BJP – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Wed, 28 Jan 2026 01:47:13 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg BJP – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 क्या अगला प्रधानमंत्री पहले से तय है? या लोकप्रिय चेहरे का रास्ता रोका जा रहा है https://sanjayrajput.com/2026/01/kya-agla-pradhanmantri-pehle-se-tay-yogi-adityanath-rajniti-satta-sangharsh.html https://sanjayrajput.com/2026/01/kya-agla-pradhanmantri-pehle-se-tay-yogi-adityanath-rajniti-satta-sangharsh.html#respond Wed, 28 Jan 2026 01:46:16 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1323 Read more

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देश की राजनीति इस समय किसी शतरंज की बिसात से कम नहीं दिखती, जहां हर चाल बेहद सोच-समझकर चली जा रही है। एक ओर 2029 के लोकसभा चुनाव की रणनीति पर काम चल रहा है, तो दूसरी ओर 2027 की राजनीतिक ज़मीन पहले से ही गर्म होती नजर आ रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या देश को अगला प्रधानमंत्री पहले ही तय कर लिया गया है, या फिर किसी उभरते और लोकप्रिय चेहरे को जानबूझकर आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय सत्ता का केंद्र एक बार फिर गुजरात में बनाए रखने की कोशिशें तेज हैं और इसी क्रम में अमित शाह को प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे के रूप में आगे लाने की रणनीति तैयार की जा रही है। लेकिन इसी बीच उत्तर प्रदेश से एक ऐसा चेहरा उभरकर सामने आया है, जिसे देश का बड़ा तबका भविष्य का प्रधानमंत्री मानने लगा है—उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

योगी आदित्यनाथ अब केवल एक राज्य के मुख्यमंत्री भर नहीं रह गए हैं। उनकी लोकप्रियता राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होती जा रही है। जनसमर्थन, सोशल मीडिया की सक्रियता और ज़मीनी प्रतिक्रिया यह संकेत दे रही है कि यदि मौका मिला, तो देश की बागडोर उनके हाथों में जा सकती है। और यहीं से राजनीतिक असहजता शुरू होती है।

इसी असहजता के दौर में यूजीसी इक्विटी बिल को लेकर बहस तेज होती है। सतह पर यह बहस सामाजिक संतुलन और वर्गों के अधिकारों से जुड़ी दिखती है, लेकिन गहराई से देखें तो तस्वीर कुछ और ही इशारा करती है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली टकराव किसी जाति या वर्ग से नहीं, बल्कि उस नेतृत्व से है, जिसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद हर दिन और ऊंचा होता दिख रहा है।

आशंका यह भी जताई जा रही है कि यदि योगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री बने, तो उनकी प्राथमिकताओं में उत्तर प्रदेश प्रमुख रहेगा। इससे सत्ता और संसाधनों के मौजूदा संतुलन में बदलाव आ सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि सीधे तौर पर रास्ता रोकना संभव न हो, तो क्या परोक्ष दबाव, नीतिगत फैसलों और मौन के ज़रिये बाधाएं खड़ी की जा सकती हैं?

योगी आदित्यनाथ की सबसे बड़ी ताकत—उनकी साफ छवि—यहीं उनकी सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। न भ्रष्टाचार का आरोप, न किसी बड़े विवाद का दाग। ऐसे में प्रत्यक्ष हमला मुश्किल हो जाता है और परिस्थितियां इस तरह बनाई जाती हैं, जहां नेता को संगठनात्मक अनुशासन और सत्ता संतुलन के नाम पर चुप रहना पड़े।

इसी पृष्ठभूमि में प्रयागराज की हालिया घटना सामने आती है। माघ मेला, भारी भीड़ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी का रथ रोके जाने का निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से उचित बताया गया। लेकिन इसके बाद जिस तरह का माहौल बनाया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। अचानक ऐसे चेहरे समर्थन में सामने आने लगे, जो आमतौर पर धार्मिक मुद्दों पर मौन रहते हैं। वहीं, भाजपा के कई वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे रहे।

इसी दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का बयान आता है कि जो हुआ, वह गलत था और इसकी जांच होगी। यह बयान महज प्रशासनिक टिप्पणी नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी द्वारा केशव प्रसाद मौर्य को बेहतर मुख्यमंत्री बताए जाने से राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होती दिखी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये घटनाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक क्रमबद्ध रणनीति का हिस्सा हो सकती हैं। बयान, मौन और समर्थन—सब कुछ एक तयशुदा स्क्रिप्ट के तहत आगे बढ़ता प्रतीत होता है, ताकि असली टकराव सीधे सामने न आए। प्रयागराज की घटना अब केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं रह जाती, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही खींचतान का प्रतीक बन जाती है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या ये सभी घटनाएं संयोग मात्र हैं, या फिर उस शतरंज की बिसात का हिस्सा, जहां अगली चाल देश की राजनीति की दिशा तय करने वाली है।

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केशव प्रसाद मौर्य का पलटवार, कहा- यूपी में सपा के गुंडाराज की वापसी असंभव https://sanjayrajput.com/2024/07/keshav-maurya-replied-to-akhilesh-yadav.html https://sanjayrajput.com/2024/07/keshav-maurya-replied-to-akhilesh-yadav.html#respond Thu, 18 Jul 2024 06:06:37 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=480 Read more

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UP में BJP मिशन मोड पर है। यूपी की राजधानी लखनऊ से राष्ट्रीय दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। BJP के दिग्गज नेताओं के बीच मतभेद की बातें भी जोर पकड़ती जा रही हैं। इतना ही नहीं सियासी गलियारों में यहां तक चर्चा है कि Yogi Adityanath को हटाकर UP में नया CM बनाया जा सकता है, लेकिन BJP इसका खंडन कर रही है।

इसको लेकर विपक्ष भी BJP पर हमलावर है। सपा के मुखिया Akhilesh Yadav ने यहां तक कह डाला कि BJP की कुर्सी की लड़ाई की गर्मी में, UP में शासन-प्रशासन ठंडे बस्ते में चला गया है।

अब इसको लेकर डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya ने एक्स पर पोस्ट कर सपा मुखिया Akhilesh Yadav पर पलटवार किया है।

डिप्टी सीएम ने कहा कि- “भाजपा की देश और प्रदेश दोनों जगह मजबूत संगठन और सरकार है, सपा का PDA धोखा है। यूपी में सपा के गुंडाराज की वापसी असंभव है, भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव में 2017 दोहरायेगी।”

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दरअसल UP में लोकसभा चुनाव में BJP के खराब प्रदर्शन के बाद इस बात की चर्चा तेज है कि यूपी में भाजपा संगठन और सरकार के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है।इन चर्चाओं के बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी सोमवार को दिल्ली पहुंचे थे। दोनों लोगों को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तलब किया था।

इस बैठक में अपने संबोधन के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि पार्टी संगठन सरकार से बड़ा है।सभी मंत्रियों, विधायकों और जन प्रतिनिधियों को पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करना चाहिए और उनके सम्मान का ख्याल रखना चाहिए।

इससे दो दिन पहले भाजपा कार्यकारिणी समिति की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अति आत्मविश्वास ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान पहुंचाया।सीएम ने कहा था कि 2014 और उसके बाद के चुनाव में बीजेपी के पक्ष में जितने प्रतिशत वोट थे,बीजेपी 2024 में भी उतने ही वोट हासिल करने में सफल रही है,लेकिन वोटों की शिफ्टिंग और अति आत्मविश्वास ने हमारी उम्मीदों को नुकसान पहुंचाया है।

बता दें कि अब भाजपा का फोकस यूपी में दस विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव पर है।उपचुनाव को लेकर भाजपा तैयारी में जुटी है। भाजपा लोकसभा चुनाव में हुए नुकसान की भी भरपाई करना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने योगी सरकार और संगठन में तालमेल बिठाने पर जोर दिया है। नड्डा ने बयानबाजी से बचने की सलाह दी है।

इस बीच यूपी भाजपा अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी ने पीएम मोदी से यूपी राजनैतिक घटनाक्रम पर एक घंटे तक मुलाक़ात कर लोकसभा चुनाव पर फीडबैक दिया।

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योगी बने रहेंगे मुख्यमंत्री लेकिन होंगे ये बदलाव : सूत्र https://sanjayrajput.com/2024/07/yogi-adityanath-will-continue-as-up-cm.html https://sanjayrajput.com/2024/07/yogi-adityanath-will-continue-as-up-cm.html#respond Thu, 18 Jul 2024 01:49:28 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=476 Read more

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यूपी का सियासी पारा चढ़ गया है. पिछले 24 घंटे में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बीजेपी नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली पहुंचे और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से शाम को 1 घंटे तक मुलाकात की. जैसे ही बैठक खत्म हुई, जेपी नड्डा ने यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के साथ भी बैठक की. 

बुधवार को भूपेंद्र चौधरी ने पीएम मोदी से भी मुलाकात की. मुलाकात करीब एक घंटे चली. लोकसभा चुनाव नतीजे और संगठन के मुद्दे को लेकर चली यह मुलाकात काफी अहम है.

सूत्रों के मुताबिक, यूपी में सीएम को लेकर कोई मंथन नहीं हुआ है. योगी सीएम बने रहेंगे. संगठन में बदलाव की पूरी संभावना है. योगी मंत्रिमंडल में भी थोड़ा बदलाव हो सकता है. फैसला और विचार विमर्श के बाद लिया जाएगा.

आलाकमान संगठानत्मक चुनावों की तैयारी में है.सूत्रों के मुताबिक यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने करीब एक घंटे तक की मुलाकात में पीएम मोदी को संगठन के बारे में जानकारी दी.

यूपी में पार्टी कार्यकर्ताओं को तरजीह मिले, सरकार के बीच उनकी बातें सुनी जाएं, ये प्रमुख मुद्दे यूपी बीजेपी अध्यक्ष की ओर से बताए गए. इसके अलावा उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर जो उपचुनाव होने वाले हैं, इसको लेकर प्रदेश कार्यकर्ताओं को किस तरीके का सहयोग चाहिए, यूपी में पार्टी संगठन में नई जान फूंकने की जरूरत है, यह बात भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से बताई गई.

इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ में अपने आवास पर मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बैठक की जिसमें आगामी विधानसभा उपचुनाव और राज्य के कई हिस्सों में आई बाढ़ जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रदेश के सभी कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री मौजूद थे. बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया, ‘बाढ़, विकास कार्यों और आगामी चुनावों पर चर्चा हुई.’ पिछले एक पखवाड़े में राज्य के 17 जिलों के 700 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, ‘बैठक विशेष रूप से आगामी चुनावों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी और हम उन सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेंगे जहां उपचुनाव होने हैं.’

क्यों नाराज हैं केशव मौर्य?

2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के समय केशव मौर्य भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। BJP को बहुमत मिला, लेकिन योगी आदित्यनाथ CM बने। 2022 के चुनाव में केशव अपनी सीट हार गए। इसके बाद पार्टी में केशव की स्थिति कमजोर मानी गई। अब लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद योगी की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। इसके चलते फिर से योगी और केशव के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। उधर, केशव ने 14 जुलाई को प्रदेश कार्य समिति की बैठक में यह कहकर सियासी हलचल बढ़ा दी कि सरकार से बड़ा संगठन है।

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