Crime News – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Sat, 23 Nov 2024 12:36:27 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg Crime News – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 क्या निहाल सिंह और विशाल सिंह की हत्या के तार आपस में जुड़े हैं? https://sanjayrajput.com/2024/11/are-the-murders-of-nihal-singh-and-vishal-singh-linked.html Sat, 23 Nov 2024 12:42:22 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=862 Read more

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देवरिया के निहाल सिंह और विशाल सिंह हत्याकांड की जांच जिस दिशा में जा रही है, उसे लेकर स्थानीय लोगों में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

विशाल सिंह के बेहद करीबी रहे एक मित्र ने बताया कि एक शिकायती पत्र पुलिस को मृतक निहाल सिंह के परिवार वालों ने दिया था। जिसमें हत्या का आरोपी आशीष पांडे, अनुराग गुप्ता और दीपक मिश्रा को बताया गया था। परिजनों के अनुसार इस हत्याकांड के तीन चश्मदीद गवाहों के नाम भी पुलिस को लिखित रूप में दिए गए थे, उनके नाम हैं अमित सिंह, सुनील यादव और शिवम् सिंह।

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विशाल के करीबी के अनुसार निहाल सिंह की हत्या के विरोध में विशाल सिंह न्याय की मांग कर रहे थे तभी उनकी भी हत्या हो गई। स्थानीय विधायक ने निहाल सिंह हत्याकांड पर आँखें बंद कर ली जबकि सजातीय मामला होता तो वे स्वयं पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए पूरी तरह सक्रिय रहते। विशाल सिंह ने स्थानीय विधायक के इस उपेक्षापूर्ण रवैए को लेकर सवाल भी खड़े किए थे और विरोध भी जताया था।

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विशाल सिंह के एक अन्य करीबी का कहना है कि न्याय के लिए लड़ने वाले विशाल सिंह की हत्या भाड़े के शूटरों ने की और हत्या में भाड़े पर आए कुछ दूसरे संप्रदाय के लोगों के नाम होने के कारण इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है और उन असली अपराधियों को बचाया जा रहा है जिन्होंने पहले निहाल सिंह की हत्या की और बाद में पैसे देकर विशाल सिंह को भी मरवा दिया। इन लोगों के अनुसार मुख्य आरोपी आशीष पांडे, अनुराग गुप्ता और दीपक मिश्रा हैं। इनका एनकाउंटर किया जाना चाहिए। जो दूसरे धर्म के लोग पकड़े गए हैं या जिनको आरोपी बताया जा रहा है वो सिर्फ भाड़े के लोग हैं। जान बूझकर इस हत्या की साजिश रचने वाले असली हत्यारों को बचाने के लिए उन्हें चर्चा से दूर रख मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

इन दोनों घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं मामले के सीएम योगी तक पहुंचने के कारण हत्या की इन दोनों घटनाओं का जल्द ही पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं करणी सेना भारत ने निहाल सिंह और विशाल सिंह की हत्या को लेकर आगामी 1 दिसंबर को देवरिया में एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संगठन द्वार पूरे देश के लोगों से 1 दिसंबर को देवरिया पहुंचने का आह्वान किया गया है।

*Disclaimer– यह लेख स्थानीय लोगों की बातचीत पर आधारित है। यह लेखक के निजी विचार नहीं है।

 

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रूह कंपा देगी ये ‘खूनी’ कहानी, प्रेमिका से शादी नहीं हुई तो मां-बाप, भाई को मार डाला https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8.html https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b0%e0%a5%82%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%96%e0%a5%82%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8.html#respond Wed, 10 Jul 2024 03:18:00 +0000 Read more

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उत्तर प्रदेश के Ghazipur जिले में तिहरे हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा मंगलवार को हुआ। घटना के बाद से ही सक्रिय हुई पुलिस ने छानबीन के दौरान कड़ी से कड़ी मिलाते हुए हत्याकांड का खुलासा करने में कामयाबी हासिल की।
चौंकाने वाली बात तो ये है कि मां-बाप और बड़े भाई की हत्या के बाद जो बेटा बिलखते हुए बता रहा था कि वह देर रात में आर्केस्ट्रा देखकर वापस लौटा तो घर के बाहर मां-बाप और अंदर भाई का खून से लथपथ शव पड़ा था वही बेटा हत्यारा निकला। 
आइए जानते हैं कि महज 16 वर्ष की उम्र में किशोर द्वारा परिवार का कत्ल करने की क्या वजह रही होगी? 
माता-पिता और बड़े भाई को मौत की नींद सुलाने वाले 16 साल के किशोर ने अपने प्यार की खातिर परिवार खत्म कर दिया। 
दरअसल, गांव की ही एक किशोरी से उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था। वह घरवालों से शादी के लिए बोल रहा था। वहीं लड़की के घरवाले भी शादी के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन दोनों की उम्र कम होने की वजह से लड़के के परिवार वाले शादी से इनकार कर रहे थे। इसी बात से किशोर नाराज चल रहा था। मां-बाप और भाई को तड़पा-तड़पाकर मारा।
उधर, रविवार की रात में गांव में मांगलिक कार्यक्रम के दौरान आर्केस्ट्रा आया था, जहां डीजे चल रहा था। इसी दौरान वहां से वापस लौटने के बाद मौका पाते ही किशोर ने वारदात को अंजाम दिया। 
खुरपी से उसने पहले चारपाई पर सो रही मां का गला काटा, फिर पिता का गला रेत दिया। इससे भी उसका मन नहीं भरा तो उसने घर के अंदर सो रहे बड़े भाई को भी गला रेतकर मौत के घाट उतार दिया। 
घटना के बाद किशोर खुद भागते हुए गांव में चल रहे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर डीजे बंद करवाया और घटना की जानकारी दी। 
पुलिस मौके पर पहुंची और छानबीन शुरू किया। आरोप लगा कि मृतक के छोटे बेटे के प्रेम प्रसंग में लड़की के घरवालों ने वारदात को अंजाम दिया है, लेकिन जब पुलिस जांच में जुटी तो कड़ी नहीं मिली। 
तीनों शवों का दाह संस्कार करने के बाद पुलिस ने परिवार में जिंदा बचे छोटे बेटे से पूछताछ की तो वह टूट गया और अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि घरवाले उसकी शादी नहीं करा रहे थे, इसी वजह से उसने पूरे परिवार को रास्ते से हटाने का प्लान बनाया।   
घटना इस प्रकार थी
Ghazipur जिले के नंदगंज थाना क्षेत्र के कुसुम्हीं कला (खिलवां) गांव में रविवार की रात 2 बजे पुलिस को सूचना मिली की तीन लोगों की हत्या हुई है। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तो पता चला कि पति-पत्नी घर के बाहर और बड़ा बेटा घर के अंदर सो रहे थे। जबकि छोटा बेटा गांव में आर्केस्ट्रा देखने के लिए गया था। जब वापस आया तो मां-बाप और भाई का शव पड़ा देख चीखने- पुकारने लगा। जिसके बाद ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
जिस समाज में एक 16 साल का किशोर प्रेमिका की खातिर अपने मां बाप और भाई को बेरहमी से मौत के घाट उतार देता है, वह समाज किस ओर जा रहा है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। 

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WhatsApp पर फर्जी कॉल से परेशान हैं, तो करें ये छोटा सा काम https://sanjayrajput.com/2024/04/whatsapp-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88.html https://sanjayrajput.com/2024/04/whatsapp-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88.html#respond Mon, 01 Apr 2024 12:51:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2024/04/01/whatsapp-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ab%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%88/ Read more

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sancharsaathi portal: आज के समय में WhatsApp एक जरूरी Social Media प्लेटफॉर्म बन चुका है।
 
WhatsApp ने हमारे कई तरह के कामों को बेहद आसान बना दिया है, हालांकि पिछले कुछ वक्त में इस ऐप में एक बड़ी समस्या भी देखने को मिली है। तेजी से बढ़ते इंटरनेट और स्मार्टफोन के इस्तेमाल के साथ साथ Fraud और Scam के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। Hackers और Cyber Criminals फ्रॉड के लिए अब WhatsApp का भी सहारा ले रहे हैं। 
पिछले कुछ समय में WhatsApp में फर्जी काल के जरिए ठगी के कई मामले सामने आए हैं जिन्होंने WhatsApp यूजर्स की सेफ्टी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 
अगर आपको भी WhatsApp पर किसी भी तरह के फर्जी कॉल (Spam Calls) आते हैं और आप इसको लेकर चिंतित हैं तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। 
अब आप आसानी से WhatsApp पर आने वाली Spam Call की शिकायत करके Caller को या फिर मैसेज करने वाले को सीधे जेल भेज सकते हैं। आइए बताते हैं कि इसके लिए आपको क्या करना है। 
ये सरकारी Portal करेगा आपकी मदद
WhatsApp पर कई बार Scammers और Cyber Criminals फर्जी काल और एसएमएस करते हैं और इससे कई बार लोग ठगी का शिकार भी हो जाते हैं। 
अब Social Media पर ऐसी समस्याओं से निपटने के लिए और आपकी मदद करने के लिए एक सरकारी Portal sancharsaathi portal आ चुका है।
 आपको बता दें कि टेलिकॉम डिपार्टमेंट ने अब Cyber Crime और Cyber Fraud से निपटने के लिए एक नया सरकारी पोर्टल sancharsaathi portal को शुरू कर दिया है। इस पोर्टल को विजिट करके आप Fraud Call या फिर फ्रॉड मैसेजेज की शिकायत कर सकते हैं। 
अगर आपको नहीं मालूम तो बता दें कि sancharsaathi portal एक ऐसा सरकारी पोर्टल है जिसमें आप अपने WhatsApp पर बैंक अकाउंट, केवाइसी अपडेट, पेमेंट ट्रांसफर, प्राइज विनर, गैस कनेक्शन, बिजली कनेक्शन, सैक्सटॉर्शन जैसे Spam से जुड़े Call या फिर मैसेज की Direct शिकायत कर सकते हैं। 
इस तरह करें ऑनलाइन शिकायत
WhatsApp पर आने वाले Fraud मैसेज या फिर Call की शिकायत के लिए आपको सबसे पहले sancharsaathi portal https://sancharsaathi.gov.in/ पर जाना होगा। 
sancharsaathi portal पर आपको Citizen Centric Services का ऑप्शन मिलेगा इस पर क्लिक करें। 
अब आपको नेक्स्ट स्टेप में Report Suspected Fraud Communication पर क्लिक करना होगा।
अब आपको Continue For Reporting पर क्लिक करना होगा जिसके बाद एक Form मिलेगा। इस Form में उस Fake Call या फिर WhatsApp मैसेज के बारे में डिटेल से जानकारी देना होगा। 
अब आपको एक Fraud List मिलेगी जिसमें आपको अपनी शिकायत चुननी होगी। 
नेक्स्ट स्टेप में आपको Fake Call या फिर मैसेज का स्क्रीनशॉट upload करना होगा। शिकायत की डिटेल देने के बाद आपको अपना Mobile No. और नाम भी देना पड़ेगा। 
अब आपको आखिरी step में एक Captcha Code Fill करना होगा जिसके बाद आपको OTP सेंड किया जाएगा। OTP Verification के बाद आपको फॉर्म Submit कर देना है।

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देवरिया हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8.html https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8.html#respond Tue, 03 Oct 2023 09:00:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/10/03/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8/ Read more

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Deoria Murder Case: सोमवार 2 अक्टूबर की सुबह जब सारा देश अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था तभी देवरिया के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भूमाफिया प्रेमचंद्र यादव की हत्या से गुस्साए परिजनों ने शक के आधार पर सत्यप्रकाश दुबे के घर पर धावा बोल सिर्फ 15-20 मिनट में पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया. वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलवार मौके से फरार हो गए. 
बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश दुबे के भाई साधू दूबे के हिस्से की करीब 10 बीघे जमीन प्रेमचंद्र यादव ने धोखे से अपने नाम करा ली थी. प्रेमचंद्र अपनी दबंगई के बल पर उस जमीन को जोत-बो भी रहा था. इसी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था. सत्यप्रकाश ने इस मामले में कोर्ट केस भी कर रखा था जिसकी 4 अक्टूबर 2023 को सुनवाई थी. साल भर पहले विवादित जमीन की पुलिस और राजस्व टीम की मौजूदगी में पैमाइश भी हुई थी. लेकिन कोई फैसला न होने से विवाद नहीं रुका. 

छह लोगों के हत्याकांड की जड़ सत्यप्रकाश दुबे का भाई साधु दुबे पूर्व जिला पंचायत सदस्य दबंग प्रेमचंद यादव के कब्जे में रहता था। भाई सत्य प्रकाश दुबे से अनबन होने के बाद एक दशक पहले साधु दुबे गांव के दबंग प्रेमचंद से जुड़ गया और फिर उसी के यहां भोजन करने के साथ ही रहने लगा। इसी दौरान धोखे से प्रेमचंद व उसके भाई रामजी यादव ने उसकी भूमि अपने नाम करा ली। इसके बाद से ही साधु दुबे प्रेमचंद के कब्जे में रहता था।
बीते दिन सत्यप्रकाश और प्रेमचंद्र के बीच फिर से कहासुनी हो गई. सोमवार सुबह छह बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव दूसरे पक्ष के सत्यप्रकाश दुबे के दरवाजे पर बाइक से पहुंचा। इसके कुछ देर बाद ही संदिग्ध रूप से सत्यप्रकाश दुबे के घर से 20 मीटर की दूरी पर प्रेमचंद्र यादव की लाश मिली.
हालांकि अभी तक ये बात साबित नहीं हो पाई है कि प्रेमचंद यादव की हत्या किसने की थी और न ही गांव के किसी ने सत्यप्रकाश दुबे या उसके परिवार को प्रेमचंद्र यादव की हत्या करते देखा है। 
लेकिन हत्या की खबर सुन प्रेमचंद्र यादव के परिजनों का गुस्सा भड़क उठा और प्रेमचंद्र यादव के भाई रामजी यादव ने करीब 77 की संख्या (पुलिस एफआईआर के मुताबिक) में अपनी बिरादरी के लोगों को लेकर सिर्फ शक के आधार पर सत्यप्रकाश के घर पर हमला कर दिया. वे लोग हाथ में लाठी-डंडा, धारदार हथियार और बंदूक लिए लेड़हा टोला में दाखिल हुए और घर में घुसकर सत्यप्रकाश दुबे और उनके परिवार की महिलाओं और बच्चों सहित 5 लोगों की हत्या कर दी. 
करीब 77 की संख्या में हमलावरों ने जिसे, जहां पाया, उसी हालत में मारते हुए घर तोड़ने लगे। हमलावरों में इतना गुस्सा था कि उन्होंने छोटे बच्चों तक को नहीं बख्शा। बरामदे में सत्यप्रकाश और किरन की हत्या के बाद हमलावार टीनशेड में छिपे उनके बच्चों को बाहर खींच लाए और उनकी हत्या कर दी। घटना में 8 वर्षीय अनमोल को भी बुरी तरह मारा काटा गया और उसे हमलावरों ने मरा समझकर छोड़ दिया जिसे बाद में गंभीर अवस्था में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
हमलावरों की नृशंसता और आक्रोश देखकर आस पड़ोस के लोग भी अपने घरों में छिप गए। पांच लोगों की हत्या के बाद आरोपी गांव के दूसरे छोर से भाग निकले। 
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इस घटना में मृत प्रेमचंद्र यादव एक भूमाफिया था तथा उसके ऊपर कई आपराधिक मुकदमें भी दर्ज थे। प्रेमचंद यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उसे सफलता भी मिली थी। देवरिया में उसकी दबंगई चलती थी।
प्रेमचंद यादव ने पहली बार राजनीति के क्षेत्र में अपनी मां चिंता देवी को वर्ष 2010 में ग्राम प्रधान पद पर उतारा, जिसमें सफलता मिलने के बाद वह काफी उत्साहित था। उनका कार्यकाल वर्ष 2015 तक था। उसके बाद वर्ष 2015 में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में प्रेमचंद यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर भलुअनी पश्चिम क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सफलता भी मिली।
स्थानीय लोगों ने बताया है कि प्रेमचंद्र यादव ने ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा करके एक आलीशान मकान बनवा रखा है।
गांव के ही कुछ लोगों ने यह भी बताया कि सत्यप्रकाश दुबे के घर पर अपने दल बल के साथ हमला करने वाला मृतक भूमाफिया प्रेमचंद्र यादव का भाई रामजी यादव भी मनबढ़ किस्म का व्यक्ति है जो अपने गांव तथा आसपास के गांवों के अपनी बिरादरी के लोगों के साथ गुट बनाकर अक्सर गुंडई किया करता है।
इस जघन्य हत्याकांड को लेकर देवरिया से बीजेपी विधायक शलभमणि त्रिपाठी बेहद अक्रोशित हैं. उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि इस मामले में दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी की वो नजीर बनेगी. उन्होंने लापरवाही बरतने वाले पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी कहा कि वह अपनी करनी का फल भुगतने को तैयार रहें. 
उन्होंने देवरिया हत्याकांड पर अपने फेसबुक पेज पर लिखा- “माननीय मुख्यमंत्री जी को संपूर्ण घटनाक्रम से विस्तार से अवगत करा दिया गया है. वे स्वयं इस घटना पर नज़र रखे हुए हैं. प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, स्पेशल DG प्रशांत कुमार, ADG गोरखपुर अखिल कुमार के भी निरंतर संपर्क में हूं. भूमाफियाओं एवं अपराधियों के विरूद्ध निर्णायक जंग लड़ी जाएगी. वे बचेंगे नहीं. चाहे उन्हें किसी की भी सियासी सरपरस्ती हासिल हो.”
इसके साथ बीजेपी विधायक ने लिखा- “देवरिया के फ़तेहपुर में ग्राम सभा की ज़मीन पर कब्जा करके कैसे आलीशान मकान बना और यह अवैध मकान किस प्रकार अब तक बचा रहा? इसमें जांच के साथ ही साथ प्रभावी कार्रवाई होगी. ऐसी कार्रवाई जो नजीर बने. यह घटना कतई स्वीकार्य नहीं है.” 
शलभमणि त्रिपाठी आगे लिखते हैं- “बेबस लोगों, बेटियों और मासूम बच्चों पर हमला करने वाले भूमाफ़िया कायर और नपुंसक हैं. उनका उचित और कानूनी इलाज होकर रहेगा. साथ ही इस मामले में दोषी महाभ्रष्ट राजस्व अधिकारी/कर्मचारी एवं प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी करनी का फल भुगतने को तैयार रहें.”
दुबे परिवार की जीवित बची विवाहित बेटी शोभिता दुबे जो घटना के वक्त अपने ससुराल में थी, उसने एक निजी चैनल को रोते हुए बताया कि प्रेम यादव के परिवार के लोगों की गुंडागर्दी से उनका परिवार लंबे समय से परेशान था और ये लोग पहले भी कई बार दूबे परिवार को जान से मारने की कोशिश कर चुके थे, जिसकी मुख्यमंत्री पोर्टल पर कई बार शिकायत की जा चुकी थी. अगर चेक किया जाए तो हजार से ज्यादा एप्लीकेशन पड़ी मिलेगी. जिला प्रशासन से भी शिकायत की गई थी लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की लापरवाही तथा विपक्षी प्रेम यादव की दबंगई और प्रभाव के कारण कभी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
एक ब्राह्मण परिवार के 5 सदस्यों को करीब 77 लोग एकजुट होकर काट देते हैं. हमलावर यादव समुदाय से आते हैं. इस हत्याकांड को सामान्य जमीनी विवाद का परिणाम मान लेना शायद एक बड़ी भूल होगी. जमीन विवाद में एक हत्या के बदले एक परिवार आरोपी परिवार के सभी लोगों को गोलियों से भून देता या तलवारों से काट डालता तो बात समझ में आती कि ये बदला लेने के लिए किया गया कृत्य है. पर यहां तो करीब 77 लोगों की भीड़ (पुलिस एफआईआर में 27 नामजद आरोपी और 50 अज्ञात) एक परिवार को, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी हैं, को पीट-पीट कर मार डालती है. 
मृतक प्रेम यादव का परिवार 77 लोगों का परिवार नहीं था. इसे परिवार कहकर केस को हल्का किया जा रहा है. ये जीता जागता नफरत का एक नमूना है. जिसमें एक जाति दूसरी जाति के लोगों से इतना नफरत करती है कि उसे हर हाल में मिटा देना चाहती है.
जरा सोचिए गांव में बसे एक ब्राह्णण परिवार को यादव जाति के कुछ लोग एकजुट होकर मार डालते हैं, ये बदला जरूर है पर एक परिवार का दूसरे परिवार से नहीं है. ये बदला है एक जाति का दूसरी जाति से. ये जातीय संघर्ष है और ये देन है हमारे देश में जाति की राजनीति करने वाले नेताओं की. 
जातिवादी नेताओं ने हमारे समाज में जातिवाद का जहर बो कर रख दिया है। अपने राजनीतिक लाभ और वोट के लिए समाज को जातीय संघर्ष की आग में झोंक दिया गया है। 
सोचने वाली बात है कि बिहार में जाति आधारित जनगणना कराने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? 
ऐसी घटनाओं से गुड गवर्नेंस की दुहाई देने वाली योगी मोदी सरकार पर भी सवाल उठता है। क्योंकि योगी सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद आज भी गुंडों और भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं, की वो खुलेआम महिलाओं और छोटे बच्चों तक को काट रहे हैं।
ऐसी घटनाओं के पीछे जो भी लोग हैं उनका फैसला ऑन द स्पॉट एनकाउंटर करके होना चाहिए और ऐसे नृशंस हत्यारों के घरों पर बुलडोजर जरूर चलाया जाना चाहिए।
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वो दौर जब गोरखपुर था ‘अपराधों की राजधानी’ https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html#respond Tue, 26 May 2020 12:26:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2020/05/26/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7/ Read more

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योगी आदित्यनाथ का शहर गोरखपुर आज भले ही विकास का रोल मॉडल बनकर सीएम सिटी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है मगर 1970 के दशक में जब पूरे देश में जेपी आंदोलन जोरों पर था उन दिनों गोरखपुर सिर्फ जातीय संघर्षों, वर्चस्व की लड़ाई और गैंगवार के लिए ही बदनाम हुआ करता था। 
कई नए माफियाओं के उदय की भूमि होने के चलते गोरखपुर को ‘Crime Capital of North India’ कहा जाने लगा था। यहां की छात्र राजनीति भी दो गुटों में बँटी हुई थी और गोरखपुर यूनिवर्सिटी में ब्राह्मण और क्षत्रिय दो गुट हुआ करते थे। इन दोनों गुटों की आपसी रंजिश और मुठभेड़ से गोरखपुर में रोज अपराध की एक नई कहानी लिखी जाती थी।

उस वक्त जब देश भर के छात्र नेता देश को बदलने के जुनून में सड़कों पर आंदोलन करने में जुटे थे। वहीं गोरखपुर के छात्र नेता देशी तमंचे लहराते हुए अपने वर्चस्व को कायम करने में जुटे हुए थे। उस समय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दो छात्र नेता हुआ करते थे, ठाकुर गुट के रविन्द्र सिंह और ब्राह्मण गुट के हरिशंकर तिवारी। इन दोनों छात्र नेताओं में हमेशा वर्चस्व को लेकर लड़ाई ठनी रहती थी। वो एक ऐसा दौर था जब गोरखपुर यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र न होकर ब्राह्मण-ठाकुर जातीय संघर्ष का अखाड़ा बनकर रह गया था।

इन दोनों गुटों में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अपना-अपना वर्चस्व कायम करने हेतु आए दिन असलहे लहराना, मारपीट और बवाल होते रहते थे। इस बीच ठाकुरों के नेता रविन्द्र सिंह को वीरेंद्र प्रताप शाही नाम का एक नया और तेज तर्रार लड़का मिला जो कि उनकी ही जाति से था। 


यह वो दौर था जब जाति को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती थी। जिले में ब्राह्मण और ठाकुर दोनों गुट अपना-अपना वर्चस्व कायम करने में जुटे रहते थे। और इन दोनों गुटों की आपसी वर्चस्व की लड़ाई ने गोरखपुर का अमन चैन पूरी तरह छीन लिया था। उन दिनों आये दिन गोरखपुर की सड़कों पर मर्डर, फिरौती, रंगबाजी, डकैती का ही तांडव हुआ करता था। 


उन दिनों गोरखपुर के हालात ऐसे हुआ करते थे कि इन दोनों गुटों के लोग दुकान से सामान लेते और दुकानदार द्वारा पैसे मांगने पर गोली मार देते थे। गुंडई का आलम यह था कि यहाँ लोग पेट्रोल भराकर पैसे तक नहीं देते थे और पैसे मांगने पर गोली मार देते थे। ऐसी घटनाएं आम होने लगी थी। फिर इन दोनों गुटों को वर्चस्व के साथ-साथ पैसे की अहमियत भी समझ में आने लगी थी। उसी दौर में रेलवे के स्क्रैप की ठेकेदारी भी मिलने लगी थी और दोनों गुट अब अपने-अपने वर्चस्व का इस्तेमाल करके ठेकेदारी और अन्य कामों में लग गए। 
1980 में हरिशंकर तिवारी ने रेलवे के ठेके में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी।  हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही दोनों ने अपने-अपने गुट को मजबूत करना शुरू कर दिया था। इन दोनों ने अपने-अपनेे संगठित गैंग भी बना लिए थे। उन्हीं दिनों कई बार ऐसा हुआ जब दोनों माफियाओं के बीच जारी वर्चस्व की जंग में पूरा गोरखपुर शहर थर्रा गया था। 
तब पूर्वांचल में रोज कहीं न कहीं गैंगवार में चली गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती रहती थी। आए दिन दोनों गुटों के कुछ लोग मारे जाते थे। साथ ही कई निर्दोष लोग भी मरते थे। इसी दौरान ब्राह्मण-ठाकुर जातीय संघर्ष में लखनऊ और गोरखपुर विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके युवा विधायक रविंद्र सिंह की भी हत्या हो गई।

बताया जाता हैं कि इस घटना के बाद ठाकुरों के गुट ने वीरेंद्र प्रताप शाही को अपना नेता मान लिया। कुछ ही दिनों में वीरेंद्र शाही की तूती बोलने लगी और उन्हें ‘शेरे-पूर्वांचल’ तक कहा जाने लगा। अब गोरखपुर माफियाराज से पूरी तरह रूबरू हो चुका था और सरकारी सिस्टम यहाँ पूरी तरह फेल हो चुका था। इन दोनों गुटों की गैंगवार के चलते गोरखपुर ही नहीं आसपास के जिलों की कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह फेल हो गयी थी।
फिर जब दोनों गुटों ने ठेके आदि से खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बना लिया तब पूर्वांचल से निकलकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दोनों गुटों ने अपनी-अपनी एक समानांतर सरकार बना ली। इन लोगों के यहाँ अपनी अपनी बिरादरी के जनता दरबार भी लगने लगे। जमीनी विवाद से लेकर हर तरह के मुद्दे इनके दरबार में आने लगे थे। लोग अपने विवादों के निपटारे के लिए कोर्ट जाने से बेहतर इन माफियाओं के दरबार को समझने लगे थे।


इसी बीच 1985 में गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली। उनके लिए प्रदेश संभालने से महत्वपूर्ण माफियाओं को संभालना चुनौती थी। हर एक की निगाह वीर बहादुर सिंह पर ही थी। उन्होेंने इसके लिए गैंगेस्टर एक्ट लाया। लेकिन इन लोगों को सामाजिक स्वीकार्यता मिल चुकी थी। राजनीति में भी इनकी बराबर भागीदारी और स्वीकार्यता मिल चुकी थी। जानकार बताते हैं कि इनकी स्वीकार्यता का ही नतीजा है कि पंडित हरिशंकर तिवारी छह बार तो वीरेंद्र प्रताप शाही दो बार विधायक चुने गए। कानून व्यवस्था को दरबारी बनाने के लिए इन पर अंगुलियां उठी तो न जाने कितने इनके दर पर आकर न्याय पाकर दुआ देते हुए लौटे भी। अलग-अलग क्षेत्रों में दबंग छवि वालों को जनता अपना रहनुमा चुनने लगी। पूर्व विधायक अंबिका सिंह, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, पूर्व सांसद ओम प्रकाश पासवान, पूर्व सांसद बालेश्वर यादव आदि का उनके क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ने के साथ जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों के रहनुमा बन चुके थे।

राजनीति से अपराधियों के गठजोड़ की अपने देश में पुरानी परंपरा है। कहा जाता है किं यदि सौ गुनाह करने के बाद भी कानून की नजरों से बचना हो तो राजनीति का चोला ओढ़ लो। इसी फॉर्मूले को अपनाकर इन दोनों गुटों के माफियाओं ने भी बाद में पैसे के बल पर राजनीति की चादर ओढ़ ली और माफिया से माननीय बन गए। 


फिर 90 के दशक में गोरखपुर के गांव मामखोर के एक शिक्षक का लड़का श्रीप्रकाश शुक्ला सबको पीछे छोड़ते हुए जरायम की दुनिया में तेजी से उभरा। अपनी बहन को छेड़े जाने पर उसने पहली हत्या की और उसके बाद हरिशंकर तिवारी ने उसे बैंकॉक भेजकर उसे पुलिस के हाथों बचाया। अपनी बिरादरी के होने के नाते हरिशंकर तिवारी ने उसे गुनाह की दुनिया में अपने फायदे के लिए एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया। लेकिन महत्वाकांशी श्रीप्रकाश शुक्ला ने गुनाह की दुनिया में तिवारी से बगावत करते हुए AK-47 जैसे असलहों से लैस अपनी अलग गैंग बनाकर पूर्वांचल से बिहार, दिल्ली, ग़ाज़ियाबाद तक अपने खौफ का साम्राज्य फैलाना शुरू कर दिया। अब बिहार के माफिया डॉन और रेलवे के ठेकेदार सूरजभान का भी हाथ श्रीप्रकाश के सिर पर था। 1997 में श्रीप्रकाश शुक्ला ने वीरेंद्र शाही की लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी। उसका अगला टारगेट माफिया से माननीय बना हरिशंकर तिवारी ही था परन्तु इस बीच उसने सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी ले ली जिसके बाद यूपी एसटीएफ (STF) ने 1998 में श्रीप्रकाश शुक्ला को लखनऊ में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया। 

वीरेंद्र शाही की हत्या के बाद छोटे-छोटे गिरोह ने अपनी धमक बनानी शुरू कर दी। कुछ ने जरायम की दुनिया में हनक दिखाने के साथ राजनीति में भी कदम रखा। जो सिलसिला आज भी कायम है। कई आज की तारीख में सत्ता के लाभ वाले पद को भी सुशोभित कर रहे हैं।  
क्योंकि हमारे समाज में गुंडों को पूजने का पुराना रिवाज है इसलिए यहाँ लोग जेल से भी चुनाव लड़कर जीत जाते हैं। जब भी कोई माफिया, बाहुबली पैसों के बल पर जोर-शोर से लाव-लश्कर के साथ चुनाव लड़ता है तो वो बम्पर वोटों से जीत हासिल करता है। वहीं जब कोई साधारण और बेदाग छवि वाला आदमी बिना लाव-लश्कर के चुनाव लड़ता है तो उसकी जमानत तक जब्त हो जा्ती है।


योगी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद पूरे प्रदेश से गुंडाराज खत्म हुआ है और प्रदेश के साथ-साथ गोरखपुर में भी चलने वाले छोटे-बड़े गैंग या तो खत्म हो गए हैं या सभी अपराधी और गुंडे भूमिगत हो गए हैं। पहले जहाँ गोरखपुर में आये दिन सरेआम फिरौती, रंगबाजी और लूटपाट आम बात थी वहीं अब कानून व्यवस्था फिर से कायम हुई है। 

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