Deoria Murder – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Sat, 23 Nov 2024 12:36:27 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg Deoria Murder – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 क्या निहाल सिंह और विशाल सिंह की हत्या के तार आपस में जुड़े हैं? https://sanjayrajput.com/2024/11/are-the-murders-of-nihal-singh-and-vishal-singh-linked.html Sat, 23 Nov 2024 12:42:22 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=862 Read more

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देवरिया के निहाल सिंह और विशाल सिंह हत्याकांड की जांच जिस दिशा में जा रही है, उसे लेकर स्थानीय लोगों में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। 

विशाल सिंह के बेहद करीबी रहे एक मित्र ने बताया कि एक शिकायती पत्र पुलिस को मृतक निहाल सिंह के परिवार वालों ने दिया था। जिसमें हत्या का आरोपी आशीष पांडे, अनुराग गुप्ता और दीपक मिश्रा को बताया गया था। परिजनों के अनुसार इस हत्याकांड के तीन चश्मदीद गवाहों के नाम भी पुलिस को लिखित रूप में दिए गए थे, उनके नाम हैं अमित सिंह, सुनील यादव और शिवम् सिंह।

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विशाल के करीबी के अनुसार निहाल सिंह की हत्या के विरोध में विशाल सिंह न्याय की मांग कर रहे थे तभी उनकी भी हत्या हो गई। स्थानीय विधायक ने निहाल सिंह हत्याकांड पर आँखें बंद कर ली जबकि सजातीय मामला होता तो वे स्वयं पीड़ितों को न्याय दिलवाने के लिए पूरी तरह सक्रिय रहते। विशाल सिंह ने स्थानीय विधायक के इस उपेक्षापूर्ण रवैए को लेकर सवाल भी खड़े किए थे और विरोध भी जताया था।

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विशाल सिंह के एक अन्य करीबी का कहना है कि न्याय के लिए लड़ने वाले विशाल सिंह की हत्या भाड़े के शूटरों ने की और हत्या में भाड़े पर आए कुछ दूसरे संप्रदाय के लोगों के नाम होने के कारण इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है और उन असली अपराधियों को बचाया जा रहा है जिन्होंने पहले निहाल सिंह की हत्या की और बाद में पैसे देकर विशाल सिंह को भी मरवा दिया। इन लोगों के अनुसार मुख्य आरोपी आशीष पांडे, अनुराग गुप्ता और दीपक मिश्रा हैं। इनका एनकाउंटर किया जाना चाहिए। जो दूसरे धर्म के लोग पकड़े गए हैं या जिनको आरोपी बताया जा रहा है वो सिर्फ भाड़े के लोग हैं। जान बूझकर इस हत्या की साजिश रचने वाले असली हत्यारों को बचाने के लिए उन्हें चर्चा से दूर रख मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।

इन दोनों घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। वहीं मामले के सीएम योगी तक पहुंचने के कारण हत्या की इन दोनों घटनाओं का जल्द ही पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है।

वहीं करणी सेना भारत ने निहाल सिंह और विशाल सिंह की हत्या को लेकर आगामी 1 दिसंबर को देवरिया में एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संगठन द्वार पूरे देश के लोगों से 1 दिसंबर को देवरिया पहुंचने का आह्वान किया गया है।

*Disclaimer– यह लेख स्थानीय लोगों की बातचीत पर आधारित है। यह लेखक के निजी विचार नहीं है।

 

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देवरिया हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8.html https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8.html#respond Tue, 03 Oct 2023 09:00:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/10/03/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8/ Read more

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Deoria Murder Case: सोमवार 2 अक्टूबर की सुबह जब सारा देश अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था तभी देवरिया के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भूमाफिया प्रेमचंद्र यादव की हत्या से गुस्साए परिजनों ने शक के आधार पर सत्यप्रकाश दुबे के घर पर धावा बोल सिर्फ 15-20 मिनट में पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया. वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलवार मौके से फरार हो गए. 
बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश दुबे के भाई साधू दूबे के हिस्से की करीब 10 बीघे जमीन प्रेमचंद्र यादव ने धोखे से अपने नाम करा ली थी. प्रेमचंद्र अपनी दबंगई के बल पर उस जमीन को जोत-बो भी रहा था. इसी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था. सत्यप्रकाश ने इस मामले में कोर्ट केस भी कर रखा था जिसकी 4 अक्टूबर 2023 को सुनवाई थी. साल भर पहले विवादित जमीन की पुलिस और राजस्व टीम की मौजूदगी में पैमाइश भी हुई थी. लेकिन कोई फैसला न होने से विवाद नहीं रुका. 

छह लोगों के हत्याकांड की जड़ सत्यप्रकाश दुबे का भाई साधु दुबे पूर्व जिला पंचायत सदस्य दबंग प्रेमचंद यादव के कब्जे में रहता था। भाई सत्य प्रकाश दुबे से अनबन होने के बाद एक दशक पहले साधु दुबे गांव के दबंग प्रेमचंद से जुड़ गया और फिर उसी के यहां भोजन करने के साथ ही रहने लगा। इसी दौरान धोखे से प्रेमचंद व उसके भाई रामजी यादव ने उसकी भूमि अपने नाम करा ली। इसके बाद से ही साधु दुबे प्रेमचंद के कब्जे में रहता था।
बीते दिन सत्यप्रकाश और प्रेमचंद्र के बीच फिर से कहासुनी हो गई. सोमवार सुबह छह बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव दूसरे पक्ष के सत्यप्रकाश दुबे के दरवाजे पर बाइक से पहुंचा। इसके कुछ देर बाद ही संदिग्ध रूप से सत्यप्रकाश दुबे के घर से 20 मीटर की दूरी पर प्रेमचंद्र यादव की लाश मिली.
हालांकि अभी तक ये बात साबित नहीं हो पाई है कि प्रेमचंद यादव की हत्या किसने की थी और न ही गांव के किसी ने सत्यप्रकाश दुबे या उसके परिवार को प्रेमचंद्र यादव की हत्या करते देखा है। 
लेकिन हत्या की खबर सुन प्रेमचंद्र यादव के परिजनों का गुस्सा भड़क उठा और प्रेमचंद्र यादव के भाई रामजी यादव ने करीब 77 की संख्या (पुलिस एफआईआर के मुताबिक) में अपनी बिरादरी के लोगों को लेकर सिर्फ शक के आधार पर सत्यप्रकाश के घर पर हमला कर दिया. वे लोग हाथ में लाठी-डंडा, धारदार हथियार और बंदूक लिए लेड़हा टोला में दाखिल हुए और घर में घुसकर सत्यप्रकाश दुबे और उनके परिवार की महिलाओं और बच्चों सहित 5 लोगों की हत्या कर दी. 
करीब 77 की संख्या में हमलावरों ने जिसे, जहां पाया, उसी हालत में मारते हुए घर तोड़ने लगे। हमलावरों में इतना गुस्सा था कि उन्होंने छोटे बच्चों तक को नहीं बख्शा। बरामदे में सत्यप्रकाश और किरन की हत्या के बाद हमलावार टीनशेड में छिपे उनके बच्चों को बाहर खींच लाए और उनकी हत्या कर दी। घटना में 8 वर्षीय अनमोल को भी बुरी तरह मारा काटा गया और उसे हमलावरों ने मरा समझकर छोड़ दिया जिसे बाद में गंभीर अवस्था में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
हमलावरों की नृशंसता और आक्रोश देखकर आस पड़ोस के लोग भी अपने घरों में छिप गए। पांच लोगों की हत्या के बाद आरोपी गांव के दूसरे छोर से भाग निकले। 
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इस घटना में मृत प्रेमचंद्र यादव एक भूमाफिया था तथा उसके ऊपर कई आपराधिक मुकदमें भी दर्ज थे। प्रेमचंद यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उसे सफलता भी मिली थी। देवरिया में उसकी दबंगई चलती थी।
प्रेमचंद यादव ने पहली बार राजनीति के क्षेत्र में अपनी मां चिंता देवी को वर्ष 2010 में ग्राम प्रधान पद पर उतारा, जिसमें सफलता मिलने के बाद वह काफी उत्साहित था। उनका कार्यकाल वर्ष 2015 तक था। उसके बाद वर्ष 2015 में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में प्रेमचंद यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर भलुअनी पश्चिम क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सफलता भी मिली।
स्थानीय लोगों ने बताया है कि प्रेमचंद्र यादव ने ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा करके एक आलीशान मकान बनवा रखा है।
गांव के ही कुछ लोगों ने यह भी बताया कि सत्यप्रकाश दुबे के घर पर अपने दल बल के साथ हमला करने वाला मृतक भूमाफिया प्रेमचंद्र यादव का भाई रामजी यादव भी मनबढ़ किस्म का व्यक्ति है जो अपने गांव तथा आसपास के गांवों के अपनी बिरादरी के लोगों के साथ गुट बनाकर अक्सर गुंडई किया करता है।
इस जघन्य हत्याकांड को लेकर देवरिया से बीजेपी विधायक शलभमणि त्रिपाठी बेहद अक्रोशित हैं. उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि इस मामले में दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी की वो नजीर बनेगी. उन्होंने लापरवाही बरतने वाले पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी कहा कि वह अपनी करनी का फल भुगतने को तैयार रहें. 
उन्होंने देवरिया हत्याकांड पर अपने फेसबुक पेज पर लिखा- “माननीय मुख्यमंत्री जी को संपूर्ण घटनाक्रम से विस्तार से अवगत करा दिया गया है. वे स्वयं इस घटना पर नज़र रखे हुए हैं. प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, स्पेशल DG प्रशांत कुमार, ADG गोरखपुर अखिल कुमार के भी निरंतर संपर्क में हूं. भूमाफियाओं एवं अपराधियों के विरूद्ध निर्णायक जंग लड़ी जाएगी. वे बचेंगे नहीं. चाहे उन्हें किसी की भी सियासी सरपरस्ती हासिल हो.”
इसके साथ बीजेपी विधायक ने लिखा- “देवरिया के फ़तेहपुर में ग्राम सभा की ज़मीन पर कब्जा करके कैसे आलीशान मकान बना और यह अवैध मकान किस प्रकार अब तक बचा रहा? इसमें जांच के साथ ही साथ प्रभावी कार्रवाई होगी. ऐसी कार्रवाई जो नजीर बने. यह घटना कतई स्वीकार्य नहीं है.” 
शलभमणि त्रिपाठी आगे लिखते हैं- “बेबस लोगों, बेटियों और मासूम बच्चों पर हमला करने वाले भूमाफ़िया कायर और नपुंसक हैं. उनका उचित और कानूनी इलाज होकर रहेगा. साथ ही इस मामले में दोषी महाभ्रष्ट राजस्व अधिकारी/कर्मचारी एवं प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी करनी का फल भुगतने को तैयार रहें.”
दुबे परिवार की जीवित बची विवाहित बेटी शोभिता दुबे जो घटना के वक्त अपने ससुराल में थी, उसने एक निजी चैनल को रोते हुए बताया कि प्रेम यादव के परिवार के लोगों की गुंडागर्दी से उनका परिवार लंबे समय से परेशान था और ये लोग पहले भी कई बार दूबे परिवार को जान से मारने की कोशिश कर चुके थे, जिसकी मुख्यमंत्री पोर्टल पर कई बार शिकायत की जा चुकी थी. अगर चेक किया जाए तो हजार से ज्यादा एप्लीकेशन पड़ी मिलेगी. जिला प्रशासन से भी शिकायत की गई थी लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की लापरवाही तथा विपक्षी प्रेम यादव की दबंगई और प्रभाव के कारण कभी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
एक ब्राह्मण परिवार के 5 सदस्यों को करीब 77 लोग एकजुट होकर काट देते हैं. हमलावर यादव समुदाय से आते हैं. इस हत्याकांड को सामान्य जमीनी विवाद का परिणाम मान लेना शायद एक बड़ी भूल होगी. जमीन विवाद में एक हत्या के बदले एक परिवार आरोपी परिवार के सभी लोगों को गोलियों से भून देता या तलवारों से काट डालता तो बात समझ में आती कि ये बदला लेने के लिए किया गया कृत्य है. पर यहां तो करीब 77 लोगों की भीड़ (पुलिस एफआईआर में 27 नामजद आरोपी और 50 अज्ञात) एक परिवार को, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी हैं, को पीट-पीट कर मार डालती है. 
मृतक प्रेम यादव का परिवार 77 लोगों का परिवार नहीं था. इसे परिवार कहकर केस को हल्का किया जा रहा है. ये जीता जागता नफरत का एक नमूना है. जिसमें एक जाति दूसरी जाति के लोगों से इतना नफरत करती है कि उसे हर हाल में मिटा देना चाहती है.
जरा सोचिए गांव में बसे एक ब्राह्णण परिवार को यादव जाति के कुछ लोग एकजुट होकर मार डालते हैं, ये बदला जरूर है पर एक परिवार का दूसरे परिवार से नहीं है. ये बदला है एक जाति का दूसरी जाति से. ये जातीय संघर्ष है और ये देन है हमारे देश में जाति की राजनीति करने वाले नेताओं की. 
जातिवादी नेताओं ने हमारे समाज में जातिवाद का जहर बो कर रख दिया है। अपने राजनीतिक लाभ और वोट के लिए समाज को जातीय संघर्ष की आग में झोंक दिया गया है। 
सोचने वाली बात है कि बिहार में जाति आधारित जनगणना कराने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? 
ऐसी घटनाओं से गुड गवर्नेंस की दुहाई देने वाली योगी मोदी सरकार पर भी सवाल उठता है। क्योंकि योगी सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद आज भी गुंडों और भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं, की वो खुलेआम महिलाओं और छोटे बच्चों तक को काट रहे हैं।
ऐसी घटनाओं के पीछे जो भी लोग हैं उनका फैसला ऑन द स्पॉट एनकाउंटर करके होना चाहिए और ऐसे नृशंस हत्यारों के घरों पर बुलडोजर जरूर चलाया जाना चाहिए।
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