Cm yogi – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Thu, 05 Jun 2025 06:16:35 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.3 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg Cm yogi – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 Yogi Adityanath History in Hindi: गैंगस्टर्स के गढ़ गोरखपुर में कैसे उभरे योगी आदित्यनाथ? https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html#respond Fri, 23 May 2025 05:57:16 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1139 Read more

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हाता और शक्ति सदन की लड़ाई में कैसे हुई योगी आदित्यनाथ की एंट्री?

Yogi Adityanath History in Hindi: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा नाम है जिसने न केवल अपनी छवि बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीतिक दिशा को भी बदला है—योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath)। उनकी कहानी केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे क्षेत्र की भी है जो कभी गैंगस्टर्स और अपराधियों के गढ़ के रूप में जाना जाता था। इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे गोरखपुर के उस माहौल से निकलकर योगी आदित्यनाथ ने खुद को स्थापित किया और राजनीति की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

योगी आदित्यनाथ: असली नाम और शुरुआत

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) का असली नाम है अजय सिंह बिष्ट, जो उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जन्मे थे। उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की और महंत अवैद्यनाथ के सान्निध्य में रहकर गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर से जुड़ गए। महंत अवैद्यनाथ के मार्गदर्शन में योगी ने न केवल धार्मिक गतिविधियों में बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

गोरखपुर, जो कभी अपराधियों और गैंगस्टरों का गढ़ था, वहां योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने धार्मिक और सामाजिक सुधारों के साथ-साथ राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई। उनके नेतृत्व में यह क्षेत्र धीरे-धीरे बदलने लगा।

गोरखपुर की राजनीतिक पृष्ठभूमि और अपराध की समस्या

गोरखपुर (Gorakhpur) का राजनीतिक इतिहास काफी जटिल रहा है। 1990 के दशक में यहां के हालात ऐसे थे कि अपराध और हिंसा आम बात थी। राजनीतिक दलों के बीच सत्ता संघर्ष और आपसी लड़ाइयों ने इस क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था।

इस दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन ने पूरे उत्तर भारत में राजनीतिक माहौल को गहरा प्रभावित किया। राम जन्मभूमि के मुद्दे ने हिंदू राष्ट्रवाद को बल दिया और उसी समय महंत अवैद्यनाथ जैसे धार्मिक नेताओं की भूमिका भी बढ़ी।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस संदर्भ में खुद को एक मजबूत हिंदू राष्ट्रवादी नेता के रूप में स्थापित किया। उन्होंने न केवल धार्मिक जनसमूह को संगठित किया, बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी अपनी पकड़ मजबूत की।

महंत अवैद्यनाथ और योगी आदित्यनाथ का संबंध

महंत अवैद्यनाथ, गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत और एक प्रभावशाली धार्मिक नेता थे, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के राजनीतिक करियर की नींव रखी। अवैद्यनाथ ने योगी को अपना उत्तराधिकारी बनाया और उन्हें गोरखपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।

महंत अवैद्यनाथ स्वयं भी राजनीति में सक्रिय रहे और उनके प्रभाव ने योगी के राजनीतिक सफर को गति दी। योगी ने महंत जी के नक्शेकदम पर चलते हुए गोरखपुर (Gorakhpur) की राजनीति को नई दिशा दी।

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक राजनीति: 1990 का दशक

1990 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम घटनाएं हुईं, जिनका योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के उभार पर गहरा प्रभाव पड़ा। उस समय के राष्ट्रपति शासन, मंडल आयोग की सिफारिशें, और तत्कालीन प्रधानमंत्रियों जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, राजीव गांधी के दौर ने प्रदेश की राजनीति को जटिल बना दिया।

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या के बाद राजनीतिक स्थिरता में कमी आई, जिससे उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की राजनीति और भी अस्थिर हो गई। इसी बीच योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक और सामाजिक आधार पर अपना जनाधार मजबूत किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक उदय

राम जन्मभूमि आंदोलन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। इस आंदोलन ने धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक ताकत में बदल दिया। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे अपनी राजनीतिक पहचान का आधार बनाया।

उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक मंच पर उठाया और हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूती से अपनाया। इस कारण वे उत्तर प्रदेश में बीजेपी के मजबूत चेहरों में से एक बने।

गोरखपुर से मुख्यमंत्री तक: योगी आदित्यनाथ का सफर

गोरखपुर से सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। उनके नेतृत्व में गोरखपुर का विकास हुआ, साथ ही सामाजिक सुधारों पर भी जोर दिया गया। वे लगातार 5 बार गोरखपुर सीट से सांसद चुने गए।

2017 में, योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास और धार्मिकता के मुद्दे प्रमुख रहे।

कानून-व्यवस्था में सुधार

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए योगी सरकार ने कई कदम उठाए। गैंगस्टर और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिससे प्रदेश में अपराध दर में कमी आई।

धार्मिक और सामाजिक सुधार

धार्मिक स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ योगी ने सामाजिक सुधारों पर भी ध्यान दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता और विकास के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।

राजनीतिक क़िस्से: गलतफहमियां और सुधार

राजनीतिक इतिहास में अक्सर गलतफहमियां और भ्रांतियां होती हैं। ऐसे मामलों में सत्य की खोज और सुधार आवश्यक होता है। यह दिखाता है कि राजनीति में तथ्यों की जांच और सही जानकारी का महत्व कितना बड़ा है। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के राजनीतिक सफर में भी कई बार गलतफहमियां और आलोचनाएं आईं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों से अपनी छवि मजबूत की।

निष्कर्ष: योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर की नई पहचान

गोरखपुर, जो कभी अपराध और अस्थिरता का केंद्र था, आज योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। उनकी धार्मिक जड़ों और राजनीतिक कुशलता ने इस क्षेत्र को न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी बदल दिया है।

योगी का सफर यह दिखाता है कि कैसे एक क्षेत्र की जटिल राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं को समझकर, सही नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उनकी कहानी न केवल गोरखपुर के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की भूमिका आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है, और उनकी कहानी राजनीतिक क़िस्सों में एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।

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क्या महापुरुषों को जाति संप्रदाय में बांटकर अपमानजनक टिप्पणी करने वाले देशद्रोही नहीं? https://sanjayrajput.com/2025/03/are-those-who-divide-great-men-on-the-basis-of-caste-and-religion-and-make-derogatory-comments-not-traitors.html https://sanjayrajput.com/2025/03/are-those-who-divide-great-men-on-the-basis-of-caste-and-religion-and-make-derogatory-comments-not-traitors.html#respond Mon, 24 Mar 2025 03:18:26 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1078 Read more

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हमारे देश में जितने भी महापुरुष हुए उन्होंने जो भी किया वो पूरे देश और सर्व समाज के लिए किया। जिसने जो भी उल्लेखनीय कार्य किया वो समाज के हर व्यक्ति के लिए किया। कभी किसी महापुरुष ने खुद को किसी जाति विशेष या संप्रदाय में बांटकर कोई कार्य नहीं किया। इसलिए सभी महापुरुष सर्व समाज के लिए पूज्यनीय और अनुकरणीय होने चाहिए लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए आजकल महापुरुषों को भी जाति धर्म और संप्रदाय में विभाजित किया जा रहा है और उनके ऊपर अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं।

संसद और विधानसभाओं में आजकल इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। किसी एक वर्ग को खुश करने के लिए दूसरे वर्ग के महापुरुष को अपमानित करने का गंदा खेल चल रहा है, जो कि निकृष्टतम राजनीति की श्रेणी में आता है।

आजकल जाति धर्म की राजनीति करने वालों ने हमारे महापुरुषों तक को नहीं बक्शा। महापुरुषों के बारे में ऐसे ऐसे वाहियात बयान आजकल हमारे नेताओं द्वारा दिए जा रहे हैं जिन्हें सुनकर लगता है कि इस देश में भौंकने की जरूरत से ज्यादा आजादी मिली हुई है।

अभी पिछले दिनों वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के दादा जिन्होंने युद्ध में 80 घाव सहे और एक आंख भी गंवाई ऐसे महापराक्रमी राणा सांगा को समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा राज्यसभा में गद्दार बता दिया गया।

पढ़िए सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में क्या कहा-

भाजपा वालों का तकियाकलाम हो गया है कि मुसलमानोंमें बाबर का डीएनए है… तो फिर हिंदुओं में किसका डीएनए है? बाबर को कौन लाया? बाबर को भारत में इब्राहीम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लाया था। मुसलमान बाबर की औलाद हैं, तो तुम (हिंदू) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। यह हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। बाबर की आलोचना करते हैं, राणा सांगा की नहीं।’

अब सपा सांसद रामजी लाल सुमन के इस बयान का ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित स्पष्टीकरण पढ़िए-

राणा सांगा और बाबर का सारा इतिहास खंगालने के बाद ये निष्कर्ष निकलता है-

राणा सांगा इब्राहिम लोदी समेत गुजरात और मालवा के सुलतानों को अपने दम पर पराजित कर चुके थे। इसलिए उनको किसी बाहरी की आवश्यकता नहीं थी।

बाबर बाबरनामा में लिखता है उस वक्त भारत में दो बड़े काफिर राजा है एक विजयनगर दूसरा राणा सांगा। इसका अर्थ संयम राणा सांगा उस वक्त बड़ी शक्ति थे जिनको किसी बाहरी की आवश्यकता नहीं थी।

बाबर बाबरनामा में लिखता है कि उसको भारत जीतने की इच्छा है पर कई बाधाएं है और भारत पर आक्रमण करना अभी उसके लिए प्रैक्टिकली संभव नहीं है। इसका अर्थ है इब्राहिम लोदी के खिलाफ राणा सांगा की जगह बाबर को किसी की सहायता की आवश्यकता थी न कि राणा सांगा को।

बाबरनामा सहित अन्य अफगान इतिहास सूत्र बताते है बाबर को इब्राहिम लोदी के खिलाफ आक्रमण करने को दौलत खान ने आमंत्रित किया था। इस आमंत्रण पर बाबर ने विचार किया होगा पर पहले ही स्पष्ट है उसके लिए भारत के अंदर आक्रमण करने की स्थिति नहीं थी इसलिए उसको किसी की आवश्यकता थी।।

राणा सांगा के पुरोहित की पांडुलिपि में बताया है बाबर ने राणा सांगा से इब्राहिम लोदी के खिलाफ सहायता मांगी थी। इसलिए इब्राहिम लोदी के खिलाफ राणा सांगा की जगह बाबर को राणा सांगा की आवश्यकता थी ये स्पष्ट हो जाता है। बाबर को राणा सांगा की आवश्यकता क्यों थी ये इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि राणा सांगा उस वक्त के एक शक्तिशाली राजा थे जो पहले ही कई सुलतानों सहित इब्राहिम लोदी को पराजित कर चुके थे। इसलिए बाबर को अच्छे से मालूम हो गया होगा कि अगर राणा सांगा उसकी सहायता कर देते है तो दिल्ली पर आक्रमण करना उसके लिए संभव हो जाएगा।

बाबरनामा में जिक्र आता है कि राणा सांगा ने अपना दूत भेज सहायता देने की बात मान ली थी। क्योंकि इब्राहिम लोदी को दिल्ली की गद्दी से हटाने की इच्छा तो राणा सांगा की भी थी। इसी बात को विरोधी राणा सांगा द्वारा बाबर को बुलाए जाने के प्रपंच के रूप में दुरूपयोग किया जाता है । पर राणा सांगा के पुरोहित की पांडुलिपि से स्पष्ट है राणा सांगा के सामंत ने राणा सांगा के इस फैसले का विरोध किया कि सांप को दूध पिलाने का कोई फायदा नहीं। राणा सांगा ने अपने सामंतों की बात मान ली और बाबर की सहायता को को अपनी सेना नहीं भेजी। इसी बात की खुन्नस के चलते बाद में बाबर और राणा सांगा के बीच युद्ध हुए।

मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर देने वाले ऐसे वीरों की तुलना मुगल लुटेरों और आक्रांताओं से की जा रही है।

मुगलों को महिमामंडित करने वालों से बस यही पूछना चाहता हूं कि यदि कोई लुटेरा आपके घर को लूटने आता है तो क्या आप उसका गुणगान करेंगे, उसको महिमामंडित करेंगे, उसे महान बताएंगे?

मुगल क्या थे और भारत में किस लिए आए थे ये सभी को पता है। फिर भी एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए आप उनको महान और पराक्रमी बता रहे हैं?

आजकल वोट की गंदी राजनीति के चक्कर में लुटेरों को महिममंडित करने और हमारे महापुरुषों को अपमानित करने का गंदा खेल चल रहा है।

औरंगजेब जिसने हमारे मंदिरों को लूटा, हमारे देवी देवताओं की मूर्तियों को तोड़ा, मंदिरों को मस्जिद का रूप देने का घिनौना काम किया, ऐसे लोगों को भी हमारे देश में महिमामंडित किया जा रहा है।

कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि द ग्रेट महाराणा प्रताप नहीं कहा जाता, द ग्रेट अकबर कहा जाता है।

हालात से समझौता न करते हुए, घास की रोटी खाकर भी मुगलों के बढ़ते कदम रोक मातृभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले मां भारती के सच्चे सपूत महाराणा प्रताप ने मातृभूमि के लिए जो त्याग और बलिदान दिया क्या उसे भुलाया जा सकता है?

कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक हमारे देश में महाराणा प्रताप की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश तक घोषित नहीं है।

देश का हर नागरिक आज ऋणी है हमारे इन महापुरुषों का। लेकिन वोट की गंदी राजनीति के चक्कर में इन महापुरुषों को भी अपमानित किया जा रहा है।

लुटेरों, आक्रांताओं को महिमामंडित करने वाले, उनको सही ठहराने वाले कैसे लोग हो सकते हैं, इसका आकलन आप लोग स्वयं करें। जिनके आदर्श लुटेरे हों वे कैसे लोग हो सकते हैं?

जो जिस प्रवृति का होता है, उसके आदर्श भी वैसे ही लोग होते हैं।

क्या ऐसा नहीं होना चाहिए कि देश के महापुरुषों को अपमानित करने, उनके खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी करने पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो?

देशभक्त महापुरुषों को अपमानित करना भी देशद्रोह की श्रेणी में आना चाहिए। सरकार को ऐसा कठोर कानून बनाना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति महापुरुषों के खिलाफ ऐसे अपमानजनक बयान देने की हिमाकत न कर सके।

भारतीय इतिहास के साथ जमकर छेड़छाड़ की गई है। इसकी वजह भी बहुत स्पष्ट है, जो भी आक्रांता आए उन्होंने भारतीय सभ्यता को पूरी तरह मिटा कर अपने महिमा मंडन को आगे रखा। उन्होंने अपनी भाषाओं में भारतीय ज्ञान और साहित्य का अनुवाद किया और मूल प्रतियों को और उन्हें जानने वालों को नष्ट करने का षड्यंत्र रचा। इस घिनौने साजिश का ही असर है कि आज भी बड़ी तादाद में हमारे देश में ही वो लोग मौजूद हैं, जो हमारे इतिहास और समृद्ध धरोहर पर ही प्रश्न चिह्न खड़े कर देते हैं। हमारा इतिहास मुगल या अंग्रेज नहीं हैं, हमारा इतिहास इनसे कहीं पुराना है। हमें किसी वॉस्कोडिगामा ने नहीं खोजा था, बल्कि इन लोगों ने अपने स्वार्थों के लिए हमें लूटा और हमारी संस्कृति को चुरा कर अपने विकास में उपयोग लाए।

भारत को पिछड़ा दिखाने की कोशिश के भी मूल में यही साजिश थी। दरअसल जब विज्ञान, सभ्यता, दर्शन शास्त्र, संपन्नता और जीव विज्ञान या आयुर्विज्ञान के चरम पर ये सनातन संस्कृति बैठी थी, तो इसके ज्ञान को इतिहास में अपने नाम से प्रचारित करने के लिए विदेशी आक्रांताओं ने इतिहास को नए सिरे से गढ़ना शुरू किया। कहते हैं नकल में भी अकल चाहिए। अरब या अंग्रेज लिखना तो जानते थे, लेकिन ज्ञान नहीं था। उन्होंने इतिहास के साथ जो तोड़-मरोड़ की, वो ज्यादा समय तक छिपी नहीं। हालांकि भारतीय राजनीति में कुछ इस तरह के समीकरण बन गए कि हमारे राजनैतिक दलों ने भी धर्म की भेंट चढ़ चुकी राजनीति के हवन कुंड में हमारे इतिहास की भी आहुति देने से परहेज नहीं किया।

हम अपने इतिहास से होने वाली जोड़-तोड़ को इसीलिए सहन करते रहते हैं क्योंकि हम असली इतिहास से वाकिफ ही नहीं हैं। हमें यह कह दिया जाता है कि वैदिक सभ्यता तो कल्पना है। ये भी कह दिया जाता है कि विज्ञान को लेकर हमारे समृद्ध इतिहास की जो बाते हैं वो कपोल कल्पनाएं हैं। हम रामायण महाभारत के कालखंड पर भी बहस करते दिख जाते हैं। यही वो साजिश थी, जो नालंदा या अन्य विश्वविद्यालयों को पूरी तरह नष्ट करते वक्त रची गई थी। स्मृतियों के जरिए आगे बढ़ी हमारी परंपरा ने बहुत कुछ बचा लिया, तो काफी कुछ खो भी दिया। मुगलों पुर्तगालियों या अंग्रेजों के हमलों से बहुत पहले भी हम एक बेहतरीन सभ्यता थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे।

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महापुरुषों पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों पर दर्ज हो देशद्रोह का मुकदमा https://sanjayrajput.com/2025/03/sedition-case-should-be-filed-against-those-who-make-derogatory-comments-on-great-men.html https://sanjayrajput.com/2025/03/sedition-case-should-be-filed-against-those-who-make-derogatory-comments-on-great-men.html#respond Sun, 23 Mar 2025 17:00:42 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1074 Read more

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गोरखपुर। देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शूरवीर योद्धाओं के बलिदान को नमन करते हुए रविवार 23 मार्च को गोरखपुर के बेतियाहाता स्थित शहीद भगत सिंह की मूर्ति पर माल्यार्पण कर उनके साथ मातृभूमि के सभी वीर सपूतों को भी नमन किया गया।

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इस दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोग उपस्थित रहे तथा सभी लोगों ने सरकार से एक स्वर में मांग किया कि आज अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए जाति संप्रदाय से ऊपर उठकर देश और मातृभूमि हेतु अपना सर्वस्व बलिदान कर देने वाले महापुरुषों को अपमानित करने वाले सांसद, विधायक और नेताओं पर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया जाए और उन्हें फांसी की सजा का प्रावधान हो, जिससे कोई भविष्य में इन महापुरुषों के खिलाफ अनर्गल बोलने की हिमाकत न कर सके।

इस दौरान उपस्थित संदीप शाही ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार इन सभी महापुरुषों को जाति के बंधन से मुक्त करते हुए राष्ट्रीय महापुरुष घोषित करे। इनके खिलाफ कोई भी टिप्पणी राष्ट्रद्रोह मानी जाए और इसकी सजा फांसी होनी चाहिए।

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सीएम योगी से इस्तीफा मांगने वाले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का भंडाफोड़ https://sanjayrajput.com/2025/02/swami-avimukteshwaranand-who-demanded-resignation-from-cm-yogi-exposed.html https://sanjayrajput.com/2025/02/swami-avimukteshwaranand-who-demanded-resignation-from-cm-yogi-exposed.html#respond Sat, 01 Feb 2025 16:47:26 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=993 Read more

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महाकुंभ 2025 में हुई भगदड़ की घटना के बाद यूपी के सीएम योगी से इस्तीफा मांगने वाले लंपट बाबा का नाम है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद. इनको और इनके चेलों को अखिलेश यादव की सपा सरकार में पुलिस ने इतना कूटा था कि इनको बहुत दिनों तक अपनी तशरीफ रखने में भी समस्या हो रही थी। 

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सपा सरकार में इनका सेवा सत्कार इतना जोरदार हुआ था कि इनके कई शिष्य परलोक सिधार गये थे और ये स्वयं भी अस्पताल पहुँच गए थे, मगर इन्होंने आज तक अखिलेश यादव से इस्तीफा नहीं मांगा. इस्तीफा मांगना तो दूर अभी महाकुंभ 2025 में ये अखिलेश यादव से हँसते खिलखिलाते हुए बड़ी आत्मीयता से मिले थे जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हैं. मतलब ये महाशय लाठियां बरसाने वाले पर फूल बरसा रहे हैं और संतों पर फूल बरसाने वाले योगी जी पर आघात कर रहे हैं, उनका इस्तीफा मांग रहे हैं.

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आपको बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मूलतः उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रहने वाले हैं. बचपन में इनका नाम उमा शंकर पांडे था. ये कांग्रेस की छात्र इकाई राष्ट्रीय छात्र संगठन के न केवल सक्रिय सदस्य रहे बल्कि उसी के बैनर तले वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्र संघ के महामंत्री भी बने.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आरम्भ में स्थानीय कांग्रेस नेताओं के लिए छोटे मोटे धरना प्रदर्शन का काम किया करते थे, लेकिन राजनीति में जब इनका सिक्का नहीं जम पाया तो फिर यह कांग्रेस के पिट्ठू रहे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती से दीक्षा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद बन गए.

सबसे वयोवृद्ध शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के अनुसार अपने गुरु की मृत्यु के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने जो उत्तराधिकार पत्री दिखाकर शंकराचार्य का पद हड़पा, उन्होंने इन्हें ऐसा कोई उत्तराधिकार पत्र दिया ही नहीं था.

अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य पद पर नियुक्त करने वाली संस्था काशी विद्वत परिषद ने भी मान्यता नहीं दी और इनके ऊपर सुप्रीम कोर्ट से भी शंकराचार्य के पद का निर्वहन करने पर रोक है. कानूनी रूप से इनका स्वयं को शंकराचार्य कहना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने वाला आपराधिक कृत्य है. फिर भी ये स्वयं को शंकराचार्य कहते हैं, जबकि अन्य शंकराचार्यों समेत अधिकांश धर्माचार्य लोग इन्हें न तो इस पद के योग्य मानते हैं और न ही यह शंकराचार्य पद के लिए स्थापित प्रक्रिया से शंकराचार्य बने हैं.

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कुछ समय पहले अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि जब तक उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री नहीं बन जाते इनके मन को शांति नहीं मिलेगी. इन्होंने कभी उद्धव ठाकरे से इस्तीफा नहीं मांगा जिनके शासन काल में चार हिंदू संतो और उनके ड्राइवर की पुलिस के सामने पीट-पीटकर नृशंस हत्या कर दी गई थी और संदिग्ध अपराधियों को बचाने का पूरा प्रयास किया गया था. इतना ही नहीं साधुओं की हत्या के 5 दिन बाद तक हत्यारो पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। यदि उस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर नहीं आता तो उद्धव सरकार द्वारा उस घटना को दुर्घटना बता दिया गया था.

अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं पूर्ण VVIP व्यवस्था में रहते हैं, यहाँ तक कि जब मंदिर या किसी धार्मिक स्थान पर भी जाते हैं तो इनका चाँदी का सिंहासन साथ जाता है पर VIP व्यवस्था के कारण जब लोगों के साथ कथित भेदभाव होता है तो उससे इनको सरकार पर बहुत ज्यादा गुस्सा भी आता है.

क्या कोई राजनेता किसी शंकराचार्य से यह कह सकता है कि आप ठीक से पूजा पाठ नहीं कर रहे हो इसलिए आप इस्तीफा दे दो ?

अगर नहीं तो किसी शंकराचार्य को भी किसी राजनेता से इस्तीफा मांगने का कोई अधिकार नहीं है, यह काम विपक्ष का है.

धर्म व्यवस्था अपने धर्म विधि के अनुसार चलेगी, राज्य सत्ता अपने राज्य सत्ता के विधान के अनुसार चलेगी.

यदि ये शंकराचार्य महोदय विपक्षियों को खुश करने के लिए राजकाज में हस्तक्षेप करेंगे, विरोधियों के हाथों में खेलेंगे तो परिणाम स्वरूप राजसत्ता को चुनने वाली जनता के बीच इनकी प्रतिष्ठा धूमिल होनी तय है.

ऐसे स्वघोषित शंकराचार्य की वजह से शंकराचार्य जैसे सम्मानित पद की गरिमा खत्म हो रही है. समझ में नहीं आता कोई भी संत या महामंडलेश्वर इनके खिलाफ आवाज क्यों नहीं उठा रहा.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की सपा सरकार में हुई कुटाई का वीडियो यहां देखें-

https://www.facebook.com/share/r/1CQbndz9bL/?mibextid=rS40aB7S9Ucbxw6v

 

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योगी बने रहेंगे मुख्यमंत्री लेकिन होंगे ये बदलाव : सूत्र https://sanjayrajput.com/2024/07/yogi-adityanath-will-continue-as-up-cm.html https://sanjayrajput.com/2024/07/yogi-adityanath-will-continue-as-up-cm.html#respond Thu, 18 Jul 2024 01:49:28 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=476 Read more

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यूपी का सियासी पारा चढ़ गया है. पिछले 24 घंटे में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बीजेपी नेताओं के बीच बैठकों का दौर जारी है. यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली पहुंचे और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से शाम को 1 घंटे तक मुलाकात की. जैसे ही बैठक खत्म हुई, जेपी नड्डा ने यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के साथ भी बैठक की. 

बुधवार को भूपेंद्र चौधरी ने पीएम मोदी से भी मुलाकात की. मुलाकात करीब एक घंटे चली. लोकसभा चुनाव नतीजे और संगठन के मुद्दे को लेकर चली यह मुलाकात काफी अहम है.

सूत्रों के मुताबिक, यूपी में सीएम को लेकर कोई मंथन नहीं हुआ है. योगी सीएम बने रहेंगे. संगठन में बदलाव की पूरी संभावना है. योगी मंत्रिमंडल में भी थोड़ा बदलाव हो सकता है. फैसला और विचार विमर्श के बाद लिया जाएगा.

आलाकमान संगठानत्मक चुनावों की तैयारी में है.सूत्रों के मुताबिक यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने करीब एक घंटे तक की मुलाकात में पीएम मोदी को संगठन के बारे में जानकारी दी.

यूपी में पार्टी कार्यकर्ताओं को तरजीह मिले, सरकार के बीच उनकी बातें सुनी जाएं, ये प्रमुख मुद्दे यूपी बीजेपी अध्यक्ष की ओर से बताए गए. इसके अलावा उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर जो उपचुनाव होने वाले हैं, इसको लेकर प्रदेश कार्यकर्ताओं को किस तरीके का सहयोग चाहिए, यूपी में पार्टी संगठन में नई जान फूंकने की जरूरत है, यह बात भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से बताई गई.

इधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ में अपने आवास पर मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ बैठक की जिसमें आगामी विधानसभा उपचुनाव और राज्य के कई हिस्सों में आई बाढ़ जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

सूत्रों के अनुसार, बैठक में प्रदेश के सभी कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री मौजूद थे. बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बताया, ‘बाढ़, विकास कार्यों और आगामी चुनावों पर चर्चा हुई.’ पिछले एक पखवाड़े में राज्य के 17 जिलों के 700 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, ‘बैठक विशेष रूप से आगामी चुनावों पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी और हम उन सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेंगे जहां उपचुनाव होने हैं.’

क्यों नाराज हैं केशव मौर्य?

2017 में यूपी विधानसभा चुनाव के समय केशव मौर्य भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। BJP को बहुमत मिला, लेकिन योगी आदित्यनाथ CM बने। 2022 के चुनाव में केशव अपनी सीट हार गए। इसके बाद पार्टी में केशव की स्थिति कमजोर मानी गई। अब लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद योगी की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। इसके चलते फिर से योगी और केशव के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। उधर, केशव ने 14 जुलाई को प्रदेश कार्य समिति की बैठक में यह कहकर सियासी हलचल बढ़ा दी कि सरकार से बड़ा संगठन है।

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Yogi Adityanath Story in Hindi: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) 5 जून 2025 को 53 साल के हो गए हैं। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में  5 जून 1972 को एक राजपूत परिवार में जन्मे अजय सिंह बिष्ट (Ajay Singh Bisht) गोरखपुर (Gorakhpur) पहुंचकर योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) बन गए। देश के सबसे बड़े सूबे की सत्ता के सिंहासन पर योगी विराजमान हैं। महज 26 साल की उम्र में संसद पहुंचने वाले योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) 45 साल की उम्र में यूपी के सीएम बने। आज उत्तरप्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत में उन्हें हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे के तौर पर जाना जाता है। उनके प्रशंसक उन्हें देश के भावी प्रधानमंत्री के तौर पर भी देखते हैं।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के गोरखनाथ (Gorakhnath) मठ के पीठाधीश्वर से देश के सबसे ताकतवर सीएम बनने के सफर की कहानी भी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। तो आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी ये रोचक कहानी।

योगी आदित्यनाथ का जन्म (Yogi Adityanath Birth) yogi adityanath ka janm kab hua tha

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) का जन्म उत्तराखंड (Uttrakhand) के एक साधारण राजपूत परिवार में हुआ. इनके पिता का नाम (Yogi Adityanath ke pita ka nam) आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम (Yogi Adityanath ki mata kanam) सावित्री देवी है.

शिक्षा (Yogi Adityanath Education)

(Yogi Adityanath ki padhai)
योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने 1989 में ऋषिकेश के भरत मंदिर इंटर कॉलेज से 12वीं की परीक्षा पास की और 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University) से गणित में B.Sc की पढ़ाई पूरी की। इसी कॉलेज से उन्होंने M.Sc भी किया।

कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ को शुरूआत से ही राजनीति में लगाव था। वह अपने कॉलेज के दिनों में छात्र संघ का चुनाव भी लड़े। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन ये कौन जानता था कि एक छोटे से छात्रसंघ का चुनाव हारने वाला युवा नेता, भारत के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बनेगा। छात्र जीवन में ही वो राममंदिर आंदोलन (Ram Mandir Andolan) से जुड़ गए थे।

अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ

(Ajay Singh Bisht se Yogi Adityanath)
90 के दशक में राममंदिर आंदोलन (Ram Mandir Andolan) के दौरान ही योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) के महंत अवैद्यनाथ (Mahanth Awaidyanath) से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) के एक कार्यक्रम में हुई। इसके कुछ दिनों बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपने माता-पिता को बिना बताए गोरखपुर (Gorakhpur) जा पहुंचे, जहां संन्यास धारण करने का निश्चय लेते हुए गुरु दीक्षा ले ली। गोरखनाथ मठ के महंत अवैद्यनाथ भी उत्तराखंड के ही रहने वाले थे। महंत अवैद्यनाथ का शिष्य बनने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने धर्म से लेकर शास्त्र की शिक्षा ली। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की कई परीक्षाएं लेने के बाद महंत अवैद्यनाथ ने उत्तराधिकारी के लिए योगी आदित्यनाथ को चुना और अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। इस तरह वे गोरखनाथ (Gorakhnath) मठ के महंत बनकर अजय सिंह बिष्ट (Ajay Singh Bisht) से योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) बन गए।

राजनैतिक जीवन की शुरुआत

(Political Career of Yogi Adityanath)
गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Mandir) के महंत की गद्दी का उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया। गोरखपुर (Gorakhpur) से महंत अवैद्यनाथ चार बार सांसद रहे, उसी सीट से योगी 1998 में 26 वर्ष की उम्र में लोकसभा पहुंचे और फिर लगातार 2017 तक पांच बार सांसद रहे।
सियासत में कदम रखने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की छवि एक कठोर हिंदुत्ववादी नेता के तौर पर उभरी। सांसद रहते हुए गोरखपुर (Gorakhpur) जिले को अपने नियम अनुसार चलाने और त्वरित फैसलों से उन्होंने सबको चकित किया। इसी के चलते योगी (Yogi) के सियासी दुर्ग को न तो मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का समाजवाद (Samajwad) भेद पाया और न ही मायावती (Mayawati) की सोशल इंजीनियरिंग (Social Engineering) ही यहाँ काम आई। गोरखपुर (Gorakhpur) में हमेशा योगी का हिंदुत्व कार्ड ही हावी रहा। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपने 19 साल के सियासी कैरियर में न केवल गोरखपुर बल्कि पूर्वांचल की कई अन्य सीटों पर भी अपना प्रभाव कायम किया।

हिंदू युवा वाहिनी का गठन (Hindu Yuva Vahini)

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अपनी निजी सेना हिंदू युवा वाहिनी (Hindu Yuva Vahini) का निर्माण किया जो धर्म रक्षा, गौ सेवा करने व हिंदू विरोधी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाई गई थी। हिंदू युवा वाहिनी ने गोरखपुर में ऐसा माहौल तैयार किया, जिसके चलते आज तक उन्हें कोई चुनौती नहीं दे सका। एक तेजतर्रार राजनीतिज्ञ के रूप में अपनी छवि योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने बना ली थी।

यूपी का सीएम बनने तक का सफर (The Making of UP CM Yogi Adityanath)

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सबसे बड़ी खासियतों में एक है कि वह जनता से सीधा संवाद करने में विश्वास रखते हैं। 2017 में बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला तो सीएम के लिए कई चेहरे दावेदार थे, लेकिन बाजी योगी के हाथ ही लगी।

कानून व्यवस्था पहली प्राथमिकता, अपराधियों में खौफ

योगी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने फैसलों से अपनी राजनीतिक इच्छा को जाहिर कर दिया। उनकी पहली प्राथमिकता थी यूपी को अपराध मुक्त कर लॉ एंड आर्डर सही करना। इसके लिए उन्होंने कुछ कड़े निर्णय भी लिए, हालांकि प्रदेश में हुए ताबड़तोड़ एनकाउंटरों के कारण विपक्ष ने उन पर उंगलियां भी उठाईं, लेकिन कानून-व्यवस्था पर सख्त योगी पर इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा।
सीएम बनते ही योगी ने अपराधियों पर ऐसा शिकंजा कसा कि यूपी के सभी अपराधी और माफिया त्राहि त्राहि करने लगे। हालात ऐसे हो गए कि पिछली सरकारों में राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बड़े बड़े माफिया सरगना नेस्तनाबूद हो गए। ऐसा पहली बार हुआ जब माफियाओं और अपराधियों की चल अचल संपत्तियों को तहस नहस करके कानून की हनक का अहसास कराया गया। योगी के सीएम बनने के बाद अपराधियों में इतना खौफ पैदा हो गया था कि वह खुद थाने जाकर सरेंडर कर रहे थे।
राज्य के अपराधी खासतौर से मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे माफिया जो दूसरे राज्यों से अपना नेटवर्क चला रहे थे, उन्हें प्रदेश में वापस लाया गया और उनके साम्राज्य को मिट्टी में मिला दिया गया।        ।

कोरोना काल में किया उत्कृष्ट प्रदर्शन

2020 के कोरोना संकट काल में सीएम योगी सीधे तौर पर सक्रिय नजर आए, जिससे उनकी लोकप्रियता में और भी इजाफा हुआ। वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने जिन्होंने कोरोना काल में लगातार अपनी जनता का हर तरह से ख्याल रखा। प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों से वापस लाने तथा उनके लिए आजीविका के संसाधन जुटाने में योगी ने जो उत्कृष्ट कार्य किया उसके लिए उनकी तारीफ पूरी दुनिया में हुई।

2021 में आई कोरोना की दूसरी लहर में भी योगी आदित्यनाथ ने जनसंख्या में अन्य राज्यों की तुलना में बहुत बड़े 24 करोड़ आबादी वाले प्रदेश को जिस तरह संभाला है वह काबिले तारीफ है। दूसरी लहर में कोरोना से हुई मौतों के मामले में दिल्ली जैसे कम जनसंख्या वाले राज्यों से तुलना करें तो उत्तरप्रदेश की स्थिति काफी हद तक बेहतर रही।

खुद कोरोना की चपेट में आ जाने के बावजूद रिकवर होते ही लगातार एक दिन में कई कई जिलों का दौरा करके हर जिले में बेड, ऑक्सीजन, दवा, इंजेक्शन आदि की उपलब्धता को सुनिश्चित करने का जो कार्य यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) ने किया है वह उत्कृष्ट और सराहनीय है।

विश्व भर में हिन्दुत्व का सबसे बड़ा चेहरा

योगी आदित्यनाथ सिर्फ यूपी में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में हिन्दुत्व का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके हैं। साथ ही देश की राजनीति में भी एक प्रमुख चेहरा बन चुके है। ये सच है कि 2017 का यूपी विधान सभा चुनाव बीजेपी ने मोदी के चेहरे पर जीता था, लेकिन आज की तारीख में बीजेपी योगी को अनदेखा करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। योगी आदित्यनाथ का कद राजनीति में अब इतना बड़ा हो चुका है की भाजपा उन्हें किनारे लगाने के बारे में सोच भी नहीं सकती वरना देशभर से हिन्दुत्ववादी वोट भाजपा से एक झटके में दूर हो सकता है। नहीं भूलना चाहिए कि आदित्यनाथ भले ही कर्म से योगी हों, लेकिन जन्म से तो वह क्षत्रिय ही हैं और क्षत्रिय झुकने से अधिक टूट जाने में विश्वास करता है।
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