing shop in hindi
vastu tips for flats in apartments in hindi
vastu tips for home design in hindi
vastu tips for love marriage in hindi
vastu tips for making house in hindi
vastu tips for mental peace in hindi
vastu tips for south west facing house in hindi
vastu tips for wall clock at home in hindi
कन्या राशि वास्तु शास्त्र
घड़ी वास्तु शास्त्र
घर में मनी प्लांट
चीनी वास्तु शास्त्र
पैसे का वास्तु शास्त्र
वास्तु वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र पैसा
वास्तु शास्त्र से

]]>
https://sanjayrajput.com/2023/12/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%81-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6.html/feed 0 57
उस घर में भी एक दीया जले जहां अंधकार है https://sanjayrajput.com/2023/11/%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be.html https://sanjayrajput.com/2023/11/%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be.html#respond Sun, 12 Nov 2023 02:46:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/11/12/%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be/ Read more

]]>

मित्रों, मान्यता है कि त्रेता युग में इस दिन भगवान राम 14 वर्ष के वनवास और रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौटे थे. इसी खुशी में अयोध्यावासियों ने समूची नगरी को दीपों के प्रकाश से जगमग कर जश्न मनाया था और इस तरह तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा.
उस राज्य में प्रभु श्रीराम का पुन: आगमन होता है, जिनके राजा राम हैं, जहां रामराज्य है, जहां भरत जैसा भाई राज्य की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने वाला राज्य का प्रभारी है। 
जिसके राज्य में एक भी परिवार या बच्चा भूखा न सोता हो, जहां कभी किसी के साथ अन्याय न हो, जहां के लोग अन्न के दाने को तरसते न हों, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संसाधन और न्याय का विधान हो। 
ऐसे राज्य में भरत की अगुवाई में अपने परम प्रतापी राजा के स्वागत में ऐसी भव्य अयोध्या सजी कि युगों युगों से इसे प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाने लगा!
हम भारतवासी हमेशा राजा राम की अनन्य घर वापसी और असत्य पर सत्य की विजय को ऐसे ही दीपोत्सव के रूप में मनाते रहेंगे।
अयोध्या में दीपोत्सव पर 24 लाख से भी अधिक दीये अलग अलग घाटों पर जलाकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया है। 
अच्छा है इससे भी अधिक दीए जलें, लेकिन उस घर में भी एक दीया जले, जिस घर पर आज के राजाओं की नजर नहीं है।
दीपावली का यह पावन पर्व आप सभी के जीवन को सुख, समृद्धि, सौभाग्य एवं आरोग्यता के धवल प्रकाश से दीप्त करे।
आप सभी को प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!
WhatsApp पर हमारे चैनल को अभी फ़ॉलो करें:👇 

]]>
https://sanjayrajput.com/2023/11/%e0%a4%89%e0%a4%b8-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a4%be.html/feed 0 66
स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है गोरखपुर के तरकुलहा देवी मंदिर का इतिहास https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81.html https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81.html#respond Mon, 16 Oct 2023 06:52:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/10/16/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81/ Read more

]]>

Tarkulha Devi Mandir Gorakhpur: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में की जो आग पूरे देश में आजादी को लेकर भड़की थी. उसे पूरे पूर्वांचल में शहीद बंधू सिंह ने नेतृत्व दिया था, और अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिये थे.
शहीद बंधू सिंह को 12 अगस्त सन 1858 को गोरखपुर शहर के अलीनगर चौक पर स्थित विशालकाय बरगद के पेड़ पर फांसी दी गयी थी. 
कहा जाता है की अंग्रेजों ने गोरखपुर शहर के अलीनगर चौक पर खुलेआम बरगद के पेड़ पर शहीद बंधू सिंह को फांसी पर लटकाया लेकिन फंदा टूट गया था. ऐसा लगभग सात बार हुआ. 
अंत में स्वयं बंधू सिंह ने मां भगवती से अपने चरणों में बुलाने का अनुरोध किया. तब जाकर वह हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए. 
इस दौरान जंगल के जिस स्थान पर बंधू सिंह अपनी देवी मां की पिन्डी रूप में पूजा करते थे वहां स्थित तरकुल का पेंड़ भी धड़ से टूट गया था और पेड़ से रक्त बहने लगा. 
आज भी भगवती मां को लोग तरकुलहा माता के नाम से पूजते चले आ रहे हैं. अमर शहीद बंधू सिंह को सम्मानित करने के लिए यहाँ एक स्मारक भी बना हैं।
बंधू सिंह ने अंग्रेजो के सिर चढ़ा कर जो बलि कि परम्परा शुरू की थी वो आज भी यहाँ जारी है। अब यहाँ पर बकरे कि बलि चढ़ाई जाती है, उसके बाद बकरे के मांस को मिट्टी के बरतनों में पका कर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, साथ में लिट्टी भी दी जाती हैं। यह देश का इकलौता मंदिर है जहाँ प्रसाद के रूप में मटन दिया जाता है। 
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार इस इलाके में घना जंगल हुआ करता था जहां जंगल में डुमरी रियासत के बाबू बंधू सिंह रहा करते थे। नदी के तट पर तरकुल (ताड़) के पेड़ के नीचे पिंडियां स्थापित कर वह देवी की उपासना किया करते थे। तरकुलहा देवी बाबू बंधू सिंह कि इष्ट देवी थी। 
बंधू सिंह गुरिल्ला लड़ाई में माहिर थे, इसलिए जब भी कोई अंग्रेज उस जंगल से गुजरता, बंधू सिंह उसको मार कर उसका सिर काटकर देवी मां के चरणों में समर्पित कर देते थे।
तरकुलहा देवी मंदिर गोरखपुर कैसे पहुंचे?
(How To Reach Tarkulha Devi Mandir Gorakhpur)

गोरखपुर जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर गोरखपुर-देवरिया रोड पर मां तरकुलहा देवी मंदिर मार्ग का मुख्य गेट है। वहां से लगभग डेढ़ किमी पैदल, निजी वाहन या आटो से चलकर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
जय माता दी !!

✅हमारे सभी पोस्ट की अपडेट तुरंत पाने के लिए अभी हमारे व्हाट्सएप चैनल को Follow करें-👇



]]>
https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%81.html/feed 0 70
क्या आप सीता माता के बारे में ये बातें जानते हैं? https://sanjayrajput.com/2023/06/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae.html https://sanjayrajput.com/2023/06/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae.html#respond Fri, 23 Jun 2023 06:39:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/06/23/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae/ Read more

]]>

रामायण की कथा तो हर कोई जानता है लेकिन फिर भी कुछ ऐसे रहस्य हैं जिन्हें बहुत कम ही लोग जानते होंगे.
रामायण में एक घास के तिनके का भी रहस्य है, जो हर किसी को नहीं मालूम क्योंकि आज तक हमने हमारे ग्रंथो को सिर्फ पढ़ा है, कभी उन्हें समझने की कोशिश नहीं की है.
रावण जब सीता माता का हरण करके लंका ले गया तब लंका मे सीता जी वट वृक्ष के नीचे बैठ कर चिंतन करने लगी. रावण बार बार आकर सीता माता को धमकाता था, लेकिन सीता माता कुछ नहीं बोलती थी.
यहाँ तक की रावण ने श्रीराम की वेश भूषा मे आकर भी सीता माता को भ्रमित करने की बहुत कोशिश की लेकिन कभी सफल नहीं हुआ.
रावण थक हार कर जब अपने शयन कक्ष मे गया तो मंदोदरी ने उससे कहा कि आप तो राम का वेश धर कर गये थे, फिर क्या हुआ?
रावण बोला- जब मैं राम का रूप लेकर सीता के समक्ष गया तो सीता मुझे नजर ही नहीं आ रही थी.
रावण अपनी समस्त ताकत लगा चुका था लेकिन जिस जगत जननी मां सीता को आज तक कोई नहीं समझ सका, उन्हें रावण कैसे समझ पाता.
रावण एक बार फिर सीता माता के पास आया और बोला मैं तुमसे सीधे सीधे संवाद करता हूँ , लेकिन तुम कैसी नारी हो कि मेरे आते ही घास का तिनका उठाकर उसे ही घूर-घूर कर देखने लगती हो?
क्या घास का तिनका तुम्हें राम से भी ज्यादा प्यारा है? 
रावण के इस प्रश्न को सुनकर माँ सीता की आँखों से अविरल आसुओं की धार बह पड़ी.
इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि जब प्रभु श्रीराम का विवाह सीता के साथ हुआ, तब अयोध्या में सीता का बड़े आदर सत्कार के साथ गृह प्रवेश हुआ और अयोध्या में बहुत बड़ा उत्सव मनाया गया.
परंपरा के अनुसार नव वधू विवाह पश्चात जब ससुराल आती है तो उसके हाथ से कुछ मीठा पकवान बनवाया जाता है, ताकि जीवन भर घर में मिठास बनी रहे.
अत: सीता माता ने भी उस दिन अपने हाथों से खीर बनाई और समस्त परिवार, राजा दशरथ एवं तीनों रानियों सहित चारों भाई और साधु-संत, ऋषि-मुनि भी भोजन पर आमंत्रित किए गए.
माँ सीता ने सभी को खीर परोसना शुरू किया और भोजन शुरू ही होने वाला था की अचानक ज़ोर से एक हवा का झोंका आया. सभी ने अपनी अपनी पत्तलें सम्भाली, सीता जी बड़े गौर से ये सब देख रही थीं.
ठीक उसी समय राजा दशरथ की खीर पर एक छोटा सा घास का तिनका गिर गया, जिसे सीता जी ने देख तो लिया, लेकिन अब खीर मे हाथ कैसे डालें?
ऐसे में सीता जी ने दूर से ही उस तिनके को घूर कर देखा और वो तिनका तुरंत जलकर राख की एक छोटी सी बिंदु मात्र बनकर रह गया. 
सीता जी ने सोचा चलो अच्छा हुआ उन्हें ऐसा करते किसी ने नहीं देखा. लेकिन राजा दशरथ सीता के इस चमत्कार को देख रहे थे, फिर भी वे चुप रहे और भोजन के पश्चात अपने कक्ष में पहुचकर उन्होंने सीता को बुलवाया.
सीता जब वहां आईं तो उन्होंने कहा कि मैंने आज भोजन के समय आपके चमत्कार को देख लिया था. आप साक्षात जगत जननी स्वरूपा हैं, लेकिन मेरी एक बात आप हमेशा याद रखें.
आपने जिस नजर से आज उस तिनके को देखा था उस नजर से आप अपने शत्रु को भी कभी न देखें.
सीता जी ने राजा दशरथ को वचन दिया और वहां से चली गईं.
यही कारण था कि जब भी सीता जी के सामने रावण आता था तो वो उस घास के तिनके को उठाकर राजा दशरथ की उस बात को याद कर लेती थीं.
“तृण धर ओट कहत वैदेही
सुमिरि अवधपति परम् सनेही”
यही है उस तिनके का रहस्य…
सीता जी चाहती तो एक पल में ही रावण को राख़ कर सकती थी, लेकिन राजा दशरथ को दिये हुए वचन एवं प्रभु श्रीराम को रावण-वध का श्रेय दिलाने हेतु वो शांत रहीं.
“रघुकुल रीत सदा चली आई
प्राण जाए पर वचन न जाई”
ऐसी वचन का पालन करनेवाली और विशाल हृदय थीं जगत जननी सीता माता.
आज यदि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम घर घर में पूजे जाते हैं तो इसमें जगत जननी माता जानकी का बहुत बड़ा योगदान है. 
स्त्री ही इस सृष्टि की रचयिता, पोषक और पालनकर्ता है. बिना स्त्री के सहयोग और योगदान के कोई भी पुरुष कुछ नहीं है.
जय सियाराम!!
*Disclaimer– यह लेख धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं पर आधारित है.
©SanjayRajput.com

]]>
https://sanjayrajput.com/2023/06/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae.html/feed 0 95
भगवान की फोटो HD डाउनलोड करें https://sanjayrajput.com/2023/05/bhagwan-ki-photo.html https://sanjayrajput.com/2023/05/bhagwan-ki-photo.html#respond Sat, 20 May 2023 17:53:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/05/20/%e0%a4%ad%e0%a4%97%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%8b-hd-%e0%a4%a1%e0%a4%be%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87/ Read more

]]>

Ajkal bhagwan ki photo download karna aur bhagwan ki photo ka wallpaper banakar rakhna india me logo ko bahut pasand hai. Isliye hum apke liiye lekar aaye hain hinduon ke mukhya sabhi bhagwan ki photo hd wallpaper.
Hamare ghar me jo bhi bade bujurg log hote hain unhe bhagwan ki photo apne mobile me wallpaper lagana achha lagta hai. Isliye hum yaha aplogo ke liye bhagwan ki photo, bhagwan ka photo, krishna bhagwan ki photo, krishna bhagwan ka photo, shankar bhagwan ka photo, krishna bhagwan photo, shankar ji ka photo, photo shankar bhagwan, vishnu bhagwan ki photo, bhagwan ke photo, shankar ji ki photo, ram bhagwan photo, bhagwan ki pic, vishnu bhagwan photo, ganesh bhagwan ka photo, shankar bhagwan ki photo, krishna bhagwan ke photos, ganesh bhagwan ki photo, vishnu bhagwan ka photo, bhagwan ji ki photo, ram bhagwan ki photo, vishnu bhagwan images, vishwakarma bhagwan ka photo, shankar bhagwan ke photo, ram bhagwan ka photo, krishna bhagwan pic, krishna bhagwan picture, krishna bhagwan ki picture, bhagwan ka pic, image krishna bhagwan, bhagwan ke wallpaper, ganesh bhagwan photo, vishnu ji ki photo, ram bhagwan images, krishna bhagwan ka pic, shankar ji photo, shiv bhagwan ki photo, surya bhagwan ki photo, surya bhagwan images, shiv bhagwan photo, vishnu bhagwan wallpaper, vishnu bhagwan pic, shiv bhagwan images, shankar bhagwan ki pic, ganesh bhagwan images, shankar bhagwan ka picture, surya bhagwan ka photo, sankar bhagwan pic, krishna bhagwan ke wallpaper, bhagwan ka wallpaper, shankar ji images, shankar bhagwan picture, ganesh bhagwan ki pic, narsingh bhagwan photo, vishwakarma bhagwan ki photo, bhagwan vishnu ki photo, surya dev ki photo, bhagwan na phota, bhagwan ki tasvir, shri krishna bhagwan ki photo, shankar ji ki pic, vishnu bhagwan wallpaper hd, krishna bhagwan ka wallpaper, bhagwan ji ke wallpaper, bhagwan ka photo hd, vishnu ji ka photo, surya bhagwan photo, vishnu ji images, vishnu ji photo, krishna bhagwan photo hd, hanuman bhagwan photo, vishnu bhagwan ki pic, shri krishna bhagwan photo, surya dev picture, ganesh bhagwan ka pic, bhagwan ji ki picture, narayan bhagwan ki photo, shankar bhagwan ka wallpaper, satyanarayan bhagwan ki photo, narsingh bhagwan ki photo, vishwakarma bhagwan photo, krishna bhagwan ki pic, vishwakarma bhagwan ke photo, bhagwan shiv ka photo, shankar bhagwan na phota, krishna bhagwan ki tasvir, shiv ji photo hd, narsingh bhagwan images, surya devta ka photo, bhagwan ki dp, bhagwan baba photo, ganesh bhagwan pic, durga bhagwan ka photo, shankar bhagwan ke wallpaper, krishna bhagwan ki image, bhagwan ji photo, kuber bhagwan ki photo, bhagwan vishnu images full hd, bhagwan ki image, ram bhagwan ke photo, ram bhagwan pic, bhagwan wala photo, vishnu ji pic, ganesh bhagwan picture, vishnu bhagwan picture, kuber bhagwan photo, narsingh bhagwan ka photo, jagannath bhagwan photo, bhagwan vishnu ka photo, krishna bhagwan ji ki photo, shani bhagwan ki photo, shri krishna bhagwan ka photo,
sabhi bhagwan ki photo, bhagwan na photo, hanuman bhagwan ka photo, shri ram bhagwan ki photo, vishnu bhagwan ka pic, ram bhagwan picture, saraswati bhagwan ka photo, jain bhagwan photo, krishna bhagwan ka image, satyanarayan bhagwan photo, ganesh bhagwan ka wallpaper, dhanvantari bhagwan ki photo, jagannath bhagwan ka photo, shani bhagwan photo, vishnu bhagwan ki image, bhagwan ram ka photo, bhagwan krishna ka photo, narayan bhagwan photo, photo bhagwan ke, hanuman bhagwan ki photo, sab bhagwan ka photo, ganesh bhagwan ji ki photo, shiv bhagwan ke photo, bhagwan ka photo dikhaiye, vishnu bhagwan images hd, ram bhagwan photo hd, sankar ji pic, bhagwan ki photo hd, bhagwan ka image, sai bhagwan ka photo, bhagwan ji ka wallpaper, sab bhagwan ki photo, krishna bhagwan ki dp, balaji bhagwan photo, shankar bhagwan ki image, swaminarayan bhagwan na photo, vishnu bhagwan ji ki photo, mahaveer bhagwan ki photo, radha krishna bhagwan ki photo, kuber bhagwan ka photo, shiv ji bhagwan ki photo, hanuman bhagwan wallpaper, bhagwan hanuman ji ki photo, ram bhagwan ki real photo, shani dev bhagwan ka photo, shani dev bhagwan ki photo, chitragupta bhagwan photo,
radha krishna bhagwan photo, ganesh bhagwan ke wallpaper, bhagwan shri krishna ka photo, shankar ji ka image, shankar ji ka pic, shankar ji ki image, swaminarayan bhagwan na phota, shri ram bhagwan ka photo, bhagwan shankar ki photo, bhagwan bholenath ki photo, krishna bhagwan ka bachpan ka photo, shankar bhagwan photo hd, shankar bhagwan ji ka photo, shaligram bhagwan ki photo, krishna bhagwan ji ka photo, shani bhagwan ka photo, sare bhagwan ki photo, krishna bhagwan ka photo dikhaiye, hanuman bhagwan images, ganesh bhagwan ki image, ganesh bhagwan ka image, shri krishna bhagwan ke photo, satyanarayan bhagwan ka photo, bhagwan shri ram ka photo, bhagwan ki tasviren, bhagwan dhanvantari ki photo, shankar bhagwan parvati ka photo, vishnu bhagwan real photo, laxmi bhagwan photo, sai bhagwan ki photo, ram bhagwan ka photo hd, parshwanath bhagwan images, shankar ji ki aarti image, vishwakarma bhagwan ka pic, bhagwan vishnu maa laxmi photo, vishnu bhagwan ka wallpaper, valmiki bhagwan ki photo, vishnu bhagwan ka image, shiva bhagwan photo, bhagwan shankar ka photo, vishnu bhagwan ke wallpaper, wallpaper bhagwan ji ke, narayan bhagwan ka photo, ganpati bhagwan ka photo, sabhi bhagwan ka photo, vishnu bhagwan photo hd, bhagwan ji images, jain bhagwan images, kartik bhagwan ka photo, balaji bhagwan ki photo, vishnu bhagwan lakshmi mata ki photo, ram bhagwan ke wallpaper, shankar bhagwan ji ki photo, shankar bhagwan ka photo hd, vishnu bhagwan laxmi mata ki photo, vishnu bhagwan hd photo, ram bhagwan ka wallpaper, sani bhagwan ke photo, datta bhagwan photo, surya dev ki image, sunny bhagwan ki photo, bhagwan ganesh ki photo, surya bhagwan images hd, bhagwan ji ki dp, shankar bhagwan ki dp, krishna bhagwan ka dp, vishnu ji images hd, narsimha bhagwan ka photo, dhanvantari bhagwan ka photo,
bhagwan bholenath ka photo, kartik bhagwan ki photo, surya bhagwan pic, mahaveer swami ki photo, bhagwan vishnu picture, ganesh ji bhagwan ki photo, vishnu bhagwan and laxmi mata photo, pic of vishnu bhagwan, vishnu bhagwan old photo, krishna bhagwan ki photo hd, bhagwan ji ki photo hd, vitthal bhagwan ki photo, vitthal bhagwan photo, krishna bhagwan ke pic, laxmi mata vishnu bhagwan ki photo, vishnu ji lakshmi ji ki photo, parasnath bhagwan ki photo, bhagwan vishnu ke photo, karma bhagwan ka photo, jain bhagwan ki photo, vishnu bhagwan laxmi ji photo, saraswati bhagwan ki photo.
Hanuman ji ki photo hd wallpaper download
Ram ji ki photo hd wallpaper download 
Shankar bhagwan ki photo hd wallpaper download 
Durga ji ki photo hd wallpaper download 
Ganesh bhagwan ki photo hd wallpaper download 
Sharda mata ki photo hd wallpaper download 

]]>
https://sanjayrajput.com/2023/05/bhagwan-ki-photo.html/feed 0 99
The Bengal Story फिल्म बनेगी? https://sanjayrajput.com/2023/05/the-bengal-story-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80.html https://sanjayrajput.com/2023/05/the-bengal-story-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80.html#respond Wed, 10 May 2023 06:39:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/05/10/the-bengal-story-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80/ Read more

]]>

मित्रों, The Kashmir Files, The Kerala Story के बाद अब बारी है The Bengal Story नाम की फिल्म बनाने की। क्योंकि बंगाल में भी ऐसा बहुत कुछ देश विरोधी घटित हुआ है और हो रहा है जिसे हर व्यक्ति को जानना बहुत जरूरी है।
सभी जानते हैं की बंगाल में कैसे वोटों की खातिर लाखों बांग्लादेशी घुसपैठिए रोहिंग्या मुसलमानो को अवैध तरीके से भारतीय नागरिक बनवा दिया गया है, जो की देश की एकता और अखंडता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
आज बंगाल में हर हिंदू खुद को डरा हुआ और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कब किस की हत्या हो जाए कोई भरोसा नहीं। यदि बंगाल में ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हिंदू वहां पूजा पाठ तक नहीं कर पाएंगे। अभी हाल ही में हनुमान जयंती पर वहां हुई हिंसा तो आप लोगों को याद ही होगी।
The Kerala Story फिल्म को बंगाल में बैन करने के पीछे क्या वजह है? आखिर क्यों वहां की सरकार ऐसा सच लोगों के सामने नहीं आने देना चाहती?
आज तक यही होता आया है की जब Bollywood मनोरंजन के नाम पर कुछ भी वाहियात और फालतू चीजें दिखाता है तो विरोध करने पर निर्माता/निर्देशक ये तर्क देते हैं की फिल्में तो समाज का आईना होती हैं, हम वही दिखाते हैं जो समाज में घटित हो रहा है।
बॉलीवुड के कहने के हिसाब से देखें तो समाज में जितनी भी अश्लीलता, फुहड़ता, घटियायी होती है सिर्फ उसे ही दिखाने का बॉलीवुड ने ठेका ले रखा था।
बड़े ही अफसोस की बात है की अभी तक ये बॉलीवुड वाले सिर्फ लव जिहाद को बढ़ावा देने वाली, अली मौला और इस्लामियत का प्रचार, हिंदू धर्म की बुराई, अश्लीलता, घटियाई और नंगापन ही दिखाते थे और हमारे समाज को अपनी फिल्मों के माध्यम से गलत संदेश देने की कोशिश करते थे।

लेकिन अब हमारा देश बदल रहा है। अब कुछ ऐसी रियलिस्टिक फिल्में भी बनना शुरू हुई हैं जिनमें जो कुछ वास्तव में देश के कई हिस्सों में घटित हुआ है या हो रहा है और जिस सच को जानना इस देश के हर नागरिक के लिए बहुत जरूरी है, वो छिपा हुआ सच दिखाया जा रहा है। 
एक जिम्मेदार और देशभक्त फिल्मकार होने का असली फर्ज तो The Kashmir Files और The Kerala Story के निर्माता/निर्देशकों ने ही निभाया है। 
सही मायने में ऐसे फिल्म निर्माताओं को ही देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जाना चाहिए लेकिन यहां तो सब कुछ वोटों की ही खातिर किया जाता है। तभी तो जो लोग मुलायम सिंह यादव को रामभक्तों का हत्यारा बताते थे उन्हीं लोगों ने अब यादव वोटों की खातिर मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत पद्म विभूषण जैसा देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर सम्मानित किया है।
इस देश में अच्छे दिन तो तभी आयेंगे जब इस देश के राजनैतिक दल और नेता अपना हर निर्णय वोटों के हिसाब से न लेकर देश और समाज के हित को ध्यान में रखकर लेना शुरू करेंगे।
यदि मेरा यह लेख आपको पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें।

]]>
https://sanjayrajput.com/2023/05/the-bengal-story-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80.html/feed 0 103
हिन्दुत्व के लॉजिक में और अन्य में क्या फर्क है? https://sanjayrajput.com/2023/01/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0.html https://sanjayrajput.com/2023/01/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0.html#respond Fri, 06 Jan 2023 09:54:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/01/06/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0/ Read more

]]>

इस दुनिया में वो कौन से लोग हैं जो समस्याएं और अराजकता पैदा करते हैं?
किन लोगों की वजह से पूरी दुनिया की अमन-शांति खतरे में है?
वो लोग जो करोड़ों देवी देवताओं को मानते और पूजते हैं या वो लोग जो ये कहते हैं कि दुनिया में सिर्फ एक ही है, बस यही सच है इसके अलावा सब झूठ है और जो इसको मानते हैं वो अपने हैं बाकी सब काफिर (दुश्मन) हैं, उन्हें दुनिया में रहने का कोई हक नहीं है।
हिंदुत्व का लॉजिक क्या है?
हिंदू धर्म में तो पहाड़ की भी पूजा होती है,
मिट्टी की मूर्ति की भी पूजा होती है, सूर्य की,
चांद की सबकी पूजा होती है। यहां तो धरती, जल, अग्नि, वायु, आकाश सबकी पूजा होती है।
हिंदू धर्म तो कहता है कि ‘कण कण में भगवान है’
मतलब हर चीज, हर इंसान में भगवान है, इसलिए किसी से भी मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्कार करते हैं। ठीक उसी तरह जैसे मंदिर में भगवान के सामने करते हैं।
क्या इससे अच्छी फिलासफी या विचारधारा दुनिया में कोई और हो सकती है?
क्या हिन्दू धर्म की इस विचारधारा वाला व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचा सकता है या किसी अन्य धर्म के लोगों से लड़ाई झगड़ा या विवाद की स्थिति पैदा होने की कोई संभावना बनती है?
क्या हिंदू धर्म की ये विचारधारा हमें कहीं से भी धार्मिक कट्टरता सिखाती है या अन्य धर्म के लोगों को मारने काटने की शिक्षा देती है?
हिन्दुत्व की उदारवादी विचारधारा में तो जीवित या निर्जीव सब में भगवान का रूप देखा जाता है। हिंदुत्व में तो सर्व धर्म समभाव की भावना है। यहां तो ‘जीयो और जीने दो’ की भावना है। यहां तो कट्टरता बिलकुल है ही नहीं।
हिंदू तो मजारों पर भी दीया, अगरबत्ती जलाते हैं, चादर चढ़ाते हैं। लेकिन क्या अन्य लोग भी कभी मंदिर में जाकर पूजा करते हैं?
एक कट्टर विचारधारा है, जिसमें ये है की बस हमारा ही धर्म सबसे ऊपर है, हमारा ही धर्म सही है, बाकी सब झूठ है। बस हमारे धर्म को मानने वाले लोग ही अपने हैं, बाकी सब काफिर (दुश्मन) हैं। 
देखा जाए तो सही मायने में यह कट्टर विचारधारा ही सारी समस्याओं की जड़ है। 
आप अपनी विचारधारा को जबरदस्ती दूसरों पर कैसे थोप सकते हैं?
जो आपकी विचारधारा और धर्म को न माने वो दुश्मन है? उसे दुनिया में जीने का कोई हक ही नहीं? उसे आप खत्म कर देंगे?
ये कौन सा लॉजिक है? ये कैसी विचारधारा है?
ये तो पूरी तरह कट्टरतावादी, तानाशाही और हिंसात्मक विचारधारा कही जायेगी, और स्वाभाविक सी बात है की ऐसी विचारधारा को मानने वाले लोग आतंकवादी, हिंसात्मक और हमलावर तो होंगे ही? 
क्या ऐसी धार्मिक कट्टरता वादी विचारधारा को मानने वाले लोग अमन पसंद हो सकते हैं? 
‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’
अब आप देखिए वो कौन सा धर्म है जो इस बात को सबसे ज्यादा जस्टिफाई करता है?
सबसे बड़ी बात तो ये है कि हिन्दुत्व की विचारधारा में यदि जरा सी भी धार्मिक कट्टरता होती, दूसरे धर्मों के प्रति नफरत और हिंसा का स्थान होता तो आज हिंदुस्तान में इतनी बड़ी संख्या में दूसरे धर्म के लोग अमन चैन से नहीं रह रहे होते। 

]]>
https://sanjayrajput.com/2023/01/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0.html/feed 0 130
लव जिहाद क्या है? https://sanjayrajput.com/2022/11/%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88.html https://sanjayrajput.com/2022/11/%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88.html#respond Thu, 24 Nov 2022 14:58:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2022/11/24/%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/ Read more

]]>
सुनील दत्त ने नर्गिस से, आदित्य पंचोली ने ज़रीना वहाब से, सचिन पायलट ने सारा अब्दुल्लाह से, मनोज वाजपेयी ने शबाना रज़ा (नेहा) से, शिरीष कुंदर ने फराह खान से, क्रिकेटर अजीत आगरकर ने फातिमा घड़ियाली से, सुनील शेट्टी ने माना क़ादरी से, अतुल अग्निहोत्री ने सलमान खान की बहन अलवीरा खान से, शशि रेखी ने वहीदा रहमान से, राज बब्बर ने नादिरा ज़हिर से, मयूर वाधवानी ने एक्ट्रेस मुमताज़ से, राजीव रॉय ने एक्टर रज़ा मुराद की बेटी बख्तावर से, समीर नेरुरकर ने टीवी एक्ट्रेस तस्नीम शेख से, एक्टर टीनू आनन्द ने जलाल आग़ा की बहन एक्ट्रेस शहनाज़ से, पंकज उधास ने फरीदा से, कुमुद मिश्रा ने एक्ट्रेस आयशा रज़ा से, क्रिकेटर मनोज प्रभाकर ने फरहीन से, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने नाज़नीन शिफ़ा से.
इन सभी हिन्दुओं ने मुस्लिम महिलाओं से शादी की और ये सभी शादियां अभी तक टिकी हुई हैं. इसका मतलब ये है कि इन सबने शादी के रिश्ते को ईमानदारी से निभाया भी, या यूं कहें कि इन्होंने
“प्रेम” के नाम पर प्रेम ही किया और वो इसलिए क्योंकि ये सब हिंदू थे.
वहीं दूसरी ओर…
आमिर खान ने रीना दत्ता के साथ, सैफ अली खान ने अमृता सिंह के साथ, अरबाज़ खान ने मलाइका अरोरा के साथ, मोहसिन खान ने रीना रॉय के साथ, अज़हरुद्दीन ने संगीता बिजलानी के साथ, फ़रहान अख्तर ने अधुना के साथ, ओमर अब्दुल्लाह ने
पायल नाथ के साथ, इन सभी मुस्लिमों ने काफ़िर औरतों से निकाह किया और उनकी जवानी का सुख लेने के बाद बुढ़ापे के क़रीब उनको छोड़ दिया. 
मतलब साफ है कि इन सभी ने जो भी किया प्रेम के नाम पर ही किया लेकिन वो प्रेम न होकर “लव जिहाद” (Love Jihad) था.
किसका प्रेम सच्चा है और कौन प्रेम की आड़ में जिहाद (Jihad) कर रहा है फर्क सबके सामने है. 
लव जिहाद क्या है? (What is Love Jihad in Hindi)
लव जिहाद (Love Jihad) वास्तव में दो शब्‍दों से मिलकर बना है। इसमें लव (Love) अंग्रेजी भाषा का शब्‍द है। इसका मतलब प्‍यार, इश्‍क और मोहब्‍बत होता है। वहीं जिहाद (Jihad) अरबी भाषा का एक शब्‍द है। जिसका मतलब धर्म की रक्षा के लिए युद्ध करना होता है। मतलब साफ है कि जब एक धर्म विशेष को मानने वाला व्‍यक्ति दूसरे धर्म की लड़कियों को प्‍यार के जाल में फंसाकर किसी प्रकार का लालच देकर या विवाह के जरिए धर्म परिवर्तन करवा देता है तो इस पूरी प्रक्रिया को लव जिहाद (Love Jihad) कहा जाता है।

]]>
https://sanjayrajput.com/2022/11/%e0%a4%b2%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88.html/feed 0 138
छठ पर्व क्यों मनाया जाता है, क्या है मान्यता? https://sanjayrajput.com/2022/10/%e0%a4%9b%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9.html https://sanjayrajput.com/2022/10/%e0%a4%9b%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9.html#respond Sun, 30 Oct 2022 11:55:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2022/10/30/%e0%a4%9b%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9/ Read more

]]>

Chhath Puja kahani in Hindi: जैसा की आप सब जानते हैं कि हमारे सनातन धर्म में छठ पर्व (Chhath Puja), छइठ या षष्‍ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू फेस्टिवल है।
सूर्योपासना का यह फेस्टिवल मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों के साथ ही अब पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। छठ पूजा (Chhath Puja) मैथिल, मगध और भोजपुरी लोगो का सबसे बड़ा पर्व है या यूं कहें की ये उनकी संस्कृति है।
सनातन परंपरा में आस्था के महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) का बहुत ज्यादा महत्व है। भगवान सूर्य और छठी मईया की पूजा से जुड़ा यह त्योहार बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड समेत अब देश के कोने-कोने में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। 
परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के सौभाग्य के लिए की जाने वाली छठ पूजा (Chhath Puja) में व्रती को तीन दिनों तक कठिन नियमों को पालन करना पड़ता है। छठ व्रत को करने वाली व्रती महिलाओं को कठिन तप करते हुए तकरीबन 36 घंटे तक बगैर कुछ खाए-पिए रहना पड़ता है।
आइए जानते हैं छठ पर्व से जुड़ी कहानियों के बारे में (Chhath Puja kahani in hindi)
छठ पूजा (Chhath Puja) द्वारा सूर्य की आराधना कब से प्रारंभ हुई इसके बारे में पौराणिक कथाओं में बताया गया है। सतयुग में भगवान श्रीराम, द्वापर में दानवीर कर्ण और पांच पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने सूर्य की उपासना की थी। छठी मैया की पूजा से जुड़ी एक क​था राजा प्रियवंद की है, जिन्होंने सबसे पहले छठी मैया की पूजा की थी। 
आइए जानते हैं कि सूर्य उपासना और छठ पूजा का इतिहास (History of Chhat Puja) और कथाएं (Chhat Puja Story) क्या हैं।
 
राजा प्रियवंद ने पुत्र के प्राणों की रक्षा के लिए की थी छठ पूजा (Chatt Puja)
एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियवंद नि:संतान थे, उनको इसकी बहुत पीड़ा थी। उन्होंने महर्षि कश्यप से इसके बारे में बात की। तब महर्षि कश्यप ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। उस दौरान यज्ञ में आहुति के लिए बनाई गई खीर राजा प्रियवंद की पत्नी मालिनी को खाने के लिए दी गई। यज्ञ के खीर के सेवन से रानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मृत पैदा हुआ था। राजा प्रियवंद मृत पुत्र के शव को लेकर श्मशान पहुंचे और पुत्र वियोग में अपना प्राण त्यागने लगे।
उसी वक्त ब्रह्मा की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने राजा प्रियवंद से कहा मैं सृष्टि की मूल प्रवृत्ति के छठे अंश से उत्पन्न हुई हूं इसलिए मेरा नाम षष्ठी भी है। तुम मेरी पूजा करो और लोगों में इसका प्रचार-प्रसार करो। माता षष्ठी के कहे अनुसार, राजा प्रियवंद ने पुत्र की कामना से माता का व्रत विधि विधान से किया। उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी थी। इसके फलस्वरुप राजा प्रियवद को पुत्र प्राप्त हुआ।
श्रीराम और सीता ने की थी सूर्य उपासना
एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, लंका के राजा रावण का वध कर अयोध्या आने के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता ने रामराज्य की स्थापना के लिए कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को उपवास रखा था और सूर्य देव की पूजा अर्चना की थी।
द्रौपदी ने पांडवों के लिए रखा था छठ व्रत
कुछ पौराणिक कथाओं में छठ व्रत के प्रारंभ को द्रौपदी से भी जोड़कर देखा जाता है। द्रौपदी ने पांच पांडवों के बेहतर स्वास्थ्य और सुखी जीवन लिए छठ व्रत रखा था और सूर्य की उपासना की थी, जिसके परिणामस्वरुप पांडवों को उनका खोया हुआ राजपाट वापस मिल गया था।
दानवीर कर्ण ने शुरू की सूर्य पूजा
महाभारत के अनुसार, दानवीर कर्ण सूर्य के पुत्र थे और प्रतिदिन सूर्य की उपासना करते थे। कथानुसार, सबसे पहले कर्ण ने ही सूर्य की उपासना शुरू की थी। वह प्रतिदिन स्नान के बाद नदी में जाकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।
छठ महापर्व (Chhat Puja) में महिलाओं द्वारा निर्जला व्रत रखते हुए अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। हमारी सनातन संस्कृति में यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य की भी पूजा व उपासना की जाती है।
दुनिया कहती है कि जिसका उदय हुआ है उसका डूबना निश्चित है, लेकिन छठ महापर्व सिखाता है कि जो डूबता है उसका उदय भी निश्चित है।
प्रत्यक्ष देव, सूर्य देव की उपासना के महापर्व ‘ छठ ‘ की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।

]]>
https://sanjayrajput.com/2022/10/%e0%a4%9b%e0%a4%a0-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b5-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9.html/feed 0 142
खजुराहो के मंदिर : हमारी अनमोल धरोहर https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8.html https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8.html#respond Sun, 29 May 2022 08:51:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2022/05/29/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8/ Read more

]]>
आज हम आपको उत्कृष्ट भारतीय कला और बेहतरीन शिल्पकारी के नायाब नमूने खजुराहो के मंदिरों (Khajuraho Temples) के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। तो आइए बात करते हैं हमारी अनमोल धरोहरों में से एक खजुराहो के मंदिरों (Khajuraho Temples) की। 
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित खजुराहो के मंदिरों (khajuraho temples) का निर्माण चंदेल वंश (Chandela Dynasty) के तेजस्वी राजा चन्द्रवर्मन (King Chandravarman) द्वारा 950 से 1050 ईसवी के बीच करवाया गया था। 

खजुराहो (Khajuraho) मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) के छतरपुर (Chhatarpur) जिले में स्थित है। यह उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झाँसी (Jhansi) से 175 किलोमीटर दक्षिण की तरफ स्थित है। खजुराहो (Khajuraho) को कई नामों से जाना जाता है। पहले के समय में यहाँ बहुत से खजूर के वृक्ष थे। इसी कारण से इसका नाम खजुराहो (Khajuraho) पड़ा।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार हिंदू और जैन मंदिरों के इन समूहों को पूरी तरह आकार लेने में लगभग 100 वर्षों का समय लगा था। 12 वीं शताब्दी से खजुराहो (Khajuraho) में लगभग 85 मंदिर हैं जो 20 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए हैं। लेकिन अब कुछ ही मंदिर बचे हुए हैं जो अब 6 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए हैं।
पूरे मंदिर परिसर को तीन भागों पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी में विभाजित किया गया है। पश्चिमी समूह में अधिकांश मंदिर हैं, पूर्वी में नक्काशीदार जैन मंदिर हैं जबकि दक्षिणी समूह में केवल कुछ मंदिर हैं। 


पूर्वी समूह के मंदिरों में जैन मंदिर चंदेल शासन (Chandel Dynasty) के दौरान क्षेत्र में फलते-फूलते जैन धर्म के लिए बनाए गए थे। पश्चिमी और दक्षिणी भाग के मंदिर विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं को समर्पित हैं। इनमें से आठ मंदिर विष्णु को समर्पित हैं, छह शिव को, और एक गणेश और सूर्य को जबकि तीन जैन तीर्थंकरों को समर्पित हैं। यहाँ बने हुए सभी मन्दिरों में 107 फुट ऊंचा कंदरिया महादेव मंदिर (Kandariya Mahadev Mandir)  सबसे भव्य और महत्वपूर्ण मन्दिर है।
चंदेल वंश (Chandela Dynasty) के कार्यकाल में खजुराहो के इन मंदिरों (Khajuraho Temples) का निर्माण हुआ। राजा चन्द्रवर्मन (King Chandravarman) ने चंदेल वंश (Chandela Dynasty) और खजुराहो (Khajuraho) की स्थापना की थी। मध्यकाल के समय राजा चन्द्रवर्मन ने राज्य किया और कुछ समय बाद उनके शासन को बुंदेलखंड (Bundelkhand) नाम दे दिया गया और तब से ही खजुराहो मंदिरों (Khajuraho Temples) का निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ।
यह कार्य 950 ईस्वी से 1050 ईस्वी तक लगभग 100 वर्षों तक चला। इसके पश्चात चन्देलों (Chandela Dynasty) ने अपनी राजधानी महोबा (Mahoba) बना ली। हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि चंदबरदाई (Chandbardayi) की रचना पृथ्वीराज रासो (Prithviraj Raso) में चन्देल राजाओं (Chandela Dynasty) का विस्तृत सन्दर्भ मिलता है। 
पृथ्वीराज रासो (Prithviraj Raso) के अनुसार चन्द्रवर्मन (Chandravarman) एक बहुत ही तेजस्वी राजा हुए। उनके असाधारण गुणों को देखकर उनकी माता ने चंद्रदेव की आराधना की। तब चंद्रदेव ने चन्द्रवर्मन को पारस पत्थर दिया और खजुराहो (Khajuraho) का राजा बना दिया। जिसके पश्चात चन्द्रवर्मन ने उस जगह को बहुत ही सुन्दर बनवाकर 85 मंदिरों का निर्माण करवाया और यज्ञ का आयोजन किया। तभी से खजुराहो के मंदिर (Khajuraho Temples) अद्वितीय स्थल बन गए।


खजुराहो के मंदिर (Khajuraho Temples) अपनी अद्दभुत कलाकृतियों तथा कामोत्तेजक मूर्तियों (Erotic Statues) के लिए विश्व प्रसिद्ध है। खजुराहो के मंदिर (Khajuraho Temples) में शिल्पकला का ऐसा प्रदर्शन किया गया है कि कोई भी व्यक्ति देख कर हैरान रह जायेगा की आखिर ऐसी शिल्पकला इस ढंग से कोई कैसे प्रदर्शित कर सकता है।
यहाँ की मूर्तियों में ही नहीं बल्कि पूरे मंदिर में कलात्मक कार्य देखने को मिलता है. खजुराहो के मंदिरो (Khajuraho Temples) के अंदर और बाहरी भागों पर करीब दस प्रतिशत कार्य कामोत्तेजक कलाकृतियों का किया गया है. मंदिरों की लम्बी लम्बी दीवारों पर भी छोटी छोटी कामोत्तेजक कलाकृतियां बनायीं गयी है.
खजुराहो के मंदिरों (Khajuraho Temples) की ख़ास बात यह है कि इन मूर्तिओं के द्वारा जो कामुक कला के आसन यहाँ दर्शाए गए हैं उन में स्त्री और पुरुषों की मूर्तियों के मुख पर एक अलौकिक आनंद दिखाई देता है और उनको देखकर किसी प्रकार की अश्लीलता का भाव नहीं आता. देखने में यह मंदिर और इनकी शिल्पकला और कामोत्तेजक मूर्ती कला इतनी भव्य और प्रभावशाली है कि खजुराहो के मंदिरों (Khajuraho Temples) को विश्व धरोहर (World Heritage) में शामिल किया गया है.
खजुराहो में मंदिरों (Khajuraho Temples) का बड़ा समूह है, जिसका भ्रमण करने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं। प्राचीन हिन्दू और जैन मंदिरों जैसे चौंसठ योगिनी मंदिर (Chaunsath Yogini Mandir), जावेरी मंदिर, देवी जगदम्‍बा मंदिर, विश्‍वनाथ मंदिर, कंदरिया महादेव मंदिर, लक्ष्‍मण मंदिर, कामदेव मंदिर, आदिनाथ मंदिर जैसे बहुत से मंदिर होने के कारण, इन मंदिरों को सन् 1986 ई. में खजुराहो स्मारक समूह (Khajuraho Group of Monuments) नाम से युनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) की सूची में शामिल किया गया है। इन्हें भारत के सात अजूबों (Seven Wonders of India) में भी स्थान दिया गया है।


अगर आप भी कहीं घूमने जाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो आपके लिए रहस्य और कल्पनाशीलता के लिए विख्यात खजुराहो (Khajuraho) एक बहुत ही अच्छा विकल्प हो सकता है। हमारा दावा है कि यहां पत्थरों पर बारीकी से उकेरी गई उत्कृष्ट कलाकृतियां और इनकी भव्यता आपको अवश्य सम्मोहित कर देंगी। 
खजुराहो कब और कैसे जायें?
Khajuraho Tour in hindi
वैसे तो खजुराहो (Khajuraho) जाने के लिए सर्दियों का सीजन सबसे बेहतर है लेकिन आप यहाँ अपनी सुविधानुसार कभी भी जा सकते हैं। खजुराहो मध्यप्रदेश के छतरपुर में स्थित है। यहाँ जाने के लिए झांसी या वाराणसी से ट्रेन द्वारा जा सकते हैं। इसके अलावा नई दिल्ली, मुम्बई, वाराणसी और भोपाल से हवाई जहाज द्वारा भी आप खजुराहो (Khajuraho) जा सकते हैं। 

खजुराहो में ठहरने के लिए होटल
Hotel Near Khajuraho Temple
खजुराहो (Khajuraho) में आपको ठहरने के लिए 5 स्टार से लेकर 2 स्टार तक होटल उपलब्ध है। यहाँ पर आपको 1500 रुपये से लेकर 5000 रुपये के बीच अच्छे फैमिली बेडरूम मिल जाएंगे। 
खजुराहो के आसपास घूमने लायक स्थान
Places Near Khajuraho Temple
खजुराहो के मन्दिरों (Khajuraho Temples) को देखने के बाद आप यहाँ से 30 किलोमीटर दूर स्थित पन्ना टाइगर पार्क (Panna Tiger Park) भी जा सकते हैं। यहाँ से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर पांडव फाल (Pandav Fall) भी है और लगभग 170 किलोमीटर दूर ओरछा का किला (Orchha Fort) है। आप इन जगहों पर भी घूमने जा सकते हैं। 
यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो नीचे दिए गए सोशल मीडिया शेयर बटन द्वारा इसे Share जरूर करें।

khajuraho temple history in hindi, hotel near khajuraho temple, history of khajuraho temple in hindi, khajuraho temple history hindi, where is khajuraho temple, khajuraho temple in hindi, 10 Lines on Khajuraho Temple  in Hindi For Class 1 To 3, 5 Lines on Khajuraho Temple  in Hindi For Class 1 To 3, Khajuraho Mandir Ka Rahasya, chhatarpur to khajuraho in hindi, khajuraho ki kamuk murti, khajuraho temple history hindi, khajuraho kaise jaye, khajuraho kaha hai, khajuraho kyo famous hai, khajuraho kaha par hai, खजुराहो की मूर्तियां, खजुराहो मंदिर का रहस्य, खजुराहो की मूर्तियों का रहस्य, खजुराहो कैसे जाएं

]]>
https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%96%e0%a4%9c%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a8.html/feed 0 158
महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन : जहाँ मिलती है पापों से मुक्ति https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%a8.html https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%a8.html#comments Fri, 13 May 2022 07:10:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2022/05/13/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%a8/ Read more

]]>

आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन (Mahakaleshwar Temple Ujjain) के बारे में।
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की धार्मिक राजधानी यानी अवंतिका, उज्जैयिनी समेत कई नामों से प्रसिद्ध शहर उज्जैन (Ujjain)। जहां भगवान शिव (Lord Shiva) के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है। शिप्रा नदी के तट पर बसा हुआ शहर अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। 
उज्जैन (Ujjain) को भगवान महाकाल की नगरी कहते हैं। शिव पुराण के अनुसार उज्जैन में बाबा महाकाल का मंदिर काफी प्राचीन है। इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के पालन करता नंद जी की 8 पीढ़ी पूर्व हुई थी। जैसा कि आप सभी जानते होंगे कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इस मंदिर में दक्षिण मुखी होकर विराजमान है।

महाकाल मंदिर के शिखर के ठीक ऊपर से कर्क रेखा (Cancer Line) गुजरी है। इसी वजह से इसे धरती का नाभि स्थल भी माना जाता है। उज्जैन के राजा प्रद्योत के काल से लेकर ईसवी पूर्व दूसरी शताब्दी तक महाकाल मंदिर के अवशेष प्राप्त होते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर से मिली जानकारी के अनुसार ईस्वी पूर्व छठी सदी में उज्जैन के राजा चंद्रप्रद्योत ने महाकाल परिसर की व्यवस्था के लिए अपने बेटे कुमार संभव को नियुक्त किया था।
आगे हम आपको बताएंगे कि महाकालेश्वर मंदिर की महिमा कितनी अपरंपार है और देश-विदेश से लोग इस मंदिर में दर्शन के लिए क्यों आते हैं? 
महाकालेश्वर मंदिर के निर्माण और स्थापना को लेकर भी बहुत सारी कहानियां प्रचलित हैं और इनका पुराणों तक में वर्णन है। 
पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि जब सृष्टि की रचना हो रही थी, उस समय सूर्य की 12 रश्मियां सबसे पहले धरती पर गिरीं और उन्हीं से धरती पर 12 ज्योतिर्लिंगों की स्थापना हुई। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भी उन्हीं सूर्य रश्मि से उत्पन्न हुआ एक ज्योतिर्लिंग है।
कहा जाता है कि उज्जैन की पूरी धरती ‘उसर’ यानी की उपजाऊ नहीं है और इसलिए इसे शमशान भूमि भी कहा जाता है। यहां स्थित महाकालेश्वर का मुख भी दक्षिण दिशा की ओर है, इसीलिए तंत्र मंत्र की क्रिया करने वाले लोग विशेष रूप से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। महाकाल के इस मंदिर में और भी बहुत सारे देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, जिसमें माता पार्वती और गणेश तथा कार्तिकेय भगवान का नाम आता है। इतना ही नहीं, महाकाल की नगरी उज्जैन में हर सिद्धि भगवान, काल भैरव भगवान, विक्रांत भैरव आदि देवताओं के भी मंदिर स्थापित हैं।  
महाकाल मंदिर के प्रांगण में एक कुंड बना हुआ है और कहा जाता है कि इस कुंड में स्नान करने के बाद मनुष्य के सारे पाप, दोष, संकट उसके ऊपर से हट जाते हैं। 
कब करें दर्शन? 
वैसे तो महाकाल के दर्शन आप 12 महीने कर सकते हैं, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा, बैशाख पूर्णिमा और दशहरे के अवसर पर यहां विशेष रूप से मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें भारी मात्रा में लोग शामिल होते हैं और बाबा भोलेनाथ के दर्शन के साथ ही मेले का आनंद लेते हैं।
क्यों कहते हैं ‘महाकाल’?
उज्जैन के इस ज्योतिर्लिंग को महाकाल भी कहा जाता है और इसके पीछे यह वजह है कि प्राचीन समय से ही उज्जैन में संपूर्ण विश्व के मानकों का निर्धारण किया जाता रहा है। इस कारण इस ज्योतिर्लिंग को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। 
तीन खंडों में विभाजित है ‘महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग’ 
जी हां! महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्वरूप तीन खंडों में विभाजित है, जिसमें सबसे निचले खंड में महाकालेश्वर स्थित हैं। बीच में यानी कि मध्य खंड में ‘ओमकारेश्वर’ भगवान की पूजा की जाती है। वहीं ऊपर के खंड में नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है। कहा जाता है कि नागचंद्रेश्वर शिवलिंग के दर्शन साल में एक बार ही किया जा सकता है, वह भी नाग पंचमी के अवसर पर। 

क्यों होती है भस्म आरती

शिवपुराण के अनुसार भस्म ही समस्त सृष्टि का सार है। एक दिन पूरी सृष्टि इसी राख के रूप में परिवर्तित हो जानी है। सृष्टि के सार भस्म को भगवान शिव सदैव धारण किए रहते हैं। इसका अर्थ है कि एक दिन यह संपूर्ण सृष्टि शिव में ही विलीन हो जाएगी। इस भस्म को तैयार करने के लिए कपिला गाय के गोबर से बने कंडे, शमी, पीपल, पलाश, बड़, अमलतास और बेर के वृक्ष की लकड़ियों को एक साथ जलाया जाता है। इस दौरान उचित मंत्रोच्चार भी किए जाते हैं। इन चीजों को जलाने पर जो भस्म प्राप्त होती है, उसे कपड़े से छान लिया जाता है। इस प्रकार एक लंबी प्रक्रिया से तैयार की गई भस्म को भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।

पापों से मिलेगी मुक्ति

ऐसी मान्यता है कि शिवजी को अर्पित की गई भस्म का तिलक लगाना चाहिए। जिस प्रकार भस्म से कई प्रकार की वस्तुएं शुद्ध व साफ की जाती हैं, उसी प्रकार भगवान शिव को अर्पित की गई भस्म का तिलक लगाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होगी। साथ ही, कई जन्मों के पापों से भी मुक्ति मिल जाएगी। महाकाल की पूजा में भस्‍म का व‌िशेष महत्व है और यही इनका सबसे प्रमुख प्रसाद है। ऐसी मान्यता है क‌ि श‌िव के ऊपर चढ़े भस्‍म का प्रसाद ग्रहण करने मात्र से सभी रोग दोष से सदा के लिए मुक्त‌ि म‌िलती है।


कैसे हुई ‘महाकालेश्वर’ मंदिर की स्थापना?
पुराणों में एक कहानी प्रचलित है जिसके अनुसार मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में जो तत्कालीन समय में अवंतिका नगरी के नाम से प्रसिद्ध था। धार्मिक कथाओं में कहा गया है कि अवंतिका यानी उज्जैन भगवान शिव को बहुत पसंद है। उज्जैन में शिव जी के कई प्रिय भक्त रहते थे। एक समय की बात है जब अवंतिका नगरी में एक ब्राह्मण परिवार रहा करता था। उस ब्राह्मण के चार पुत्र थे। दूषण नाम का राक्षस ने अवंतिका नगरी में आतंक मचा रखा था। वह राक्षस उज्जैन के सभी वासियों को परेशान करने लगा था। राक्षस के आतंक से बचने के लिए उस ब्राह्मण ने भगवान शिव की अर्चना की। ब्राह्मण की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव धरती फाड़ कर महाकाल के रूप में प्रकट हुए और उस राक्षस का वध करके उज्जैन की रक्षा की। उज्जैन के सभी भक्तों ने भगवान शिव से उसी स्थान पर हमेशा रहने की प्रार्थना की। भक्तों के प्रार्थना करने पर भगवान शिव अवंतिका में ही महाकाल ज्योतिर्लिंग के रूप में वहीं स्थापित हो गए।
उज्जैन में स्थित अन्य मन्दिर
उज्जैन में आपको महाकाल के दर्शन के साथ ही हर सिद्धि मंदिर भी देखने को मिलेगा, जिसे माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इसके अलावा यहां काल भैरव का विश्व प्रसिद्ध मंदिर भी है। कहा जाता है कि इस मंदिर में मूर्ति पर प्रसाद के रूप में शराब चढ़ाई जाती है। उज्जैन में ही आपको गोपाल मंदिर देखने को मिलेगा, जिसमें भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित है। यहीं पर आपको मंगलनाथ मंदिर के दर्शन होंगे और कहा जाता है कि मंगल मंदिर में आपके ऊपर अगर मंगल दोष है तो उसके नाश करने के उपाय किए जाते हैं।
अगर आप महाकाल के दर्शन के लिए जा रहे हैं तो सुबह होने वाली भस्म आरती जरूर देखें, क्योंकि इस मंदिर में महाकाल की आरती और श्रृंगार ताजे मुर्दे की भस्म से की जाती है। महाकाल के दर्शन के बाद जूना महाकाल का दर्शन करना आवश्यक बताया जाता है। 
उज्जैन के बाबा महाकाल के बारे में प्रचलित कुछ विशेष बातें 
1. ऐसी मान्यता है कि उज्जैन में कोई भी आदमी या औरत रात में नहीं रुक सकते, यदि उज्जैन में रुके तो उनकी मृत्यु निश्चित है, क्योंकि उज्जैन के राजा हैं महाकाल ! उज्जैन के राजा विक्रमादित्य भी कभी उज्जैन में रात को नहीं रुके।
2. महाकाल मंदिर के सामने से कोई बारात नहीं निकलती क्योंकि बाबा के सामने कोई घोड़े पर सवारी नहीं कर सकता ! 
3. कई लोगों ने मंदिर पर हमला करने की  सोची, वो दूसरे दिन फुटपाथ पर मरे पड़े मिले ! 
4. महाकाल की सुबह होने वाली भस्म आरती शमशान कि चिता की राख से की जाती है।

कैसे पहुंचे महाकाल मंदिर तक?
अगर आप महाकाल के दर्शन के लिए जा रहे हैं तो सबसे बड़ा नजदीकी शहर इंदौर है। आप यहां हवाई मार्ग या रेल मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। वहीं इंदौर सड़क मार्ग से संपूर्ण देश से जुड़ा हुआ है, तो आप सड़क मार्ग का प्रयोग कर भी आसानी से इंदौर पहुंच सकते हैं। इंदौर से उज्जैन की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है जिसे आप आसानी से किसी भी टैक्सी से तय कर पाएंगे।
महाकालेश्वर मन्दिर दर्शन, पूजन और आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग 
महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में दर्शन और आरती के लिए प्रशासन द्वारा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। आप मन्दिर की ऑफिसियल वेबसाइट
पर जाकर बुकिंग कर सकते हैं।

आपको यह लेख कैसा लगा Comment करके अवश्य बताएं। पसंद आये तो Share जरूर करें।
©SanjayRajput.com
history of mahakaleshwar temple ujjain in hindi, ujjain mahakaleshwar history in hindi, mahakaleshwar temple ujjain history in hindi, ujjain mahakaleshwar near airport, mahakaleshwar near airport, mahakaleshwar temple ujjain history hindi me, is mahakaleshwar temple ujjain open

]]>
https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%89%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%88%e0%a4%a8.html/feed 1 163
जानिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की वनवास यात्रा के गवाह बने प्रमुख स्थलों के बारे में https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae.html https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae.html#comments Tue, 03 May 2022 12:01:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2022/05/03/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae/ Read more

]]>

दोस्तों, आज हम आपको हिंदुओं के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की वनवास यात्रा के गवाह बने प्रमुख स्थलों के बारे में बताने जा रहे हैं। 
भारत का शायद ही कोई निवासी होगा जो भगवान राम के जीवन से अपरिचित हो। दरअसल मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का जीवन स्वयं में इतना महान रहा है कि अगर कभी आदर्श व्यक्तित्व का उदाहरण देना पड़े तो श्रीराम से ऊपर किसी का नाम नहीं आता। वहीं बात यदि उनके वनवास के दिनों की घटनाओं की करें तो वहां से भी हम बहुत कुछ जान-सीख सकते है। 
तो आईये आज हम आपको उन सभी पवित्र स्थानों के आत्मिक दर्शन करवाते हैं जहां जहां श्रीराम ने माता सीता एवं अपने अनुज लक्ष्मण के साथ वनवास का समय बिताया था। 
आईए जाने भारत में स्थित उन स्थानों एवं घटनाओं के बारे में जहां श्रीराम के पावन चरण पड़े थे।

केवट प्रसंग

वाल्मिकी रामायण के अनुसार अयोध्या का राजमहल त्यागने के बाद भगवान राम माता सीता, अनुज लक्ष्मण संग सर्वप्रथम अयोध्या से कुछ दूर स्थित मनसा नदी के समीप पहुंचे। वहां से गोमती नदी पार कर वे इलाहाबाद के समीप वे श्रंगवेरपुर गये जो राजा गुह का क्षेत्र था। जहां उनकी भेंट केवट से हुई जिसको उन्होंने गंगा पार करवाने को कहा था। वर्तमान में श्रंगवेरपुर सिगरौरी के नाम से जाना जाता है जो कि इलाहाबाद के समीप स्थित है। वहीं गंगा पार कर भगवान ने कुरई नामक स्थान में कुछ दिन विश्राम किया था। यहां एक छोटा मंदिर है जो उनके विश्रामस्थल के रूप में जाना जाता है।
चित्रकुट का घाट

प्रयाग स्थित बहुत से स्मारक उनके वहां व्यतीत किए दिनों के साक्ष्य है। इनमें वाल्मीकि आश्रम, माडंव्य आश्रम, भरतकूप आदि प्रमुख हैं  विद्वानों के अनुसार यही वह स्थान है जहां उनके अनुज भरत उन्हें मनाने के लिए आए थे और श्रीराम के मना करने के बाद उनकी चरण पादुकाओं को राजसिंहासन पर रखकर अयोध्या नगरी का भार संभाला था। क्योंकि तब दशरथ भी स्वर्ग सिधार चुके थे।
अत्रि ऋषि का आश्रम

वहां से प्रस्थान कर भगवान सतना मध्यप्रदेश पहुंचे। वहां उन्होंने अत्रि ऋषि के आश्रम में कुछ समय व्यतीत किया। अत्रि ऋषि वहां अपनी पत्नी, माता अनुसूइया के साथ निवास करते थे। अत्रि ऋषि, माता अनुसूइया एवं उनके भक्त सभी वन के राक्षसों से काफी भयभीत रहते थे। श्रीराम ने उनके भय को दूर करने के लिए सभी राक्षसों का वध कर दिया।


दंडकारयण वन

अत्रि ऋषि से आज्ञा लेकर भगवान ने आगे पड़ने वाले दंडकारयण ‘छतीसगढ़‘ के वनों में अपनी कुटिया बनाई। यहां के जंगल काफी घने हैं और आज भी यहां भगवान राम के निवास के चिन्ह मिल जाते हैं। मान्यता ये भी है कि इस वन का एक विशाल हिस्सा भगवान राम के नाना एवं कुछ रावण के मित्र राक्षस वाणसुर के राज्य में पड़ता था। यहां प्रभु ने लम्बा समय बिताया एवं नजदीक के कई क्षेत्रों का भी भ्रमण भी किया। पन्ना, रायपुर, बस्तर, जगदलपुर में बने कई स्मारक स्थल इसके प्रतीक हैं। वहीं शहडोल, अमरकंटक के समीप स्थित सीताकुंड भी बहुत प्रसिद्ध है। यहीं पास में सीता बेंगरा एवं लक्ष्मण बेंगरा नामक दो गुफाएं भी हैं।
पंचवटी में राम

दंडकारणय में कुछ वर्ष व्यतीत करने के बाद प्रभु गोदावरी नदी, ‘नासिक के समीप’ स्थित पंचवटी आ गए। कहते हैं कि यहीं लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पनखा की नाक काटी थी। इसके बाद यह स्थान नासिक के नाम से प्रसिद्ध हो गया। ‘संस्कृत में नाक को नासिक कहते हैं।‘ 
जबकि पंचवटी का नाम गोदावरी के तट पर लगाए गए पांच वृक्षों पीपल, बरगद, आवला, बेल तथा अशोक के नाम पर पड़ा। मान्यता है कि ये सभी वृक्ष राम- सीता, लक्ष्मण ने लगाए थे। राम-लक्ष्मण ने यहीं खर-दूषण साथ युद्ध किया था। साथ ही मारीच वध भी इसी क्षेत्र में हुआ था।
सीताहरण का स्थान

नासिक से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित ताकड़े गांव के बारे में मान्यता है कि इसी स्थान के समीप भगवान की कुटिया थी जहां से रावण ने माता सीता का हरण किया था। इसके पास ही जटायु एवं रावण के बीच युद्ध भी हुआ था एवं मृत्युपूर्व जटायु ने यहीं राम को सीताहरण के बारे में बताया था। यह स्थान सर्वतीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। वहीँ आंध्रप्रदेश के खम्मम के बारें में कई लोगों की मान्यता है कि राम-सीता की कुटिया यहां थी।
शबरी को दर्शन

जटायु के अंतिम सस्कार के बाद राम-लक्ष्मण सीता की खोज में ऋष्यमूक पर्वत की ओर गए। रास्ते में वे पम्पा नदी के समीप शबरी की कुटिया में पहुंचे। भगवान राम की शबरी से हुई भेंट से भला कौन परिचित नहीं है? पम्पा नदी केरल में है प्रसिद्द सबरीमला मंदिर इसके तट पर बना हुआ है।

हनुमान से भेंट

घने चंदन के वनों को पार करते हुए जब भगवान ऋष्यमूक पर्वत पर पहुंचे तब वहां उन्हें सीता के आभूषण मिले एवं हनुमान से भेंट हुई। यहीं समीप में उन्होंने बाली का वध किया था यह स्थान कर्णाटक के हम्मी, बैल्लारी क्षेत्र में स्थित है। पहाड़ के नीचे श्रीराम का एक मंदिर है एवं नजदीक स्थित पहाड़ के बारें मान्यता है कि वहां मतंग ऋषि का आश्रम था इसलिए पहाड़ का नाम मतंग पर्वत है।
सेना का गठन

हनुमान एवं सुग्रीव से मित्रता के बाद राम ने अपनी सेना का गठन किया एवं किष्किन्धा ‘कर्णाटक’ से प्रस्थान किया। मार्ग में कई वनों, नदियों को पार करते हुए वो रामेश्वरम पहुंचे। यहां उन्होंने युद्ध में विजय के लिए भगवान शिव की पूजा की। रामेश्वरम में तीन दिनों के प्रयास के बाद भगवान ने उस स्थान का पता लगवा लिया जहां से आसानी से लंका जाया जा सकता था। फिर अपनी सेना के वानर नल-नील की सहायता से उस स्थान पर रामसेतु का निर्माण करवाया।
नुवारा एलिया पर्वत श्रृंखला

मान्यताओं के अनुसार हनुमान द्वारा सर्वप्रथम लंका जाने के बाद जिस स्थान का ज्ञान हुआ वो लंका संमुद्र से घिरी नुवारा एलिया पर्वत श्रृंख्ला थी।  रावण की लंका यहीं पर बसी हुई थी। यहीं रावण के साम्राज्य को समाप्त कर राम ने 72 दिन चले युद्ध के बाद सीता को रावण की लंका से मुक्त कराया था।

ram 14 years vanvas route in hindi, ram vanvas in hindi, Holy Places of Shri Ram Vanvas, Places where Lord Rama visited during vanvas hindi, ayodhya to lanka these are some places where sri rama lived during vanvas, places where lord rama stayed during 14 years of exile, rama vanavasam place name, detailed map of 196 places visited by rama, at what age ram went to vanvas, ram 14 years vanvas route map, sri rama vanavasam route, why ram went to vanvas, Where did Lord Rama stayed during vanvas?, Where did ram go for exile?, Where did RAM stay during his exile to forest?, What are the places Rama walked according to Ramayana?, Which places of India had been traveled by Shree Ram, Ram, Ramayan, Vanvas, Shreeram, Shriram, Lord Ram, Prabhu Shriram, maryada purushottam shriram, prabhu shriram vanvas me kaha kaha gaye the, Sita, Lanka, Ravan, Ayodhya, ram vanvas story in hindi

]]>
https://sanjayrajput.com/2022/05/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%ae.html/feed 1 164
क्या वास्तव में राममंदिर की जमीन खरीदने में कोई घोटाला हुआ है? जानिए असली सच https://sanjayrajput.com/2021/06/ayodhya-mandir-samachar-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2021/06/ayodhya-mandir-samachar-in-hindi.html#respond Tue, 15 Jun 2021 12:50:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2021/06/15/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0/ Read more

]]>
अयोध्या राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) की जमीन को लेकर घोटाला हो गया मंदिर की दो करोड़ की जमीन 18 करोड़ में खरीदी गई। कितना बड़ा घोटाला हो गया, मोदी जी को जांच करानी चाहिए। ये वह लोग पूछ रहे हैं जो लोग अब तक यह कहते थे कि अयोध्या में मंदिर (Ayodhya Mandir) क्यों बन रहा है इसकी जगह अस्पताल और स्कूल क्यों नहीं बन रहा? वह मस्जिदों पर कभी नहीं पूछते कि वहां पर मस्जिद की जगह स्कूल और अस्पताल क्यों नहीं बनते?

तो चलिए मैं आपको आज बताने जा रहा हूं कि यह दो करोड़ के 18 करोड़ 5 मिनट के अंदर हो जाने का असली सच क्या है? साथ ही मैं आपको यह भी बताऊंगा कि उनके मन में मंदिर (Ayodhya Mandir) के लिए जो हमदर्दी आ रही है उसके पीछे की वजह क्या है? 
सबसे पहले हम आपको यह बता देते हैं कि  दावा क्या किया जा रहा है आम आदमी पार्टी (AAP) और सपा (SP) के द्वारा और किस तरह के घोटाले का आरोप लगाया जा रहा है उनके द्वारा?
दावा: अंसारी और अन्य ने 18 मार्च 2021 को कुसुम से जमीन खरीदी और 15 मिनट बाद ही राम मंदिर ट्रस्ट (Ayodhya Mandir) को बेच दी। जमीन की कीमत सिर्फ 15 मिनट में तेजी से कैसे बढ़ सकती है?


आम आदमी पार्टी के संजय सिंह कह रहे हैं कि बहुत बड़ा घोटाला हो गया, जो अयोध्या (Ayodhya Nagari) रेलवे स्टेशन के पास एक जमीन 2 करोड़ की थी उसको खरीदा गया 2 करोड़ रुपए में और 5 मिनट बाद उसको मंदिर के ट्रस्ट को ₹18 करोड़ में बेच दिया गया और 17 करोड़ों रुपए के आसपास ऑनलाइन ट्रांसफर किया गया। उनके कहने के हिसाब से बड़ा घोटाला हो गया। संजय सिंह ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके कहा है कि अयोध्या राम मन्दिर (Ayodhya Ram Mandir) के नाम पर बहुत बड़ा घोटाला किया गया है।
आइए जानने की कोशिश करते हैं कि वाकई सच्चाई क्या है? 
कोई भी जब इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और तथ्यों को देखेगा, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि ‘घोटाला’, जैसा कि AAP ने आरोप लगाया है, अस्तित्व में ही नहीं है। AAP द्वारा किए गए दावे, उसके बाद से उठे संदेह और मामले के तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर स्पष्टीकरण इस प्रकार हैं। 

इन आरोपों की जड़ इस तथ्य से उपजा है कि AAP द्वारा पेश किए गए दोनों दस्तावेज, कुसुम से अंसारी को जमीन की बिक्री और अंसारी के बीच मंदिर ट्रस्ट को बेचने के समझौते को एक ही दिन में निष्पादित किया गया था। AAP के अनुसार, चूंकि दोनों दस्तावेजों को एक ही दिन में निष्पादित किया गया था, 15 मिनट की अवधि में, पूरा लेनदेन एक ही दिन में हुआ, इसलिए, एक घोटाले की ओर कीमत 2 करोड़ रुपये से बढ़कर 18.5 करोड़ रुपये हो गई।
दोनों दस्तावेज़ एक ही दिन पंजीकृत किए गए थे, इसका मतलब यह नहीं है कि दोनों बिक्री की अवधारणा की गई थी और एक ही दिन में हुई थी। इस विशिष्ट मामले में, कुसुम पाठक द्वारा अंसारी और अन्य को जमीन बेचने का पहला समझौता 2019 में हुआ था। 17.09.2019 को, कुसुम ने अपनी जमीन को तत्कालीन प्रचलित बाजार दर 2 करोड़ रुपये पर अंसारी को बेचने पर सहमति व्यक्त की थी और उसी के लिए अंसारी से 50 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान प्राप्त किया था। समझौते को विधिवत पंजीकृत किया गया था। 

पंजीकृत समझौते के अनुसार, अंसारी को जमीन की खरीद के लिए कुसुम को शेष राशि 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए 3 साल की समय अवधि की अनुमति दी गई थी। 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान सितंबर 2022 तक किया जाना था। चूंकि एक अग्रिम भुगतान किया गया था और समझौता पंजीकृत किया गया था, कुसुम इस सौदे से पीछे नहीं हट सकती थी। क्योंकि 9 नवंबर 2019 के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या के फैसले के बाद जमीन की कीमतें बढ़ गईं। इसलिए उन्हें अपनी जमीन अंसारी को 2 करोड़ रुपये में ही बेचने के लिए बाध्य होना पड़ा। 

इसके बाद, जब ट्रस्ट ने 2021 में संपत्ति खरीदने का फैसला किया, तो उसने अंसारी से 2019 समझौते को बेचने के लिए कुसुम के साथ एक बिक्री विलेख निष्पादित करने का अनुरोध किया। नतीजतन, अंसारी और कुसुम ने 18.03.2021 को एक पंजीकृत बिक्री विलेख निष्पादित किया, जो 2019 को बेचने के समझौते को प्रभावी बनाता है।साथ ही अंसारी ने उसी दिन मंदिर ट्रस्ट के साथ बेचने का करार किया। बेचने का अनुबंध भी दर्ज किया गया था। 

यह एक स्थापित तथ्य है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम जन्मभूमि (Ram Janmbhumi) और यहां तक ​​कि अयोध्या (Ayodhya Nagari) के बाकी हिस्सों में जमीन की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। दिसंबर 2019 में ही, फोर्ब्स (Forbes) ने अयोध्या (Ayodhya Nagari) में प्रॉपर्टी की कीमतों में वृद्धि का विवरण देते हुए एक लेख प्रकाशित किया था। फोर्ब्स (Forbes) ने अपने लेख में एक प्रॉपर्टी डीलर को यह कहते हुए उद्धृत किया है कि “सुप्रीम कोर्ट द्वारा Ayodhya Ram Mandir पर अपना फैसला सुनाए जाने के बाद दरें छह गुना तक बढ़ गई हैं”। 
2019 में ही, प्रॉपर्टी डीलर ने कहा था, “प्रस्तावित राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) स्थल से 4 किमी के दायरे में, दरें 400 रुपये प्रति वर्ग फुट से तीन गुना होकर 1,200 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई हैं।” अगर फैसले के एक महीने के भीतर संपत्ति की दरें इतनी बढ़ जाती हैं ऐसे में 2 साल जब मंदिर का निर्माण चल रहा होता है, तो कोई भी यह निष्कर्ष निकाल सकता है कि भूमि की कीमत में 2 करोड़ रुपये से 18.5 करोड़ रुपये तक की वृद्धि अथाह नहीं है। 
यह भी ध्यान दिया जा सकता है कि सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण में भी सर्किल रेट से 4 गुना बिक्री का प्रावधान है। अब विचाराधीन संपत्ति के लिए सर्किल रेट आम आदमी पार्टी द्वारा दिखाए गए उक्त दस्तावेजों के अनुसार 5.79 करोड़। इस प्रकार, प्रचलित बाजार दर लगभग रु. 23 करोड़ हालांकि, टेंपल ट्रस्ट को संपत्ति का तीन गुना मूल्य मिला, जो कि मौजूदा बाजार मूल्य से भी कम है। 

असली सच तो ये है कि गड़बड़ घोटाला जमीन को लेकर नहीं हुआ, गड़बड़ घोटाला हुआ है नीयत को लेकर। इसलिए सबसे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस (Congress) की नीयत समझने की कोशिश करिए। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में चुनाव होने वाले है। गंगा में जो लाशें बहाई जाती है उसको भी कोरोना से जोड़ा जा रहा है। मोदी (PM Modi) योगी (CM Yogi) के बीच में कोई अंदरूनी युद्ध चल रहा है यह अफवाह भी इन दिनों खूब फैलाई जा रही है। 
सच तो ये है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस (Congress) ऐसा माहौल बनाएगी कि मुसलमानों के भरोसे यूपी में कुछ सीटें निकल जाएं। अभी दिग्विजय सिंह का एक बयान आया कि धारा 370 को फिर से कश्मीर में बहाल किया जाए। क्योंकि यह सब एक प्रोपगंडा के तहत किया जा रहा है। यूपी में चुनाव है इसलिए ये सारी चीजें फैलाई जा रही है। मुस्लिमों को फोकस किया जा रहा है। दिग्विजय सिंह बयान देते हैं कि 370 को वापस लाया जाए, ताकि मुसलमान वापस कांग्रेस में शिफ्ट हो। कांग्रेस की रणनीति है कि वह मुस्लिम वोटरों को कांग्रेस से जोड़ने के लिए अभियान चलाने जा रही है जिसके लिए वो मदरसों और मस्जिदों में बैठक करेंगे और जाकर मुस्लिम स्टूडेंट्स को मोटिवेट करने की कोशिश की जाएगी।

अरविंद केजरीवाल को यह समझ में आ रहा है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमान वोट लेने के लिए बहुत सारी पार्टियां हैं। जैसे समाजवादी पार्टी, बीएसपी, कांग्रेस। उनको यह पता है कि मुसलमान सिर्फ और सिर्फ वोट यह देखकर करता है कि कौन बीजेपी को हरा सकता है। उसको किसी पार्टी से कोई फर्क नहीं पड़ता है, वह बस यह देखता है कि कौन बीजेपी को हराएगा। वह एकजुट होकर उसी पार्टी को वोट करता है।
आम आदमी पार्टी को पता है कि वह यूपी में अकेले सरकार नहीं बना सकते। क्योंकि आम आदमी पार्टी को यहाँ मुसलमानों का वोट नहीं मिलेगा। इसलिए उनको समझ में आ गया है कि उधर से नहीं मिलेगा तो हिंदुओं को तोड़ो। हिंदू तो एकजुट होकर कभी वोट कर नहीं सकता, इसलिए उनको तोड़ो। उनके मन में बीजेपी के खिलाफ ये बात बैठाओ कि ये तो राम मन्दिर (Ayodhya Ram Mandir) के नाम पर भी घोटाला करते हैं।


इसीलिए हम आदमी पार्टी ने यह स्ट्रेटेजी बनाई है कि बीजेपी का हिंदू वोट काटना है तो राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) को लेकर भ्रम फैला दो कि ये तो मंदिर में भी घोटाला कर रहे हैं। इन्होंने श्री राम को भी नहीं छोड़ा, बताइए भगवान के नाम पर घोटाला। अगर कुछ हिंदुओं के मन में यह बात बैठ गई तो हिंदुओं का कुछ वोट हमारे पास आ जाएगा और यूपी में भी खेला चालू हो जाएगा। 
इसलिए, यह स्पष्ट है कि AAP और सपा द्वारा आरोपित कोई भी “घोटाला” वास्तव में मौजूद नहीं है। एक ऐसे विवाद को खड़ा करने का दुर्भावनापूर्ण इरादा जहां कोई तथ्य मौजूद नहीं है, इस तथ्य को स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि भारत में कई राजनीतिक दल केवल राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) के निर्माण में बाधाएं पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके लिए हिंदुओं ने सदियों से इंतजार किया है।
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभी ऐसी और बहुत सारी चीजें होंगी, क्योंकि अगले साल यूपी में चुनाव है इसलिए अभी सारी हदें पार कर दी जाएंगी।

Copyright ©2021. All Rights Reserved.

आपको ये सब भी पसंद आ सकता है👇👇

📌इम्युनिटी बढ़ाने और बीमारियों से बचने हेतु खाएं ये चीजें

📌ऐसे करें खुद को Google सर्च में Add

📌देश विरोधियों के मकड़जाल का भंडाफोड़

📌अश्लीलता परोसने वाले ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगना क्यों जरूरी है?

📌डॉक्टर्स क्यों करते हैं सिजेरियन आपरेशन?

📌क्या स्वदेशी कम्पनियों का विरोध करना देशद्रोह से कम है?

📌स्वदेशी आयुर्वेदिक कंपनियों का विरोध क्यों हो रहा है?

📌शेर सिंह राणा: कहानी एक वीर राजपूत की

📌ये है बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारतीय नागरिक बनने की कहानी

📌आखिर मोदी को इतनी नफरत का सामना क्यों करना पड़ रहा है?

📌सिनेमा, क्रिकेट और राजनीति ही हमारे देश के युवाओं के आदर्श क्यों हैं?

📌इतिहास की अनकही सत्य कहानियां

📌बॉलीवुड ने भ्रष्ट किया हमारा समाज, करें बहिष्कार

📌सुदर्शन न्यूज़ हिंदुस्तान में हिंदुत्व को सपोर्ट करने की सजा क्यों भुगत रहा है?

📌ये है बॉलीवुड पर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा

📌ऐसा देश जहां लोग करते हैं गुप्त दान


ayodhya, ayodhya mandir, ayodhya verdict, ayodhya ram mandir, ayodhya news, ayodhya temple, ayodhya ka ram mandir, ayodhya ram mandir history, अयोध्या मंदिर, ayodhya ram mandir news, ayodhya babri masjid, ayodhya hotel, ayodhya case, ayodhya nagari, ayodhya from lucknow, ayodhya samachar, ayodhya history

]]>
https://sanjayrajput.com/2021/06/ayodhya-mandir-samachar-in-hindi.html/feed 0 172