SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Fri, 30 Jan 2026 06:22:40 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 उत्तर प्रदेश में संपत्ति रजिस्ट्रेशन में आधार-बायोमेट्रिक सत्यापन 1 फरवरी से अनिवार्य https://sanjayrajput.com/2026/01/aadhaar-biometric-property-registration-up-february-2026.html https://sanjayrajput.com/2026/01/aadhaar-biometric-property-registration-up-february-2026.html#respond Fri, 30 Jan 2026 06:22:40 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1338 Read more

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उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में संपत्ति रजिस्ट्री प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए 1 फरवरी 2026 से आधार आधारित पहचान और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले का उद्देश्य पंजीकरण प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है, जिससे जमीन और संपत्ति से जुड़े जालसाज़ियों पर रोक लग सके।

इस नई व्यवस्था के तहत, अब दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन के समय सभी पक्षकारों — यानी खरीदारों, विक्रेताओं और गवाहों — की पहचान ई-केवाईसी, फिंगरप्रिंट/बायोमेट्रिक और ई-हस्ताक्षर के माध्यम से सत्यापित की जाएगी। बिना सफल प्रमाणीकरण के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।

राज्य के स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के मंत्री ने बताया कि यह कदम भूमि और संपत्ति धोखाधड़ी को रोकने, दस्तावेजों की प्रामाणिकता बढ़ाने और रजिस्ट्रेशन प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

अब तक संपत्ति रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का भी बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, जिससे रजिस्ट्री प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ बन रही है।

मुख्य बातें

  • 1 फरवरी 2026 से राज्य के सभी उप-निबंधक कार्यालयों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण अनिवार्य होगा।
  • खरीदार, विक्रेता और गवाह, तीनों का सत्यापन ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक के जरिए किया जाएगा।
  • इससे फर्जी रजिस्ट्रियों और जालसाज़ी को प्रभावी रूप से रोका जा सकेगा।
  • डिजिटल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा बेहतर होगी।

यह नई व्यवस्था उत्तर प्रदेश सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम का हिस्सा है।

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क्या अगला प्रधानमंत्री पहले से तय है? या लोकप्रिय चेहरे का रास्ता रोका जा रहा है https://sanjayrajput.com/2026/01/kya-agla-pradhanmantri-pehle-se-tay-yogi-adityanath-rajniti-satta-sangharsh.html https://sanjayrajput.com/2026/01/kya-agla-pradhanmantri-pehle-se-tay-yogi-adityanath-rajniti-satta-sangharsh.html#respond Wed, 28 Jan 2026 01:46:16 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1323 Read more

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देश की राजनीति इस समय किसी शतरंज की बिसात से कम नहीं दिखती, जहां हर चाल बेहद सोच-समझकर चली जा रही है। एक ओर 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति पर काम चल रहा है, तो दूसरी ओर 2027 की राजनीतिक ज़मीन पहले से ही गर्म होती नजर आ रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश को अगला प्रधानमंत्री पहले ही तय कर लिया गया है, या फिर किसी उभरते और लोकप्रिय चेहरे को जानबूझकर आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय सत्ता का केंद्र एक बार फिर गुजरात में बनाए रखने की कोशिशें तेज हैं और इसी क्रम में अमित शाह को प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में आगे लाने की रणनीति तैयार की जा रही है। लेकिन इसी बीच उत्तर प्रदेश से एक ऐसा चेहरा उभरकर सामने आया है, जिसे देश का बड़ा तबका भविष्य का प्रधानमंत्री मानने लगा है—उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

योगी आदित्यनाथ अब केवल एक राज्य के मुख्यमंत्री भर नहीं रह गए हैं। उनकी लोकप्रियता राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती जा रही है। जनसमर्थन, सोशल मीडिया की सक्रियता और ज़मीनी प्रतिक्रिया यह संकेत दे रही है कि यदि मौका मिला, तो देश की बागडोर उनके हाथों में जा सकती है। और यहीं से राजनीतिक असहजता शुरू होती है।

इसी असहजता के दौर में यूजीसी इक्विटी बिल को लेकर बहस तेज होती है। सतह पर यह बहस सामाजिक संतुलन और वर्गों के अधिकारों से जुड़ी दिखती है, लेकिन गहराई से देखें तो तस्वीर कुछ और ही इशारा करती है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली टकराव किसी जाति या वर्ग से नहीं, बल्कि उस नेतृत्व से है, जिसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद हर दिन और ऊंचा होता दिख रहा है।

आशंका यह भी जताई जा रही है कि यदि योगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री बने, तो उनकी प्राथमिकताओं में उत्तर प्रदेश प्रमुख रहेगा। इससे सत्ता और संसाधनों के मौजूदा संतुलन में बदलाव आ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सीधे तौर पर रास्ता रोकना संभव न हो, तो क्या परोक्ष दबाव, नीतिगत फैसलों और मौन के ज़रिये बाधाएं खड़ी की जा सकती हैं?

योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत—उनकी साफ छवि—यहीं उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। न भ्रष्टाचार का आरोप, न किसी बड़े विवाद का दाग। ऐसे में प्रत्यक्ष हमला मुश्किल हो जाता है और परिस्थितियां इस तरह बनाई जाती हैं, जहां नेता को संगठनात्मक अनुशासन और सत्ता संतुलन के नाम पर चुप रहना पड़े।

इसी पृष्ठभूमि में प्रयागराज की हालिया घटना सामने आती है। माघ मेला, भारी भीड़ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी का रथ रोके जाने का निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से उचित बताया गया। लेकिन इसके बाद जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। अचानक ऐसे चेहरे समर्थन में सामने आने लगे, जो आमतौर पर धार्मिक मुद्दों पर मौन रहते हैं। वहीं, भाजपा के कई वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे रहे।

इसी दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बयान आता है कि जो हुआ, वह गलत था और इसकी जांच होगी। यह बयान महज प्रशासनिक टिप्पणी नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी द्वारा केशव प्रसाद मौर्य को बेहतर मुख्यमंत्री बताए जाने से राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होती दिखी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये घटनाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक क्रमबद्ध रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। बयान, मौन और समर्थन—सब कुछ एक तयशुदा स्क्रिप्ट के तहत आगे बढ़ता प्रतीत होता है, ताकि असली टकराव सीधे सामने न आए। प्रयागराज की घटना अब केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं रह जाती, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही खींचतान का प्रतीक बन जाती है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ये सभी घटनाएं संयोग मात्र हैं, या फिर उस शतरंज की बिसात का हिस्सा, जहां अगली चाल देश की राजनीति की दिशा तय करने वाली है।

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नीट अभ्यर्थी ने दिव्यांग कोटा पाने के लिए खुद का पैर काटा, जांच में चौंकाने वाले खुलासे https://sanjayrajput.com/2026/01/neet-aspirant-self-amputation-pwd-quota-jaunpur.html https://sanjayrajput.com/2026/01/neet-aspirant-self-amputation-pwd-quota-jaunpur.html#respond Mon, 26 Jan 2026 05:52:18 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1319 Read more

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जौनपुर (उत्तर प्रदेश)। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जौनपुर निवासी नीट अभ्यर्थी सूरज भास्कर पर आरोप है कि उसने एमबीबीएस में दिव्यांग (PwD) कोटे का लाभ लेने के उद्देश्य से अपने ही पैर का हिस्सा काट लिया।

घटना के बाद युवक ने पुलिस को बताया था कि उस पर अज्ञात लोगों ने हमला किया है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि, जांच आगे बढ़ने पर युवक के बयानों में कई तरह की असंगतियां सामने आईं।

पुलिस ने जब कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले और युवक की करीबी महिला मित्र से पूछताछ की, तो मामले में नया मोड़ आ गया। पूछताछ में सामने आया कि युवक पहले से ही दिव्यांग प्रमाण पत्र प्राप्त करने के प्रयास में लगा हुआ था।

जांच के दौरान पुलिस को एनेस्थीसिया की सिरिंज और सर्जिकल उपकरण भी बरामद हुए, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया कि चोट स्वयं द्वारा दी गई हो सकती है और पूरी घटना को हमले का रूप देने की कोशिश की गई।</

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यूजीसी के नए दिशा-निर्देशों पर उठे सवाल, सामान्य वर्ग के छात्रों ने जताई भेदभाव की आशंका https://sanjayrajput.com/2026/01/ugc-guidelines-general-category-students-discrimination.html https://sanjayrajput.com/2026/01/ugc-guidelines-general-category-students-discrimination.html#respond Tue, 20 Jan 2026 10:09:39 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1315 Read more

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी को जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। आयोग का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेज परिसरों में जातिगत भेदभाव को रोकना है, लेकिन सामान्य वर्ग से जुड़े कई छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने इन प्रावधानों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

दिशा-निर्देशों की पहली नज़र में मंशा समानता और समावेशन की दिखाई देती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इसके कुछ प्रावधान व्यावहारिक स्तर पर असंतुलन और एकतरफा कार्रवाई को बढ़ावा दे सकते हैं।

क्या है UGC Guidelines?

♦ अगर OBC या SC/ST का विद्यार्थी किसी सामान्य वर्ग के विद्यार्थी पर आरोप लगाया तो वह दोषी माना ही जाएगा, भले वह आरोप फर्जी हो |

♦ झूठी शिकायत करने पर उन विद्यार्थियों पर कोई भी सज़ा का प्रावधान नहीं होगा |

♦ कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर UGC और फंडिंग का दबाव बढ़ेगा |

♦ सामान्य वर्ग = दोषी, जब तक निर्दोष साबित न हो |

♦ अगर आवश्यक समझा जाएगा तो पुलिस बुलाकर सवर्ण बच्चों को तुरंत जेल का प्रावधान होगा |

निगरानी स्क्वाड को लेकर विवाद

यूजीसी दस्तावेज़ के पाँचवें बिंदु में यह प्रावधान किया गया है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के खिलाफ होने वाले कथित भेदभाव पर निगरानी रखने के लिए संस्थानों में एक विशेष स्क्वाड गठित किया जाएगा।

सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि यह व्यवस्था आगे चलकर निगरानी, दबाव और उत्पीड़न का माध्यम बन सकती है। उनका आरोप है कि इससे कुछ समुदायों को पहले से ही संदिग्ध मानकर देखा जाएगा, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो सकता है।

‘अवसर केंद्र’ और ‘समानता समिति’ पर आपत्ति

दस्तावेज़ में वंचित एवं शोषित वर्गों के छात्रों के लिए ‘अवसर केंद्र’ (Opportunity Centre) स्थापित करने तथा एक ‘समानता समिति’ (Equity Committee) के गठन का भी प्रावधान है। यह समिति SC, ST, OBC और दिव्यांग छात्रों से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगी।

विरोध करने वालों का कहना है कि इस समिति में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में यदि किसी सामान्य वर्ग के छात्र के खिलाफ शिकायत दर्ज होती है, तो उसकी बात निष्पक्ष रूप से रखने के लिए मंच उपलब्ध नहीं होगा।

भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने पर सवाल

आलोचकों का यह भी कहना है कि दिशा-निर्देशों में “भेदभाव” की कोई स्पष्ट और कानूनी परिभाषा नहीं दी गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि व्यक्तिगत मतभेद, वैचारिक असहमति या सामान्य बातचीत को भी भेदभाव की श्रेणी में रखकर शिकायत दर्ज की जा सकती है।

संभावित दुष्परिणाम गिनाए गए

  • शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने से फर्जी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों की आशंका।
  • शैक्षणिक परिसरों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ने का डर।
  • कानूनी कार्रवाई के भय से छात्रों के बीच संवाद और बहस का माहौल कमजोर होने की संभावना।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी तेज

कुछ सामाजिक संगठनों ने इन दिशा-निर्देशों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया है कि सरकार नए सामाजिक समीकरण साधने के प्रयास में एक वर्ग को अलग-थलग महसूस करा रही है। वहीं, सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि यह नियम केवल समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं, न कि किसी समुदाय के खिलाफ।

फिलहाल यूजीसी के इन दिशा-निर्देशों पर देशभर के शैक्षणिक संस्थानों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इन नियमों में संशोधन होता है या सरकार और आयोग इन्हें मौजूदा स्वरूप में ही लागू करते हैं।

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मां बनी कातिल: तीन साल के बेटे ने देख लिया मां का राज, फिर छत से फेंककर कर दी हत्या https://sanjayrajput.com/2026/01/maa-ne-3-saal-ke-bete-ko-chhat-se-phenkar-ki-hatya-gwalior-crime-story.html https://sanjayrajput.com/2026/01/maa-ne-3-saal-ke-bete-ko-chhat-se-phenkar-ki-hatya-gwalior-crime-story.html#respond Tue, 20 Jan 2026 04:42:08 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1312 Read more

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मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से सामने आई यह खौफनाक वारदात रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली है। यहां एक मां ने अपने ही तीन साल के मासूम बेटे की बेरहमी से हत्या कर दी। वजह ऐसी कि जिसने भी सुनी, सन्न रह गया।

यह सनसनीखेज घटना 28 अप्रैल 2023 को ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि महिला का बेटा अचानक उस समय छत पर पहुंच गया, जब उसकी मां अपने प्रेमी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में थी। बेटे द्वारा यह राज देख लिए जाने के डर ने मां को हैवान बना दिया।

राज खुलने के डर से मां ने मासूम को मौत के घाट उतारा

अभियोजन के अनुसार, आरोपी महिला ज्योति राठौर अपने पड़ोसी प्रेमी उदय इंदौलिया के साथ दो मंजिला मकान की छत पर मौजूद थी। इसी दौरान तीन साल का बेटा सनी उर्फ जतिन वहां पहुंच गया। बेटे ने मां को प्रेमी के साथ देख लिया।

बात बाहर न फैल जाए, इस डर से ज्योति ने क्रूर कदम उठाते हुए मासूम बेटे को छत से नीचे फेंक दिया। ऊंचाई से गिरने के कारण बच्चे के सिर में गंभीर चोटें आईं। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पिता मानता रहा हादसा, सच्चाई रही दबी

बच्चे के पिता ध्यान सिंह, जो पेशे से पुलिस कांस्टेबल हैं, शुरुआत में इसे महज एक हादसा मानते रहे। उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस बेटे को उन्होंने खोया है, उसकी मौत के पीछे खुद उसकी मां का हाथ है।

सपनों में आने लगा बेटा, टूट गया अपराध का बोझ

बेटे की मौत के बाद ज्योति की मानसिक हालत बिगड़ने लगी। वह रात-रात भर घबराकर उठ जाती थी और डरी-सहमी रहती थी। पति को लगा कि वह बेटे की मौत के सदमे में है। डॉक्टरों का इलाज भी चला, लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।

कुछ समय बाद ज्योति ने पति को बताया कि उसका मरा हुआ बेटा उसे सपनों में दिखाई देता है। उसे लगने लगा कि बेटे की आत्मा भटक रही है। इसी मानसिक दबाव और डर के चलते एक दिन उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

उसने बताया कि बेटे ने उसे और उसके प्रेमी को छत पर एक साथ देख लिया था। डर था कि बच्चा यह बात किसी को बता देगा, इसलिए उसने उसे छत से नीचे फेंक दिया।

वीडियो साक्ष्य बने सबूत, मां को उम्रकैद

सच्चाई सामने आने के बाद कांस्टेबल पति ने पत्नी को विश्वास में लेकर बातचीत का वीडियो बनाया और उसे पुलिस को सौंप दिया। इन्हीं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई हुई।

शनिवार को सत्र न्यायालय ने हत्यारिन मां ज्योति राठौर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उसके प्रेमी उदय इंदौलिया को बरी कर दिया।

रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली कहानी

यह मामला न सिर्फ एक मासूम की दर्दनाक मौत की कहानी है, बल्कि उस अंधे राज की भी, जिसने एक मां को अपने ही कलेजे के टुकड़े का कातिल बना दिया।

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इटावा हत्याकांड: आभूषण कारोबारी ने बीवी और तीन बच्चों को ज़हर देकर मार डाला, वजह जानकर दहल जाएगी रूह https://sanjayrajput.com/2026/01/etawah-family-murder-case-jewellery-businessman-killed-wife-children.html https://sanjayrajput.com/2026/01/etawah-family-murder-case-jewellery-businessman-killed-wife-children.html#respond Mon, 19 Jan 2026 16:03:36 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1309 Read more

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उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िले से सामने आया यह हत्याकांड पूरे प्रदेश को हिला देने वाला है। एक ऐसा परिवार, जो समाज में खुशहाल और प्रतिष्ठित माना जाता था, उसी घर में चार लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई। और कातिल कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसी घर का मुखिया निकला।

बंद कमरों में मौत, बाहर पसरा सन्नाटा

लालपुरा मोहल्ले में स्थित वर्मा परिवार के घर पर 11 नवंबर 2024 की सुबह दोनों कमरों में ताले लटके मिले। मोहल्ले वालों को लगा कि परिवार किसी काम से बाहर गया होगा। लेकिन शाम होते-होते जो सामने आया, उसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया।

रात करीब 8 बजे अचानक रेखा और उसकी बड़ी बेटी भव्या के व्हाट्सएप स्टेटस पर एक लाइन दिखाई दी—“अब हमारा परिवार नहीं रहा।”

फोन बंद थे, कॉल का कोई जवाब नहीं। घबराए रिश्तेदारों ने पुलिस को सूचना दी। इसी बीच कंट्रोल रूम में एक अज्ञात कॉल आई—“लालपुरा के एक घर में चार लाशें पड़ी हैं।”

ताले टूटे, अंदर का मंजर देख कांप उठी पुलिस

पुलिस जब मौके पर पहुंची और ताले तोड़े, तो अंदर का दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला था। नीचे के कमरे में पत्नी रेखा, बेटी भव्या और छोटा बेटा अभीष्ट मृत पड़े थे। ऊपर की मंज़िल पर 16 साल की काव्या की लाश मिली।

चारों की मौत ने एक ही सवाल खड़ा कर दिया—घर का मुखिया मुकेश वर्मा कहां है?

रेलवे ट्रैक पर मिला परिवार का कातिल

इसी दौरान रेलवे पुलिस से सूचना आई कि एक व्यक्ति ट्रेन के आगे कूदने की कोशिश कर रहा था। उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में उसकी पहचान मुकेश वर्मा के रूप में हुई—वही व्यक्ति, जिसकी पत्नी और बच्चे मृत मिले थे।

पहले तो उसने खुद को मानसिक रूप से बीमार बताने की कोशिश की, लेकिन बाद में उसने अपराध कबूल कर लिया।

पिज़्ज़ा में नींद की गोली, फिर गला घोंटकर हत्या

मुकेश ने पुलिस को बताया कि 10 नवंबर की रात उसने बच्चों के लिए पिज़्ज़ा मंगवाया, जिसमें नींद की गोलियां मिलाई गई थीं। पत्नी और बच्चों के बेहोश होते ही उसने एक-एक कर सभी का गला घोंट दिया।

उसने यह सब आर्थिक तंगी और पारिवारिक तनाव का हवाला देकर जायज़ ठहराने की कोशिश की।

लेकिन यह कहानी झूठ थी

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मुकेश की कहानी धराशायी होती चली गई। कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड्स ने एक ऐसी सच्चाई उजागर की, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया।

स्वाति सोनी: हत्याकांड के पीछे छिपा नाम

जांच में सामने आया कि मुकेश का एक महिला से वर्षों से अवैध संबंध था। उसका नाम था स्वाति सोनी—कानपुर की तलाकशुदा महिला और दो बच्चों की मां।

दोनों की पहचान सालों पहले हुई थी, लेकिन 2019 में रिश्ता दोबारा शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह जुनून में बदल गया। मुकेश ने स्वाति और उसके बच्चों पर लाखों रुपये खर्च किए, यहां तक कि अपनी दुकान बेचकर मिली रकम भी उसी पर उड़ा दी।

पत्नी को हो गया था शक, घर में मच गया था तूफान

रेखा को पति के बदलते व्यवहार पर शक हो चुका था। आए दिन झगड़े होने लगे। इसी दौरान एक बहस में रेखा ने कहा था कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो वह बच्चों के साथ आत्महत्या कर लेगी।

पुलिस के अनुसार, यही बात मुकेश के दिमाग में घर कर गई और उसने आत्महत्या की जगह पूरे परिवार की हत्या की योजना बना ली।

घटना के दिन इटावा में थी प्रेमिका

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वारदात वाले दिन स्वाति अपने बेटे के साथ इटावा आई थी। मुकेश ने उससे मुलाकात कर कहा—“काम हो गया है, अब तुम वापस कानपुर चली जाओ।”

इसके बाद उसने रेलवे ट्रैक पर जाकर आत्महत्या का नाटक किया, ताकि खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित कर सके।

पहली पत्नी की मौत पर भी उठे सवाल

जांच में एक और सनसनीखेज़ खुलासा हुआ। पुलिस को शक है कि मुकेश ने अपनी पहली पत्नी नीतू को भी कैंसर की दवा के बहाने ज़हर देकर मारा था, ताकि वह दूसरी शादी कर सके।

एक शख्स, कई हत्याएं, अनगिनत सवाल

इटावा हत्याकांड ने यह साबित कर दिया कि लालच, अवैध रिश्ते और झूठ इंसान को हैवान बना सकते हैं। बाहर से शरीफ दिखने वाला यह कारोबारी दरअसल एक खतरनाक अपराधी था, जिसने अपने ही परिवार को मौत के घाट उतार दिया।

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पत्रकार सुरक्षा कानून पर पूर्व राज्यपाल से जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया की अहम बैठक https://sanjayrajput.com/2026/01/patrakar-suraksha-kanoon-jci-purv-rajyapal-baithak.html https://sanjayrajput.com/2026/01/patrakar-suraksha-kanoon-jci-purv-rajyapal-baithak.html#respond Wed, 14 Jan 2026 04:44:04 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1305 Read more

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नई दिल्ली। देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पत्रकार सुरक्षा कानून को प्रभावी रूप से लागू कराने की मांग को लेकर जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने हिमाचल प्रदेश एवं राजस्थान के पूर्व राज्यपाल माननीय कलराज मिश्र से मुलाकात कर विस्तृत एवं गंभीर चर्चा की।

बैठक के दौरान पत्रकारों के समक्ष उत्पन्न हो रही चुनौतियों, लगातार बढ़ रहे हमलों, धमकियों, उत्पीड़न तथा फर्जी मुकदमों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। डॉ. अनुराग सक्सेना ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सशक्त बनाए रखने के लिए पत्रकारों को मजबूत कानूनी संरक्षण प्रदान किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों में पत्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए असुरक्षा और हिंसा का सामना कर रहे हैं, जिससे निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात में पत्रकार सुरक्षा कानून की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

पूर्व राज्यपाल माननीय कलराज मिश्र ने संगठन की मांगों को गंभीरता से सुना और कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आधारशिला हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना न केवल सरकार बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा उठाए गए इस महत्वपूर्ण विषय को वे केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून समय की मांग है और इसके क्रियान्वयन के लिए वे हरसंभव प्रयास करेंगे।

माननीय कलराज मिश्र ने पत्रकार हितों के लिए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले समय में इस दिशा में सकारात्मक और ठोस निर्णय लिए जाएंगे।

इस बैठक को पत्रकारों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे भविष्य में पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

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जो समस्याएं भारत में आम हैं, वे चीन में क्यों नहीं दिखतीं? सिस्टम, इच्छाशक्ति और अनुशासन का बड़ा फर्क https://sanjayrajput.com/2026/01/bharat-china-samasyayein-fark-kyon.html https://sanjayrajput.com/2026/01/bharat-china-samasyayein-fark-kyon.html#respond Tue, 13 Jan 2026 05:18:24 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1302 Read more

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भारत और चीन—दुनिया की दो सबसे बड़ी आबादी वाले देश। दोनों का इतिहास हजारों साल पुराना, सभ्यताएं प्राचीन और संसाधन विशाल। इसके बावजूद आज जब हम बुनियादी व्यवस्थाओं, नागरिक सुविधाओं और शासन की प्रभावशीलता की बात करते हैं, तो एक सवाल बार-बार उठता है—जो समस्याएं भारत में दशकों से बनी हुई हैं, वे चीन में क्यों नजर नहीं आतीं?

यह सवाल सिर्फ सोशल मीडिया बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों और आम नागरिकों के बीच भी गंभीर चर्चा का विषय बन चुका है। आइए, तथ्यों और व्यवस्थागत अंतर के आधार पर समझने की कोशिश करते हैं।


1. निर्णय लेने की गति: लोकतंत्र बनाम केंद्रीकृत सत्ता

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां नीति निर्माण में संसद, न्यायपालिका, राज्य सरकारें, विपक्ष, मीडिया और जनमत की अहम भूमिका होती है। यह व्यवस्था नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा तो करती है, लेकिन निर्णय प्रक्रिया को धीमा भी कर देती है।

वहीं चीन में सत्ता पूरी तरह केंद्रीकृत है। वहां सरकार जो फैसला लेती है, वह तुरंत जमीन पर लागू होता है। न लंबी बहस, न अदालतों में सालों तक लटके मामले। इसी वजह से इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, स्मार्ट सिटी और ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहद तेजी से विकसित होते हैं।


2. कानून का सख्त पालन: नियम सबके लिए समान

भारत में कानून हैं, लेकिन उनका पालन एक बड़ी चुनौती है। ट्रैफिक नियम तोड़ना, अतिक्रमण करना, टैक्स चोरी, सरकारी जमीन पर कब्जा—ये सब आम दृश्य बन चुके हैं। अक्सर राजनीतिक संरक्षण या सिस्टम की ढिलाई के कारण दोषी बच निकलते हैं।

चीन में कानून तोड़ने की कीमत बेहद भारी होती है। वहां नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी सजा तय है और वह बिना भेदभाव लागू होती है। आम नागरिक से लेकर बड़े अधिकारी तक, कानून के सामने सभी समान हैं। यही कारण है कि वहां सार्वजनिक अनुशासन स्वतः दिखाई देता है।


3. भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई

भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून और एजेंसियां मौजूद हैं, लेकिन जांच और सजा की प्रक्रिया लंबी और जटिल है। कई हाई-प्रोफाइल मामले वर्षों तक अदालतों में चलते रहते हैं।

चीन में भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। बड़े-बड़े अफसरों और उद्योगपतियों तक को कड़ी सजा दी गई है। इसका सीधा असर यह हुआ कि सिस्टम में डर भी है और अनुशासन भी।


4. इंफ्रास्ट्रक्चर: योजना से लेकर क्रियान्वयन तक अंतर

भारत में सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट और शहरी विकास योजनाएं बनती जरूर हैं, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी, राजनीतिक विरोध और कानूनी अड़चनों के कारण परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी रहती हैं।

चीन में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास राष्ट्रीय प्राथमिकता है। वहां एक बार योजना बनी तो उसे तय समय में पूरा किया जाता है। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क, मल्टी-लेन एक्सप्रेसवे और आधुनिक शहर इसका उदाहरण हैं।


5. जनसंख्या प्रबंधन और शहरी अनुशासन

भारत में तेजी से बढ़ती आबादी और अव्यवस्थित शहरीकरण बड़ी समस्या है। झुग्गियां, ट्रैफिक जाम, गंदगी और संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

चीन ने वर्षों पहले जनसंख्या नियंत्रण और नियोजित शहरीकरण पर काम किया। शहरों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया गया, जिससे बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा।


6. शिक्षा और नागरिक जिम्मेदारी

भारत में शिक्षा प्रणाली ज्ञान देने पर तो जोर देती है, लेकिन नागरिक कर्तव्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। नतीजा यह है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या नियम तोड़ना सामान्य बात बन जाती है।

चीन में शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन और राष्ट्रहित की भावना बचपन से सिखाई जाती है। नागरिकों में यह भावना होती है कि सिस्टम का पालन करना उनका कर्तव्य है।


7. राजनीति और प्रशासन का संबंध

भारत में प्रशासन अक्सर राजनीतिक दबाव में काम करता है। ट्रांसफर-पोस्टिंग, जांच और कार्रवाई कई बार राजनीतिक समीकरणों से प्रभावित होती है।

चीन में प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के अधीन होता है और प्रदर्शन के आधार पर अधिकारियों का मूल्यांकन किया जाता है। नतीजतन, काम न करने वाले अधिकारी लंबे समय तक सिस्टम में नहीं टिक पाते।


8. मीडिया, विरोध और सिस्टम की स्थिरता

भारत में मीडिया और विरोध लोकतंत्र की ताकत हैं, लेकिन कई बार अनावश्यक विरोध और राजनीतिक हंगामे विकास कार्यों को प्रभावित करते हैं।

चीन में विरोध की सीमाएं तय हैं। इससे सरकार को योजनाएं लागू करने में स्थिरता मिलती है, हालांकि इसकी कीमत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के रूप में चुकानी पड़ती है।


निष्कर्ष: समस्या व्यवस्था की नहीं, इच्छाशक्ति की है

यह कहना गलत होगा कि भारत में समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। संसाधन, प्रतिभा और तकनीक—सब कुछ मौजूद है। फर्क सिर्फ राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी का है।

चीन का मॉडल पूरी तरह भारत में लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि भारत की आत्मा लोकतंत्र में बसती है। लेकिन कानून का सख्त पालन, भ्रष्टाचार पर त्वरित कार्रवाई, योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन और नागरिक अनुशासन—ये सब सीख भारत भी अपना सकता है।

जब तक सिस्टम को चलाने वाले और सिस्टम में रहने वाले दोनों अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक सवाल बना रहेगा—जो समस्याएं भारत में हैं, वे चीन में क्यों नहीं हैं?

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पत्रकार से बदसलूकी का मामला गरमाया, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग https://sanjayrajput.com/2026/01/the-case-of-misbehavior-with-the-journalist-has-heated-up-demanding-action-against-the-guilty-policemen.html https://sanjayrajput.com/2026/01/the-case-of-misbehavior-with-the-journalist-has-heated-up-demanding-action-against-the-guilty-policemen.html#respond Sun, 11 Jan 2026 15:51:22 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1295 Read more

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मेरठ में कवरेज रोकने की कोशिश का वीडियो वायरल, प्रेस की आज़ादी पर बहस तेज

लखनऊ। रिपोर्टिंग के दौरान एक टीवी पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मेरठ में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रिपब्लिक भारत न्यूज चैनल के पत्रकार एक संवेदनशील प्रकरण की कवरेज के लिए मौके पर मौजूद थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रिपोर्टिंग से रोकने की कोशिश की। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की की गई। वायरल वीडियो में पुलिस और पत्रकार के बीच तीखी नोकझोंक साफ तौर पर देखी जा सकती है।

घटना की कड़ी निंदा करते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि पत्रकार संविधान से मिले अधिकारों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, ऐसे में पुलिस का यह रवैया गंभीर चिंता का विषय है। यदि पत्रकारों को सच्चाई सामने लाने से रोका जाएगा तो शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े होंगे।

वहीं, संगठन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आर.सी. श्रीवास्तव ने इसे पूरे मीडिया जगत का अपमान बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया तो संगठन को आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

मेरठ की यह घटना अब केवल एक स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रही है। यह मामला देशभर में प्रेस की स्वतंत्रता और पुलिस के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि वे कानून-व्यवस्था में बाधा नहीं बनते, लेकिन सच दिखाने से रोकने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने गृह मंत्री को पत्र भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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PM Kisan Farmer ID Registration: किसानों के लिए अनिवार्य हुई फार्मर आईडी, जानें पूरी जानकारी https://sanjayrajput.com/2026/01/pm-kisan-farmer-id-registration.html https://sanjayrajput.com/2026/01/pm-kisan-farmer-id-registration.html#respond Thu, 08 Jan 2026 09:28:45 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1292 Read more

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देश के किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक अहम और दूरगामी कदम उठाया है। अब प्रत्येक किसान के लिए फार्मर आईडी (Farmer ID) बनवाना अनिवार्य किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य किसानों को एक यूनिक डिजिटल पहचान देना और सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे, पारदर्शी और बिना किसी रुकावट के उन तक पहुंचाना है।

क्या है फार्मर आईडी

फार्मर आईडी किसानों के लिए तैयार की गई एक डिजिटल पहचान है। इसमें किसान की व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, उम्र, पता, आधार नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज रहता है। इसके साथ ही खेती से जुड़ी जानकारी जैसे जमीन का विवरण, फसलों की जानकारी और खेती का प्रकार भी इसमें शामिल होता है।

क्यों जरूरी मानी जा रही है फार्मर आईडी

सरकारी योजनाओं में लंबे समय से फर्जीवाड़े और अपात्र लोगों द्वारा लाभ लेने की शिकायतें सामने आती रही हैं। फार्मर आईडी के जरिए केवल वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी। एक बार डिजिटल सत्यापन हो जाने के बाद बार-बार दस्तावेज जांच की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।

PM किसान सम्मान निधि से क्या है संबंध

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आगे चलकर इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी। जिन किसानों का पंजीकरण पूरा नहीं होगा, उनकी किस्त अटक सकती है।

सरकार का उद्देश्य क्या है

सरकार देश के सभी किसानों का एक राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार करना चाहती है। इससे कृषि नीतियों को बेहतर बनाने, सब्सिडी के सही वितरण और योजनाओं की निगरानी में मदद मिलेगी। सही डेटा के आधार पर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकेगा।

कौन करा सकता है फार्मर आईडी रजिस्ट्रेशन

फार्मर आईडी सभी किसानों के लिए है। इसमें छोटे और सीमांत किसान, बटाईदार, किराए पर खेती करने वाले किसान और दूसरों की जमीन पर खेती करने वाले लोग भी शामिल हैं। सरकार चाहती है कि खेती से जुड़ा हर व्यक्ति इस सिस्टम का हिस्सा बने।

जरूरी दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • जमीन से जुड़े दस्तावेज (खसरा, खतौनी आदि)
  • बैंक खाता विवरण
  • मोबाइल नंबर
  • निवास प्रमाण पत्र
  • पासपोर्ट साइज फोटो (यदि आवश्यक हो)

ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया

फार्मर आईडी के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया सरल रखी गई है। किसान संबंधित पोर्टल पर जाकर आधार और मोबाइल नंबर के माध्यम से ओटीपी सत्यापन करते हैं। इसके बाद व्यक्तिगत और खेती से जुड़ी जानकारी भरकर दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं। जांच पूरी होने पर किसान को फार्मर आईडी जारी कर दी जाती है।

ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत होने पर क्या करें

जिन किसानों के पास इंटरनेट या स्मार्टफोन नहीं है, वे नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC), कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वहां मौजूद कर्मचारी पूरी प्रक्रिया में मदद करते हैं और नाममात्र शुल्क लिया जाता है।

फार्मर आईडी से भविष्य में क्या फायदे होंगे

फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों को हर योजना के लिए अलग-अलग दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे। सब्सिडी, फसल बीमा, मुआवजा और अन्य लाभ सीधे किसान तक पहुंचेंगे। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम

यह व्यवस्था कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। योजनाओं की निगरानी आसान होगी और सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में किस तरह की सहायता की जरूरत है।

किसानों से सरकार की अपील

सरकार ने सभी किसानों से अपील की है कि वे समय रहते अपनी फार्मर आईडी बनवा लें। आने वाले समय में अधिकांश योजनाएं इसी आईडी के आधार पर लागू की जाएंगी। देरी करने पर किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

खेती को आधुनिक बनाने की पहल

फार्मर आईडी को खेती को आधुनिक और संगठित बनाने का एक मजबूत माध्यम माना जा रहा है। डिजिटल रिकॉर्ड और सही डेटा के जरिए खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।

निष्कर्ष: फार्मर आईडी किसानों के लिए एक जरूरी और फायदेमंद पहल है। यह न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ पाने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य की कृषि नीतियों को भी मजबूत बनाएगी। किसानों को चाहिए कि वे इसे अवसर के रूप में देखें और जल्द से जल्द पंजीकरण कराएं।

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कितने प्रकार की रोटियां खाएं? बीमारी के अनुसार सही रोटी का चुनाव https://sanjayrajput.com/2026/01/bimari-ke-anusar-sahi-roti-ka-chunav.html https://sanjayrajput.com/2026/01/bimari-ke-anusar-sahi-roti-ka-chunav.html#respond Thu, 08 Jan 2026 02:04:34 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1289 Read more

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भारतीय भोजन में रोटी मुख्य आहार मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बीमारी और शारीरिक स्थिति के अनुसार रोटी का चुनाव बदलना चाहिए? सही अनाज की रोटी न केवल बीमारी से बचाव करती है, बल्कि उपचार में भी सहायक होती है। आइए जानते हैं बीमारी के अनुसार कौन-सी रोटी खानी चाहिए और किनसे बचना चाहिए।


1⃣ मधुमेह (डायबिटीज)

  • खाएं: ज्वार, बाजरा, जौ, रागी की रोटी
  • लाभ: कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स, शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है
  • बचें: मैदा व बहुत मुलायम गेहूं की रोटी

2⃣ मोटापा

  • खाएं: जौ, ज्वार, बाजरा, ओट्स की रोटी
  • लाभ: अधिक फाइबर, देर तक पेट भरा रहता है
  • बचें: मैदा, घी-मक्खन लगी रोटियां

3⃣ कब्ज

  • खाएं: गेहूं (चोकर सहित), ज्वार, बाजरा की रोटी
  • लाभ: आंतों की गति सुधरती है
  • साथ में: पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

4⃣ हृदय रोग

  • खाएं: ज्वार, जौ, ओट्स, रागी की रोटी
  • लाभ: कोलेस्ट्रॉल घटाने में सहायक
  • बचें: रिफाइंड आटा

5⃣ उच्च रक्तचाप (हाई बीपी)

  • खाएं: ज्वार, बाजरा, रागी की रोटी
  • लाभ: पोटैशियम व फाइबर से रक्तचाप संतुलित रहता है
  • बचें: बहुत अधिक नमक वाली रोटियां

6⃣ एनीमिया (खून की कमी)

  • खाएं: बाजरा, रागी, चना आटे की रोटी
  • लाभ: आयरन की अच्छी मात्रा
  • साथ में: विटामिन-C युक्त भोजन (नींबू, आंवला)

7⃣ थायरॉइड

  • खाएं: ज्वार, बाजरा, रागी की रोटी
  • लाभ: पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है
  • बचें: अत्यधिक मैदा

8⃣ कमजोरी व कुपोषण

  • खाएं: गेहूं और चना आटा मिश्रित रोटी
  • लाभ: प्रोटीन व ऊर्जा में वृद्धि

9⃣ पेट की गैस / अम्लता

  • खाएं: जौ, रागी की हल्की रोटी
  • बचें: बहुत मोटी व अधपकी रोटियां

🔟 बच्चों व वृद्धों के लिए

  • खाएं: नरम गेहूं या जौ की रोटी
  • लाभ: पचने में आसान, पोषण भी भरपूर

निष्कर्ष:
हर व्यक्ति की शारीरिक जरूरत अलग होती है। यदि हम बीमारी और उम्र के अनुसार सही रोटी का चयन करें, तो दवाइयों पर निर्भरता कम हो सकती है और शरीर प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रह सकता है।

नोट: किसी गंभीर बीमारी में आहार बदलने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

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हल्दीघाटी के बाद का संघर्ष: इतिहास के भूले-बिसरे पन्नों में महाराणा प्रताप का अदम्य प्रतिरोध https://sanjayrajput.com/2025/12/haldighati-ke-bad-ka-sangharsh.html https://sanjayrajput.com/2025/12/haldighati-ke-bad-ka-sangharsh.html#respond Sat, 27 Dec 2025 06:59:38 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1285 Read more

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इतिहास में हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख तो मिलता है, लेकिन इसके बाद के लगभग एक दशक में मेवाड़ में क्या हुआ, इस पर बहुत कम चर्चा की जाती है। इतिहास के कई ऐसे पन्ने हैं, जिन्हें या तो जानबूझकर दरकिनार किया गया या पाठ्यक्रम से हटा दिया गया। ये वही घटनाएं हैं, जो हिंदू प्रतिरोध, साहस और स्वाभिमान की सशक्त मिसाल प्रस्तुत करती हैं।

इतिहास की पुस्तकों में यह तथ्य भी सीमित रूप से ही बताया गया है कि हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप के प्रचंड आक्रमण से मुगल सेना कुछ समय के लिए पांच-छह कोस तक पीछे हट गई थी। बाद में अकबर के स्वयं आने की अफवाह के चलते शाही सेना दोबारा युद्ध में उतरी। यह उल्लेख स्वयं अबुल फजल की रचना अकबरनामा में मिलता है।

क्या हल्दीघाटी ही अंतिम युद्ध था?

इतिहासकारों द्वारा हल्दीघाटी को एक निर्णायक और अंतिम युद्ध के रूप में प्रस्तुत करना मेवाड़ के इतिहास के साथ अन्याय माना जाता है। वास्तविकता यह है कि हल्दीघाटी केवल महाराणा प्रताप और मुगलों के बीच लंबे संघर्ष की शुरुआत थी। मुगल न तो महाराणा प्रताप को बंदी बना सके और न ही मेवाड़ पर स्थायी नियंत्रण स्थापित कर पाए।

गुरिल्ला युद्ध की रणनीति

हल्दीघाटी के बाद महाराणा प्रताप के पास लगभग सात हजार सैनिक शेष रह गए थे। इसी दौरान मुगलों ने कुम्भलगढ़, गोगुंदा, उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। ऐसी विषम परिस्थितियों में महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाई और मुगलों को मेवाड़ में स्थायी रूप से बसने से रोके रखा।

इतिहासकारों के अनुसार, 1577 से 1582 के बीच अकबर ने हर वर्ष लगभग एक-एक लाख सैनिकों की सेनाएं मेवाड़ भेजीं, लेकिन वे महाराणा प्रताप को झुकाने में असफल रहीं।

भामाशाह का योगदान और सेना का पुनर्गठन

हल्दीघाटी के पश्चात् महाराणा प्रताप के खजांची भामाशाह और उनके भाई ताराचंद मालवा से भारी धनराशि लेकर पहुंचे। इस सहयोग से महाराणा ने पुनः सेना का संगठन किया। कहा जाता है कि इस धन से लगभग 25 हजार सैनिकों को वर्षों तक रसद उपलब्ध कराई जा सकती थी। कुछ ही समय में महाराणा प्रताप ने लगभग 40 हजार योद्धाओं की सशक्त सेना खड़ी कर दी।

दिवेर का युद्ध: इतिहास का अनदेखा अध्याय

सन 1582 में विजयदशमी के दिन महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की स्वतंत्रता पुनः प्राप्त करने का संकल्प लिया। सेना को दो भागों में विभाजित किया गया। एक टुकड़ी का नेतृत्व स्वयं महाराणा ने किया, जबकि दूसरी का नेतृत्व युवराज अमर सिंह ने संभाला। इस संघर्ष को इतिहास में दिवेर का युद्ध कहा जाता है।

इतिहासकार कर्नल टॉड ने हल्दीघाटी को “मेवाड़ का थर्मोपाइली” और दिवेर के युद्ध को “राजस्थान का मैराथन” बताया है। उन्होंने महाराणा प्रताप और उनकी सेना की तुलना स्पार्टन्स से की है, जो संख्या में कम होने के बावजूद कई गुना बड़ी सेना से टकराने का साहस रखते थे।

भीषण युद्ध और मुगलों की पराजय

दिवेर का युद्ध अत्यंत भीषण था। युवराज अमर सिंह के नेतृत्व में राजपूत सेना ने दिवेर थाने पर हमला किया। युद्ध में हजारों मुगल सैनिक मारे गए। उल्लेख मिलता है कि अमर सिंह के प्रहार से सुल्तान खान मुगल अपने घोड़े सहित धराशायी हो गया। वहीं, महाराणा प्रताप ने बहलोल खान पर ऐसा वार किया कि वह घोड़े समेत कट गया।

इस युद्ध के बाद लगभग 36 हजार मुगल सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। दिवेर की पराजय से मुगलों का मनोबल इस कदर टूट गया कि उन्हें मेवाड़ में बने अपने 36 थानों और चौकियों को छोड़कर पीछे हटना पड़ा। यहां तक कि कुम्भलगढ़ का किला भी मुगलों ने रातों-रात खाली कर दिया।

मेवाड़ की पुनः स्वतंत्रता

दिवेर के बाद महाराणा प्रताप ने गोगुंदा, कुम्भलगढ़, बस्सी, चावंड, जावर, मदारिया, मोही और माण्डलगढ़ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर दोबारा अधिकार कर लिया। चित्तौड़ को छोड़कर मेवाड़ के अधिकांश दुर्ग और ठिकाने पुनः स्वतंत्र करा लिए गए।

इसके पश्चात महाराणा ने कड़े आदेश जारी किए, जिससे मेवाड़ में मुगलों की रसद और कर वसूली पूरी तरह बाधित हो गई। परिणामस्वरूप शाही रसद अजमेर से भारी सुरक्षा में भेजी जाने लगी।

इतिहास का निर्णायक मोड़

दिवेर का युद्ध न केवल महाराणा प्रताप के जीवन का, बल्कि मुगल इतिहास का भी एक निर्णायक मोड़ माना जाता है। इस संघर्ष ने मेवाड़ में अकबर की विजय श्रृंखला पर विराम लगा दिया। इसके बाद अकबर के शासनकाल में मेवाड़ पर बड़े आक्रमण लगभग बंद हो गए।

इतिहासकारों का मानना है कि ये वे घटनाएं हैं, जिन्हें दरबारी इतिहासकारों ने जानबूझकर हाशिये पर डाल दिया। अब समय है कि इतिहास के इन भूले-बिसरे अध्यायों को पुनः सामने लाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां मेवाड़ के इस अद्वितीय संघर्ष को जान सकें।

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आज जयपुर में करियर निर्माण हेतु सही full-stack-developer-course चुनना जरूरी है https://sanjayrajput.com/2025/12/full-stack-developer-course-in-jaipur.html https://sanjayrajput.com/2025/12/full-stack-developer-course-in-jaipur.html#respond Thu, 25 Dec 2025 07:13:12 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1278 Read more

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आज का दौर पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है। हर छोटा-बड़ा व्यवसाय, स्टार्टअप, कंपनी और सरकारी संगठन अपनी ऑनलाइन मौजूदगी मजबूत करना चाहता है। इसी कारण IT सेक्टर में स्किल-बेस्ड प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर full stack developer की डिमांड आज जयपुर सहित पूरे भारत में लगातार बढ़ रही है। ऐसे में करियर निर्माण के लिए सही full stack developer course चुनना बेहद जरूरी हो गया है।

बदलते समय में करियर की नई दिशा

पहले करियर का मतलब केवल डिग्री तक सीमित था, लेकिन आज कंपनियां डिग्री से ज्यादा practical skills को महत्व देती हैं। वे ऐसे प्रोफेशनल्स चाहती हैं जो real-world problems को handle कर सकें। यही वजह है कि students और working professionals अब ऐसे कोर्स की तलाश में रहते हैं जो उन्हें industry-ready बना सकें।

जयपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में IT और software development से जुड़े अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। कई startups, IT firms और digital agencies यहां काम कर रही हैं, जिन्हें skilled developers की जरूरत होती है।

Full Stack Developer कौन होता है

Full stack developer वह व्यक्ति होता है जिसे front-end, back-end, database और server management की अच्छी समझ होती है। आसान शब्दों में कहें तो वह किसी website या web application को शुरू से लेकर deploy करने तक का पूरा काम कर सकता है।

एक full stack developer को आमतौर पर निम्न चीजों का ज्ञान होता है:

  • HTML, CSS, JavaScript
  • Front-end frameworks
  • Back-end programming languages
  • Database management
  • API integration
  • Version control systems

इसी वजह से कंपनियां full stack developers को ज्यादा प्राथमिकता देती हैं, क्योंकि वे multi-skilled होते हैं।

जयपुर में full-stack-developer-course की बढ़ती मांग

जयपुर अब सिर्फ पर्यटन शहर नहीं रहा, बल्कि यह एक emerging IT hub बनता जा रहा है। यहां education, technology और entrepreneurship का अच्छा ecosystem विकसित हो रहा है। इसी कारण students और fresh graduates के बीच full-stack-developer-course की मांग तेजी से बढ़ी है।

जयपुर में रहने वाले छात्रों के लिए यह एक अच्छा अवसर है क्योंकि उन्हें महानगरों में शिफ्ट किए बिना भी quality learning और career opportunities मिल सकती हैं।

सही कोर्स चुनना क्यों जरूरी है

आज बाजार में कई तरह के courses उपलब्ध हैं, लेकिन हर course करियर के लिए फायदेमंद नहीं होता। गलत course चुनने से समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो सकती है। इसलिए सही decision लेना बेहद जरूरी है।

सही full-stack-developer-course चुनने से:

  • मजबूत technical foundation बनता है
  • practical knowledge मिलता है
  • real projects पर काम करने का अनुभव होता है
  • job readiness बढ़ती है
  • freelancing और remote work के अवसर मिलते हैं

Course चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें

अगर आप जयपुर में full-stack-developer-course करने की सोच रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. Course Curriculum

कोर्स का syllabus industry-relevant होना चाहिए। उसमें modern technologies और tools शामिल होने चाहिए, ताकि सीखने के बाद आप outdated न हों।

2. Practical Learning

सिर्फ theory पढ़ाने वाला course ज्यादा फायदेमंद नहीं होता। ऐसा course चुनें जिसमें hands-on practice, assignments और projects शामिल हों।

3. Duration और Flexibility

Course duration balanced होनी चाहिए। बहुत छोटा course knowledge अधूरा छोड़ सकता है, और बहुत लंबा course motivation कम कर सकता है।

4. Career Support

अच्छा course वह होता है जो learning के साथ career guidance भी दे, जैसे resume building, interview preparation और industry exposure।

Students और Working Professionals के लिए फायदेमंद

Full stack development सिर्फ students के लिए ही नहीं, बल्कि working professionals के लिए भी एक बेहतरीन career upgrade option है। जो लोग IT, design, marketing या किसी अन्य field में काम कर रहे हैं, वे इस skill के जरिए career growth पा सकते हैं।

जयपुर में कई लोग part-time या online mode में full-stack-developer-course करके अपने career को नई दिशा दे रहे हैं।

Freelancing और Entrepreneurship के अवसर

आज केवल job ही एकमात्र विकल्प नहीं है। Full stack developer बनने के बाद आप freelancing, remote projects और startup opportunities भी explore कर सकते हैं।

जयपुर जैसे शहर में रहकर भी आप global clients के साथ काम कर सकते हैं। यही कारण है कि full-stack-developer-course को future-proof skill माना जाता है।

Digital India और Skill Development

भारत सरकार भी digital skills को बढ़ावा दे रही है। Digital India, startup ecosystem और online businesses के कारण developers की जरूरत और बढ़ेगी। ऐसे में आज सही समय है कि career को मजबूत करने के लिए सही skill चुनी जाए।

भविष्य की संभावनाएं

Technology कभी रुकती नहीं है, लेकिन strong fundamentals वाले professionals हमेशा relevant रहते हैं। Full stack development ऐसी skill है जो आने वाले समय में भी demand में रहेगी।

जयपुर में रहने वाले students और professionals अगर सही full-stack-developer-course चुनते हैं, तो वे long-term career stability और growth पा सकते हैं।

निष्कर्ष

आज के competitive दौर में करियर निर्माण के लिए सिर्फ डिग्री काफी नहीं है। Practical skills, industry knowledge और adaptability जरूरी है। जयपुर में सही full-stack-developer-course चुनना उन लोगों के लिए एक smart decision हो सकता है जो IT field में stable और rewarding career बनाना चाहते हैं।

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पूर्वांचल प्रांत का हुआ संगठन विस्तार, युवाओं को मिली नई जिम्मेदारी https://sanjayrajput.com/2025/12/kshatriya-mahasabha-up-has-expanded-its-organization-with-youth-given-new-responsibilities.html https://sanjayrajput.com/2025/12/kshatriya-mahasabha-up-has-expanded-its-organization-with-youth-given-new-responsibilities.html#respond Mon, 15 Dec 2025 11:34:57 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1271 Read more

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गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पूर्वांचल प्रांत में बड़े स्तर पर संगठन विस्तार किया गया है। रविवार को संगठन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष जगदंबा सिंह ‘शक्ति’ के मोहद्दीपुर स्थित आवास पर आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह द्वारा नव मनोनीत पदाधिकारियों को मनोनयन पत्र सौंपे गए।

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यह बैठक प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह के निर्देश पर, प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री अश्वनी कुमार सिंह ‘लालू’ के निवेदन तथा राष्ट्रीय सचिव ओंकार नाथ सिंह के अनुमोदन से आयोजित की गई। बैठक का नेतृत्व वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष जगदंबा सिंह ‘शक्ति’ एवं प्रदेश अध्यक्ष युवा प्रकोष्ठ सूरज सिंह सेंगर ने किया।

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संगठन की मुख्य इकाई में गोविंद प्रकाश शाही को प्रदेश उपाध्यक्ष, अनिल सिंह बबलू को प्रदेश मंत्री बनाया गया। वहीं गोरखपुर मंडल में शिव प्रताप सिंह को मंडल महामंत्री, अभय सिंह राका को मंडल उपाध्यक्ष एवं शंकर दयाल सिंह को मंडल संगठन मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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प्रदेश युवा प्रकोष्ठ में पवन सिंह बारीगांव को वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, भूपेंद्र सिंह गुड्डू को प्रदेश संगठन मंत्री, राज सिंह को प्रदेश महासचिव, अविनाश सिंह ज़रार एवं मानवेंद्र सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष तथा रंजीत सिंह सिकरवार को प्रदेश मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया। इसके अतिरिक्त कु० राहुल सिंह को प्रदेश अध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ, कु० राणा प्रताप सिंह को प्रदेश अध्यक्ष किसान मोर्चा एवं राजेश सिंह राहत को प्रदेश अध्यक्ष सांस्कृतिक प्रकोष्ठ बनाया गया।

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युवा प्रकोष्ठ के अंतर्गत सुमित सिंह को गोरखपुर जिलाध्यक्ष, शशि देव सिंह को बलिया जिलाध्यक्ष, अविनाश प्रताप सिंह को संतकबीरनगर जिलाध्यक्ष, प्रियांशु सिंह को महराजगंज जिलाध्यक्ष एवं भूपेंद्र शाही को देवरिया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

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बलिया जिले के युवा प्रकोष्ठ में लड्डू सिंह को जिला मंत्री, कौशल किशोर सिंह को जिला महामंत्री, प्रशांत कुमार सिंह को जिला सचिव, शिवराज सिंह को जिलाध्यक्ष खेलकूद प्रकोष्ठ, अनिकेत सिंह को बलिया नगर अध्यक्ष तथा अनुभव सिंह को नगर उपाध्यक्ष बनाया गया।

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देवरिया जनपद से राजीव कुमार सिंह को युवा प्रकोष्ठ जिला संयोजक, इंद्रेश सिंह रामू को जिला प्रभारी, सुमित सिंह रामू को जिला कोषाध्यक्ष, शैलेन्द्र सिंह टुन्नु को वरिष्ठ जिला महामंत्री, सुधीर सिंह को जिला संगठन मंत्री, समरेंद्र सिंह सम्मी को मंडल मीडिया प्रभारी, प्रशांत सिंह पीयूष को वरिष्ठ मंडल महामंत्री एवं धर्मेंद्र सिंह को मंडल महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

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इस अवसर पर राष्ट्रीय सचिव ओंकार नाथ सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह एवं प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री अश्वनी कुमार सिंह ‘लालू’ ने सभी नव मनोनीत पदाधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया।

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बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, देवरिया के जिला उपाध्यक्ष छोटे सिंह (पूर्व प्रधान इंदुपुर), गोरखपुर के वरिष्ठ महामंत्री राजकुमार सिंह श्रीनेत, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय चंद, प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री युवा प्रकोष्ठ अनुज सिंह कटका, करुण्रेंद्र सिंह सहित गोरखपुर, देवरिया, बलिया, संतकबीरनगर, आजमगढ़ समेत कई जनपदों से सैकड़ों क्षत्रिय समाज के लोग उपस्थित रहे।

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गद्दार नहीं, धर्मपरायण और देशभक्त राजा थे जयचंद – जानिए असली इतिहास https://sanjayrajput.com/2025/12/raja-jaichand-true-history-facts.html https://sanjayrajput.com/2025/12/raja-jaichand-true-history-facts.html#respond Thu, 11 Dec 2025 02:34:50 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1263 Read more

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भारत के मध्यकालीन इतिहास में राजा जयचंद का नाम अक्सर गलत आरोपों और अधूरी कहानियों के कारण बदनाम किया गया है। सदियों तक लोककथाओं और पक्षपातपूर्ण साहित्य ने उन्हें ‘गद्दार’ के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि वास्तविक इतिहास इससे कहीं अलग तस्वीर दिखाता है।

राजा जयचंद की छवि को गलत क्यों पेश किया गया?

कई साहित्यिक रचनाएँ, विशेषकर लोककाव्य और कथाएँ, समय के साथ राजनीतिक और सामाजिक पक्षपात का शिकार बनीं। इसमें जयचंद को विदेशी आक्रमणों के लिए दोषी ठहराया गया, जबकि इस दावे के समर्थन में कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है

इतिहासकारों का मानना है कि यह छवि अधिकतर प्रतिस्पर्धी राजवंशों की कथाओं और बाद के लेखकों द्वारा गढ़े गए वर्णनों का परिणाम है।

धर्मनिष्ठ और प्रजा-हितैषी शासक

जयचंद न केवल एक शक्तिशाली शासक थे, बल्कि धार्मिक रूप से आस्थावान, कला-संरक्षक और अपने राज्य की समृद्धि के लिए समर्पित राजा भी थे। पुरालेखों और शिलालेखों में उनके द्वारा किए गए दान, सामाजिक कार्यों और सांस्कृतिक योगदानों के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं।

क्या जयचंद ने वास्तव में ‘विश्वासघात’ किया था?

आधुनिक इतिहासकारों और शोधकर्ताओं ने स्पष्ट कहा है कि यह एक मिथक है। न तो किसी विदेशी ताकत से उनकी मिलीभगत का रिकॉर्ड मिलता है, न ही किसी युद्ध में उनका ऐसा कोई कदम दर्ज है जिसे विश्वासघात कहा जा सके।

वास्तव में, उन्होंने अपने राज्य की रक्षा हेतु कई महत्वपूर्ण युद्ध लड़े और एक राजपूत शासक के रूप में अपने धर्म और कर्तव्य का निर्वाह किया।

इतिहास में कैसे फैला भ्रम?

  • लोककथाएँ और कवियों द्वारा रचे पक्षपातपूर्ण वर्णन
  • प्रतिद्वंदी राजवंशों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
  • बाद के युगों में कथा-नाटकों का अतिशयोक्तिपूर्ण प्रस्तुतिकरण
  • लंबे समय तक इतिहास का व्यवस्थित लेखन न होना

आधुनिक शोध क्या साबित करते हैं?

नए अभिलेखों, शिलालेखों और ऐतिहासिक संदर्भों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जयचंद एक धर्मपरायण, जिम्मेदार और देशभक्त शासक थे। गलत धारणाएं केवल लोकप्रिय साहित्य के कारण बनीं।

निष्कर्ष – अब समय है वास्तविक इतिहास जानने का

राजा जयचंद को सदियों तक गलत आरोपों का बोझ उठाना पड़ा, जबकि तथ्य बताते हैं कि उन्होंने अपने धर्म, राज्य और जनता के लिए ईमानदारी से शासन किया। आधुनिक शोध उनके चरित्र को बिल्कुल नए दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या राजा जयचंद वास्तव में गद्दार थे?

नहीं। ऐसा कोई ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जो उन्हें गद्दार साबित करे। यह सिर्फ लोक कथाओं का प्रचारित भ्रम है।

जयचंद और विदेशी आक्रमणकारियों की मिलीभगत की कहानी कहाँ से आई?

कुछ कवियों और साहित्यकारों ने राजनीतिक कारणों से उनके विरुद्ध लिख दिया। समय के साथ मिथक को इतिहास मान लिया गया।

जयचंद किस प्रकार के शासक थे?

वे एक धार्मिक, न्यायप्रिय, दानशील और प्रजा-हितैषी शासक थे। उनके शासनकाल के सामाजिक व सांस्कृतिक कार्य इसे प्रमाणित करते हैं।

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मुसाफिर शाही की पांचवीं पुण्यतिथि पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने दी श्रद्धांजलि https://sanjayrajput.com/2025/12/abkm-paid-tribute-to-musafir-shahi-on-his-fifth-death-anniversary.html https://sanjayrajput.com/2025/12/abkm-paid-tribute-to-musafir-shahi-on-his-fifth-death-anniversary.html#respond Sat, 06 Dec 2025 13:54:03 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1260 Read more

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मुसाफिर शाही की अनमोल विरासत को बखूबी संभाल रही हैं मंजू शाही: विनोद सिंह

गोरखपुर। स्व मुसाफिर शाही की पांचवीं पुण्यतिथि श्री हरिनारायण चन्द उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवादा, बड़हलगंज के प्रांगण में मनाई गई। इस अवसर पर एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई जिसमें क्षेत्र के तमाम गणमान्य लोग उपस्थित रहे। साथ ही उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र छात्राओं सहित अन्य लोगों को पुरस्कृत भी किया गया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह ‘लालू’ ने कहा कि स्व मुसाफिर शाही की अनमोल विरासत को उनकी बेटी मंजू शाही बखूबी संभाल रही हैं। वे अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश कर रही हैं जिस पर पूरे क्षत्रिय समाज को गर्व है।

बता दें कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नेवादा, बड़हलगंज स्थित श्री हरिनारायण चन्द उच्चतर माध्यमिक विद्यालय प्रांगण में स्व मुसाफिर शाही की पांचवीं पुण्यतिथि उनकी पुत्री तथा स्कूल की प्रबंधक मंजू शाही द्वारा तमाम कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर मातृ आंचल सेवा संस्थान की संचालिका देहदानी व रक्तदानी पुष्पलता सिंह अम्मा को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही खेलकूद तथा पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालय के छात्र छात्राओं को पुरस्कृत किया गया साथ ही विद्यालय की प्रबंधक मंजू शाही द्वारा कम्बल वितरण भी किया गया।

इस दौरान मुख्य रूप से अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, प्रदेश वरिष्ठ महामंत्री अश्वनी कुमार सिंह (लालू सिंह), प्रदेश अध्यक्ष खेलकूद प्रकोष्ठ रंजीत शाही, मंडल अध्यक्ष आरपी सिंह, जिला संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, श्री हरिनारायण चन्द उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नेवादा की प्रबंधक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष वीरांगना प्रकोष्ठ मंजू शाही, आरपीएम स्कूल के डायरेक्टर अजय शाही, एडी इंटर कॉलेज की प्रवक्ता व मशहूर कवियित्री डॉ. चारु शाही सहित हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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सर्दियों में बढ़ता ब्लड प्रेशर: कारण, लक्षण और मैनेजमेंट टिप्स https://sanjayrajput.com/2025/11/winter-high-blood-pressure-management-tips.html https://sanjayrajput.com/2025/11/winter-high-blood-pressure-management-tips.html#respond Mon, 24 Nov 2025 08:00:37 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1255 Read more

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सर्दियों का मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियाँ लेकर आता है। इनमें से सबसे आम और खतरनाक समस्या है—ब्लड प्रेशर का बढ़ना। बहुत से लोग ठंड में अचानक बढ़ते ब्लड प्रेशर से परेशान रहते हैं, खासकर वे लोग जो पहले से ही हाई बीपी (Hypertension) से ग्रसित हैं।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि आखिर ठंड के मौसम में ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है, शरीर में क्या बदलाव आते हैं, और विंटर में बीपी को कैसे कंट्रोल में रखा जा सकता है।


❄ सर्दियों में ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ जाता है?

जैसे ही तापमान गिरता है, शरीर खुद को गर्म रखने के लिए कई तरह के बदलाव करता है। उन्हीं में से एक है:

1. ब्लड वेसल्स का सिकुड़ना (Vasoconstriction)

ठंड में शरीर की ब्लड वेसल्स स्वाभाविक रूप से सिकुड़ने लगती हैं। इससे ब्लड वेसल्स का व्यास कम हो जाता है और खून को इन संकुचित वेसल्स से गुजरने में ज्यादा प्रेशर लगता है। यही प्रेशर बढ़कर हाई ब्लड प्रेशर का कारण बनता है।

2. हार्ट पर बढ़ता लोड

ठंड में दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट रेट और बीपी दोनों बढ़ सकते हैं।

3. कम शारीरिक गतिविधि

सर्दियों में लोग अक्सर घरों में ही सीमित हो जाते हैं। कम फिजिकल एक्टिविटी भी हाई बीपी का बड़ा कारण है।

4. सर्दियों का डाइट पैटर्न

ठंड के मौसम में तला-भुना, मीठा और भारी भोजन की मात्रा बढ़ जाती है, जो वजन और ब्लड प्रेशर दोनों को बढ़ा देता है।

5. तनाव और धूप की कमी

सर्दियों में धूप कम निकलने से विटामिन D की कमी भी बीपी लेवल को प्रभावित कर सकती है।


🩺 ठंड में हाई बीपी के लक्षण (Symptoms of High BP in Winter)

  • सिरदर्द
  • चक्कर आना
  • धड़कन तेज होना
  • थकान या कमजोरी
  • नाक से खून आना (कम ही मामलों में)

कई बार हाई बीपी ‘सायलेंट किलर’ होता है यानी कोई लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए नियमित बीपी चेकअप जरूरी है।


🌡 सर्दियों में ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखने के 12 प्रभावी टिप्स

अगर आप भी सर्दियों में बढ़ते बीपी से परेशान रहते हैं, तो नीचे दिए गए विंटर मैनेजमेंट टिप्स आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

1. नियमित रूप से BP चेक करें

अगर आपको हाई बीपी की शिकायत है, तो सर्दियों में हर 2–3 दिन में BP मॉनिटर जरूर करें।

2. शरीर को ठंड से बचाएं

गर्म कपड़े, ऊनी टोपी, मोजे, दस्ताने और जैकेट पहनें। ठंडे हवा के झोंकों से बचें।

3. हल्की धूप लें

धूप से शरीर में विटामिन D बनता है, जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में लाभकारी है।

4. नियमित व्यायाम

सर्दी हो या गर्मी—30 मिनट वॉक या हल्का व्यायाम BP को कंट्रोल में रखने का सबसे बेहतर तरीका है।

5. वजन नियंत्रण में रखें

सर्दियों में वजन बढ़ने से ब्लड प्रेशर और ज्यादा बढ़ सकता है। हल्का-फुल्का, संतुलित भोजन लें।

6. नमक का सेवन कम करें

दिनभर में 5-6 ग्राम से ज्यादा नमक न लें। नमकीन, चिप्स, पापड़, अचार कम खाएं।

7. पानी की कमी न होने दें

ठंड में प्यास कम लगती है लेकिन शरीर में पानी की कमी से BP बढ़ सकता है। दिनभर में 6–7 गिलास पानी जरूर पिएं।

8. तनाव कम करें

तनाव व anxiety ब्लड प्रेशर तुरंत बढ़ाते हैं। योग, मेडिटेशन और गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं।

9. शराब और तंबाकू से दूरी

सर्दियों में लोग “गरमाहट” के नाम पर शराब ज्यादा पीते हैं, जो BP को खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकती है।

10. गर्म तरल पदार्थ लें

सूप, ग्रीन टी, हर्बल चाय, गर्म पानी शरीर का तापमान नियंत्रित रखते हैं।

11. डॉक्टर की सलाह पर दवा लें

अगर आप ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं, तो डॉक्टर की सलाह बिना डोज़ न बदलें।

12. कैफीन कंट्रोल करें

अधिक चाय-कॉफी BP को बढ़ा सकती है। दिन में 2–3 कप से ज्यादा न लें।


⚠ किन लोगों को सर्दियों में विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

  • हाई बीपी मरीज
  • हार्ट के मरीज
  • शुगर वाले लोग
  • 60+ उम्र वाले लोग
  • मोटापा या थायराइड वाले लोग

इन लोगों का ब्लड प्रेशर सर्दियों में तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए नियमित मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है।


🧠 निष्कर्ष

सर्दियों में ब्लड प्रेशर का बढ़ना एक सामान्य लेकिन गंभीर स्थिति है। ठंड से ब्लड वेसल्स के सिकुड़ने के कारण BP बढ़ता है, लेकिन सही सावधानियों और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट की मदद से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

अगर आप बीपी मरीज हैं, तो इस सर्दी अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज न करें। गर्म कपड़े पहनें, नियमित BP चेक करें और डॉक्टर की सलाह पर दवा लें।

स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें! ❄❤

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Free Government Resources for Online Education Hindi: ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मुफ़्त सरकारी संसाधन — हिंदी में पूरी मार्गदर्शिका https://sanjayrajput.com/2025/11/free-government-resources-for-online-education-hindi.html https://sanjayrajput.com/2025/11/free-government-resources-for-online-education-hindi.html#respond Thu, 13 Nov 2025 07:44:48 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1251 Read more

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Free Government Resources for Online Education Hindi: हाल ही में उपलब्ध सरकारी प्लेटफॉर्म और उनके उपयोग-सुझाव (हिंदी में)। आज के डिजिटल युग में सरकार ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्वयं सीखने वालों के लिए कई मुफ़्त ऑनलाइन संसाधन मुहैया कराए हैं। अगर आप हिंदी में पढ़ना/सीखना पसंद करते हैं तो ये प्लेटफ़ॉर्म बेहद उपयोगी साबित होंगे। इस लेख में मैंने प्रमुख सरकारी संसाधनों का संक्षिप्त परिचय, उपयोग-तरीका और टिप्स दिए हैं ताकि आप तुरन्त सीखना शुरू कर सकें।


1. SWAYAM

क्या है? SWAYAM (Study Webs of Active-Learning for Young Aspiring Minds) शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित एक MOOC प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ कक्षा 9 से लेकर पोस्ट-ग्रेजुएशन तक के कोर्स मिलते हैं।

खास बातें:

  • वीडियो लेक्चर, नोट्स और स्वयं-मूल्यांकन (अभ्यास प्रश्न/क्विज़)।
  • कई पाठ्यक्रम हिंदी में उपलब्ध हैं।
  • कई कोर्सेज़ पर सर्टिफिकेट (शर्तों के अनुसार)।

कैसे शुरू करेंhttps://swayam.gov.in पर जाएँ, रुचि का कोर्स चुनें, वीडियो देखें और असाइनमेंट/क्विज़ दें।

2. ePathshala (NCERT)

क्या है? NCERT-CIET द्वारा विकसित ePathshala में कक्षा 1 से 12 तक की किताबें, ऑडियो-विजुअल संसाधन और इंटरैक्टिव सामग्री उपलब्ध है।

खास बातें:

  • हिंदी समेत कई भाषाओं में पाठ्यपुस्तकें और सहायक सामग्री।
  • ऑफ़लाइन डाउनलोड की सुविधा — इंटरनेट बंद होने पर भी उपयोग संभव।
  • शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी उपयोगी निर्देश।

कैसे शुरू करेंhttps://epathshala.nic.in पर अपनी कक्षा और विषय की पुस्तक डाउनलोड करें और वीडियो/ऑडियो देखें।

3. NDLI (National Digital Library of India)

क्या है? NDLI एक विशाल डिजिटल पुस्तकालय है जिसमें पाठ्यपुस्तकें, शोध पत्र, वीडियो लेक्चर, ऑडियोबुक और अन्य शैक्षिक सामग्री शामिल है।

खास बातें:

  • विषय-अनुसार खोज की सुविधा; भाषा-फिल्टर में ‘हिंदी’ चुन सकते हैं।
  • शिक्षार्थियों और शोधकर्ताओं दोनों के लिए उपयुक्त संसाधन।
  • अधिकांश कंटेंट मुफ़्त और डाउनलोड-योग्य।

कैसे शुरू करेंhttps://ndl.iitkgp.ac.in पर जाएँ और अपनी रुचि के विषय का चुनाव करें।

4. NROER (National Repository of Open Educational Resources)

क्या है? NROER स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित एक रिपॉज़िटरी है जहाँ शिक्षण-सामग्री (वीडियो, इमेज, इंटरैक्टिव टिप्स) संग्रहीत है—खासकर स्कूल और टीचर्स के उपयोग के लिए।

खास बातें:

  • इंटरेक्टिव लेसन, संक्षेपित वीडियो और ऑडियो क्लिप उपलब्ध।
  • टीचर्स अपने क्लास-रिसोर्स के रूप में इसे उपयोग कर सकते हैं।

कैसे शुरू करेंnroer.gov.in या संबंधित राज्य शिक्षा पोर्टल से सामग्री डाउनलोड करें।

5. ONOS (One Nation One Subscription)

क्या है? ONOS विशेषकर उच्च शिक्षा और शोध के लिए है — विश्वविद्यालयों/संस्थानों के लिए जर्नल्स और शोधपत्रों का साझा सब्सक्रिप्शन मॉडल।

खास बातें:

  • यदि आपका कॉलेज/विश्वविद्यालय सदस्य है तो आप बड़े-पैमाने पर शोधपत्रों तक पहुँच सकते हैं।
  • शोध और गहन अध्ययन के लिए उपयुक्त स्रोत।

कैसे शुरू करें — अपने संस्थान के लाइब्रेरी/रिसोर्स पेज से लॉगिन जानकारी प्राप्त करें या onos.gov.in पर देखें।


पढ़ाई के प्रभावी सुझाव (हिंदी में)

  1. भाषा-फिल्टर का उपयोग करें: प्लेटफ़ॉर्म पर ‘हिंदी’ चुनकर सामग्री खोजें ताकि आपको भाषा की बाधा न आए।
  2. रोज़ाना एक निर्धारित समय: रोज़ कम से कम 25–45 मिनट किसी एक विषय को दें — निरंतरता ज़रूरी है।
  3. नोट्स और रिवीजन: वीडियो देखने के बाद छोटे-छोटे नोट्स बनाएं और सप्ताह में कम से कम एक बार रिवाइज़ करें।
  4. ऑफ़लाइन डाउनलोड: जहाँ संभव हो सामग्री डाउनलोड कर लें — इससे इंटरनेट की समस्या नहीं आएगी।
  5. प्रमाणपत्र (यदि आवश्यक हो): अपने करियर में मदद के लिए कोर्स/सर्टिफिकेट वाले कोर्स चुनें और आवश्यक असाइनमेंट भरें।

अब क्या करें — तुरंत स्टेप्स

  • यदि आप स्कूल-स्टूडेंट हैं — ePathshala से अपनी पाठ्यपुस्तक डाउनलोड करें और NDLI पर सहायक वीडियो देखें।
  • अगर आप कॉलेज/वयस्क शिक्षार्थी हैं — SWAYAM पर अपने विषय का शुरुआती कोर्स चुनें और हर सप्ताह एक मॉड्यूल पूरा करने का लक्ष्य रखें।
  • शोधकर्ता/पीएचडी छात्र हैं — अपने संस्थान के माध्यम से ONOS की पहुँच जाँचें और NDLI से संदर्भ-सामग्री एकत्र करें।

रिसोर्स लिंक (संदर्भ के लिए):


लेखक की नोट: ऊपर दिए गए मंच सरकारी/शैक्षिक उद्देश्यों के लिए उपलब्ध हैं — किसी विशेष कोर्स या प्रमाणपत्र की शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं।

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Best Personal Loan Guide in Hindi 2025: पर्सनल लोन क्या है और कैसे लें? https://sanjayrajput.com/2025/11/best-personal-loan-guide-in-hindi-2025.html https://sanjayrajput.com/2025/11/best-personal-loan-guide-in-hindi-2025.html#respond Wed, 12 Nov 2025 06:21:30 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1248 Read more

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Best Personal Loan Guide in Hindi 2025: Personal Loan आज के समय में भारत में सबसे ज्यादा लिए जाने वाले लोन में से एक है। चाहे शादी का खर्च हो, बिजनेस स्टार्ट करना हो या इमरजेंसी मेडिकल जरूरत, एक Personal Loan in India हर परिस्थिति में मददगार साबित हो सकता है। इस लेख में हम जानेंगे कि पर्सनल लोन क्या है, इसे कैसे अप्लाई करें, और भारत में सबसे अच्छा Personal Loan Interest Rate कौन सी बैंक दे रही है।


✅ Personal Loan क्या होता है?

Personal Loan एक ऐसा लोन होता है जिसे आप बिना किसी सुरक्षा (Collateral) के ले सकते हैं। बैंक या NBFC (Non-Banking Financial Company) आपकी सैलरी, आय और क्रेडिट स्कोर के आधार पर लोन अप्रूव करती है। इसका इस्तेमाल आप किसी भी पर्सनल जरूरत के लिए कर सकते हैं – जैसे घर की मरम्मत, शादी, ट्रैवल, एजुकेशन या मेडिकल इमरजेंसी।

इसे हम Unsecured Loan भी कहते हैं क्योंकि इसमें आपको कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी होती।


💰 भारत में Personal Loan लेने के फायदे

  • कोई गारंटी या सिक्योरिटी की आवश्यकता नहीं
  • तेज़ अप्रूवल और ऑनलाइन प्रोसेस
  • फ्लेक्सिबल EMI ऑप्शन (1 से 5 साल तक)
  • इंस्टेंट कैश ट्रांसफर कुछ ही घंटों में
  • कम डॉक्यूमेंटेशन

अगर आप ऑनलाइन Personal Loan Apply Online करना चाहते हैं, तो आपको बैंक या NBFC की वेबसाइट पर जाकर बेसिक डिटेल भरनी होगी।


🏦 भारत में सबसे अच्छे Personal Loan Interest Rate (2025)

हर बैंक और फाइनेंस कंपनी की ब्याज दर अलग होती है। नीचे कुछ प्रमुख बैंकों की औसत ब्याज दरें दी गई हैं:

बैंक का नाम इंटरेस्ट रेट (वार्षिक) लोन राशि
HDFC Bank Personal Loan 10.50% – 21% ₹50,000 – ₹40 लाख
SBI Personal Loan 9.60% – 15.65% ₹25,000 – ₹20 लाख
ICICI Bank Personal Loan 10.75% – 19% ₹50,000 – ₹25 लाख
Axis Bank Personal Loan 10.49% – 22% ₹50,000 – ₹30 लाख
Bajaj Finserv 11% – 23% ₹1 लाख – ₹25 लाख

Note: ब्याज दरें आपके क्रेडिट स्कोर और आय पर निर्भर करती हैं।


📋 Personal Loan के लिए जरूरी योग्यता (Eligibility Criteria)

  • आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
  • आयु सीमा 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • मासिक आय कम से कम ₹15,000 से ₹25,000 होनी चाहिए।
  • अच्छा क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score 700+ होना चाहिए)।

अगर आपके पास सैलरी स्लिप नहीं है, तो भी कुछ NBFC कंपनियाँ Personal Loan without Salary Slip प्रदान करती हैं, बशर्ते आपके पास इनकम प्रूफ या बिजनेस इनकम स्टेटमेंट हो।


🧾 Personal Loan के लिए जरूरी दस्तावेज़

  • आधार कार्ड / पैन कार्ड
  • सैलरी स्लिप या इनकम प्रूफ
  • बैंक स्टेटमेंट (पिछले 3-6 महीने)
  • पते का प्रमाण (Address Proof)
  • पासपोर्ट साइज फोटो

💻 Personal Loan Apply Online करने की प्रक्रिया

  1. अपनी पसंद की बैंक या फाइनेंस कंपनी की वेबसाइट खोलें।
  2. Personal Loan Apply Online सेक्शन में जाएँ।
  3. नाम, मोबाइल नंबर, आय और लोन राशि भरें।
  4. दस्तावेज़ अपलोड करें और वेरिफिकेशन पूरा करें।
  5. लोन अप्रूवल के बाद राशि आपके बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगी।

आप चाहें तो Instant Personal Loan App जैसे PaySense, MoneyTap, Navi, CASHe आदि का उपयोग भी कर सकते हैं।


📈 Personal Loan लेते समय किन बातों का ध्यान रखें

  • हमेशा तुलना करें – अलग-अलग बैंक के Personal Loan Interest Rate चेक करें।
  • छिपे हुए चार्ज (Hidden Charges) ध्यान से पढ़ें।
  • लोन की EMI समय पर चुकाएँ ताकि CIBIL स्कोर खराब न हो।
  • ज़रूरत से ज़्यादा लोन न लें – केवल उतनी राशि लें जितनी आवश्यकता हो।

🧠 Personal Loan बनाम Credit Card Loan

कई लोग Credit Card Loan और Personal Loan में कंफ्यूज़ हो जाते हैं। दोनों के बीच मुख्य अंतर यह है कि Personal Loan में ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है और EMI अधिक लचीली होती है, जबकि Credit Card Loan महंगा पड़ सकता है।


📊 Personal Loan Calculator से EMI कैसे निकालें?

ऑनलाइन Personal Loan EMI Calculator का उपयोग करके आप अपनी मासिक किस्त (EMI) का अंदाज़ा लगा सकते हैं। बस आपको लोन राशि, ब्याज दर और अवधि डालनी होती है। इससे आपको पता चलता है कि EMI आपके बजट में है या नहीं।


📣 निष्कर्ष: सही Personal Loan चुनना क्यों जरूरी है?

भारत में Personal Loan in India तेजी से बढ़ता सेक्टर है, लेकिन सही लोन का चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण है। हमेशा भरोसेमंद बैंक या NBFC से लोन लें, ब्याज दर और प्रोसेसिंग फीस की तुलना करें, और अपनी भुगतान क्षमता के अनुसार EMI चुनें।

अगर आप सही तरीके से रिसर्च करते हैं, तो Personal Loan आपकी फाइनेंशियल जरूरतों का सबसे आसान और सुरक्षित समाधान बन सकता है।


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