Rajput – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Sun, 24 Aug 2025 15:19:03 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg Rajput – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 गमले में उगे पौधे बरगद से मुकाबला नहीं कर सकते: राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ https://sanjayrajput.com/2025/08/abkm-gorakhpur-meeting.html https://sanjayrajput.com/2025/08/abkm-gorakhpur-meeting.html#respond Sun, 24 Aug 2025 15:15:18 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1186 Read more

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल प्रांत की गोरखपुर में हुई बैठक में राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ ने नए प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह को दिया मनोनयन पत्र

गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल प्रांत की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को शहर के होटल फाइव सेंसेस में आयोजित हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ ने विनोद कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष का मनोनयन पत्र सौंपा।

पढ़ें…अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का इतिहास

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बैठक से पहले गोरखपुर आगमन पर संगठन की जिला इकाई के कार्यकर्ताओं ने बाघागाड़ा फोरलेन पर फूल मालाओं से दोनों नेताओं का भव्य स्वागत किया।

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मीडिया से बातचीत में राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ ने कहा कि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा देश का सबसे पुराना संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1897 में हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन से बाहर निकाले गए कुछ लोग निजी स्वार्थ में समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनका यह प्रयास कभी सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा, “गमले में उगे पौधे बरगद से मुकाबला नहीं कर सकते।” उन्होंने समाज को अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील भी की।

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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि क्षत्रिय समाज ने हमेशा देश व समाज के लिए बलिदान दिया है, लेकिन आज सरकार से लेकर समाज के कई वर्गों तक क्षत्रियों के विरोध में खड़े हैं। गोरखपुर मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह राजपूत ने कहा कि क्षत्रिय समाज मान-सम्मान के साथ जीता और मरता आया है, और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।

बैठक को राष्ट्रीय सचिव ओंकार नाथ सिंह, देवरिया जिलाध्यक्ष राजेश सिंह श्रीनेत सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह, प्रदेश वीरांगना प्रकोष्ठ अध्यक्ष सीमा सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री अरुण कुमार सिंह, व्यापार प्रकोष्ठ अध्यक्ष दीपक सिंह, संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, युवा प्रकोष्ठ मंत्री सुमित सिंह श्रीनेत, युवा नेता आर्यन शाही, सावन शाही व सूरज सिंह सेंगर समेत गोरखपुर, देवरिया, बलिया, बस्ती, आजमगढ़ और महाराजगंज से आए सैकड़ों क्षत्रिय समाज के लोग उपस्थित रहे।

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क्षत्रिय कैसे एक बार फिर खुद को स्थापित कर सकते हैं? https://sanjayrajput.com/2025/03/how-can-the-kshatriyas-establish-themselves-once-again.html https://sanjayrajput.com/2025/03/how-can-the-kshatriyas-establish-themselves-once-again.html#respond Tue, 18 Mar 2025 09:22:10 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1066 Read more

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यूपी के राजपूत बाहुबलियों ने अपने लिए बहुत कुछ हासिल किया और समुदाय के अन्य व्यक्तियों की भी मदद की, जैसे सूर्यदेव सिंह ने कई ठाकुरों को करोड़पति बनाया, या बृजभूषण सिंह की कॉलेजों और अन्य व्यवसायों की श्रृंखला ने हजारों राजपूत युवाओं को रोजगार प्रदान किया, लेकिन सवाल यह है कि क्या इन अमीर बाहुबलियों को सामूहिक सामुदायिक हितों की भी परवाह है? 

जब बॉलीवुड बलात्कारी, अत्याचारी ठाकुर कथा का निर्माण कर रहा था, तब उन्होंने क्या किया?

या शिक्षा जगत में लॉबी ने सामंतवाद का शोषण कथा का निर्माण किया?

खैर, उन्होंने कुछ नहीं किया।

सामुदायिक चेतना वाला कोई भी नेता हाथरस की घटना के बाद बलात्कारी ठाकुर कथा चलाने वाले सभी पत्रकारों, मीडिया चैनलों और यूट्यूबर्स को अदालत में घसीट लेता। लेकिन क्या उन्होंने ऐसा किया? नहीं। मुद्दा यह है कि, उनमें सामूहिक सामुदायिक चेतना नहीं है।

जहां तक उदारता की बात है, एक सीमा से अधिक उदारता आत्मघाती हो जाती है। उदारता सामरिक होनी चाहिए। आज राजपूत समाज के लिए जमीन और धन त्यागने की बात करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि बदले में हमें क्या मिला? हमारे पैसे से हमारी जमीन पर बने विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल सामंतवाद की कहानी गढ़ने के लिए किया गया और हमें खलनायक के रूप में पेश किया गया। आज उन्हीं विश्वविद्यालयों का इस्तेमाल हमारे पूर्वजों की पहचान को विकृत करके दूसरों में बांटने के लिए किया जा रहा है। हमें उस ‘उदारता’ से क्या मिला? वह उदारता त्याग नहीं बल्कि आत्महत्या थी।

मैं संस्थानों के निर्माण के पक्ष में हूं, लेकिन हमें नियंत्रण पूरी तरह अपने हाथों में रखना चाहिए। और यहां ‘हम’ का मतलब राजपूतों से है, हिंदुओं से नहीं। अपने खुद के ट्रस्ट बनाएं, उन्हें चलाने के लिए अपने लोगों को रखें।

समाधान ये हैं:

✔गोत्रवाद और क्षेत्रवाद और वंश संघर्ष को रोकने के लिए हमें अपने समुदाय को एक अलग संप्रदाय के साथ केंद्रीकृत करने की आवश्यकता है जो गुजरात से जम्मू और छत्तीसगढ़ तक के सभी राजपूतों को एक समान धार्मिक/संप्रदाय पहचान के तहत लाएगा। हमारे अपने मंदिर, अपने पुजारी, अपना साहित्य।

✔सरकारी नियंत्रण से अपने मंदिरों, किलों आदि को वापस पाने के लिए राजनीतिक और कानूनी लड़ाई। छोटे यूरोपीय देश हर साल पर्यटन से सैकड़ों अरब डॉलर कमा रहे हैं। कल्पना कीजिए कि अगर राजपूतों को हमारे सभी ऐतिहासिक स्मारकों का स्वामित्व वापस मिल जाए। गुजरात से जम्मू और छत्तीसगढ़ तक एक विश्व स्तरीय पर्यटन सर्किट का विस्तार, हमारे समुदाय के लोगों द्वारा कड़ाई से नियंत्रित, लाखों नौकरियां पैदा करना और आने वाले दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था के उछाल के साथ सैकड़ों अरब डॉलर का वार्षिक राजस्व पैदा करना। यह हमें एक आम सरकारी बाबू नौकरी की दौड़ से कहीं ज़्यादा फ़ायदा पहुँचाएगा।

✔ चूंकि राजपूत सबसे बड़े भूस्वामियों में से एक हैं, इसलिए कृषि का आधुनिकीकरण हमें सबसे अधिक मदद करेगा और कृषि व्यवसाय के एक बड़े हिस्से को नियंत्रित करने का अवसर प्रदान करेगा।

अपने लोगों को व्यवसाय के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग करें।

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का इतिहास I Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasabha History https://sanjayrajput.com/2025/02/akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha-history.html https://sanjayrajput.com/2025/02/akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha-history.html#respond Thu, 13 Feb 2025 15:20:55 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1013 Read more

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Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasabha History: अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा भारत का सबसे पुराना क्षत्रिय संगठन है। अंग्रेजों के समय में ही इसकी शुरुआत हुई और तमाम राजा महाराजाओं ने इस संगठन के अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। हालांकि आगे चलकर इसी संगठन से टूटकर तमाम नए संगठन भी बने और कुछ ने मिलते जुलते नाम भी रख लिए लेकिन अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा भारत में आज भी क्षत्रियों का सबसे बड़ा संगठन है। तो आइए आज जानते हैं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का इतिहास। (Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasabha History)

Akhil Bharatiya Kshatriya Mahasabha History

बिहार के राजा खड़ग बहादुर मल्ल मझौली और ठाकुर रामदीन सिंह ठिकानेदार (विलासप्रेस बांकीपुर) ने तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत के 1860 के सोसाइटी  रजिस्ट्रेशन कानून की कुनीति को भांपते हुए 1862 में गठित अपंजीकृत क्षत्रिय हितकारिणी सभा ही 19 October 1897 में क्षत्रिय महासभा के रूप में पंजीकृत हुई। पुन: क्षत्रिय महासभा को भंग करके 1986 में अखिल भारतीय महासभा का गठन हुआ। परन्तु 113/147 सालों का समाज के श्रेष्ठ संगठनिक पुरुषों के पुरुषार्थ का संकलन पुस्तक के रूप में उपलब्ध नहीं है।

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1857 के स्वतंत्रता के इतिहास का अहम् योगदान था क्षत्रिय सभा के निर्माण में। अंग्रेजी शासन काल में, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम अंग्रेजों द्वारा क्षत्रियों के विरुद्ध अपनाई गई कलुषित नीति के विरुद्ध विदेशी दासता से मुक्ति पाने के लिए एक खुली अघोषित क्रांति थी जिसका प्रमुख केंद्र बिंदु उत्तर भारत था। शुरुआत में इसके सूत्रपात्र के दो मुख्य श्रोत “सैनिक क्रांति” और “जन क्रांति” थे। इसके सूत्रपात्र का जिम्मा शुरुआती दौर में उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, दिल्ली, पंजाब (वर्तमान हरियाणा) तथा आँध्रप्रदेश के उत्पीड़ित क्षत्रिय शासकों ने उठाया था।

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संयुक्त प्रान्त, आगरा एवं अवध में, बनारस के राजा चेत सिंह की फांसी, रुहेलखण्ड के क्षत्रिय सरदारों के प्रति ईस्ट इंडिया कंपनी की उपेक्षा पूर्ण नीति और दिल्ली के अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफ़र के दो बेटों को दिल्ली में बीच मार्ग पर खड़ा करके गोली मारने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया। साथ ही क्षत्रिय राजाओं को गोद लेने की प्रथा को समाप्त करने की लार्ड डलहौजी की घोषणा ने भी भीषण जनक्रांति को जन्म दिया ।

विकिपीडिया के अनुसार 1857 के विद्रोह के बाद कई तालुकदारों और राजपूत एस्टेट धारकों की स्थिति, जिन्होंने क्रांतिकारियों का समर्थन किया या उनके साथ भाग लिया, समझौता कर लिया गया। अंग्रेजों ने उनकी कई जमीनों और संपत्तियों को जब्त कर लिया और उन पर भारी जुर्माना लगाया गया।

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कालाकांकर के प्रमुख राजा हनुमंत सिंह ऐसे ही एक तालुकदार थे, जिन्हें 1857 के विद्रोह का समर्थन करने के लिए उनकी कई संपत्तियों से बेदखल कर दिया गया था। राजा हनुमंत सिंह ने महसूस किया कि उनके समुदाय द्वारा सामना किए जा रहे अन्याय और आवाज को उठाने के लिए एक अखिल भारतीय संगठन आवश्यक था। उन्होंने अवध के अन्य तालुकदारों के साथ मिलकर वर्ष 1857 में राम दल नामक संगठन की स्थापना की। 1860 में इसका नाम बदलकर क्षत्रिय हितकारिणी सभा कर दिया गया । इस प्रकार राजपूत समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा और उनके लिए लड़ने के लिए एक संगठन का गठन किया गया था।

क्षत्रिय महासभा क्षत्रिय हितकारिणी सभा का उत्तराधिकारी है, जिसका नाम कोटला के ठाकुर उमराव सिंह, कालाकांकर के राजा रामपाल सिंह और भिंगा के राजा उदय प्रताप सिंह के साथ अवागढ़ के राजा बलवंत सिंह के नेतृत्व में 1897 में क्षत्रिय महासभा रखा गया था। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा 19 अक्टूबर 1897 को अस्तित्व में आई, जिसने क्षत्रियों और राजपूतों के हितों को बढ़ावा देने के लिए एक मंच तैयार किया।

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1898 में ‘राजपूत मासिक’ नामक एक समाचार पत्र शुरू किया गया। एसोसिएशन का पहला सम्मेलन आगरा के राजपूत बोर्डिंग हाउस में हुआ था। जम्मू और कश्मीर के महाराजा सर प्रताप सिंह ने लाहौर से पाक्षिक के रूप में राजपूत गजट नामक एक उर्दू प्रकाशन शुरू करने का प्रायोजन किया।

उस समय रियासतों के शासकों और बड़े ज़मींदारों का बोलबाला था और उन्होंने शिक्षा के लिए और क्षत्रिय समुदाय के छात्रों को प्राथमिकता देने के लिए अपने क्षेत्रों में विभिन्न स्कूल और कॉलेज शुरू किए।

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हालाँकि, आज़ादी के बाद, उच्च क्षत्रिय जाति और उसके प्रभावशाली सदस्यों के लिए स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई। 1947 में भारत की आज़ादी के तुरंत बाद रियासतों को भारत संघ में मिला दिया गया और बाद में ज़मींदारी को भी समाप्त कर दिया गया और संघ दिशाहीन हो गया। हालाँकि, बिहार के एक प्रमुख राजपूत राजनेता बाबू राम नारायण की अध्यक्षता में, वर्ष 1955 में उज्जैन में बैठक हुई और संघ को पुनर्जीवित किया गया।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की स्थापना के बाद से अब तक निम्न उल्लेखनीय व्यक्ति इस संगठन का नेतृत्व कर चुके हैं :-

  1. अवागढ़ के राजा बलवंत सिंह – 1897
  2. महाराजा रामपाल सिंह (कालाकांकर)- 1899
  3. महाराजा प्रताप सिंह (जम्मू कश्मीर)- 1902 & 1913
  4. ले. कर्नल प्रताप सिंह (इदर)- 1903
  5. बीकानेर के जनरल महाराजा सर गंगा सिंह – 1904
  6. राजा कौशल किशोर सिंह (मझौली)- 1906
  7. राजा प्रताप बहादुर सिंह (प्रतापगढ़)- 1907
  8. सैलाना के महाराजा सर जसवन्त सिंह – 1911
  9. सैलाना के महाराजा ढालीप सिंह – 1920
  10. महाराजाधिराज सर नाहर सिंह जी (शाहापुरा)- 1922
  11. राव साहब गोपाल सिंह खरवा, अजमेर – 1924
  12. महाराजा सवाई सिंह जी (अलवर)- 1925
  13. महाराजा साहब सज्जन सिंह (रतलाम)- 1929
  14. सैलाना के महाराजा ढालीप सिंह – 1930
  15. महाराजा राम सिंह (ओरछा)- 1933
  16. कुंवर साहब सर विजय प्रताप सिंह (बागला)- 1940
  17. महाराजा राम रणविजय प्रताप सिंह बहादुर (डुमरांव)- 1941
  18. महाराजा कुमार विजय आनन्द (मोतिहारी)- 1942
  19. राजा कामाख्या नारायण सिंह (रामगढ़)- 1942 & 1953
  20. पन्ना के महाराजा यादवेन्द्र सिंह जूदेव – 1946
  21. अलवर के महाराजा सवाई तेज सिंह – 1947
  22. ठाकुर साहब कर्नल जोधपुर के मान सिंहजी भाटी – 1948
  23. बाबू राम नारायन सिंह (हजारीबाग)- 1955
  24. महाराजा लक्ष्मण सिंह (डूंगरपुर)- 1960
  25. सिंगरामऊ, जौनपुर के राजा श्रीपाल सिंह – 1986
  26. राजा डॉ. दिग्विजय सिंह (वाँकानेर)- 1997
  27. श्रीपाल सिंह (सिगरामऊ)- 2000
  28. पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह- 2004 से अब तक

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह हैं। 4 सितंबर 1950 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर में जन्मे कुँवर हरिवंश सिंह ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातक किया है। वे उत्तर प्रदेश की प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं। वे 2014 लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 16 वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित किये गए थे। वे अपना दल के टिकट पर प्रतापगढ़ संसदीय सीट से चुनाव लड़े और विजयी हुए। उन्होंने बसपा के प्रत्याशी आसिफ निजामुद्दीन को 168222 वोटों के अंतर से हराया था। 74 वर्षीय कुंवर हरिवंश सिंह मुंबई के एक बड़े बिजनेसमैन भी हैं।

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वर्तमान में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के सबसे सक्रिय पदाधिकारी राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री राघवेंद्र सिंह राजू हैं। इन्होंने अपना पूरा जीवन संगठन को समर्पित कर दिया है। प्रतिदिन भारत के किसी न किसी स्थान पर कार्यक्रम करते हुए राघवेंद्र सिंह राजू देश भर के क्षत्रियों को एकजुट करने के प्रति दृढ़ संकल्पित हैं। वे एक कुशल वक्ता होने के साथ ही क्षत्रियों के हितों के प्रति मुखर भी हैं और क्षत्रिय हित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से जनता और मीडिया के समक्ष रखने में भी सक्षम हैं।

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राघवेंद्र सिंह राजू बताते हैं कि उन्हें जीवन में कई बार बड़े बड़े राजनैतिक दलों से ऑफर मिले लेकिन उनका उद्देश्य छात्र जीवन से ही राजनीति में न जाकर सिर्फ अपने समाज की लड़ाई लड़ने का रहा।

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का
पंजीकृत कार्यालय – 202-202
राज अपार्टमेंट 7 जापलिंग रोड (नियर देनिक जागरण चौराहा) लखनऊ, उत्तर प्रदेश

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राजपूत काल से वर्तमान तक: 25% जीडीपी से 3.37% जीडीपी तक की समृद्धि की गिरावट https://sanjayrajput.com/2025/01/rajput-period-to-present-decline-of-prosperity-from-25-gdp-to-3-37-gdp.html https://sanjayrajput.com/2025/01/rajput-period-to-present-decline-of-prosperity-from-25-gdp-to-3-37-gdp.html#respond Tue, 07 Jan 2025 14:17:43 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=971 Read more

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जहां कोई एक गज जमीन नहीं दे सकता, वहां राजपूत समाज का बलिदान और संघर्ष अनमोल हैं। 565 रियासतें, 43 गढ़, 18,700 किले, बल्कि 40 लाख एकड़ जमीन देकर भारत को एक सशक्त राष्ट्र बनाने वाला भी राजपूत ही था।

भारत का इतिहास एक प्रेरणा है, जो हमें हमारे गौरवमयी अतीत और कठिन संघर्षों की याद दिलाता है। राजपूत काल वह स्वर्णिम समय था, जब भारत की आर्थिक, सांस्कृतिक और सैन्य शक्ति पूरी दुनिया में पहचानी जाती थी। लेकिन आज, उस गौरव के कई पहलू धुंधले पड़ गए हैं, और यह बदलाव सिर्फ किसी एक वर्ग या समाज का नहीं, बल्कि हमारे देश की समग्र दिशा का परिणाम है।

राजपूत काल: समृद्धि का युग

जब राजपूतों ने देश के निर्माण में अपना योगदान दिया, तो भारत अपने समय की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्था था। वैश्विक जीडीपी में भारत का योगदान 25% था।

1. आर्थिक समृद्धि – व्यापार और उद्योग तेजी से बढ़े। भारतीय कारीगरी, मसाले, कपास और आभूषण दुनिया भर में प्रसिद्ध थे। भारत सोने और चांदी के भंडार से लैस था।

2. संस्कृति और कला – राजपूत किले, मंदिर, और स्थापत्य कला ने हमारे सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखा। संगीत, नृत्य, और शिल्पकला के वह अद्वितीय समय आज भी हमारे दिलों में जीवित हैं।

3. सैन्य और शौर्य – राजपूतों के साहस और युद्ध कौशल ने भारत को कई युद्धों में विजय दिलाई। उनकी निष्ठा, साहस और समर्पण ने भारतीय सैन्य इतिहास को गौरवपूर्ण बना दिया।

राजपूत समाज की बदलती छवि

समय के साथ राजपूत समाज के खिलाफ कुछ गलत धारणाएं और नकारात्मक प्रचार फैलने लगे। इन प्रचारों ने समाज को अपनी पहचान छिपाने पर मजबूर कर दिया। पहले जहां समाज की स्थिति मजबूत थी, वहीं आज हमें कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

आज का भारत: 3.37% जीडीपी योगदान

आज हम 3.37% की वैश्विक जीडीपी में योगदान दे रहे हैं, जबकि कभी भारत 25% जीडीपी में योगदान करता था। यह बदलाव हमारी दिशा के गलत मोड़ का परिणाम है।

समाज और देश के लिए एक नई शुरुआत की आवश्यकता

अब समय आ गया है कि हम अपने स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान को याद करें और फिर से उन मूल्यों को अपनाएं, जो हमें राजपूतों ने सिखाए। हमें अपने अतीत से प्रेरणा लेकर अपने समाज को फिर से सशक्त बनाना है, ताकि हम एक बार फिर उस समृद्धि, गौरव और सम्मान की ओर लौट सकें।

हम सभी को मिलकर एक नई शुरुआत करनी होगी, एक ऐसी शुरुआत जो हमारे देश और समाज को मजबूत और सशक्त बनाए।

इस पोस्ट का उद्देश्य किसी जाति या समाज के बीच कोई भेदभाव उत्पन्न करना नहीं है। मेरा मकसद केवल यह है कि हम सभी इस सच्चाई को समझें कि अपने स्वार्थ की पूर्ति और राजनीतिक लाभ के लिए राजपूत समाज को अनावश्यक रूप से बदनाम किया गया। वास्तव में, राजपूत वह थे जो अपने राज्य की सही दिशा और अपने लोगों की भलाई के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से भी नहीं कतराते थे। वे वही वीर योद्धा थे जिन्होंने अपने राज्य और समाज के लिए शहादत दी, और जो किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटते थे।

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अभिषेक सिंह बने अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के गोरखपुर महानगर अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ https://sanjayrajput.com/2024/12/abhishek-singh-became-the-gorakhpur-city-youth-cell-president-of-akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha.html https://sanjayrajput.com/2024/12/abhishek-singh-became-the-gorakhpur-city-youth-cell-president-of-akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha.html#respond Sat, 28 Dec 2024 14:34:39 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=954 Read more

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नशा मुक्ति केंद्र के संचालक दुर्गेश सिंह ‘चंचल’ को मोमेंटो और प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित

गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की मासिक बैठक शनिवार को नशा मुक्ति केंद्र के संचालक दुर्गेश सिंह ‘चंचल’ के बिलंदपुर स्थित कार्यालय पर आयोजित हुई जिसमें अभिषेक सिंह को महानगर अध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ) मनोनीत किया गया तथा युवाओं को नशे की लत से छुटकारा दिलाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र चलाकर समाज हित में अपना उत्कृष्ट योगदान देने हेतु उन्हें प्रशस्ति पत्र तथा मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

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बैठक में अपने संबोधन में वक्ताओं ने दुर्गेश सिंह चंचल द्वारा नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से समाज हित में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा की।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि अभिषेक सिंह के महानगर अध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ) बनाए जाने से संगठन की युवा टीम गोरखपुर में और अधिक मजबूत होगी।

प्रदेश अध्यक्ष पूर्वांचल प्रांत उग्रसेन सिंह ने कहा कि दुर्गेश सिंह चंचल नशामुक्ति के लिए जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं उससे समस्त क्षत्रिय समाज को उन पर गर्व है।

जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने कहा कि युवाओं को नशे की लत से छुटकारा दिलाना आज के समय में हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है। हमारा युवा जब तक नशे से दूर नहीं होगा हमारे देश की तरक्की संभव नहीं है।

मनोनीत महानगर अध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ) अभिषेक सिंह ने कहा कि संगठन ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है वे उसे निभाने का पूरा प्रयास करेंगे और महानगर में संगठन से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने की कोशिश करेंगे।

बैठक के दौरान राष्ट्रीय, प्रदेश तथा जिला कार्यकारिणी के दर्जनों पदाधिकारी तथा सदस्यगण उपस्थित रहे।

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लोनिया समाज द्वारा क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान को अपना पूर्वज बताना कितना सही? https://sanjayrajput.com/2024/11/prithviraj-chauhan-history-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2024/11/prithviraj-chauhan-history-in-hindi.html#respond Mon, 04 Nov 2024 13:31:53 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=832 Read more

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Prithviraj Chauhan History: इतिहास में एक बहुत ही पराक्रमी चौहान क्षत्रिय राजा हुए हैं पृथ्वीराज चौहान, जिनके बारे में हम सब भली भांति जानते हैं। विकिपीडिया के अनुसार पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) का जन्म 1166 ईस्वी में अजमेर के राजा सोमेश्वर चौहान और रानी कर्पूरादेवी के घर हुआ था। पिता की मृत्यु के बाद 13 साल की उम्र में ही उन्होंने अजमेर के राजगढ़ की गद्दी संभाल ली। वे एक महान योद्धा थे और उन्होंने मुस्लिम शासक मुहम्मद गौरी को युद्ध में 17 बार हराया था। Prithviraj Chauhan आवाज़ सुनकर लक्ष्य को भेदने में निपुण थे। भारतीय इतिहास के सबसे प्रसिद्ध हिन्दू राजपूत राजाओं में से एक पृथ्वीराज चौहान का राज्य राजस्थान और हरियाणा तक फैला था। 

साहसी और युद्ध कला में निपुण सम्राट पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) बचपन से ही तीर कमान और तलवारबाजी पसंद करते थे। कई पौराणिक लेखनों में इसका वर्णन किया गया है। इनमें सबसे लोकप्रिय कवि चंदबरदाई द्वारा लिखित ‘पृथ्वीराज रासो’ है, जो उन्हें “राजपूत” राजा के रूप में प्रस्तुत करता है। चंदबरदाई पृथ्वीराज के बचपन के मित्र और उनके राजकवि थे और उनकी युद्ध यात्राओं के समय वीर रस की कविताओं से सेना को प्रोत्साहित भी करते थे।

विकिपीडिया के अनुसार चौहान राजवंश के संस्थापक राजा वासुदेव चौहान माने जाते हैं। इतिहासविदों का मत है कि, चौहानवंशीय क्षत्रिय जयपुर के साम्भर तालाब के समीप में, पुष्कर प्रदेश में और आमेर-नगर में निवास करते थे। सद्य वे उत्तर भारत में विस्तृत रूप से फैले हैं। उत्तरप्रदेश राज्य के मैनपुरी, बिजनौर जिले में अथवा नीमराणा राजस्थान में बहुधा निवास करते हैं और नीमराणा से ये उत्तरप्रदेश और उत्तर हरियाणा में फ़ैल गये ।

चौहान वंश (चाहमान वंश) एक भारतीय राजवंश था जिसके शासकों ने वर्तमान राजस्थान, गुजरात एवं इसके समीपवर्ती क्षेत्रों पर ७वीं शताब्दी से लेकर १२वीं शताब्दी तक शासन किया। उनके द्वारा शासित क्षेत्र ‘सपादलक्ष’ कहलाता था। वे चरणमान (चौहान) कबीले के सबसे प्रमुख शासक परिवार थे।

चौहानों ने मूल रूप से शाकंभरी (वर्तमान में सांभर लेक टाउन) में अपनी राजधानी बनाई थी। 10वीं शताब्दी तक, उन्होंने राजपूत प्रतिहार जागीरदारों के रूप में शासन किया। जब त्रिपिट्री संघर्ष के बाद राजपूत प्रतिहार शक्ति में गिरावट आई, तो चमन शासक सिमरजा ने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की। 12वीं शताब्दी की शुरुआत में, अजयराजा ने राज्य की राजधानी को अजयमेरु (आधुनिक अजमेर) में स्थानांतरित कर दिया। इसी कारण से, चम्मन शासकों को अजमेर के चौहानों के रूप में भी जाना जाता है।

जैसा कि सर्वविदित है कि पृथ्वीराज चौहान (Prithviraj Chauhan) एक क्षत्रिय सम्राट थे और क्षत्रियों में जो चौहान सरनेम लिखने वाले क्षत्रिय हैं वे वर्तमान समय में अधिकतर हरियाणा, राजस्थान, मैनपुरी, बिजनौर, आगरा, नोएडा, मथुरा, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात आदि स्थानों पर निवास करते हैं।

अब बात करते हैं नोनिया या लोनिया बिरादरी की, जो पूर्वांचल में कुछ जगहों पर निवास करते हैं और ये लोग भी ‘चौहान’ सरनेम लिखते हैं। इन्हें ओबीसी की आरक्षित कैटेगरी में रखा गया है। सरकार द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र में इन्हें लोनिया (चौहान) के रूप में अंकित किया जाता है। इन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलता है।

हुआ ये कि लोनिया बिरादरी के लोगों का एक संगठन है अखिल भारतीय चौहान महासभा, जिसके द्वारा दिनांक 3 नवंबर को देवरिया जिले की सदर तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सरौरा के चौहान टोला में क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक का शिलान्यास देवरिया सदर से भाजपा विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी और खजनी के भाजपा विधायक श्रीराम चौहान के द्वारा किए जाने का कार्यक्रम रखा गया।

बता दें कि इस कार्यक्रम के जो पोस्टर बैनर और आमंत्रण पत्र छपे थे उन पर सिर्फ लोनिया बिरादरी के लोगों का ही नाम लिखा हुआ था। क्षत्रिय समाज के किसी भी व्यक्ति को न तो इस कार्यक्रम में बुलाया गया और न ही किसी का कहीं नाम ही दिया गया।

इसी बात को लेकर क्षत्रिय समाज उद्वेलित हो उठा। क्योंकि इस शिलान्यास कार्यक्रम की रूपरेखा से ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे पृथ्वीराज चौहान को लोनिया समाज के ये लोग अपना पूर्वज दर्शाते हुए ये कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे थे।

इसके बाद क्षत्रिय समाज के लोगों ने देवरिया जिला प्रशासन से अपना विरोध दर्ज कराया जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने यह शिलान्यास कार्यक्रम निरस्त कर दिया।

देवरिया प्रशासन द्वारा शिलान्यास कार्यक्रम निरस्त करने पर मीडिया में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अखिल भारतीय चौहान महासभा के देवरिया जिलाध्यक्ष जयनारायण चौहान ने कहा कि शासन प्रशासन का हम सम्मान करते हैं इसलिए शिलान्यास कार्यक्रम को स्थगित कर दिए हैं। शिलान्यास चौहान महासभा के लोग अपने दिल में कर लिए हैं। हम इसी स्थान पर मूर्ति का अनावरण करेंगे। उस समय देखते हैं कौन रोकता है। अगर क्षत्रिय समाज के वह वंशज थे तो क्षत्रिय समाज के लोग सिंह के साथ चौहान भी जोड़ें। हमारा समाज पृथ्वीराज चौहान को अपना पूर्वज मानता है।

अखिल भारतीय चौहान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डा. रामनाथ चौहान ने कहा कि क्षत्रिय समाज के द्वारा विरोध किए जाने पर चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक का शिलान्यास जिला प्रशासन ने रोक दिया, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर जुटे चौहान समाज के सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में शेष कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम को अखिल भारतीय चौहान महासभा के दर्जन भर लोगों ने सम्बोधित किया। शिलान्यास कार्यक्रम स्थगित जरूर हुआ है, किन्तु निकट भविष्य में हम चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक जरूर बनाएंगे। चक्रवर्ती सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जाति को लेकर जो दावा क्षत्रिय समाज कर रहा है वह सही नहीं है। इस सम्बंध में हम जिला प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।

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ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार तो सर्वविदित है कि पृथ्वीराज चौहान एक चौहान क्षत्रिय सम्राट थे लेकिन अब लोनिया समाज के लोग भी उन्हें अपना पूर्वज बताकर दावा कर रहे हैं कि वे उनके समाज के राजा थे। हालांकि उनके दावे का आधार सिर्फ चौहान सरनेम ही प्रतीत होता है। जबकि पृथ्वीराज चौहान के क्षत्रिय कुल का राजा होने के तमाम प्रमाण इतिहास में मौजूद हैं।

एक बड़े क्षत्रिय नेता अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहते हैं- ‘क्षत्रियों ने अपनी रियासतें तक देश की एकता और अखंडता के लिए दान कर दी। सीलिंग एक्ट लगाकर हमारी जमीन जायदाद सब सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया। जातिगत आरक्षण लागू कर हमें समाज में सबसे पीछे धकेलने की साजिश की गई और अब हमारे पूर्वजों और महापुरुषों को अपना बताकर उन्हें भी हथियाने की साजिश की जा रही है।’

वे आगे कहते हैं- ‘जो लोग हमारे महापुरुषों को अपना बता रहे हैं क्या उन्हें अपने पूर्वजों को अपना पूर्वज बताने में शर्म महसूस होती है? हमें अपने पूर्वजों पर गर्व है, उन्हें भी अपने ही पूर्वजों पर गर्व होना चाहिए। लिखने का क्या है आजकल तो कोई भी कुछ भी सरनेम लगा लेता है। सरनेम लगाने और असली होने में बहुत फर्क है।

राष्ट्रवादी क्षत्रिय संघ (भारत) के विशाल सिंह ‘दीपू’ का कहना है-

लोनिया समाज का स्वागत है, वे आएं, बस आरक्षण छोड़ दें। यदि लोनिया समाज खुद को क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान का वंशज मानता है तो अखिल भारतीय चौहान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लिखकर दें कि उनके समाज को आरक्षण का लाभ नहीं चाहिए। यदि वे क्षत्रिय राजा पृथ्वीराज चौहान के वंशज हैं तो उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं लेना चाहिए।”

*Disclaimer:- यह लेख ऐतिहासिक तथ्यों, विकिपीडिया तथा विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों पर आधारित है। यह लेखक के निजी विचार नहीं हैं।

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दूसरे समाज के लोगों द्वारा क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक का शिलान्यास कराए जाने पर भड़के क्षत्रिय समाज के लोग, कार्यक्रम हुआ निरस्त https://sanjayrajput.com/2024/11/people-of-kshatriya-community-got-angry-when-people-of-other-community-laid-the-foundation-stone-of-kshatriya-emperor-prithviraj-chauhan-memorial-the-program-was-cancelled.html https://sanjayrajput.com/2024/11/people-of-kshatriya-community-got-angry-when-people-of-other-community-laid-the-foundation-stone-of-kshatriya-emperor-prithviraj-chauhan-memorial-the-program-was-cancelled.html#respond Sun, 03 Nov 2024 10:57:13 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=829 Read more

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रविवार 3 नवंबर को देवरिया के सरौरा चौराहा (चौहान टोला) में नोनिया और बेलदार समाज के लोगों द्वारा क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक का शिलान्यास देवरिया से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और खजनी के भाजपा विधायक श्रीराम चौहान के द्वारा किए जाने की सूचना पर क्षत्रिय समाज के लोग उद्वेलित हो गए और देवरिया प्रशासन से अपना विरोध जताया, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन द्वारा इस कार्यक्रम को निरस्त कर दिया गया।

राष्ट्रवादी क्षत्रिय संघ (भारत) के अमित सिंह एडवोकेट ने बताया कि, हम लोगों को शनिवार को खबर मिली कि अखिल भारतीय चौहान महासभा के लोगों द्वारा रविवार को देवरिया के सरौरा चौराहा पर क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान स्मारक का शिलान्यास कराए जाने का कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में किसी भी क्षत्रिय समाज के व्यक्ति को न तो आमंत्रित किया गया है और न ही क्षत्रिय समाज के लोगों को इस कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इससे साफ प्रतीत होता है कि बेलदार और नोनिया बिरादरी के लोग जो चौहान सरनेम लिखते हैं वे एक साजिश के तहत क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान को अपना पूर्वज साबित करना चाहते हैं। इसलिए हमने देवरिया प्रशासन से अपना विरोध दर्ज कराया जिसके पश्चात इस कार्यक्रम को निरस्त कर दिया गया।

राष्ट्रवादी क्षत्रिय संघ (भारत) के विशाल सिंह ने कहा कि, इतिहास में वर्णित है कि पृथ्वीराज चौहान क्षत्रिय जाति के महाराजा थे। इतिहास को गलत बताकर महापुरुष को उनके कुल परंपरा से हटाकर सम्मानित करना उचित नहीं है। क्योंकि वह हमारे महापुरुष थे हम सब उनके वंशज हैं इसलिए समाज के लोगों के साथ मिल जुलकर मूर्ति की स्थापना करना चाहिए, इससे आपसी सौहार्द भाईचारा भी बना रहता। लेकिन इस तरह से शिलान्यास करना गलत है, क्षत्रिय समाज इसकी अनुमति नहीं देता।

शिलान्यास करने वाले नेता जो पढ़ें लिखे व्यक्ति हैं और इतिहास को जानते हैं, उन्हें भी सोचना चाहिए कि हम क्या करने जा रहे हैं, क्या इसका असर अन्य लोगों पर नहीं पड़ेगा।

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अभियंता अमरेश सिंह को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने किया सम्मानित https://sanjayrajput.com/2024/11/er-amresh-singh-honored-by-akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha.html https://sanjayrajput.com/2024/11/er-amresh-singh-honored-by-akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha.html#respond Sat, 02 Nov 2024 07:38:22 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=819 Read more

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बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए डीएम गोंडा द्वारा किया जा चुका है सम्मानित

गोरखपुर। समाज में अपने उत्कृष्ट कार्यों से अलग पहचान बनाने वाले लोगों को सम्मानित करने के क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर द्वारा जिलाध्यक्ष लालू सिंह के नेतृत्व में बाढ़ कार्यखंड गोंडा में सहायक अभियंता के तौर पर कार्यरत अमरेश कुमार सिंह को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

बता दें कि बांसगांव के मूल निवासी अमरेश कुमार सिंह विगत 2016 से बाढ़ कार्यखंड गोंडा में बतौर सहायक अभियंता कार्यरत हैं। इस दौरान बाढ़ से बचाव और बांध टूटने से बचाने हेतु उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पिछले दिनों उन्हें गोंडा की डीएम नेहा शर्मा द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया था।

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इस अवसर पर जिलाध्यक्ष लालू सिंह, मंडल उपाध्यक्ष इंद्रसेन सिंह, वरिष्ठ जिला महामंत्री राजकुमार सिंह, जिलाध्यक्ष बौद्धिक प्रकोष्ठ डॉ. उमेश सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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शहीद बंधु सिंह की धरती से हुआ क्षत्रिय एकता का शंखनाद, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की चौरी-चौरा इकाई गठित https://sanjayrajput.com/2024/08/akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha-chaurichaura-unit-formed.html https://sanjayrajput.com/2024/08/akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha-chaurichaura-unit-formed.html#respond Mon, 26 Aug 2024 01:01:15 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=739 Read more

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आज लोग एक एक इंच जमीन के लिए लड़ रहे हैं जबकि हमारे पूर्वजों ने अपनी 565 रियासतें देश की एकता और अखंडता के लिए दान कर दी: लालू सिंह 

आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर देने वाले पूर्वांचल के अमर शहीद बंधु सिंह की धरती चौरी चौरा से क्षत्रिय एकता का शंखनाद किया गया है। संगठन विस्तार के क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर जिला इकाई अंतर्गत चौरी-चौरा तहसील कार्यकारिणी का गठन रविवार को किया गया।

इस अवसर पर संगठन के गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने मनोनीत पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी सदस्य और पदाधिकारीगण अपने क्षेत्र में सामाजिक कार्य कर अपने कुलवंश को गौरवान्वित करें। इतिहास गवाह है कि क्षत्रियों ने मातृभूमि और देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। आज लोग एक एक इंच जमीन के लिए लड़ रहे हैं जबकि हमारे पूर्वजों ने अपनी 565 रियासतें देश की एकता और अखंडता के लिए दान कर दी थी।

चौरी चौरा तहसील कार्यकारिणी में तहसील अध्यक्ष शिवहरि सिंह, तहसील उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह, वरिष्ठ महामंत्री अखिलेश कुमार सिंह, तहसील मीडिया प्रभारी विनोद कुमार सिंह, तहसील कोषाध्यक्ष सतीश चंद, ब्रह्मपुर ब्लॉक अध्यक्ष शिव नारायण सिंह, मंत्री रवि प्रकाश चंद तथा संगठन मंत्री अरुण कुमार सिंह को बनाया गया है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल प्रांत प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह, जिला संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय चंद, वरिष्ठ महामंत्री राजकुमार सिंह, जिला महामंत्री राजू सिंह नन्हे, जिलाध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ दीपक सिंह, जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षा प्रकोष्ठ डॉ. उमेश सिंह सहित चौरी चौरा और गोरखपुर जिला इकाई के सभी लोग उपस्थित रहे।

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर की समीक्षा बैठक हुई आयोजित, एकजुट होने का लिया गया संकल्प https://sanjayrajput.com/2024/08/abkm-gorakhpur-meeting-held-in-madhav-lawn.html https://sanjayrajput.com/2024/08/abkm-gorakhpur-meeting-held-in-madhav-lawn.html#respond Sun, 11 Aug 2024 11:49:49 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=709 Read more

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क्षत्रिय एक जाति नहीं धर्म है- लालू सिंह

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर की समीक्षा बैठक रविवार को माधव लॉन में संपन्न हुई। जिसमें संगठन के विस्तार और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पूर्वांचल प्रांत उग्रसेन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने समाज के युवाओं का आह्वान करते हैं कि वे आगे आएं और नेतृत्व करें, हम अभिभावक के तौर पर उनके साथ हैं।

बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने कहा कि क्षत्रिय एक जाति नहीं धर्म है। हम समाज के हर शोषित, पीड़ित और दबे कुचले की मदद को हमेशा तैयार हैं। हमारा संगठन स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, रक्तदान, खेलकूद और रोजगार जैसे सामाजिक कार्यों में भी निरंतर सक्रिय है।

बैठक को प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, प्रदेश महामंत्री डॉ. महेश्वर सिंह, मंडल अध्यक्ष आरपी सिंह, वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह, जिला संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, जिलाध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ दीपक सिंह, मंडल महामंत्री मानवेंद्र प्रताप सिंह, संगठन मंत्री युवा प्रकोष्ठ सावन शाही, राघवेंद्र प्रताप सिंह, राजकुमार सिंह, नवीन प्रताप सिंह, आलोक सिंह विशेन आदि ने भी संबोधित किया।

इस समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश संरक्षक कैलाश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ केपी राव, प्रदेश सचिव संजय कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षा प्रकोष्ठ डॉ. उमेश सिंह, संजीत सिंह, सुनील सिंह, अनिल सिंह राठौर, कमांडो अजीत सिंह, आलोक सिंह, विजेंद्र सिंह, संगम सिंह, सौरभ चंद कौशिक सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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सावन शाही बने क्षत्रिय महासभा युवा इकाई के संगठन मंत्री https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9.html https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9.html#respond Mon, 15 Jul 2024 06:35:00 +0000 Read more

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-हरित गोरखपुर अभियान चला रहे सावन शाही के आने से संगठन को मिलेगी मजबूती: लालू सिंह
गोरखपुर। दक्षिणांचल में स्थित रियांव (गगहा) निवासी सावन शाही को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा इकाई गोरखपुर का संगठन मंत्री बनाया गया है। गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने रविवार को एक बैठक में संगठन मंत्री प्रवीण सिंह की संस्तुति पर सावन शाही को युवा इकाई का संगठन मंत्री मनोनीत किया। 
इस अवसर पर पूर्वांचल प्रांत के प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह ने भी अपनी सहमति दी तथा युवा इकाई गोरखपुर मंडल अध्यक्ष अनुज सिंह “कटका” एवम युवा इकाई जिलाध्यक्ष दीपक चंद की उपस्थिति में उन्हें मनोनयन पत्र दिया गया। 
प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह ने माल्यार्पण कर सावन शाही का अभिनंदन करते हुए कहा कि हमें पूर्ण विश्वास है कि वे पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।  
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने कहा कि सावन शाही ने ‘हरित गोरखपुर अभियान’ चलाकर वृक्षारोपण के लिए अपना अमूल्य योगदान दिया है। उनके जैसे युवाओं के हमारे संगठन से जुड़ने से हमारा संगठन और अधिक मजबूत होगा।
सावन शाही के संगठन मंत्री युवा इकाई बनाए जाने पर प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह, जिला महामंत्री राजू सिंह नन्हे, जिला मंत्री राणा रणजीत सिंह, जिला सचिव संजय सिंह, जिला उपाध्यक्ष अर्जुन सिंह, अमित सिंह भोलू, डॉ. शिव शंकर शाही, डॉ. वाई सिंह, जसवंत सिंह, राजकुमार सिंह, आरपी सिंह, मानवेंद्र प्रताप सिंह, अनुज सिंह “कटका”, दीपक चंद, प्रवीण सिंह सहित अन्य लोगों ने उन्हें बधाई दी है।

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क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री की देवरिया व गोरखपुर जिलाध्यक्ष के साथ लखनऊ में हुई बैठक https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f.html https://sanjayrajput.com/2024/07/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f.html#respond Sat, 13 Jul 2024 14:50:00 +0000 Read more

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-हर जिले में संगठन को मजबूती प्रदान करें तथा निष्ठावान लोगों का सम्मान बढ़ाएं- राघवेंद्र सिंह ‘राजू’
गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ द्वारा शनिवार को लखनऊ में संगठन के गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह तथा देवरिया जिलाध्यक्ष राजेश सिंह श्रीनेत के साथ एक आवश्यक मीटिंग की गई।
मीटिंग के दौरान राष्ट्रीय महामंत्री राघवेन्द्र सिंह ‘राजू’ ने बताया कि जल्द ही पूर्वांचल प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक गोरखपुर मुख्यालय पर होगी। जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद कुंवर हरिवंश सिंह भी उपस्थित रहेंगे।
उन्होंने सभी पदाधिकारियों से कहा कि संगठन को पूर्वांचल के हर जिलों मे मजबूती प्रदान करें तथा निष्ठावान लोगो का सम्मान बढ़ाएं। एक सितंबर राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में राष्ट्रीय पदाधिकारियों को प्रभारी एवं सह प्रभारी बनाया जाएगा। 28 जुलाई को वाराणसी बिन्ध्य प्रदेश कार्यकारिणी बैठक वाराणसी में होगी। एक अगस्त को जैत छटीकरा मथुरा में महाराणा प्रताप भवन निर्माण शुभारंभ एवम ब्रज प्रदेश सम्मेलन आयोजित होगा। उन्होंने सभी पदाधिकारियों का आह्वान किया कि संगठन के सदस्यता अभियान को बढ़ाएं।
वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेन्द्र सिंह ‘राजू’ ने कहा कि छल कपट, षड्यंत्र से समाज को कुछ लोगों ने कमजोर किया। हर संगठन में अनुशासन जरूरी है, अनुशासन से आप शासन ठीक से कर सकते हैं।
बिखरा संगठन, बिखरा समाज दूसरे समाज को बादशाह बना रहा है।
बैठक में जिलाध्यक्ष गोरखपुर लालू सिह ने कहा कि पूर्वांचल में हमारा संगठन बहुत मजबूत होगा। बहुत छोटे संगठन हमारे साथ सम्बद्ध होने जा रहे हैं। अगस्त या सितंबर मे पूर्वांचल प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक प्रदेश अध्यक्ष से वार्ता कर रखा जाएगा। मिशन क्षत्रिय हमारा तभी सार्थक होगा जब हम एक दूसरे का सम्मान करेंगे। 28 सितंबर पटना मे महापंचायत रैली ऐतिहासिक होगी। 
देवरिया जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश कार्यालय संचालन मे हमारा जिला हर संम्भव सहयोगी बनेगा। बैठक के दौरान दोनों जिलों में संगठन के विस्तार पर भी चर्चा की गई।
इस मीटिंग में मुख्य रूप से वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र सिंह ‘राजू’, राजेश सिंह श्रीनेत, जिलाध्यक्ष देवरिया, लालू सिंह जिलाध्यक्ष गोरखपुर, कृष्ण बिहारी सिंह संरक्षक देवरिया, जय हरि सिंह संगठन मंत्री देवरिया तथा प्रवीण सिंह संगठन मंत्री गोरखपुर, आलोक सिंह, केपी सिंह तथा अवध प्रदेश अध्यक्ष दयाशंकर सिंह भी मौजूद रहे।

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दिवेर का महायुद्ध: हल्दीघाटी के बाद जहां महाराणा प्रताप ने मुगलों को चटाई थी धूल https://sanjayrajput.com/2024/01/battle-of-dewair-1582.html https://sanjayrajput.com/2024/01/battle-of-dewair-1582.html#comments Mon, 29 Jan 2024 02:44:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2024/01/29/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%98/ Read more

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मुगल बादशाह अकबर (Mughal Emperor Akbar) का सबसे खतरनाक सेना नायक हुआ करता था बहलोल खां। उसकी हाइट लगभग 7 फुट 8 इंच थी। कहा जाता है कि घोड़ा भी उसके सामने छोटा लगता था और वह अपने नाश्ते में एक बड़े बकरे के मांस जितना नाश्ता खा जाता था। बहुत चौड़ा और ताकतवर था बहलोल खां। कहा जाता है कि उसका हाथी जैसा बदन था और ताक़त का जोर इतना कि नसें फटने को होती थीं। 
अपने पूरे जीवन में एक भी लड़ाई कभी हारा नहीं था ये बहलोल खां। बादशाह अकबर (Mughal Emperor Akbar) को बहलोल खां पर बहुत नाज था। युद्ध में लूटी हुई औरतों में से बहुत सी बहलोल खां को सौंप दी जाती थी। शरीर से काफी भारी भरकम बहलोल खान की दानवता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 1 दिन के बच्चे को भी क्रूरता से मार देता था।
महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) मेवाड़ (Mewad) के सिसोदिया वंश के राजकुमार थे। वे आजीवन मेवाड़ की सुरक्षा के लिए लड़ते रहे। वे मेवाड़ की सुरक्षा स्वतंत्रता और आजादी के लिए लड़ते रहे। वह अपने ही धुन के रखवाले थे । महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ऊंची कद काठी और भारी-भरकम हथियारों से हमेशा लैस रहते थे। महाराणा प्रताप ने मेवाड़ को अकबर से आजाद कराने के लिए शपथ भी खाई थी कि वे जब तक मेवाड़ को मुगलों से आजाद नहीं करवा लेते तब तक वे ना राजशाही बिस्तर पर सोएंगे, ना ही राजसी भोजन करेंगे और राजशाही सुखों का त्याग करेंगे और उन्होंने ऐसा ही किया भी।
मुगलों से लड़ते हुए महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को काफी दुखों का सामना करना पड़ा था। घास की रोटी भी खानी पड़ी थी लेकिन फिर भी उन्होंने कभी मुगलों के अधीन होना स्वीकार नहीं किया था।
दिवेर का महायुद्ध (Battle of Dewair 1582)
इतिहास में दर्ज है कि 1576 में हुए हल्दीघाटी युद्ध (Battle of Haldighati) के बाद भी अकबर ने महाराणा को पकड़ने या मारने के लिए 1577 से 1582 के बीच करीब एक लाख सैन्य बल भेजे। अंगेजी इतिहासकारों ने लिखा है कि हल्दीघाटी युद्ध का दूसरा भाग जिसको उन्होंने ‘बैटल ऑफ दिवेर’ (Battle of Dewair) कहा है, मुगल बादशाह के लिए एक करारी हार सिद्ध हुआ था।  
कर्नल टॉड ने भी अपनी किताब में जहां हल्दीघाटी को ‘थर्मोपल्ली ऑफ मेवाड़’ की संज्ञा दी, वहीं दिवेर के युद्ध (Battle of Dewair) को ‘मेवाड़ का मैराथन’ बताया है (मैराथन का युद्ध 490 ई.पू. मैराथन नामक स्थान पर यूनान केमिल्टियाड्स एवं फारस के डेरियस के मध्य हुआ, जिसमें यूनान की विजय हुई थी, इस युद्ध में यूनान ने अद्वितीय वीरता दिखाई थी)। 
कर्नल टॉड ने महाराणा और उनकी सेना के शौर्य, युद्ध कुशलता को स्पार्टा के योद्धाओं सा वीर बताते हुए लिखा है कि वे युद्धभूमि में अपने से 4 गुना बड़ी सेना से भी नहीं डरते थे। 
दिवेर युद्ध (Battle of Dewair) की योजना महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने अरावली स्थित मनकियावस के जंगलों में बनाई थी। भामाशाह द्वारा मिली राशि से उन्होंने एक बड़ी फौज तैयार कर ली थी। बीहड़ जंगल, भटकावभरे पहाड़ी रास्ते, भीलों, राजपूत, स्थानीय निवासियों की गुरिल्ला सैनिक टुकड़ियों के लगातार हमले और रसद, हथियार की लूट से मुगल सेना की हालत खराब कर रखी थी।
हल्दीघाटी (Battle of Haldighati) के बाद अक्टूबर 1582 में दिवेर का युद्ध (Battle of Dewair) हुआ। इस युद्ध में मुगल सेना की अगुवाई करने वाला अकबर (Akbar) का चाचा सुल्तान खां था। विजयादशमी का दिन था और महाराणा ने अपनी नई संगठित सेना को दो हिस्सों में विभाजित करके युद्ध का बिगुल फूंक दिया। एक टुकड़ी की कमान स्वयं महाराणा (Maharana Pratap) के हाथ में थी, तो दूसरी टुकड़ी का नेतृत्व उनके पुत्र अमर सिंह कर रहे थे।  
 
महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की सेना ने महाराज कुमार अमर सिंह के नेतृत्व में दिवेर के शाही थाने पर हमला किया। यह युद्ध इतना भीषण था कि प्रताप के पुत्र अमर सिंह ने मुगल सेनापति पर भाले का ऐसा वार किया कि भाला उसके शरीर और घोड़े को चीरता हुआ जमीन में जा धंसा और सेनापति मूर्ति की तरह एक जगह गड़ गया।
अकबर महाराणा प्रताप से बहुत डरता था इसलिए वो खुद दिवेर युद्ध (Battle of Dewair) से दूर रहा। अकबर ने नरपिशाच बहलोल खां को भिड़ा दिया हिन्दू वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से। लड़ाई पूरे जोर पर थी और मुगलई गंद खा-खा के ताक़त का पहाड़ बने बहलोल खां का सामना हो गया वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप से।
अफीम के ख़ुमार में डूबी हुई सुर्ख नशेड़ी आँखों से भगवा अग्नि की लपट सी प्रदीप्त रण के मद में डूबी आँखें टकराईं और शुरू हुई जबरदस्त भिडंत। कुछ देर तक तो महाराणा प्रताप यूँ ही मज़ाक सा खेलते रहे मुगलिया बिलाव के साथ और फिर गुस्से में आकर अपनी तलवार के एक ही वार से घोड़े सहित हाथी सरीखे उस नरपिशाच का पूरा धड़ बिलकुल सीधी लकीर में चीर दिया। ऐसा फाड़ा कि बहलोल खां का आधा शरीर इस तरफ और आधा उस तरफ गिरा।
स्थानीय इतिहासकार बताते हैं कि दिवेर के इस युद्ध (Battle of Dewair 1582) के बाद यह कहावत बनी कि “मेवाड़ के योद्धा सवार को एक ही वार में घोड़े समेत काट दिया करते हैं”।  
दिवेर के युद्ध (Battle of Dewair) में अपने सिपाहसालारों की यह गत देखकर मुगल सेना में बुरी तरह भगदड़ मची और राजपूत सेना ने अजमेर तक मुगलों को खदेड़ा। भीषण युद्ध के बाद बचे-खुचे 36000 मुग़ल सैनिकों ने महाराणा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। 
दिवेर के युद्ध (Battle of Dewair) ने मुगलों के मनोबल को बुरी तरह तोड़ दिया। दिवेर के युद्ध के बाद प्रताप ने गोगुंदा, कुम्भलगढ़, बस्सी, चावंड, जावर, मदारिया, मोही, माण्डलगढ़ जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्ज़ा कर लिया।   
 
स्थानीय इतिहासकार बताते हैं कि इसके बाद भी महाराणा (Maharana Pratap) और उनकी सेना ने अपना अभियान जारी रखते हुए सिर्फ चित्तौड़ को छोड़ के मेवाड़ के अधिकतर ठिकाने/ दुर्ग वापस स्वतंत्र करा लिए। यहां तक कि मेवाड़ से गुजरने वाले मुगल काफिलों को महाराणा को रकम देनी पड़ती थी।
ऐसे-ऐसे युद्ध-रत्न उगले हैं सदियों से भगवा चुनरी ओढ़े रण में तांडव रचने वाली हमारी मां भारती ने।
महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के पास कभी कोई बड़ा साम्राज्य नहीं था, उनके पास कभी सोने का सिंहासन नहीं था, उनके पास सोने के लिए सोने की खाट या भोजन करने के लिए सोने के बर्तन नहीं थे, उन्होंने कभी भी एक शाही राजा की तरह अपना जीवन नहीं जिया, जैसा कि अकबर (Mughal Emperor Akbar) और उनकी संप्रभुता के तहत अधिकांश शासकों के पास था।
महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने कभी गुलामी नहीं स्वीकार की और इसलिए उनका नाम भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। वह दुनिया भर में एक प्रेरणा बन गए। अमेरिकी सेना से वियतनाम की जीत एक ऐसा महान उदाहरण है जिसमें वियतनाम के लोगों ने हल्दीघाटी युद्ध (Battle of Haldighati) के बाद महाराणा (Maharana Pratap) और उनके जीवन भर के संघर्ष की प्रशंसा की जिसके कारण वे लंबे समय तक शक्तिशाली अमेरिकी सेना से लड़ने में सक्षम हुए और अंततः उनकी जीत हुई, बिल्कुल महाराणा प्रताप की गुरिल्ला जैसी समान युद्ध रणनीति के साथ।
जय महाराणा प्रताप!!
जय राजपूताना!!
*नोट :- यह लेख विभिन्न इतिहासकारों के लेखों पर आधारित है

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सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या से सबक लेते हुए एकजुट हों https://sanjayrajput.com/2023/12/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80.html https://sanjayrajput.com/2023/12/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80.html#respond Fri, 08 Dec 2023 02:10:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/12/08/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80/ Read more

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सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हाल ही में हुई नृशंस हत्या हमें ये संदेश देने के लिए काफी है की इस देश में क्या माहौल चल रहा है।
कुछ दिनों पहले जब जेएनयू की दीवारों पर लिखा गया था कि, “ब्राह्मण बनिया भारत छोडो” तब सुखदेव जी गोगामेड़ी ने दहाडते हुए कहा था कि, “ब्राह्मण बनिया को भारत छुडवाने वालो को पहले क्षत्रियों की तलवारों से गुजरना होगा”
सनातन के रक्षक सनातन शिरोमणि भगवा के रक्षक बहुत सारे मुगलों की आंखों में भी खटक रहे थे, पाकिस्तान से भी धमकियां आ रही थी। कारण गोगामेड़ी जी सनातन को मजबूत कर रहे थे, बहुत बड़े स्तर पर, सनातन को समाप्त करने की कड़ी में यह हत्या हुई है। 
राजस्थान में कांग्रेस की हार के तुरंत बाद इस तरह की घटना होना वहां की निवर्तमान सरकार को भी शक के दायरे में लाता है। जाट भी नाराज थे। सीबीआई, एनआईए से इसकी गहन जांच होनी चाहिए तभी सच्चाई बाहर आएगी। 
गहलोत सरकार ने सुरक्षा नहीं दिया, कारण मुसलमानो का वोट बैंक। लगता है कि ये लोग यही चाहते हैं कि चुन चुन कर भारत के सभी हिंदुओं के बड़े नेताओं को मार दिया जाए, ताकि भविष्य में इस्लामिक देश बनाने मे आसानी हो।
क्षत्रियों को आदिकाल से आज तक षड्यंत्रों द्वारा हराया और मारा गया है। एक बार जरुर ध्यान से सोचें कि समाज में हर कोई क्षत्रिय जैसा उपाधि चाहता है लेकिन क्षत्रिय किसी को पसंद नही, क्योंकि किसी को अपने ऊपर शासन करने वाला पसंद नही होता। आज क्षत्रियों के विरुद्ध राजनैतिक और सामाजिक षड्यंत्र चल रहा है कि इन्हें सत्ता और प्रभाव से कैसे दूर रखा जाए और हमें नष्ट करने में प्रयोग हमारे क्षत्रिय समाज के ही चंद लोग किए जाते हैं और पूरा क्षत्रिय समाज मौन रहता है। धीरे धीरे आज हमारी, कल तुम्हारी बारी आती है। 
कभी आपने देखा किसी दूसरे समाज के विरुद्ध अगर किसी ने कुछ किया या बोला तो उसका पूरा समाज एकजुट होकर अपनी मांगे मगवाने तक आंदोलन करता है और किसी से ना तो डरते हैं और ना ही संकोच करते हैं कि कौन क्या कहेगा और क्या सोचेगा। जिसकी वजह से उनकी सारी मांगे मानी जाती है और आगे उनके विरूद्ध कोई और नहीं बोलता।
आज एक बार फिर क्षत्रिय के नाम पर एक राजपूत संगठन के मुखिया को दिनदहाड़े गोली मार दी जाती है और पूरा समाज मौन होकर देख रहा है कि क्षत्रिय समाज क्या कर सकता है। बहुत से लोग अपमानजनक टिप्पणियां भी कर रहें हैं।
आज समाज का सबसे मजबूत संदेश सोशल मीडिया द्वारा दिया जाता है। सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या हुई है और चंद क्षत्रिय भाई ही सोशल मीडिया से सड़क तक संघर्ष कर रहे हैं, परंतु इससे कुछ खास नहीं होने वाला है जब तक पूरा क्षत्रिय समाज बाहर नहीं आयेगा। 
आप अगर सड़क से सदन तक नहीं लड़ सकते तो आप सभी रक्तवंशी अपने अपने सोशल मीडिया द्वारा और अन्य माध्यमों से अपने समाज के लिए न्याय और सम्मान के लिए सामने आइए। सभी के सोशल मीडिया पर न्याय की लड़ाई जरूर हो। 
अगर जिनके डीएनए और रक्त वाहिनियों में क्षत्रिय रक्त नही हो वो घर में मुंह छुपाके बैठ सकता है लेकिन जब ऐसे नामर्दों पर कोई अत्याचार होगा उस समय उनके साथ कौन खड़ा होगा जरूर सोचें।
आओ एक बार अपने पूर्वजों और शूरवीरों को याद कर एक कदम आगे बढ़ाते हैं अपने रक्तवंशियों के लिए। अगर आपने हुंकार भरी तो सुखदेव सिंह के असली हत्यारे और षड्यंत्रकर्ता दंडित होंगे और कोई दूसरा किसी क्षत्रिय के विरुद्ध षडयंत्र नही करेगा।
आज आपके वजूद की लड़ाई है, सभी साथी एक साथ अपने विभिन्न माध्यमों से आवाज उठाएं ताकि हत्यारों को फांसी हो और षड्यंत्र करने वाले बेनकाब हों।
याद रखें, जो कौम अपने हक और इंसाफ के लिए लड़ना नहीं जानती उसका अस्तित्व ही एक दिन दुनिया से मिट जाता है।
जय भवानी!!
जय राजपूताना!!

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ठाकुर का क्या? https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be.html https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be.html#respond Sun, 01 Oct 2023 03:20:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/10/01/%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/ Read more

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Manoj Jha Statement: संसद में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने ‘ठाकुर का कुआँ’ कविता पढ़ी थी.
‘ठाकुर का कुआँ’ ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविता है. ओमप्रकाश वाल्मीकि ख़ुद दलित थे. लेकिन संसद में इसे पढ़ने वाले मनोज झा ब्राह्मण हैं.
मनोज झा ने ओम प्रकाश वाल्मीकि की ये कविता पढ़ी थी-
चूल्‍हा मिट्टी का
मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का
भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का
बैल ठाकुर का
हल ठाकुर का
हल की मूठ पर हथेली अपनी
फसल ठाकुर की
कुआं ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्‍ले ठाकुर के
फिर अपना क्‍या ?
गांव ?
शहर ?
देश ?

मनोज झा ने कविता सुनाने के साथ ही ये बातें भी कही- 

‘वो ठाकुर मैं भी हूं, वो ठाकुर संसद में है,
वो ठाकुर विश्वविद्यालयों में है,
वो ठाकुर विधायिका को कंट्रोल करता है,
इस ठाकुर को मारो, जो हमारे अंदर है.’
अब इस कविता के 6 जवाब नीचे कविता के रूप में ही दिए गए हैं उन्हें भी पढ़ लीजिए-

जवाब नं.1
रणभूमि में जो शीश गिरा, वो पहला शीश था ठाकुर का !
जौहर में जो उठी चितायें, उसमें शौर्य छिपा था ठाकुर का ! 
मर्यादा के जो थे पुरुषोत्तम, उन प्रभु राम में भी था खून ठाकुर का ! 
जिसने खाई घास की रोटी, वो राणा भी एक ठाकुर था ! 
जिसने गौरी को धूल चटाई, वो चौहान भी ठाकुर था!
जिस भारत के तुम वासी हो, वो नाम भी था एक ठाकुर का ! 
जिस इतिहास पर तुम गर्व कर रहे, वो इतिहास भी है उस ठाकुर का ! 
जवाब नं.2
कुँआ ठाकुर का था पर कभी लोग राजतंत्र में प्यासे नहीं मरे.
बाजरे का खेत ठाकुर का था पर कोई भूखा नहीं मरता था.
बैल ठाकुर के हल ठाकुर का हल की मूठ पर हाथ किसान का पर किसान आत्महत्या नही करते थे, उनकी हर ज़रूरत पूरी की ठाकुर ने. उसके परिवार को पालने का एक मात्र साधन था ठाकुर के बैल और हल.
गाँव ठाकुर के, शहर ठाकुर के, देश ठाकुर का, क्योंकि मातृभूमि के लिए अपना और अपने बच्चों तक का खून देने वाला ठाकुर अपने देश और जनता के लिए ही जीता था, आक्रांताओ के आगे खडा होकर, बलिदान देकर.
जवाब नं.3
देश सबका, धर्म सबका, सिर कटा ठाकुर का. सेना ठाकुर की, राज ठाकुर का, हर युद्ध में बलिदान ठाकुर का.
तुम्हारा क्या?
जौहर ठकुराइन का, साका ठाकुर का,
सिर कटा तो धड़ लड़ा ठाकुर का.
तुम्हारा क्या?
देश की हर रियासत, दान की ठाकुर ने‌ तो ये भारत देश बना. खुद के लिए ना रखा कुछ वो दिल था ठाकुर का.
तुम्हारा क्या?
गली मोहल्ले ठाकुर के, इतिहास ठाकुर का, फिर क्यों हो रहा है अपमान ठाकुर का?
शिक्षा सबकी, रोजगार सबका, फिर क्यों हो रहा है बहिष्कार ठाकुर का?
जमीन ठाकुर की, देश ठाकुर का, खेत खलिहान ठाकुर का, शहर-गाँव ठाकुर का, युद्ध में कटे सर ठाकुर का, फिर क्यों नहीं मानता आज एहसान कोई ठाकुर का?

जवाब नं.4
मीडिया तुम्हारी, अखबार तुम्हारे, एंकर तुम्हारे, पार्टियां तुम्हारी, प्रोपेगंडा तुम्हारा, फिर भी प्रिविलेज ठाकुर का?
सिनेमा तुम्हारा, प्रोड्यूसर तुम्हारे, स्क्रीनप्ले तुम्हारे, हीरो तुम्हारे, विलेन हमारे, फिर भी जातिवाद ठाकुर का?
न्यायपालिका तुम्हारी, जज तुम्हारे, कानून तुम्हारा, फिर भी दादागिरी ठाकुरों की?
ब्यूरोक्रेसी तुम्हारी, सिस्टम तुम्हारा, व्यवस्था तुम्हारी, मगर सरकार ठाकुर की?
पक्ष तुम्हारा, विपक्ष तुम्हारा, मुद्दे तुम्हारे, देश तुम्हारा, ठाकुर का क्या?
जवाब नं.5
कभी क़ासिम तो कभी गजनी से भिड़ा ठाकुर. हार तो तय थी पर लड़ा ठाकुर.
हारना ही था उसे, वो अकेला लड़ा था,
क्या जन्मभूमि ये तुम्हारी नहीं थी ? फिर क्यों अकेला लड़ा ठाकुर ?
बीवी सती हुई, बच्चे अनाथ, हिन्दू तो बचा पर, भरी जवानी में मरा ठाकुर.
सदियों से रक्त दे माटी को सींचा, जन्मभूमि और धर्म की वेदी पर मिटा ठाकुर.
मौत होती तो भी लड़ लेता, पर अपनों की घृणा से अब सहमा ठाकुर.
जिनके लिए सब कुछ खोया, क्यों उनकी ही नज़रों में बुरा?
फ़िल्मों का ठाकुर !
क़िस्सों-कहानियों का ठाकुर !
कविताओं का ठाकुर !
जब दुबक बैठे थे घरों में सब तमाशबीन,
तब पीढियां युद्धभूमि में बलिदान कर रहा था ठाकुर.
आज बुद्धिजीवी पानी पी पीकर बरगलाते और कोसते कि आखिर कौन है ये ठाकुर?
कौन बताए उन्हें कि कफन केशरिया करके, मूंछों पर तांव देकर मौत को गले लगाने वाला जांबाज ही था ठाकुर.

जवाब नं.6
सिर्फ कुएं की बात नहीं, कुछ बात करो शमशीरों की।
मिट गए देश हित सब के सब, कुछ बात करो उन वीरों की।
हां कुआं रहा ठाकुर का था, ठाकुर जी ने बनवाया था।
संपूर्ण प्रजा की प्यास बुझे, इस हेतु यज्ञ करवाया था।
बेशक अपने घर में ठाकुर, कुछ रूखा सूखा खाते थे।
रमुआ की बिटिया की शादी कैसे होगी समझाते थे।
कलुआ के लड़के का इलाज, भी तो हमको करवाना है।
पट्टे का पिता मर गया है, उसका भी काम कराना है।
कासिम से लेकर गोरी तक, ठाकुर ने ही ललकारे थे।
मर गए कट गए स्वयं मगर, दुश्मन गिन गिन कर मारे थे।
सतयुग में हरिश्चंद्र ठाकुर ने मान सत्य का रखा सुनो।
त्रेता में रामचंद्र ने आ, केवट को माना सखा सुनो।
द्वापर में शांतनु ने भी है, मछुवारिन का उद्धार किया।
पद दिया राजमाता वाला, था सच्चे मन से प्यार किया।
आ जाओ कलयुग वाली भी कुछ कथा कहानी सुन लो तुम। 
क्यों मरे नहीं प्यासे सारे, यदि रोका पानी सुन लो तुम।
सय्याजी गायकवाड राज, ठाकुर कुल के सिरमौर रहे।
शासक वे रहे प्रजा वत्सल, चर्चे उनके चहुं ओर रहे।
दे दिया अकूत खजाना जब, तब भीमराव पढ़ सके सुनो।
ठाकुर की कृपा रही केवल, अपना भविष्य गढ़ सके सुनो।
वरना जैसे तेरह बच्चे, गुमनाम हुए अंधियारों में।
इनका भी हाल वही होता, खो जाते कहीं जवारों में।
जगनिक ने यूं ही नहीं लिखा, क्षत्रिय जीवन अट्ठारह का।
बलिदानों की परिपाटी में, हर दांव लगा पौ बारह का।
कुछ बे पेंदी के लोटे अब, बलिदानों को ललकारेंगे।
जो मिटे देश पर पीढ़ी से, वह परिपाटी धिक्कारेंगे।
पर याद रखो इस वसुधा पर, रघुराई भी हैं बाण सहित।
हर क्षत्रिय कुल भूषण जीवित, है पुरखों के सम्मान सहित। 
इसलिए कुएं पर हल्ला क्या, सारी वसुधा है ठाकुर की।
भुजदंडों से जो रक्षित है, संपदा सुरक्षित ठाकुर की।
मनोज झा के बयान पर बिहार के भाजपा विधायक नीरज सिंह बबलू ने कहा कि ठाकुर नहीं होते तो हिंदुस्तान का नाम मुगलिस्तान होता, ठाकुरों ने देश की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि मनोज झा मेरे सामने बोलते तो पटकर मुंह तोड़ देता.
बिहार के बाहुबली नेता आनंद मोहन ने कहा कि अगर मैं राज्यसभा में होता तो उनकी जीभ खींच लेता और आसन की ओर उछाल देता.
आनंद मोहन ने कहा, महिला आरक्षण बिल पर चर्चा हो रही थी. कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना. पूर्व सांसद ने मनोज झा पर हमला बोलते हुए कहा, “आप अगर इतने ही बड़े समाजवादी हो तो झा क्यों लगाते हो? जिस सरनेम की आप आलोचना करते हैं पहले उसे तो छोड़कर आइए.”
बाहुबली नेता ने कहा कि आप कहते हैं कि ठाकुर को मारो. आप ठाकुर को कहां-कहां से मारोगे. रामायण में ठाकुर, महाभारत में ठाकुर, दर्जनों-सैकड़ों कथावाचक 25 लाख से डेढ़ करोड़ रुपये लेकर इसी ठाकुर को जपकर पेट पालता है. उन्होंने कहा, मंदिरों में जहां तुम घंटी बजाते हो, शंख बजाते हो, वहां ठाकुर बैठे हुए हैं.  
आनंद मोहन की बेटी सुरभि आनंद सिंह ने राज्यसभा सांसद मनोज झा को जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि आपने संसद में अपने अंदर के ‘ठाकुर’ को मारने की बात की थी ना, अब हमारी भी सुनिए- ठाकुर होना आसान नहीं होता!
मनोज झा संसद में ठाकुरों को तानाशाह साबित करने की कोशिश कर रहे थे. हमारी बॉलीवुड की फिल्मों ने भी ऐसा साबित करने में अपना पूरा जोर लगा दिया है. 
हम मनोज झा जैसे लोगों से बस यही कहना चाहते हैं कि इतिहास से यदि राजपूत शब्द हटा दिया जाए तो इतिहास में कुछ भी नहीं बचेगा. ठाकुरों के अस्तित्व और योगदान को तुम्हारे जैसे टुच्चे नेता तो क्या दुनिया की कोई शक्ति नकार नहीं सकती. इस देश का नाम हमारे पूर्वजों के नाम पर भारत पड़ा. हिंदुओं के सबसे बड़े आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम हमारे कुल में जन्मे. ठाकुरों ने हिंदुत्व की रक्षा में, मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. आज अगर हिंदू बचे हो तो ये ठाकुरों की देन है वरना टोपी पहन किसी मस्जिद में नमाज पढ़ रहे होते.
हमारे पास दुनिया को बताने के लिए अपने पूर्वजों के शौर्य, पराक्रम, त्याग और बलिदान की अनगिनत गाथाएं मौजूद हैं. ठाकुरों के गौरवशाली इतिहास को मनोज झा जैसे दो कौड़ी के अवसरवादी और स्वार्थी नेताओं की टुच्ची बातों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. हाथी को देख हमेशा कुछ सड़क छाप कुत्ते भौंकने लगते हैं.
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