make in india – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Tue, 15 Oct 2024 13:37:45 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg make in india – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 अब गोरखपुर में दूध बेचने वालों को लेना होगा Fssai Food License https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html#respond Tue, 15 Oct 2024 13:37:45 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=767 Read more

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हमारे देश में दूध एक ऐसा पदार्थ है जिसका सेवन अधिकतर सभी लोगों के द्वारा किया जाता है। इस कारण से भारत में दूध की बिक्री बहुत ज्यादा होती है। लेकिन दिन पर दिन कुछ लोगों के दूध में मिलावट किया जा रहा है और इसकी समस्या समय के साथ बढ़ते ही जा रही है। भारत के उत्तर प्रदेश में दूध में मिलावट समस्या बहुत ज्यादा आ रही है, इसमें गोरखपुर का नाम सबसे ऊपर है। इसके कारण भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई गाइडलाइन लागू किया है। इस गाइडलाइन के अंतर्गत दूध विक्रेताओं के लिए आईडी कार्ड जारी किया जाएगा और साथ  ही 500 से अधिक दूध बेचने वाले लोगों को Fssai Food License लेना अनिवार्य होगा।

ऐसे में इस लेख के द्वारा हम आपको बताने वाले हैं कि दूध विक्रेताओं को कौन सा लाइसेंस लेना होगा और साथ ही यह लाइसेंस कैसे मिल सकता है। अगर आप भी इन सभी बातों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लेख को अंत तक पढ़े।

दूध बेचने वालों को क्यों लेना होगा लाइसेंस।

हमारे देश में प्रतिदिन हजारों लीटर की दूध की बिक्री होती है। लेकिन कुछ समय से दूध और दूध से बने उत्पादों की पदार्थ में काफी ज्यादा मिलावट किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध और दूध से बने उत्पादों की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए कुछ गाइडलाइन जारी किया है, जिसके तहत सभी को आईडी कार्ड या लाइसेंस लेना होगा।

दूध विक्रेताओं को लाइसेंस लेने के लिए इसलिए कहा गया है ताकि सभी लोगों को शुद्ध दूध प्राप्त हो सके। आपको बता दे कि केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने हाल ही में लोकसभा में यह जानकारी दिया था कि उत्तर प्रदेश में दूध में मिलावट सबसे ज्यादा किया जा रहा है, और इसी के बाद से खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस विषय पर तेजी से अपना कार्य शुरू कर दिया है।

दूध में मिलावट की सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से सामने आ रही है, और गोरखपुर का नाम इसमें सबसे ऊपर है। ऐसे में गोरखपुर के सभी दूध विक्रेताओं को परिचय पत्र यानी आईडी कार्ड जारी करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा गोरखपुर में मौजूद वैसे दूध विक्रेताओं जो प्रतिदिन 500 लीटर से अधिक दूध की बिक्री करते हैं, उन्हें अब लाइसेंस लेना होगा।

दूध विक्रेताओं को कौन सा लाइसेंस लेना होगा?

आपको बता दे कि शहर के अंदर दूध बेचने वाले दूधियों का परिचय पत्र बनवाया जाएगा, वही परिचय पत्र बनवाने के लिए सभी को ₹100 का भुगतान जमा करना होगा। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिलावटी दूध को रोकने के लिए यह पहल किया गया है।

परिचय पत्र के चलते शहर में दूध बेचने वाले लोगों को आसानी से पहचान किया जा सकेगा। इसके अलावा 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले डेयरी संचालकों को खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा Fssai Food License लेना होगा। विभाग द्वारा जारी किया गया गाइडलाइन को पूर्ति करने के लिए कार्य किया जाना शुरू कर दिया गया है।

ऐसे में गोरखपुर के रहने वाले सभी दूध विक्रेताओं को अपना पहचान पत्र बनवाना होगा और 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले डायरी संचालकों को लाइसेंस लेना जरूरी है। अगर दूध विक्रेताओं सरकार के नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

दूध बेचने के लिए Fssai Food License कैसे प्राप्त करें?

अगर आप भी दूध बेचने के बिजनेस में लगे हुए हैं तो आपको सबसे पहले अपना पहचान पत्र यानी आईडी कार्ड बनवाना चाहिए, वहीं अगर आप 500 अधिक लीटर दूध बेचती है तो आपको Fssai Food License लेना अनिवार्य है। ऐसे में बहुत से लोगों की यह समस्या है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है की Fssai Food License कैसे प्राप्त किया जाता है।

इसीलिए हम आपको बता दे कि अगर आपको भी Fssai Food License लेना है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि खाद सुरक्षा विभाग की टीम दूध विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन करने के लिए शिविर आयोजित करने वाली है।

विभाग द्वारा इन शिवरो का आयोजन उसे स्थान पर किया जाएगा जहां सबसे ज्यादा दूध विक्रेता इकट्ठा होते हैं। गोरखपुर में जहां-जहां सबसे ज्यादा दूध विक्रेताएं एकत्रित होते हैं उसी स्थान पर सिविल आयोजित किया जाने वाला है, और यहीं से आप Fssai Food License प्राप्त कर सकते हैं।

पहचान पत्र और लाइसेंस के बिना दूध बेचने पर होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया इस गाइडलाइन को अगर कोई भी व्यक्ति फॉलो नहीं करता है तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दे की रजिस्ट्रेशन ना करवाने वाले विक्रेताओं पर सबसे पहले विभाग के द्वारा नोटिस भेजा जाएगा और साथ ही उनके दूध को जप्त कर लिया जाएगा।

अगर इतना होने के बाद भी वह नहीं मानते हैं तो दूध विक्रेताओं के खिलाफ न्यायालय में मामला दर्ज भी कराया जा सकता है। मामला दर्ज करवाने के बाद अगर दूध विक्रेताएं दोषी पाए जाते हैं तो उन पर ₹2,00,000 तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

गोरखपुर के सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा, डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि दुग्ध विक्रेताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए 100 रुपये की फीस तय की गई है। सभी दुग्ध विक्रेताओं को अपना पहचान पत्र साथ में रखना जरूरी होगा।

उन्होंने कहा कि दूध की शुद्धता को लेकर सतर्क न रहने वाले विक्रेताओं की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह कदम लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने और मिलावट को रोकने के लिए उठाए गए हैं। दूध बेचने वालों को साफ-सफाई और गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना होगा।

यह भी पढ़े :- क्या खाने पीने की चीजों में मिलावट करने वाले किसी हत्यारे से कम हैं?

निष्कर्ष:

हमारे देश में दूध और दूध से बने उत्पादों की डिमांड काफी ज्यादा होती है, लेकिन समय के साथ इन पदार्थों में काफी ज्यादा मिलावट किया जा रहा है, जिसके चलते खाद्य सुरक्षा विभाग कई गाइडलाइन जारी किया है। इस गाइडलाइन के अंतर्गत सभी दूध विक्रेताओं को अपना आईडी कार्ड प्राप्त करना होगा और 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले को Fssai Food License प्राप्त करना होगा। ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं की Fssai Food License कैसे प्राप्त करें तो इसके लिए ऊपर दिए गए लेख को अंत तक पढ़े। उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया, होगा sanjayrajput.com पर इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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क्या स्वदेशी कम्पनियों और भारतीय उद्योगपतियों का विरोध करने वाले देशद्रोही से कम हैं? https://sanjayrajput.com/2020/12/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%94.html https://sanjayrajput.com/2020/12/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%94.html#respond Tue, 22 Dec 2020 03:07:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2020/12/22/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%94/ Read more

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आजकल बहुत से लोग सोशल मीडिया पर रिलायंस मॉल में बिकने वाली तमाम चीजों का के मूल्य का फोटो खींचकर पोस्ट करते हैं और लिखते हैं यह देखो 1 किलो गन्ना कितने रुपए में बिक रहा है, 1 किलो आलू कितने रुपए में बिक रहा है।
अरे भाई कभी यह विचार किया कि कर्नाटक में काफ़ी उगाने वाले किसानों से मल्टीनेशनल कंपनी नेस्ले कितने रुपए किलो कॉफी बींस खरीदती है और उसे कितने रुपए किलो बेचती है ??


 कभी यह सोचा की स्टारबक्स में एक कप कॉफी ₹200 की क्यों हो जाती है जबकि उसमें सिर्फ कुछ ग्राम ही काफी होता है ?? 
कभी इस पर दुख नहीं जताया कि किसानों से मक्का खरीद कर उसमें कुछ चॉकलेट फ्लेवर मिलाकर डिब्बों में पैक कर बेचने वाली अमेरिका की कंपनी केलॉग्स कितने प्रतिशत मुनाफा कमाती है ?? 

कभी यह सोचा कि सिर्फ पानी और थोड़ी सी कार्बन डाइऑक्साइड और थोड़ी सी चीनी डालकर बोतल में पैक करके कोका कोला कई दशक से हमें ₹10 में बेच रही है जबकि वह पानी भी हमारा वह चीनी भी हमारी है।


कभी भारत के आलू चिप्स उद्योग पर भारतीय कंपनियों का दबदबा हुआ करता था हर घर में महिलाएं चिप्स बनाया करती थी लेकिन जब मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे तब आर्थिक उदारीकरण पर दस्तखत करने के बाद भारत के बाजार मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए खोल दिए गए और अंकल चिप्स जो एक भारतीय की कंपनी थी वह बिकी धीरे-धीरे तमाम भारतीय चिप्स कंपनियां गायब हो गई और भारत के आलू चिप्स बाजार पर पेप्सीको का और हिंदुस्तान लीवर का कब्जा हो गया ।
मात्र कुछ ग्राम चिप्स अब ₹10 में मिलने लगा कभी तुमने उसका हिसाब लगाया ??

दरअसल तुम्हारी औकात यह नहीं है कि तुम नेस्ले को, पेप्सीको, कोका कोला को, स्टारबक्स को गाली दे सको, क्योंकि तुम एक विदेशी दलाल हो।
तुम्हारी आंखों में सिर्फ भारतीय उद्योगपति टाटा, बिरला, अंबानी, अडानी, रामदेव ही आंखों में रेत की तरह चुभ रहे हैं।
तुम्हें केवल सिर्फ इनका मुनाफा नजर आता है। तुम्हें यह नजर नहीं आता की इन कंपनियों ने कितने भारतीयों को रोजगार दिया है और यह कंपनियां अपने मुनाफे का कितना प्रतिशत सोशल रिस्पांसिबिलिटी पर खर्च कर रही है और यह कंपनियां भारत के जीडीपी में कितना योगदान दे रही हैं।


अमेरिका से आकर Amazon वाला कमाकर ले जाये, चीन से आकर Redmi,  Oppo, Vivo वाला कमाकर ले जाये, England से आकर वोडाफोन वाला कमाकर ले जाये, पर यहाँ रहकर अपना पैसा लगाकर, अपने लोगों को रोजगार देने वाला अंबानी, अडानी या बाबा रामदेव ना कमाने पायें??
गांधी को स्वदेशी से प्रेम था. तथाकथित खुद को गांधीवादी कहने वाले फिर भी ठोंग करते है कि हम गाँधी के अनुयायी  है? 



नेस्ले इंडिया अच्छा है क्योंकि उसके विदेशी मालिक को हम नही जानते। प्रॉक्टर एन्ड गैंबल अच्छा है क्योंकि हम उसके विदेशी मालिक को नही जानते। कोको कोला, पेप्सी अच्छे है क्योंकि हम उनके मालिकों को भी नही जानते हैं।
वोडाफोन अच्छा है क्योंकि उसके सेठ को भी नही जानते। रेडमी, वीवो, सैमसंग, नोकिया, आई फोन अच्छे हैं क्योंकि उनके मालिकों को भी नही जानते हैं।
रामदेव चोर है, मुकेश अंबानी चोर है, गौतम अडानी चोर है, टाटा, बिरला चोर हैं?
नई संसद का ठेका टाटा को कैसे मिल गया ? सोलर का ठेका चीन की जगह अडानी को कैसे मिल गया ? भारत के सब व्यापारी तो चोर होते हैं!


है न? क्योंकि ये हमारे अपने देश के हैं और हमारे यहां का कोई बिजनेसमैन बड़ा आदमी कैसे हो सकता है? कैसे बड़ी बड़ी विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर दे सकता है?
यह दृष्टिदोष नही है? यह गुणसूत्र का मामला भी हो सकता है। इसे आसानी से समझाया भी नही जा सकता है क्योंकि वामपंथ ने इसे हमारी मानसिकता में जो घुसा रखा है।
हमारी चेतना से आत्मगौरव विस्मृत करने में कितना पुरुषार्थ लगाया है लेफ्ट लिब्रल्स ने इसकी हमें कल्पना तक नही है।



तभी तो हम सोच भी नही सकते है कि कोई अदार पूनावाला कोरोना की वैक्सीन बना सकता है ? वेंटिलेटर महेंद्रा एन्ड महेंद्रा भी बना सकता है?
कोरोना में तो करोडों की मौतें होनी थी न? क्या था?  हमारे पास न पीपीई किट, न एन 95 मास्क और न अन्य संसाधन!
सब कुछ तो विदेश से ही आना था, फिर इस भारत ने 150 देशों तक कैसे कार्गो भर भर के दवाएं, मास्क, पीपीई किट व अन्य साजों सामान सहायता में भिजवा दिए?
अरे ये कैसे हो सकता है कि विश्व के 190 देश भारत के सीरम इंस्टीट्यूट की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं ?


अरे सीरम के अदार पूनावाला को बिल गेट्स ने वेक्सीन के लिए 300 मिलियन डॉलर, हां…हां 22.5 अरब रुपया कैसे दे दिया? और पूनावाला ने स्वयं 19 अरब इस टीके पर खर्च कैसे कर दिए?
अरे, पूनावाला तो मोदी का दोस्त है! मोदी उसकी फेक्ट्री में गए क्यों थे..यह अब समझ आया…जरूर कोई गड़बड़ है।



इस इकोसिस्टम को समझिए, भारत अब लाचार, दूसरे देशों की ओर हाथ फैलाने वाला देश नही रहा है। 
नया भारत है ये। समस्याओं को टालता नही है, उनसे भागता नहीं है। अब उनका डटकर सामना करता है। आपदा को अवसर में बदलता है।
आत्मनिर्भर भारत कुछ लोगों को मजाक लगता है न? उड़ाइये मजाक, बजाइये ढपली, लगाइए नारे भारत की बर्बादी तक जंग के…मांगिये आजादी…काटिये चिकन नेक…मनाइए बरसी…अफजल गुरू की.


धिक्कार है ऐसी सोच पर जो स्वदेशी, मेक इन इंडिया, मेड इन इंडिया आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देने की बजाय देश को विदेशी कम्पनियों का गुलाम बनाने पर तुले हैं। जो लोग स्वदेशी उद्योगपतियों की खिलाफत कर रहे हैं उनकी सोच को लकवा मार गया है और ऐसे लोग अपनी आने वाली पीढ़ी को विदेशी कम्पनियों का गुलाम बना देना चाहते हैं।

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