UP News – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Fri, 30 Jan 2026 06:22:40 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg UP News – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्रेशन में आधार-बायोमेट्रिक सत्यापन 1 फरवरी से अनिवार्य https://sanjayrajput.com/2026/01/aadhaar-biometric-property-registration-up-february-2026.html https://sanjayrajput.com/2026/01/aadhaar-biometric-property-registration-up-february-2026.html#respond Fri, 30 Jan 2026 06:22:40 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1338 Read more

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उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए 1 फरवरी 2026 से आधार आधारित पहचान और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य पंजीकरण प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, जिससे जमीन और संपत्ति से जुड़े जालसाज़ियों पर रोक लग सके।

इस नई व्यवस्था के तहत, अब दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन के समय सभी पक्षकारों — यानी खरीदारों, विक्रेताओं और गवाहों — की पहचान ई-केवाईसी, फिंगरप्रिंट/बायोमेट्रिक और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से सत्यापित की जाएगी। बिना सफल प्रमाणीकरण के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।

राज्य के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के मंत्री ने बताया कि यह कदम भूमि और संपत्ति धोखाधड़ी को रोकने, दस्तावेजों की प्रामाणिकता बढ़ाने और रजिस्ट्रेशन प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

अब तक संपत्ति रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का भी बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, जिससे रजिस्ट्री प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ बन रही है।

मुख्य बातें

  • 1 फरवरी 2026 से राज्य के सभी उप-निबंधक कार्यालयों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा।
  • खरीदार, विक्रेता और गवाह, तीनों का सत्यापन ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक के जरिए किया जाएगा।
  • इससे फर्जी रजिस्ट्रियों और जालसाज़ी को प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा।
  • डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा बेहतर होगी।

यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम का हिस्सा है।

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यूपी में अब नहीं पास कराना होगा नक्शा, इस मानक का करना होगा पालन https://sanjayrajput.com/2025/05/up-no-need-for-map-approval-to-build-houses-in-up-new-rules-house-maping.html https://sanjayrajput.com/2025/05/up-no-need-for-map-approval-to-build-houses-in-up-new-rules-house-maping.html#respond Tue, 06 May 2025 06:46:48 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1119 Read more

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मैप पासिंग का झंझट खत्म, योगी सरकार ने दी आम जनता को बड़ी राहत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के लोगों को बड़ा तोहफा दिया है. सरकार ने राज्य के नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए भवन निर्माण से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है. घर का नक्शा पास करने में जो शोषण होता है और उसके बाद में जिस तरह धन उगाही होती है, उसको रोकने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है. 1000 वर्गफीट तक के प्लॉट पर मकान बनाने के लिए नक्शा पास कराने की आवश्यकता नहीं होगी. इसके साथ ही भ्रष्टाचार और धन उगाही पर भी अंकुश लगाने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है. CM के द्वारा स्वीकृत नए भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2025 के तहत कई जटिल प्रक्रियाएं आसान कर दी गई हैं. आवास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद के अनुसार अब 5000 वर्गफीट तक के निर्माण के लिए आर्किटेक्ट का प्रमाण पत्र ही पर्याप्त होगा.

छोटे प्लॉट पर भी बन सकेंगे अपार्टमेंट

पहले जहां अपार्टमेंट निर्माण के लिए 2000 वर्गमीटर का प्लॉट आवश्यक होता था अब 1000 वर्गमीटर में भी इसकी अनुमति मिल सकेगी. अस्पताल और कमर्शियल बिल्डिंग के लिए 3000 वर्गमीटर का क्षेत्र पर्याप्त होगा.

प्रोफेशनल्स के लिए राहत

नए बायलॉज के अनुसार मकान के 25% हिस्से में नर्सरी क्रैच होम स्टे या प्रोफेशनल्स जैसे डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स अपने कार्यालय चला सकेंगे इसके लिए नक्शे में अलग से जिक्र जरूरी नहीं होगा.

NOC की तय समय सीमा

अब नक्शा पास कराने के लिए विभिन्न विभागों को 7 से 15 दिन के भीतर अनापत्ति प्रमाण पत्र NOC देना होगा तय समय में जवाब नहीं मिलने पर वह NOC स्वतः मान्य हो जाएगा.

कॉमर्शियल गतिविधियों को भी मिली मंजूरी

24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों पर रिहायशी इलाकों में दुकान और दफ्तर खोलने की अनुमति दी गई है वहीं इससे कम चौड़ी सड़कों पर डॉक्टर वकील जैसे प्रोफेशनल्स अपने कार्यालय संचालित कर सकेंगे.

ऊंची इमारतों के लिए खुली छूट

45 मीटर चौड़ी सड़कों पर अब जितनी ऊंची चाहें उतनी ऊंची इमारतें बनाई जा सकेंगी। फ्लोर एरिया रेशियो FAR को भी 3 गुना तक बढ़ाया गया है जिससे शहरों में ऊंचे भवन निर्माण को बढ़ावा मिलेगा. यह निर्णय न केवल आम जनता को राहत देगा बल्कि शहरी विकास में पारदर्शिता और गति भी सुनिश्चित करेगा.

पहले क्या थी व्यवस्था

पहले प्राधिकरण और आवास विकास क्षेत्र में प्रत्येक भूखंड पर भवन बनाने के लिए नक्शा पास करना जरूरी होता था. अब सौ स्क्वायर मीटर तक तो नक्शा पास नहीं करना होगा. जबकि 500 स्क्वायर मीटर में अब नक्शा पास करने की आवश्यकता नहीं होगी, केवल आर्किटेक्ट से नक्शा बनवाकर अनुमोदित करना होगा.

अब रिहायशी इलाकों में हो सकेगी कॉमर्शियल एक्टीविटी

जहां तक मकान में दुकान और कॉमर्शियल एक्टिविटी की बात है तो विकास प्राधिकरण क्षेत्र के रेजिडेंशियल लैंडयूज में किसी तरह का व्यावसायिक निर्माण मान्य नहीं था. अब 24 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क पर कॉमर्शियल निर्माण रिहायशी में भी किया जा सकेगा. इसके अलावा इससे कम चौड़ी सड़क पर जो भी प्रोफेशनल लोग हैं, जैसे वकील, डॉक्टर, आर्किटेक्ट वे अपने कार्यालय और क्लीनिक खोल सकेंगे.

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Guest House Kand Mayawati: कहानी उस गेस्ट हाउस कांड की जिसके बाद मायावती ने कभी साड़ी नहीं पहनी https://sanjayrajput.com/2025/03/guest-house-kand-mayawati.html https://sanjayrajput.com/2025/03/guest-house-kand-mayawati.html#respond Sun, 02 Mar 2025 02:12:02 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1054 Read more

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-बसपा विधायकों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया था

Guest House Kand Mayawati: बात 2 जून 1995 की है। प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार थी। बसपा गठबंधन तोड़ने के लिए स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थी। तभी सपा के विधायक और समर्थक पहुंच गए। उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। बसपा विधायकों को उठाकर गाड़ियों में भरने लगे। मायावती के साथ बदसलूकी की। मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।

4 घंटे बाद जब कमरा खुला तब यूपी की राजनीति के माथे पर गेस्ट हाउस कांड नाम का एक ऐसा कलंक लग चुका था जो आज तक मिट नहीं सका।

2 जून को मीराबाई स्टेट गेस्ट हाउस लखनऊ में जो हुआ वह अचानक नहीं हुआ। इसकी पटकथा 1 साल पहले से लिखी जानी शुरू हो गई थी।

ऐसे में सीधे उस दिन की नहीं, बल्कि उस पटकथा से कहानी शुरू करते हैं, जब बीजेपी को रोकने के लिए सपा-बसपा एक हुए और सरकार बनाई…

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिरी तो केंद्र सरकार ने कल्याण सिंह सरकार को बर्खास्त कर दिया। 1993 में चुनाव हुए।

बीजेपी की लोकप्रियता से वाकिफ सपा और बसपा के नेताओं ने तय किया कि साथ चुनाव लड़ेंगे। मुलायम सिंह ने 256 सीटों पर प्रत्याशी उतारे। 109 जीत गए।

कांशीराम ने 164 उतारे, उनमें 67 जीत गए। बीजेपी के खाते में 177 सीटें आई थीं जो 212 के बहुमत के आंकड़ों से दूर थी। गौरतलब है कि उस वक्त यूपी-उत्तराखंड एक थे और सीटों की संख्या 422 थी।

सपा और बसपा ने मिलकर सरकार बना ली। शुरुआत में सरकार सही चली। मंडल कमीशन की रिपोर्ट, सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थाओं में दलितों और पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण के प्रति समर्थन ही दोनों पार्टियों को जोड़ने का सैद्धांतिक सूत्र था।

सरकार बनने के बाद कांशीराम ने यूपी की जिम्मेदारी मायावती को सौंप दी और खुद दूसरे राज्यों में पार्टी का विस्तार करने में जुट गए।

सीएम को बुलाकर इंतजार करवाते, फिर लुंगी पहनकर मिलने जाते कांशीराम

मायावती के जीवन पर लिखी किताब ‘बहनजी’ में अजय बोस लिखते हैं, “कांशीराम कभी मुलायम से मिलने नहीं जाते थे। उनकी जिद होती थी कि मुलायम सिंह उनसे मिलने राज्य के अतिथि-गृह में आएं। मुलायम आते थे तब कांशीराम आधे-आधे घंटे इंतजार करवाते थे। अंत में बड़ी लापरवाही के साथ बनियान और लुंगी पहनकर नीचे उतरते थे। मीडिया के कैमरों के कारण मुलायम का संकोच और बढ़ जाता था।”

पंचायत चुनाव में बसपा हारी और सपा जीती तो दूरियां बढ़ गई

1995 में राज्य में पंचायत चुनाव हुए। 50 जिलों में 30 पर सपा जीत गई। 9 में बीजेपी, पांच पर कांग्रेस और बसपा के हाथ में महज एक सीट आई।

इस रिजल्ट से साफ हो गया कि सपा-बसपा गठबंधन के बीच फायदा सपा को ही हुआ। यहीं से दोनों पार्टियों के बीच विवाद गहराया। एक तरफ मुलायम सिंह बसपा के विधायकों को अपने पाले में करने लग गए। दूसरी तरफ बसपा बीजेपी के संपर्क में आने लगी।

अब बात गेस्ट हाउस कांड की करते हैं…

धमकी और मारपीट के दम पर विधायकों को अपने पाले में करने की कोशिश

1 जून 1995 को मुलायम सिंह को खबर लग गई कि बसपा समर्थन वापस लेने जा रही है। मायावती ने उस वक्त के राज्यपाल मोतीलाल वोरा से मिलकर बीजेपी के सहारे सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। मुलायम गुस्से से लाल हो गए।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामबहादुर को अपने पाले में कर लिया। उनके साथ 15 और विधायक भी आ गए। लेकिन दल-बदल कानून से बचने के लिए एक तिहाई सदस्य चाहिए, यानी 8 और विधायक चाहिए थे।

अजय बोस बताते हैं, “कांशीराम के अस्पताल में होने के कारण मुलायम सिंह इस बात को लेकर निश्चिंत थे कि सरकार चलती रहेगी। क्योंकि बसपा के कई विधायक पहले से जेब में थे। लेकिन जब समर्थन वापस लेने की बात आई तब तय हुआ कि बसपा के और विधायकों को डरा धमकाकर अपने पाले में किया जाए।”

मायावती बैठक कर रही थीं तभी ‘चमार पागल हो गए’ की आवाज आने लगी

2 जून 1995, मायावती लखनऊ के मीराबाई स्टेट गेस्ट हाउस में पार्टी के विधायकों और सांसदों के साथ मीटिंग कर रही थीं। उस वक्त वह इसी गेस्ट हाउस के रूम नंबर 1 में रहती थीं। सभी विधायक कॉमन हाल में बैठे थे। चार बजे थे तभी सपा के करीब 200 कार्यकर्ता और विधायक गेस्ट हाउस पहुंच गए। उनकी पहली लाइन थी, “चमार पागल हो गए हैं।”

विधायकों को उठाया और गाड़ी में फेंकना शुरू किया, सपा कार्यकर्ता भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे थे। जातिसूचक सबसे अधिक। बसपा के विधायकों ने मेन गेट बंद करना चाहा तभी उग्र भीड़ ने उसे तोड़ दिया। इसके बाद बसपा के विधायकों को हाथ-लात और डंडों से पीटा जाने लगा।

पिटाई के दौरान विधायकों से मुलायम सिंह को समर्थन देने के लिए एक शपथ पत्र पर सिग्नेचर करवाया जा रहा था। विधायक इतने डर गए कि कोरे कागज पर सिग्नेचर करके देने लगे। पांच बसपा विधायकों को जबरन गाड़ी में बैठा लिया गया।

मायावती ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया, मायावती के साथ बदसलूकी हुई। उन्होंने भागकर अपने आप को एक कमरे में बंद कर लिया। उनके अलावा कमरे में दो और लोग थे। उनमें एक सिकंदर रिजवी थे। उपद्रव कर रहे लोग दरवाजा पीटने लगे। कह रहे थे, “चमार औरत को उसकी मांद में से घसीटकर बाहर निकालो।”

अंदर से सिकंदर रिजवी ने दरवाजे के पास सोफे और मेज को लगा दिया, ताकि अगर सिटकनी टूटे भी तो दरवाजा न खुल सके। उस वक्त पेजर का चलन था, प्रशासन को सूचना दी गई। मौके पर बड़े अधिकारी पहुंचे।

बताया जाता है कि, 1995 के गेस्टहाउस कांड में जब कुछ कथित तौर पर सपा के गुंडों ने बसपा सुप्रीमो मायावती को कमरे में बंद करके मारा और उनके कपड़े फाड़ दिए थे. किसी तरह मायावती ने अपने को कमरे में बंद किया था और बाहर से समाजवादी पार्टी के विधायक और समर्थक दरवाजा तोड़ने में लगे हुए थे. इस बीच, कहा जाता है कि अपनी जान पर खेलकर बीजेपी विधायक ब्रम्हदत्त द्विवेदी मौके पर पहुंचे और सपा विधायकों और समर्थकों को पीछे ढकेला. बता दें कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी की छवि भी दबंग नेता की थी. यूपी की राजनीति में इस कांड को गेस्टहाउस कांड कहा जाता है और ये भारत की राजनीति के माथे पर कलंक है. खुद मायावती ब्रम्हदत्त द्विवेदी को भाई कहने लगीं और सार्वजनिक तौर पर कहती रहीं कि अपनी जान की परवाह किए बिना उन्होंने मेरी जान बचाई थी. जानकारी के लिए बता दें कि ब्रम्हदत्त द्विवेदी संघ के सेवक थे और उन्हें लाठी चलानी भी बखूबी आती थी इसलिए वो एक लाठी लेकर हथियारों से लैस गुंडों से भिड़ गए थे. यही वजह है कि मायावती ने भी उन्हें हमेशा अपना बड़ा भाई माना और कभी उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया. पूरे राज्य में मायावती बीजेपी का विरोध करती रहीं, लेकिन फर्रुखाबाद में ब्रम्हदत्त द्विवेदी के लिए प्रचार करती थीं.

SSP कार्रवाई के बजाय सिगरेट फूंक रहे थे

अजय बोस लिखते हैं, जिस वक्त गेस्ट हाउस में यह घटना हो रही थी उस वक्त लखनऊ के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ओपी सिंह मौजूद थे। वह कार्रवाई के बजाय सिर्फ सिगरेट पीते हुए नजर आए। कुछ देर बाद गेस्ट हाउस की बिजली और पानी सप्लाई रोक दी गई। इसका भी आरोप उन्हीं पर लगा।

सरकार का आदेश था कि विधायकों पर लाठी चार्ज नहीं होगा, एसपी राजीव रंजन जिला मजिस्ट्रेट के साथ मिलकर गेस्ट हाउस खाली करवाने में जुट गए। पहले उन्होंने उन्हें निकाला जो विधायक नहीं थे। इसके बाद वह विधायकों को निकालने लगे तो बहस हो गई।

सरकार का आदेश था कि विधायकों पर लाठी चार्ज नहीं किया जाए। लेकिन स्थिति ऐसी थी कि बल प्रयोग करना पड़ा। रात के 9 बजे से 11 बजे तक इस मामले में राज्यपाल कार्यालय, केंद्र सरकार और वरिष्ठ बीजेपी नेताओं का दखल हो गया और भारी सुरक्षा बल पहुंच गया।

अगले दिन मायावती मुख्यमंत्री बन गईं

रात में जब भारी पुलिस फोर्स पहुंची और मायावती को लग गया कि अब वह सुरक्षित हैं तब जाकर कमरे से बाहर आईं। मायावती को किसने बचाया, सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि बीजेपी नेताओं ने बचाया जैसे दावों में दम नहीं है।

जब यह घटना शुरू हुई तो यहां भारी संख्या में मीडिया पहुंच गई। सपा के लोग हटाना चाहते थे, लेकिन मीडिया हटी नहीं। 2 जून को मायावती 39 साल की उम्र में यूपी की मुख्यमंत्री बन गई।

आखिरी बात मायावती की बदली ड्रेस को लेकर

गेस्ट हाउस कांड के बाद माया ने कभी साड़ी नहीं पहनी, 2 जून से पहले मायावती अक्सर साड़ी पहने हुए नजर आती थीं, लेकिन इस घटना के बाद उन्होंने कभी साड़ी नहीं पहनी।

घटना के समय मौजूद रहे लोग बताते हैं कि उस वक्त उपद्रवियों के हाथ मायावती की साड़ी तक पहुंच गए थे। लेकिन ऐसी किसी भी घटना की चर्चा न उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखी और न ही उनके ऊपर किताब लिखने वालों ने लिखा।

Disclaimer: यह लेख मायावती के जीवन पर आधारित अजय बोस की किताब ‘बहनजी’ तथा विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में छपी खबरों और प्रत्यक्षदर्शियों के मीडिया में दिए गए इंटरव्यू पर आधारित है। यह लेखक के निजी विचार नहीं हैं।

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पं. हरिशंकर तिवारी को लेकर उनके गांव के इस प्रोफेसर ने कह दी ये बात https://sanjayrajput.com/2024/08/harishankar-tiwari-news-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2024/08/harishankar-tiwari-news-in-hindi.html#respond Thu, 08 Aug 2024 14:17:44 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=694 Read more

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Harishankar Tiwari News in Hindi: गोरखपुर में पूर्व मंत्री स्वर्गीय पंडित हरिशंकर तिवारी की 88 वीं जयंती पर 5 अगस्त को उनकी प्रतिमा लगाने के लिए बन रहे चबूतरे को प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व बुलडोजर से गिरा दिया था। जिसके बाद यह मुद्दा गरमा गया।

पूर्वांचल के एक बाहुबली नेता और पूर्व मंत्री स्वर्गीय पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) एक विवादास्पद राजनीतिक व्यक्तित्व रहे हैं। इस लेख में हम इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे, जिसमें मूर्ति स्थापना की पृष्ठभूमि, इसके पीछे के सामाजिक संदेश और इससे जुड़े विवाद शामिल हैं।

पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) का परिचय

पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर में अनेक उतार-चढ़ाव देखे। वे चिल्लूपार विधानसभा से सात बार विधायक रहे और उत्तर प्रदेश की सरकार में मंत्री भी रहे। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने बाहुबल और राजनीतिक कूटनीति के माध्यम से अपना साम्राज्य स्थापित किया।

Harishankar Tiwari की पहचान पूर्वांचल के बाहुबलियों में होती थी। उनका नाम अक्सर विवादों में रहा, और उनके कार्यों को लेकर अनेक आरोप भी लगे। उनके नेतृत्व में कई लोगों ने अपने अधिकारों का हनन अनुभव किया, जिससे उनके व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।

गौरतलब है कि देश की राजनीति में एक समय ऐसा था जब इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के खिलाफ जय प्रकाश नारायण (Jai Prakash Narayan) मोर्चा खोले हुए थे. इस दौरान छात्र जेपी के साथ और इंदिरा के खिलाफ विरोध कर रहे थे. लेकिन पूर्वांचल में अलग ही कहानी चल रही थी. पूर्वांचल में माफिया, शक्ति और सत्ता की लड़ाई शुरू हो चुकी थी. यहां के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र कट्टों और बंदूकों की नाल साफ कर रहे थे.

यही वो वक्त था जब पूर्वांचल की राजनीति में हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) की एंट्री होती है. लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं से वंचित इस क्षेत्र के युवाओं की दिलचस्पी किताबों को छोड़ कट्टों और खतरनाक हथियारों में होने लगी.

जेल में रहते हुए हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) चुनाव जीते और साल 1997 से लेकर 2007 तक वे लगातार यूपी में मंत्री बने रहे. वह 22 सालों तक चिल्लूपार सीट से विधायक रहे.

Harishankar Tiwari को केवल 2 बार हार का सामना करना पड़ा. वह पहली बार साल 2007 में और दूसरी बार साल 2012 में चुनाव हारे. भाजपा, सपा, बसपा सभी सरकारों में वे कई मंत्रालयों को संभालते रहे.

मूर्ति स्थापना का मामला

हाल ही में पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) की मूर्ति उनके पैतृक गांव टांडा में स्थापित की जाने वाली थी। हालांकि, प्रशासन ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए रोक दिया। इस निर्णय के पीछे 28 वर्ष अमेरिका में रहे उनके गांव के ही निवासी बीएचयू के प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का विरोध था, जिन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर सार्वजनिक जमीन पर इस मूर्ति स्थापना का विरोध किया था।

देखें वीडियो-

https://www.facebook.com/reel/534133808957769?mibextid=rS40aB7S9Ucbxw6v

प्रोफेसर त्रिपाठी का कहना है कि एक अपराधी की मूर्ति लगाकर समाज में गलत संदेश दिया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रशासन की कार्रवाई

प्रशासन ने Harishankar Tiwari की मूर्ति स्थापित करने के लिए बनाए गए चबूतरे को हटाने का निर्णय लिया। यह कार्रवाई प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर की गई। प्रशासन का तर्क था कि यह कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई है, और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन की इस कार्रवाई ने गांव में राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया। कुछ लोग इसे सही मानते हैं, जबकि अन्य इसे राजनीति का एक हिस्सा मानते हैं।

समाज पर मूर्ति के प्रभाव

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का कहना है कि मूर्ति स्थापना का मुद्दा केवल एक मूर्ति लगाने का नहीं है, बल्कि यह समाज में अपराध और राजनीति के संबंधों पर भी प्रकाश डालता है। जब समाज में ऐसे व्यक्तियों की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, तो यह संदेश जाता है कि अपराधियों को सम्मानित किया जा रहा है।

वे आगे कहते हैं कि इससे युवा पीढ़ी को गलत संदेश मिलता है, और वे इसे अपने आदर्श मानने लगते हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे समाज में नैतिकता का हनन होता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण

राजनीति में हमेशा से ही ऐसे मुद्दों का उपयोग किया जाता रहा है। पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) की मूर्ति स्थापना का मामला भी राजनीतिक हितों से जुड़ा हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए योगी सरकार पर बदले की भावना से कार्य करने का आरोप लगाया है। यह राजनीतिक खेल समाज में और भी विभाजन पैदा करने का काम कर रहा है।

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का दृष्टिकोण

प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) को आदर्श नहीं मानते। उनका मानना है कि हरिशंकर तिवारी का व्यक्तित्व विवादास्पद रहा है, और उन्हें समाज में आदर्श के रूप में स्थापित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) के खिलाफ उनके पास ठोस प्रमाण हैं, और वे इस बात को साबित करने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि समाज को ऐसे व्यक्तियों से दूरी बनानी चाहिए।

समाज में नैतिकता का संकट

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का कहना है कि यह मामला एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। क्या हम ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करना चाहते हैं, जिनका इतिहास विवादास्पद रहा है? समाज में नैतिकता का संकट बढ़ता जा रहा है। जब समाज में अपराधियों को सम्मान दिया जाता है, तो यह युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाता है।

वे आगे कहते हैं कि समाज को यह समझने की आवश्यकता है कि ऐसे व्यक्तियों की मूर्तियां स्थापित करने से हम किस प्रकार का संदेश भेज रहे हैं। यह केवल एक व्यक्ति की पहचान नहीं, बल्कि समाज की पहचान भी है।

निष्कर्ष

गोरखपुर में पंडित हरिशंकर तिवारी की मूर्ति स्थापना का मामला एक गंभीर मुद्दा है, जो समाज में नैतिकता, राजनीति और अपराध के संबंधों को उजागर करता है। प्रशासन की कार्रवाई और प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी का विरोध यह दर्शाता है कि समाज में अभी भी ऐसे लोग हैं, जो सही और गलत के बीच का अंतर समझते हैं।

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी कहते हैं कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज में केवल उन व्यक्तियों को सम्मान दिया जाए, जो वास्तव में आदर्श हैं। इसके लिए हमें जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि युवा पीढ़ी सही मार्ग पर चल सके।

*Disclaimer– यह लेख प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी द्वारा एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू पर आधारित है, ये लेखक के निजी विचार नहीं हैं।

देखिए प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी का एक न्यूज चैनल को दिया गया इंटरव्यू-

https://youtu.be/3C87g1wyBbM?si=qKlG1jjrPVaa-OL8

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लखीमपुर खीरी में छुट्टा पशुओं के विवाद में 2 की हत्या https://sanjayrajput.com/2024/08/lakhimpur-kheri-double-murder.html https://sanjayrajput.com/2024/08/lakhimpur-kheri-double-murder.html#respond Mon, 05 Aug 2024 12:15:45 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=658 Read more

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Lakhimpur Kheri News: लखीमपुर खीरी जिले में सनसनीखेज वारदात हुई है। भीरा थाना क्षेत्र के देवरिया रणा गांव में शुक्रवार की रात घर में छुट्टा जानवर घुसने से नाराज दबंगों ने दो युवकों की पीट- पीटकर हत्या कर दी।

रामजीत, गुड्डू, विनीत, कौशल, रामदेव, अमन, लोकेंद्र और सोनी सिंह द्वारा गांव के छुट्टा पशुओं को भगाया जा रहा था। तो दूसरे पक्ष के संतराम, सुशील राजकुमार सौरभ अशोक मायाराम और रामगोपाल ने इसका विरोध जताते हुए कहा छुट्टा पशुओं को हमारे तरफ क्यो भागा रहे हो, इस बात को लेकर दोनो पक्षों में विवाद हो गया।

विवाद में 1. रामजीत सिंह पुत्र जसवंत सिंह 2. गुड्डू सिंह पुत्र रामदेव सिंह 3.विनीत सिंह पुत्र सोनू सिंह 4.कौशलेंद्र पुत्र रंजीत सिंह 5.रामदेव सिंह पुत्र चंद्रमा 6.अमन सिंह पुत्र बृजेश सिंह 7.लोकेंद्र प्रताप पुत्र रंजीत सिंह भू 8.सोनी सिंह पत्नी सोनू सिंह गंभीर रूप से घायल हो गई जिन्हें बिजुआ सरकारी अस्पताल ले जाया गया वहां से इन्हे लखीमपुर मुख्यालय रेफर किया गया। गंभीर हालत में लखीमपुर से लखनऊ भेजे गए गुड्डू सिंह पुत्र रामदेव सिंह और राम जीत सिंह पुत्र जसवंत सिंह की इलाज के दौरान केजीएमयू में मौत हो गई है।

Lakhimpur Kheri double murder

आपसी संघर्ष में दो लोगों की मौत के बाद मामला धीरे-धीरे जातीय रंग लेने लगा है। घटना में दोनों मृतकों के क्षत्रिय होने के चलते करणी सेना अध्यक्ष ने अपने समर्थकों के साथ गांव में डेरा डाल दिया है।

Lakhimpur Kheri double murder case 3 aug

दो लोगों की मौत के बाद क्षत्रिय बहुल गांव में दूसरे पक्ष के लोग दहशत में आकर पलायन कर गए हैं। करणी सेना के पदाधिकारी सुबह से ही उग्र हैं और आरोपियों के घर बुलडोजर चलाने की मांग कर रहे हैं। गांव में तनाव का माहौल है। दोनों शवों का पोस्टमार्टम लखनऊ में कराया गया और शवों के गांव पहुंचने पर परिजनों ने हंगामा किया, जिसे प्रशासन ने समझा-बुझा कर शांत कराया।

Lakhimpur Kheri double murder case

आईजी प्रशांत कुमार के जाने के बाद मृतक के परिजनों ने भीरा-पलिया हाईवे जाम कर दिया और भीरा थानाध्यक्ष शिवाजी दुबे को हटाने की मांग तेज कर दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने साथ थानों की पुलिस और पीएसी की कंपनी को गांव में तैनात कर दिया है। एहतियात बरतते हुए दूसरे पक्ष के लोगों के घरों की सुरक्षा में भी पुलिस और पीएसी तैनात है।

दो पक्षों में पशुओं को भगाने को लेकर विवाद हुआ था। मारपीट हुई एक पक्ष के दो लोगों की लखनऊ में मौत हुई है। घायल भी लोग हुए हैं। उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया परिजनों की तहरीर पर FIR दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

-गणेश प्रसाद साहा, एसपी लखीमपुर खीरी

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GDA Gorakhpur का खेल: 25 साल पुराने हजारों मकानों को कर दिया अवैध घोषित, खौफ में निवासी https://sanjayrajput.com/2024/07/gda-gorakhpur-mahayojna-2031.html https://sanjayrajput.com/2024/07/gda-gorakhpur-mahayojna-2031.html#respond Tue, 30 Jul 2024 06:22:41 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=639 Read more

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-GDA Gorakhpur ने अपनी महायोजना-2031 में नए बसे मोहल्लों को घोषित किया आवासीय, 25 साल पुरानी कालोनियों को दिखाया हरित क्षेत्र 

-GDA Gorakhpur के गलत फैसले से भूतपूर्व सैनिकों के हजारों मकान अवैध घोषित

-बने हैं 10 हजार से अधिक मकान फिर भी जीडीए की महायोजना-2031 में यहां का लैंड यूज आवासीय नहीं

GDA Gorakhpur Mahayojna 2031: सीएम सिटी गोरखपुर के वार्ड संख्या 7 महादेव झारखंडी टुकड़ा नं. 2 के मोहल्लों आदर्श नगर, गैस गोदाम रोड, प्रज्ञा पुरम, वसुंधरा नगर, साई धाम नगर, सरवन नगर, स्वर्ण सिटी सहित तमाम कॉलोनी जिनका महायोजना-2031 में जीडीए ने लैंड यूज आवासीय के स्थान पर ग्रीन लैंड घोषित कर दिया था, जिसे लेकर स्थानीय लोग बहुत डरे हुए हैं। लोगों को जिंदगी भर की पूंजी लगाकर बने अपने आशियाने को तोड़े जाने का डर चैन से जीने नहीं दे रहा।

इसी सिलसिले में विगत 11 मार्च को स्थानीय लोगों ने सदर सांसद और जीडीए वीसी से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद जीडीए उपाध्यक्ष द्वारा मौका मुआयना करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 4 माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय नागरिक बहुत अक्रोशित हैं।

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बता दें कि जीडीए की महायोजना 2031 में महादेव झारखंडी टुकड़ा नं.2 के 25 साल पुराने दर्जनों मोहल्लों के आवासीय क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट घोषित किए जाने का विरोध दर्ज करने पर विगत मार्च में जीडीए उपाध्यक्ष द्वारा स्थानीय लोगों को बुलाकर उन्हें आश्वासन दिया गया था कि एक से दो दिनों के अंदर वे स्वयं महादेव झारखंडी टुकड़ा नं 2 के संबंधित मोहल्लों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप देंगे। लेकिन 4 माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जीडीए ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया।

गौरतलब है कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नं 2 के इन मोहल्लों में लगभग 10 हजार से अधिक मकान भी बन चुके हैं जिनमें अधिकतर मकान 25-30 साल पुराने हैं। उसके बाद भी जीडीए ने महायोजना 2031 में यहां का लैंड यूज आवासीय न करते हुए इसे ग्रीन लैंड घोषित कर दिया है। जबकि महायोजना 2031 में जहां ताल कंदरा है, कुछ भी नहीं बना है वहां का लैंड यूज जीडीए द्वारा आवासीय कर दिया गया है। इसी को लेकर यहां के स्थानीय नागरिक विरोध कर रहे हैं। इस मामले में स्थानीय लोगों ने 1200 आपत्तियां भी दर्ज कराई थी।

इसी के चलते स्थानीय लोगों ने विगत 11 मार्च को बड़ी संख्या में सदर सांसद रवि किशन शुक्ला और जीडीए उपाध्यक्ष को ज्ञापन भी दिया था लेकिन आज 4 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जीडीए ने कोई पहल नहीं की है। जबकि स्थानीय लोग जीडीए द्वारा अपने मकानों के अवैध घोषित किए जाने के कारण बहुत डरे हुए हैं।

बता दें कि गोरखपुर एम्स से सटे इन मोहल्लों में अधिकतर भूतपूर्व सैनिक मकान बनाकर रहते हैं। यहां के अधिकतर मकान वर्ष 1998 से 2000 के बीच ही बन गए थे लेकिन जीडीए ने किस मापदंड के आधार पर इतनी पुरानी कॉलोनियों को अपनी महायोजना 2031 में आवासीय की जगह ग्रीन बेल्ट (हरित क्षेत्र) घोषित कर दिया है ये बात समझ से परे है।

जीडीए द्वारा उनके मोहल्लों को ग्रीन बेल्ट घोषित किए जाने से अक्रोशित स्थानीय लोगों का कहना है कि लगता है ये सौतेला व्यवहार नए विकसित हो रहे इलाकों में प्लाटिंग करा चुके भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।

इस संबंध में जीडीए गोरखपुर के उपाध्यक्ष (वीसी) आनंद वर्धन का कहना है कि-

Gda vc anand vardhan

“मामला संज्ञान में है। महायोजना-2031 में शामिल करने का प्रयास किया गया था पर कुछ तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया। यहां राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।”

कारण चाहे जो भी हो लेकिन जीडीए के इस एक फैसले से अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर बना लोगों का आशियाना एक ही झटके में अवैध निर्माण घोषित हो चुका है जिसके तोड़े जाने का डर स्थानीय लोगों को चैन से जीने नहीं दे रहा है।

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यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा को लेकर सरकार का बड़ा फैसला https://sanjayrajput.com/2024/07/up-police-constable-re-exam-2023.html https://sanjayrajput.com/2024/07/up-police-constable-re-exam-2023.html#respond Sat, 27 Jul 2024 17:34:09 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=606 Read more

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उत्तर प्रदेश सरकार ने UP Police Constable Re-exam को लेकर एक बड़ा एलान किया है, जिससे अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है। 

यूपी सरकार ने एलान किया है कि अगस्त में दोबारा आयोजित होने वाली UP Police Constable Re-exam – 2023 के लिए राज्य सड़क परिवहन निगम की निःशुल्क बस सेवा की सुविधा रहेगी।

बस से यात्रा करने वाले अभ्यर्थियों को अपने प्रवेश पत्र की अतिरिक्त दो प्रतियों को डाउनलोड करना होगा जिसमें से एक प्रति परीक्षा केन्द्र के जनपद तक की यात्रा एवं दूसरी प्रति परीक्षा उपरान्त अपने जनपद तक की यात्रा के लिए बस कंडक्टर को प्रस्तुत करना होगा। जिससे अभ्यर्थी सुविधापूर्वक परीक्षा केन्द्र तक पहुंच सकें।

बता दें कि एक बार परीक्षा निरस्त होने के बाद दोबारा परीक्षा आयोजित होने पर अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक आने जाने में अतिरिक्त खर्च न वहन करना पड़े इसलिए सरकार द्वारा ये अहम फैसला लिया गया है।

UP Police Constable Re-exam: उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने पुलिस कॉन्सटेबल के री-एगजाम की तारीखों का ऐलान कर दिया है. बोर्ड ने आरक्षी नागरिक पुलिस के 60244 पदों पर सीधी भर्ती-2023 की लिखित परीक्षा 23,24,25 अगस्त और 30,31 अगस्त 2024 को आयोजित कराने का फैसला लिया गया है. बता दें कि यह परीक्षा धांधली के आरोपों के चलते पहले निरस्त की जा चुकी है.

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सपा ने केशव मौर्य को कहा कुकर्मी, पापी, भ्रष्टाचारी, चोट्टा, निर्लज्ज फिर… https://sanjayrajput.com/2024/07/keshav-maurya-akhilesh-yadav.html https://sanjayrajput.com/2024/07/keshav-maurya-akhilesh-yadav.html#respond Sat, 27 Jul 2024 06:53:26 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=593 Read more

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यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने आज सुबह अपने एक्स @kpmaurya1 पर अखिलेश यादव को ट्वीट करके कहा-

कांग्रेस के मोहरा सपा मुखिया श्री @yadavakhilesh जी 2027 में पराजय सुनिश्चित देख अनाप-शनाप बयानबाज़ी कर रहे हैं।

जनता से झूठ बोल कर 2024 में मिली सफलता से वह ग़ुब्बारे की तरह फूल गए, उन्हें 2014/17/19/22 में सपा की पराजय याद रखना चाहिए।

2027 में 2017 दोहरायेंगे।

देखें यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का ट्वीट-

https://twitter.com/kpmaurya1/status/1817051851994575148?t=Tk90AfDyyAv1xq9uFBv6Jg&s=19

इसके जवाब में सपा के मीडिया सेल के एक्स हैंडल @MediaCellSP से जो जवाब आया वो बेहद अभद्र था और उसमें केशव मौर्य के लिए बहुत ही अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया है।

पढ़िए…

तुम अपना देखो @kpmaurya1

दिल्ली वाले तुम्हारी बैटरी चार्ज करके तुम्हें लखनऊ वापिस भेज देते हैं, तुम्हारा गुब्बारा फूल जाता है जिसमें लखनऊ में बैठे बाबा पिन लगाकर फोड़ देते हैं, 7 साल से खटारा स्टूल की सवारी कर रहे हो ,बेइज्जती सहने की भी एक सीमा होती है, तुम तो उस सीमा को पार करके भी खीखी खीखी करके खिसिया रहे हो, लाज शर्म स्वाभिमान सब तुम्हारा जूतों तले रौंद दिया गया है, और इसके जिम्मेदार तुम खुद हो, तुम्हारा जरा सा भी जनाधार होता और पिछड़ों दलितों के लिए तुमने ईमानदारी से काम किया होता तो 2 टके की तुम्हारी इज्जत भी होती, लेकिन तुमने सत्ता पाकर सिर्फ अहंकार किया और जमकर भ्रष्टाचार किया और सिर्फ अपना पेट भरा जिसके कारण तुम्हारे क्षेत्र के लोगों ने तुम्हें चोट्टा चोट्टा कहकर ना सिर्फ दौड़ाया बल्कि बुरी तरह से तुम्हें चुनाव भी हराया, तुम्हारे गृहमंडल की सीटें भाजपा बुरी तरह से हारी, पूरे कौशांबी जनपद की सारी सीटें भाजपा 2022 में हारी क्योंकि तुम्हारे कुकर्म थे, ऐसे कुकर्मियों पापियों भ्रष्टाचारियों और स्वार्थियो के लिए ना दल में दाल गलती है ना समाज में इज्जत होती है

अपनी 2 कौड़ी की इज्जत लेकर दिल्ली से लखनऊ, लखनऊ से दिल्ली के चक्कर काटो बस, निर्लज्ज कहीं का बेशर्म इंसान

देखें सपा मीडिया सेल के एक्स हैंडल @MediaCellSP से किया गया ट्वीट-

https://twitter.com/MediaCellSP/status/1817076294409941389?t=sQhk4ZK2wTWEyXZJi1y48g&s=19

 

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बलिया में पुलिस वाले कर रहे थे वसूली, एडीजी की छापेमारी में खुली पोल https://sanjayrajput.com/2024/07/adg-raid-in-narahi-ballia.html https://sanjayrajput.com/2024/07/adg-raid-in-narahi-ballia.html#respond Thu, 25 Jul 2024 18:22:28 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=577 Read more

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर एडीजी जोन ने की बड़ी कार्यवाही, बिहार से आने वाली गाड़ियों से 500 रूपये की होती थी वसूली

यूपी सरकार ने बलिया के एसपी और एएसपी दोनों को हटा दिया है। साथ ही सीओ, एसएचओ और चौकी इंचार्ज के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू की गई ही जो इनकी संपत्ति की भी जांच करेगी। ये कार्यवाही बलिया के नरही थाना क्षेत्र के भरौली बक्सर बार्डर पर एडीजी वाराणसी जोन की गुप्त जांच के बाद की गई है।

बलिया में रात भर ऑपरेशन में ADG और DIG ने अपनी ही पुलिस के कई जवानों से पूछताछ कर उन्हें गिरफ्तार किया, जिसके बाद से इंस्पेक्टर पन्नेलाल अपनी ही कोतवाली से कूदकर फरार हो गया है।

बलिया के नरही थाना क्षेत्र के भरौली बक्सर बार्डर पर एडीजी वाराणसी जोन कि गुप्त कार्यवाही मे खुली भ्रष्टाचार की पोल।

सुबह सवेरे एडीजी कि कार्यवाही मे मौके से 16 प्राइवेट दलाल और दो थाने के सिपाहियों की हुई गिरफ्तारी।

मौके से तीन सिपाही भागने मे रहे कामयाब। जबकि एडीजी जोन की कार्यवाही मे मौके से वसूली रजिस्टर और भारी मात्रा मे मोबाईल फोन हुए बरामद।

नरही थाने के बैरको से मिले 37500 रुपए नगद। जबकि एसओ के आवास को किया गया सीज।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर एडीजी जोन ने की बड़ी कार्यवाही, बिहार से आने वाली गाड़ियों से 500 रूपये कि होती थी वसूली।

एडीजी जोन की इस छापेमारी मे हुई बड़ी कार्यवाही। नरही एसओ हुए सस्पेंड 9 सिपाहियों के विरुद्ध मुकदमा हुआ दर्ज़, वही कोरन्टाडीह के सभी चौकी इंचार्ज समेत सभी कर्मी हुए सस्पेंड ।

एड़ीजी की इस कार्यवाही से पुलिस महकमे और दलालों मे हड़कंप मच गया है।

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सीतापुर में पैदा हुआ अद्भुत बच्चा, देखें तस्वीर https://sanjayrajput.com/2024/07/sitapur-me-paida-hua-adbhut-bachcha.html https://sanjayrajput.com/2024/07/sitapur-me-paida-hua-adbhut-bachcha.html#respond Mon, 22 Jul 2024 12:04:05 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=553 Read more

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यूपी के सीतापुर जिले में एक अद्भुत बच्चे का जन्म हुआ है। इस बच्चे के चार पैर, चार हाथ समेत संपूर्ण दूसरा शरीर एक में ही चिपका हुआ है।

गौरतलब है कि महिला ने अस्पताल के बाहर ही इस बच्चे को जन्म दिया है। क्योंकि अस्पताल में एक नर्स के सिवा कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था।

इससे भी हैरानी की बात ये है कि जन्म के काफी देर तक यह नवजात बच्चा बाहर ही पड़ा रहा।

जब इस विचित्र बालक को देखने के लिए भीड़ इकट्ठी होने लगी और लोगों द्वारा फोटो खींची जाने लगी तब जाकर अस्पताल में हड़कंप मचा।

बताया जा रहा है कि इस बच्चे को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। अधिकतर लोग इस विचित्र बच्चे की फोटो और वीडियो बनाने में लगे हुए हैं।

देखें इस विचित्र बच्चे की असली तस्वीर-

Sitapur kid

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इस IPS के नाम से कांप उठते हैं बड़े-बड़े अपराधी, 22 लाख की नौकरी छोड़ बने थे IPS https://sanjayrajput.com/2024/07/ips-neeraj-kumar-jadaun.html https://sanjayrajput.com/2024/07/ips-neeraj-kumar-jadaun.html#respond Sat, 20 Jul 2024 06:25:23 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=525 Read more

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IPS Neeraj Kumar Jadaun: देश में कई हस्तियों के संघर्ष और सफलता की कहानियां आपने पढ़ी और सुनी होंगी। Police से मिले कटु अनुभवों से निराश होने के बजाए सिस्टम को बदलने और इंसाफ पाने की एक और कहानी है, जो संघर्ष और मुश्किलों से भरी है। यह कहानी आपको फिल्मी जरूर लग सकती है, लेकिन इसके सभी किरदार वास्तविक हैं।

कहानी है Ghaziabad में SP Rural के रूप में तैनात 2015 बैच के IPS Neeraj Kumar Jadaun की।

6 दिसंबर 2008 की यह वो तारीख है, जिस दिन IPS Neeraj Kumar Jadaun की पूरी जिंदगी बदल गई। वो इस तारीख को कभी भूल नहीं सकते। दरअसल, इस दिन Neeraj के पिता की खेत के विवाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

मीडिया से बात करते हुए Neeraj ने बताया कि हमारी मदद करने की बजाय Police आरोपितों का साथ दे रही थी। मगर पिता को इंसाफ दिलाना था तो Neeraj ने IPS बनने की ठान ली।

पिता को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने IPS बनने की ठान ली। कभी निराशा मिली तो कभी हताशा हुई, लेकिन इरादे के पक्के Neetaj ने हार नहीं मानी और IPS बन गए। बस फिर क्या था, आरोपितों की हेकड़ी ढीली हो गई और स्थानीय Police ने भी नियमानुसार कार्रवाई की।

Jalaun के नौरेजपुर गांव के मूलनिवासी Neeraj Kumar Jadaun का जन्म Kanpur में हुआ। यहीं स्कूलिंग और फिर IIT, BHU से Computer Science में B.Tech की Degree लेकर MNC ज्वॉइन कर ली। Noida व Bangluru से लेकर UK तक Job की।

पिता की हत्या के समय वह Bangluru में थे। केस की पैरवी शुरू की तो Police का रवैया देख दुखी हुए। पीड़ित की मदद करने को बनी Police आरोपितों का साथ दे रही थी। मगर पिता को इंसाफ दिलाना था तो Neeraj ने IPS बनने की ठान ली।

2010 में नौकरी के साथ ही तैयारी शुरू कर दी और 2011 में पहले ही प्रयास में Interview तक पहुंच गए, जिसमें सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में रैंक कम रह गई और तीसरे प्रयास के लिए आवेदन करने तक उम्र अधिक हो चुकी थी।

छोड़ दिया 22 लाख का पैकेज

पिता की हत्या के बाद परिवार में सबसे बड़े Neeraj चार भाई-बहनों के इकलौते सहारा थे। भाई-बहनों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए वह नौकरी नहीं छोड़ सकते थे। इसीलिए नौकरी के साथ कोशिश की। उम्र पूरी होने के कारण Neeraj काफी निराश हुए, लेकिन तभी एक अच्छी खबर आई कि अब 32 साल की आयु तक के अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। नीरज ने इसे अंतिम मौका मानते हुए 22 लाख रुपये सालाना का Package छोड़ दिया और तन-मन से तैयारी शुरू कर दी। अगले ही प्रयास में 140वीं रैंक हासिल कर Neeraj IPS बन गए। Neeraj Jadaun के भाई पंकज व रोहित Software Engineer हैं तो राहुल व बहन उपासना Highcourt में Practice करते हैं।

गाजियाबाद से भी जुड़ी हैं जड़ें

IPS Neeraj Kumar Jadaun की जड़ें पहले से ही Ghaziabad से जुड़ी रही हैं। दादा कम्मोद मोदी मिल में मजदूर थे। 1967-69 तक दादा कम्मोद मोदीनगर ही रहे। मगर बॉयलर फटने के बाद वह परिवार समेत Kanpur चले गए। इसी वजह से Neeraj Jadaun Ghaziabad से खास लगाव भी रखते हैं।

छह बार हो चुका जानलेवा हमला

Prayagraj में ट्रेनिंग के बाद Aligarh में गभाना सर्किल के सीओ (एएसपी) बने। यहां गोतस्करों के खिलाफ IPS Neeraj Kumar Jadaun ने बड़ी कार्रवाई की। रात भर गाड़ी लेकर घूमते और कई Encounter भी किए। इस कारण उन पर छह बार जानलेवा हमला भी हुआ।

तस्करों के गिरोह ने ट्रक से टक्कर मरवाने से लेकर फायरिंग तक की। एक बार उनकी सरकारी गाड़ी भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। मगर 16 माह के कार्यकाल में वह कभी पीछे नहीं हटे और हजारों गोवंश तस्करों के चंगुल से मुक्त कराए।

बेटे के जन्म के दो दिन बाद पहुंचे

AMU में जिन्ना की फोटो को लेकर मई-2018 में हुए बवाल में भी हालात संभालने के लिए IPS Neeraj Kumar Jadaun आगे रहे। फरवरी-2019 में छात्र राजनीति को लेकर विधायक के बेटे पर गोली चलाने के बाद पैदा हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद वहां के सीओ को हटाकर IPS Neeraj Kumar Jadaun को भेजा गया।

इसी समय पत्नी को प्रतीक्षा प्रसव पीड़ा के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया। पत्नी को अस्पताल में छोड़ वह बवालियों से लोहा ले रहे थे। इसी बीच 16 फरवरी को प्रमोशन के साथ उनका Ghaziabad ट्रांसफर हो गया। अगले ही दिन छोटे बेटे राज्यवर्द्धन ने जन्म लिया, लेकिन IPS Neeraj Kumar Jadaun अलीगढ़ में हालात शांत होने के बाद 18 फरवरी की रात को उसे देखने पहुंचे।

Ips neeraj kumar jadaun with family

दिल्ली में घुस दंगाइयों से बचाए थे परिवार

यूपी के Ghaziabad एसपी देहात के रूप में तैनात IPS Neeraj Kumar Jadaun ने NRC व CAA के विरोध और फिर Delhi में हुई हिंसा के दौरान बॉर्डर पर हालात संभाले। लोनी क्षेत्र में दिल्ली बॉर्डर के 10 बेहद संवेदनशील प्वॉइंट थे, जहां से दंगाई बार-बार Ghaziabad में घुसने का प्रयास कर रहे थे। IPS Neeraj Kumar Jadaun ने एक तरफ दंगाइयों को रोका तो वहीं Ghaziabad के निवासियों से लगातार संपर्क में रहे।

इसी कारण बॉर्डर पर आवाजाही ही नहीं बल्कि दंगों की आग को भी रोक दिया। लाल बाग सब्जी मंडी से 100 मीटर दूर दंगाई उत्पात करते हुए दुकान में लूट के बाद घर आग के हवाले करने का प्रयास कर रहे थे। छत पर महिला व बच्चे रो रहे थे। IPS Neeraj Kumar Jadaun ने सीमा लांघी और Delhi में घुस सैकड़ों की संख्या में पेट्रोल बम व पत्थर हाथ में लिए दंगाइयों को चेतावनी देकर खदेड़ा। उन्होंने करीब तीन परिवारों को सकुशल बचाया।

क्राइम पर पकड़, कानून-व्यवस्था में भी माहिर

IPS Neeraj Kumar Jadaun क्राइम पर अच्छी पकड़ रखते हैं यानी पेचीदा केस खोलना और जनता से संवाद बना कानून-व्यवस्था बनाए रखना जानते हैं। IPS Neeraj Kumar Jadaun के अंदर ये दोनों ही काबिलियत हैं।

 

IPS Neeraj Kumar Jadaun को अपने कार्यकाल के दौरान देहात क्षेत्र में हत्या, लूट व डकैती के रिकॉर्ड ही नहीं बल्कि उनका घटनाक्रम और खोलने का तरीका तक उन्हें मुंह जुबानी याद है।

जनता से सीधा संवाद रखते हैं। पीड़ित यदि उन तक अपनी समस्या पहुंचा दे तो निदान की पूरी गारंटी देते हैं।

यही वजह है कि लोग उन्हें देखने के बाद कानून हाथ में नहीं लेते। IPS Neeraj Kumar Jadaun ने किसानों के खिलाफ गलत तरीके से दर्ज कई मुकदमे खत्म कराए ताकि उनका Police में विश्वास बना रहे।

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देवरिया हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8.html https://sanjayrajput.com/2023/10/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8.html#respond Tue, 03 Oct 2023 09:00:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2023/10/03/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%87%e0%a4%a8%e0%a4%b8/ Read more

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Deoria Murder Case: सोमवार 2 अक्टूबर की सुबह जब सारा देश अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी की जयंती मना रहा था तभी देवरिया के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में पूर्व जिला पंचायत सदस्य और भूमाफिया प्रेमचंद्र यादव की हत्या से गुस्साए परिजनों ने शक के आधार पर सत्यप्रकाश दुबे के घर पर धावा बोल सिर्फ 15-20 मिनट में पूरे परिवार को मौत की नींद सुला दिया. वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हमलवार मौके से फरार हो गए. 
बताया जा रहा है कि सत्यप्रकाश दुबे के भाई साधू दूबे के हिस्से की करीब 10 बीघे जमीन प्रेमचंद्र यादव ने धोखे से अपने नाम करा ली थी. प्रेमचंद्र अपनी दबंगई के बल पर उस जमीन को जोत-बो भी रहा था. इसी को लेकर दोनों पक्षों में विवाद चल रहा था. सत्यप्रकाश ने इस मामले में कोर्ट केस भी कर रखा था जिसकी 4 अक्टूबर 2023 को सुनवाई थी. साल भर पहले विवादित जमीन की पुलिस और राजस्व टीम की मौजूदगी में पैमाइश भी हुई थी. लेकिन कोई फैसला न होने से विवाद नहीं रुका. 

छह लोगों के हत्याकांड की जड़ सत्यप्रकाश दुबे का भाई साधु दुबे पूर्व जिला पंचायत सदस्य दबंग प्रेमचंद यादव के कब्जे में रहता था। भाई सत्य प्रकाश दुबे से अनबन होने के बाद एक दशक पहले साधु दुबे गांव के दबंग प्रेमचंद से जुड़ गया और फिर उसी के यहां भोजन करने के साथ ही रहने लगा। इसी दौरान धोखे से प्रेमचंद व उसके भाई रामजी यादव ने उसकी भूमि अपने नाम करा ली। इसके बाद से ही साधु दुबे प्रेमचंद के कब्जे में रहता था।
बीते दिन सत्यप्रकाश और प्रेमचंद्र के बीच फिर से कहासुनी हो गई. सोमवार सुबह छह बजे पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेम यादव दूसरे पक्ष के सत्यप्रकाश दुबे के दरवाजे पर बाइक से पहुंचा। इसके कुछ देर बाद ही संदिग्ध रूप से सत्यप्रकाश दुबे के घर से 20 मीटर की दूरी पर प्रेमचंद्र यादव की लाश मिली.
हालांकि अभी तक ये बात साबित नहीं हो पाई है कि प्रेमचंद यादव की हत्या किसने की थी और न ही गांव के किसी ने सत्यप्रकाश दुबे या उसके परिवार को प्रेमचंद्र यादव की हत्या करते देखा है। 
लेकिन हत्या की खबर सुन प्रेमचंद्र यादव के परिजनों का गुस्सा भड़क उठा और प्रेमचंद्र यादव के भाई रामजी यादव ने करीब 77 की संख्या (पुलिस एफआईआर के मुताबिक) में अपनी बिरादरी के लोगों को लेकर सिर्फ शक के आधार पर सत्यप्रकाश के घर पर हमला कर दिया. वे लोग हाथ में लाठी-डंडा, धारदार हथियार और बंदूक लिए लेड़हा टोला में दाखिल हुए और घर में घुसकर सत्यप्रकाश दुबे और उनके परिवार की महिलाओं और बच्चों सहित 5 लोगों की हत्या कर दी. 
करीब 77 की संख्या में हमलावरों ने जिसे, जहां पाया, उसी हालत में मारते हुए घर तोड़ने लगे। हमलावरों में इतना गुस्सा था कि उन्होंने छोटे बच्चों तक को नहीं बख्शा। बरामदे में सत्यप्रकाश और किरन की हत्या के बाद हमलावार टीनशेड में छिपे उनके बच्चों को बाहर खींच लाए और उनकी हत्या कर दी। घटना में 8 वर्षीय अनमोल को भी बुरी तरह मारा काटा गया और उसे हमलावरों ने मरा समझकर छोड़ दिया जिसे बाद में गंभीर अवस्था में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
हमलावरों की नृशंसता और आक्रोश देखकर आस पड़ोस के लोग भी अपने घरों में छिप गए। पांच लोगों की हत्या के बाद आरोपी गांव के दूसरे छोर से भाग निकले। 
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि इस घटना में मृत प्रेमचंद्र यादव एक भूमाफिया था तथा उसके ऊपर कई आपराधिक मुकदमें भी दर्ज थे। प्रेमचंद यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उसे सफलता भी मिली थी। देवरिया में उसकी दबंगई चलती थी।
प्रेमचंद यादव ने पहली बार राजनीति के क्षेत्र में अपनी मां चिंता देवी को वर्ष 2010 में ग्राम प्रधान पद पर उतारा, जिसमें सफलता मिलने के बाद वह काफी उत्साहित था। उनका कार्यकाल वर्ष 2015 तक था। उसके बाद वर्ष 2015 में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए हुए चुनाव में प्रेमचंद यादव ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर भलुअनी पश्चिम क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सफलता भी मिली।
स्थानीय लोगों ने बताया है कि प्रेमचंद्र यादव ने ग्रामसभा की जमीन पर कब्जा करके एक आलीशान मकान बनवा रखा है।
गांव के ही कुछ लोगों ने यह भी बताया कि सत्यप्रकाश दुबे के घर पर अपने दल बल के साथ हमला करने वाला मृतक भूमाफिया प्रेमचंद्र यादव का भाई रामजी यादव भी मनबढ़ किस्म का व्यक्ति है जो अपने गांव तथा आसपास के गांवों के अपनी बिरादरी के लोगों के साथ गुट बनाकर अक्सर गुंडई किया करता है।
इस जघन्य हत्याकांड को लेकर देवरिया से बीजेपी विधायक शलभमणि त्रिपाठी बेहद अक्रोशित हैं. उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि इस मामले में दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी की वो नजीर बनेगी. उन्होंने लापरवाही बरतने वाले पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को भी कहा कि वह अपनी करनी का फल भुगतने को तैयार रहें. 
उन्होंने देवरिया हत्याकांड पर अपने फेसबुक पेज पर लिखा- “माननीय मुख्यमंत्री जी को संपूर्ण घटनाक्रम से विस्तार से अवगत करा दिया गया है. वे स्वयं इस घटना पर नज़र रखे हुए हैं. प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, स्पेशल DG प्रशांत कुमार, ADG गोरखपुर अखिल कुमार के भी निरंतर संपर्क में हूं. भूमाफियाओं एवं अपराधियों के विरूद्ध निर्णायक जंग लड़ी जाएगी. वे बचेंगे नहीं. चाहे उन्हें किसी की भी सियासी सरपरस्ती हासिल हो.”
इसके साथ बीजेपी विधायक ने लिखा- “देवरिया के फ़तेहपुर में ग्राम सभा की ज़मीन पर कब्जा करके कैसे आलीशान मकान बना और यह अवैध मकान किस प्रकार अब तक बचा रहा? इसमें जांच के साथ ही साथ प्रभावी कार्रवाई होगी. ऐसी कार्रवाई जो नजीर बने. यह घटना कतई स्वीकार्य नहीं है.” 
शलभमणि त्रिपाठी आगे लिखते हैं- “बेबस लोगों, बेटियों और मासूम बच्चों पर हमला करने वाले भूमाफ़िया कायर और नपुंसक हैं. उनका उचित और कानूनी इलाज होकर रहेगा. साथ ही इस मामले में दोषी महाभ्रष्ट राजस्व अधिकारी/कर्मचारी एवं प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी करनी का फल भुगतने को तैयार रहें.”
दुबे परिवार की जीवित बची विवाहित बेटी शोभिता दुबे जो घटना के वक्त अपने ससुराल में थी, उसने एक निजी चैनल को रोते हुए बताया कि प्रेम यादव के परिवार के लोगों की गुंडागर्दी से उनका परिवार लंबे समय से परेशान था और ये लोग पहले भी कई बार दूबे परिवार को जान से मारने की कोशिश कर चुके थे, जिसकी मुख्यमंत्री पोर्टल पर कई बार शिकायत की जा चुकी थी. अगर चेक किया जाए तो हजार से ज्यादा एप्लीकेशन पड़ी मिलेगी. जिला प्रशासन से भी शिकायत की गई थी लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन की लापरवाही तथा विपक्षी प्रेम यादव की दबंगई और प्रभाव के कारण कभी कोई कार्यवाही नहीं हुई।
एक ब्राह्मण परिवार के 5 सदस्यों को करीब 77 लोग एकजुट होकर काट देते हैं. हमलावर यादव समुदाय से आते हैं. इस हत्याकांड को सामान्य जमीनी विवाद का परिणाम मान लेना शायद एक बड़ी भूल होगी. जमीन विवाद में एक हत्या के बदले एक परिवार आरोपी परिवार के सभी लोगों को गोलियों से भून देता या तलवारों से काट डालता तो बात समझ में आती कि ये बदला लेने के लिए किया गया कृत्य है. पर यहां तो करीब 77 लोगों की भीड़ (पुलिस एफआईआर में 27 नामजद आरोपी और 50 अज्ञात) एक परिवार को, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी हैं, को पीट-पीट कर मार डालती है. 
मृतक प्रेम यादव का परिवार 77 लोगों का परिवार नहीं था. इसे परिवार कहकर केस को हल्का किया जा रहा है. ये जीता जागता नफरत का एक नमूना है. जिसमें एक जाति दूसरी जाति के लोगों से इतना नफरत करती है कि उसे हर हाल में मिटा देना चाहती है.
जरा सोचिए गांव में बसे एक ब्राह्णण परिवार को यादव जाति के कुछ लोग एकजुट होकर मार डालते हैं, ये बदला जरूर है पर एक परिवार का दूसरे परिवार से नहीं है. ये बदला है एक जाति का दूसरी जाति से. ये जातीय संघर्ष है और ये देन है हमारे देश में जाति की राजनीति करने वाले नेताओं की. 
जातिवादी नेताओं ने हमारे समाज में जातिवाद का जहर बो कर रख दिया है। अपने राजनीतिक लाभ और वोट के लिए समाज को जातीय संघर्ष की आग में झोंक दिया गया है। 
सोचने वाली बात है कि बिहार में जाति आधारित जनगणना कराने के पीछे क्या मकसद हो सकता है? 
ऐसी घटनाओं से गुड गवर्नेंस की दुहाई देने वाली योगी मोदी सरकार पर भी सवाल उठता है। क्योंकि योगी सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद आज भी गुंडों और भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं, की वो खुलेआम महिलाओं और छोटे बच्चों तक को काट रहे हैं।
ऐसी घटनाओं के पीछे जो भी लोग हैं उनका फैसला ऑन द स्पॉट एनकाउंटर करके होना चाहिए और ऐसे नृशंस हत्यारों के घरों पर बुलडोजर जरूर चलाया जाना चाहिए।
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उत्तरप्रदेश में 31 मई के बाद बाजार खोले जा सकते हैं। संभावना है कि सुबह से शाम आठ बजे तक बाजार खुलेंगी। हालांकि, इस दौरान वीकली लॉकडाउन पहले की तरह बरकरार रहेगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार के आला अधिकारी इस पक्ष में है कि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बाजारों को खोलना जरूरी है। अनुमान है कि शनिवार-रविवार की साप्ताहिक बन्दी पहले की तरह रहेगी। जल्द ही इस संबंध में जारी हो सकती है नई गाइडलाइन।
माना जा रहा है कि सरकार बाजार खोलने का निर्णय ले सकती है। हालांकि, इस दौरान बढ़ते ब्लैक फंगस के मामले को लेकर भी सरकार सक्रिय है। लेकिन बावजूद उसके बाजार खुलने के पूरे आसार हैं। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने भी बाजार को खोलने की बात कही है। इस दौरान शनिवार और रविवार को पहले की तरह बंदी रहेगी। ताकि बाजारों को पूरी तरह से सैनिटाइज कराया जा सके। जानकारों का कहना है कि प्रदेश में अब कोरोना का पीक गुजर चुका है अतः बंदी की आवश्यकता नहीं है।

20 लाख रिटेल कारोबारियों की बढ़ गई थी परेशानी
प्रदेश में करीब 20 लाख से ज्यादा रिटेल कारोबारी है। इस दौरान करोड़ों का काम प्रभावित होने लगा था। लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन कंपनियां को पूरी तरह से कारोबार करने की छूट थी, लेकिन इसकी वजह से रिटेल को बड़ा नुकसान होने लगा था। रिटेल सेक्टर से जुड़े अलग-अलग संगठनों ने इसको लेकर सीएम को ट्वीट भी किया था। हालांकि उसमें बाजार खोलने की बात न होकर ऑनलाइन पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन अब अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार बाजार को पूरी तरह से खोलने की तैयारी कर रही है।
बाजारों के अलावा कई सेक्टर पर अभी भी पहले की तरह पूरी तरह से पाबंदी जारी रह सकती है। इसमें सिनेमा हॉल, जिम, ब्यूटी पॉर्लर, शादियों में 25 की संख्या। स्कूलों को फिलहाल सरकार ने 30 मई तक बंद रखने का फैसला कर लिया है। बताया जा रहा है कि स्कूल इससे आगे भी बंद रहेंगे। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई जारी रहेगी।

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यूपी के स्कूल इस साल भी नहीं बढ़ा सकेंगे फीस, जारी हुआ ये आदेश https://sanjayrajput.com/2021/05/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80.html https://sanjayrajput.com/2021/05/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80.html#respond Thu, 20 May 2021 16:50:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2021/05/20/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82%e0%a4%b2-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80/ Read more

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प्रदेश में संचालित सभी बोर्डों के सभी विद्यालयों पर लागू होगा आदेश

★विद्यालय बन्द रहने की अवधि में नहीं देना होगा परिवहन शुल्क
★तीन माह की अग्रिम फीस देने में परेशानी होने पर दे सकेंगे मासिक फीस
एक तरफ कोरोना का कहर उपर से बच्चों के एडमिशन और स्कूल फीस की टेंशन ने हर अभिभावक की हालत खराब कर रखी है। स्कूलों द्वारा लगातार फीस जमा करने का दबाव बनाये जाने से हर अभिभावक दुखी हैं, क्योंकि लॉकडाउन ने सबकी हालात खराब कर रखी है। ऐसी विषम परिस्थिति में भी स्कूलों द्वारा फीस में वृद्धि लागू कर दी गयी थी जो कि सर्वथा अनुचित है। 

ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने कोरोना महामारी के चलते पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश में संचालित सभी बोर्डों के सभी विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए शुल्क वृद्धि (Fee Hike) पर रोक लगा दी है। यह जानकारी देते हुए उपमुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि कोविड के चलते कई परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। विद्यालय भौतिक रूप से बन्द हैं पर आनलाइन पठन पाठन कार्य जारी है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने एक ऐसा संतुलित निर्णय किया है जिससे कि आम जनमानस पर अतिरिक्त भार न पडे साथ ही विद्यालय में कार्यरत शिक्षक व शिक्षणेत्तर कार्मिकों को नियमित  वेतन देना सुनिश्चित किया जा सके।


उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विद्यालय शैक्षणिक सत्र 2021-22 में पिछले वर्ष की भांति उसी शुल्क संरचना के हिसाब से शुल्क ले सकेंगे जो वर्ष 2019-20 में लागू की गई थी। अगर किसी स्कूल ने बढी हुई शुल्क संरचना के हिसाब से फीस ले ली है तो इस बढी हुई फीस को आगे के महीनों की फीस में समायोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि विद्यालय बन्द रहने की अवधि में परिवहन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा अगर किसी छात्र अथवा अभिभावक को तीन माह का अग्रिम शुल्क जमा करने में किसी प्रकार की परेशानी आ रही है तो उनके अनुरोध पर उनसे मासिक शुल्क ही लिया जाए। इस स्थिति में उन्हें तीन माह का अग्रिम शुल्क देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। 

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि जब तक विद्यालयों में भौतिक रूप से परीक्षा नहीं हो रही है तब तक परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जा सकेगा। इसी प्रकार से जब तक क्रीड़ा, विज्ञान प्रयोगशाला, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर, वार्षिक फंक्शन जैसी गतिविधियां नहीं हो रही हैं तक उनका शुल्क भी नहीं लिया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने कोरोना काल में पूरी संवेदनशीलता के साथ यह निर्णय भी किया है कि अगर कोई छात्र अथवा छात्रा अथवा उनके परिवार का कोई सदस्य कोरोना से संक्रमित है और उन्हे फीस देने में परेशानी हो रही है तो सम्बन्धित छात्र अथवा छात्रा के लिखित अनुरोध पर उस माह का शुल्क अग्रिम महीनों में मासिक किश्त के रूप में समायोजित किया जाएगा। 


उन्होंने बताया कि इस बात के निर्देश भी दिए गए हैं कि विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मिकों का वेतन नियमित रूप से दिया जाए। इस आशय का शासनादेश जारी कर दिया गया है। इन आदेशों का कडाई से अनुपालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी विद्यालय द्वारा इन निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है तो अभिभावक द्वारा जिले में गठित शुल्क नियामक समिति के समक्ष शिकायत की जा सकेगी। जिला विद्यालय निरीक्षक को इन नियमों का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। 
यूपी सरकार द्वारा फीस वृद्धि पर रोक लगाए जाने का यह फैसला बेहद तर्कसंगत और अनिवार्य है। सरकार के इस फैसले से स्कूलों की मनमाना फीस वसूली पर अंकुश लगेगा।
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