Gorakhpur news – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com सच की ताकत Tue, 11 Nov 2025 16:22:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.3 https://sanjayrajput.com/wp-content/uploads/2024/07/cropped-91-98392-81815-20231027_230113.jpg Gorakhpur news – SanjayRajput.com https://sanjayrajput.com 32 32 235187837 12वीं के बाद सही करियर चुनें: इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परामर्श 2025-26 https://sanjayrajput.com/2025/11/career-councelling-by-pratistha-singh.html https://sanjayrajput.com/2025/11/career-councelling-by-pratistha-singh.html#respond Tue, 11 Nov 2025 16:21:13 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1245 Read more

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🎓 12वीं के बाद सही करियर चुनें: इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परामर्श 2025-26

गोरखपुर — काउंसलर प्रतिष्ठा सिंह द्वारा इंजीनियरिंग और मेडिकल करियर के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन।

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गोरखपुर के इस मठ का आशीर्वाद पाकर लोग बनते हैं मंत्री, सांसद और विधायक https://sanjayrajput.com/2025/11/gorakhnath-mandir-gorakhpur-politics.html https://sanjayrajput.com/2025/11/gorakhnath-mandir-gorakhpur-politics.html#respond Sat, 01 Nov 2025 11:40:55 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1236 Read more

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Gorakhnath Mandir Gorakhpur: गोरखपुर का प्रसिद्ध गोरखनाथ मठ न केवल आध्यात्मिक केंद्र रहा है, बल्कि यहां से निकला आशीर्वाद कई बार राजनीतिक दिशा तय करता दिखा है। पढ़िए किन नेताओं की किस्मत इस मठ के आशीर्वाद से चमकी।

मानीराम के पूर्व विधायक से शुरू हुई परंपरा

मानीराम क्षेत्र से जुड़े पूर्व विधायक स्वर्गीय ओम प्रकाश पासवान की कहानी मठ के प्रभाव की मिसाल मानी जाती है। 1989 में विवादों के दौर में उन्होंने महंत अवैद्यनाथ की शरण ली। महंत के आशीर्वाद से वे हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। बाद में वे समाजवादी पार्टी से भी जुड़े, लेकिन मंदिर से जुड़ाव हमेशा बना रहा।

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में असर और गहरा

जब योगी आदित्यनाथ मंदिर की कमान पर आए, तब गोरखनाथ मठ की राजनीतिक भूमिका और मजबूत हुई। 2002 में उन्होंने डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़ाया, जिन्होंने तत्कालीन मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को 20 हजार से अधिक मतों से हराया। यह जीत योगी और गोरखनाथ मंदिर के प्रभाव का प्रतीक बनी।

2007 में कई नेताओं को मिला मंदिर का आशीर्वाद

2007 के विधानसभा चुनाव में कई नेताओं ने गोरखनाथ मंदिर से आशीर्वाद लेकर सफलता पाई, जिनमें प्रमुख नाम हैं:

  • अतुल सिंह — रामकोला विधानसभा
  • शंभू चौधरी — नेबुआ नौरंगिया
  • महंत कौशलेंद्र — तुलसीपुर

ओम प्रकाश पासवान के उत्तराधिकारी कमलेश पासवान

स्व. ओम प्रकाश पासवान के निधन के बाद उनके पुत्र कमलेश पासवान ने भी इसी राह पर चलते हुए राजनीति में कदम रखा। योगी आदित्यनाथ के आशीर्वाद से उन्होंने सफलता हासिल की और आज वे बांसगांव से भाजपा सांसद होने के साथ साथ केंद्रीय राज्यमंत्री भी हैं। वहीं उनके उनके छोटे भाई डॉ विमलेश पासवान भी बांसगांव से विधायक हैं। इसी दौर में विजय बहादुर यादव को भी मानीराम से टिकट मिला और वे विधानसभा पहुंचे।

मठ की छाया हटते ही फीका पड़ा सितारा

ऐसी मान्यता है कि, जिसने गोरखनाथ मंदिर की छाया छोड़ी, उसकी राजनीतिक चमक भी घट गई। विजय बहादुर यादव, शंभू चौधरी और महंत कौशलेंद्र जैसे नेता इसी का उदाहरण हैं। उनके राजनीतिक ग्राफ के गिरने से यह धारणा और मजबूत हुई कि मठ का आशीर्वाद सफलता की कुंजी है।

गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि प्रभाव का भी केंद्र रहा है। मठ से जुड़े नेताओं की यात्रा इस बात की गवाही देती है कि यहां का आशीर्वाद आज भी राजनीतिक समीकरणों को दिशा देने में सक्षम है।

© SanjayRajput.com — स्थानीय रिपोर्टिंग और विश्लेषण।

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Shaheed Ravindra Singh Gorakhpur: पूर्वांचल का वो युवा नेता जिसने मचा दी थी राजनीति में हलचल https://sanjayrajput.com/2025/08/shaheed-ravindra-singh-gorakhpur.html https://sanjayrajput.com/2025/08/shaheed-ravindra-singh-gorakhpur.html#respond Sat, 30 Aug 2025 10:37:53 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1199 Read more

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Shaheed Ravindra Singh Gorakhpur: पूर्वांचल के गोरखपुर से ही देश की सियासत में पहली बार अपराधीकरण की शुरुआत हुई। दरअसल 70 के दशक में इमरजेंसी का दौर था। देश में जेपी आंदोलन सियासत के नए चेहरे जन्म दे रहा था। इस आंदोलन से कई युवा प्रभावित हुए और छात्र राजनीति में कूद पड़े। इसी दौर में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में हरिशंकर तिवारी और बलवंत सिंह छात्रनेता हुए। दोनों में ही वर्चस्व को लेकर जंग चल रही थी। खास बात ये थी कि इन्होंने छात्र राजनीति में जातिवाद का प्रयोग शुरू कर दिया था। बलवंत सिंह जहां ठाकुर लॉबी को जोड़ने में जुटे थे, वहीं दूसरी तरफ हरिशंकर तिवारी ब्राह्मण युवाओं को अपनी तरफ जोड़ने की कोशिश करते।

ये वो दौर था जब पूर्वांचल की राजनीति में एक और युवा अपनी तेजी से अपनी पहचान बना रहा था। नाम था रविंद्र सिंह। रविंद्र सिंह 1967 में गोरखपुर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। इसके बाद 1972 में लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। तेज तर्रार छवि के रविंद्र सिंह ने देखते ही देखते गोरखपुर और आसपास के इलाकों में अपनी अच्छी पहचान बना ली थी। इसी को देखते हुए उन्हें जनता पार्टी ने 1977 में टिकट दिया। अपने पहले ही चुनाव में रविंद्र सिंह कौड़ीराम सीट से विधायक चुने गए। कहा जाता है कि रविंद्र सिंह वीरेंद्र शाही के करीबी थे, वीरेंद्र शाही धीरे-धीरे रविंद्र सिंह से ही राजनीति के गुर सीख रहे थे। लेकिन तभी रविंद्र सिंह की गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर हत्या हो जाती है। उन्हें गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर गोलियों से भून दिया जाता है।

स्व. सिंह जी छात्र जीवन से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। वे आज़ाद भारत के पहले ऐसे विधायक बने जिन्हें गोरखपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय दोनों का छात्रसंघ अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। उनकी कर्मठता और लोकप्रियता के चलते 1977 में जनता पार्टी ने उन्हें कौड़ीराम विधानसभा से प्रत्याशी बनाया और वे भारी मतों से विजयी हुए।

विधानसभा में उनके सशक्त भाषणों और ईमानदार छवि से अपराध और दबंगई के सहारे राजनीति करने वालों की जमीन खिसकने लगी थी। यही वजह थी कि लखनऊ जाते समय गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर उनकी हत्या कर दी गई।

उनके न रहने के बाद भी उनकी विचारधारा जीवित रही। उनकी धर्मपत्नी गौरी देवी जी चार बार उसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। समाज और राजनीति में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। 1971 के भारत-पाक युद्ध में युवाओं की फौज तैयार कर देश की सेवा करना, क्यूबा की राजधानी में भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करना और आपातकाल के दौरान 20 महीने जेल में रहकर लोकतंत्र की रक्षा करना उनकी महान उपलब्धियों में शामिल है।

स्व. रवींद्र सिंह का संघर्षमय जीवन, ईमानदारी और कर्मठता आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। पूर्वांचल की राजनीति में अपने क्रांतिकारी विचारों और प्रभावशाली व्यक्तित्व से अमिट छाप छोड़ने वाले पूर्व विधायक स्व. रवींद्र सिंह जी की 46वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

“बड़े गौर से सुन रहा था ज़माना, तुम्हीं सो गये दास्तां कहते-कहते।।”

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गमले में उगे पौधे बरगद से मुकाबला नहीं कर सकते: राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ https://sanjayrajput.com/2025/08/abkm-gorakhpur-meeting.html https://sanjayrajput.com/2025/08/abkm-gorakhpur-meeting.html#respond Sun, 24 Aug 2025 15:15:18 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1186 Read more

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल प्रांत की गोरखपुर में हुई बैठक में राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ ने नए प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह को दिया मनोनयन पत्र

गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल प्रांत की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को शहर के होटल फाइव सेंसेस में आयोजित हुई। इस अवसर पर राष्ट्रीय वरिष्ठ महामंत्री राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ ने विनोद कुमार सिंह को प्रदेश अध्यक्ष का मनोनयन पत्र सौंपा।

पढ़ें…अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा का इतिहास

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बैठक से पहले गोरखपुर आगमन पर संगठन की जिला इकाई के कार्यकर्ताओं ने बाघागाड़ा फोरलेन पर फूल मालाओं से दोनों नेताओं का भव्य स्वागत किया।

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मीडिया से बातचीत में राघवेंद्र सिंह ‘राजू’ ने कहा कि अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा देश का सबसे पुराना संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1897 में हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन से बाहर निकाले गए कुछ लोग निजी स्वार्थ में समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनका यह प्रयास कभी सफल नहीं होगा। उन्होंने कहा, “गमले में उगे पौधे बरगद से मुकाबला नहीं कर सकते।” उन्होंने समाज को अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील भी की।

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राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि क्षत्रिय समाज ने हमेशा देश व समाज के लिए बलिदान दिया है, लेकिन आज सरकार से लेकर समाज के कई वर्गों तक क्षत्रियों के विरोध में खड़े हैं। गोरखपुर मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह राजपूत ने कहा कि क्षत्रिय समाज मान-सम्मान के साथ जीता और मरता आया है, और यही हमारी सबसे बड़ी पहचान है।

बैठक को राष्ट्रीय सचिव ओंकार नाथ सिंह, देवरिया जिलाध्यक्ष राजेश सिंह श्रीनेत सहित कई अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील सिंह, प्रदेश वीरांगना प्रकोष्ठ अध्यक्ष सीमा सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री अरुण कुमार सिंह, व्यापार प्रकोष्ठ अध्यक्ष दीपक सिंह, संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, युवा प्रकोष्ठ मंत्री सुमित सिंह श्रीनेत, युवा नेता आर्यन शाही, सावन शाही व सूरज सिंह सेंगर समेत गोरखपुर, देवरिया, बलिया, बस्ती, आजमगढ़ और महाराजगंज से आए सैकड़ों क्षत्रिय समाज के लोग उपस्थित रहे।

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Yogi Adityanath History in Hindi: गैंगस्टर्स के गढ़ गोरखपुर में कैसे उभरे योगी आदित्यनाथ? https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2025/05/yogi-adityanath-history-in-hindi.html#respond Fri, 23 May 2025 05:57:16 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1139 Read more

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हाता और शक्ति सदन की लड़ाई में कैसे हुई योगी आदित्यनाथ की एंट्री?

Yogi Adityanath History in Hindi: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐसा नाम है जिसने न केवल अपनी छवि बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीतिक दिशा को भी बदला है—योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath)। उनकी कहानी केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक ऐसे क्षेत्र की भी है जो कभी गैंगस्टर्स और अपराधियों के गढ़ के रूप में जाना जाता था। इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे गोरखपुर के उस माहौल से निकलकर योगी आदित्यनाथ ने खुद को स्थापित किया और राजनीति की दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

योगी आदित्यनाथ: असली नाम और शुरुआत

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) का असली नाम है अजय सिंह बिष्ट, जो उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में जन्मे थे। उन्होंने धार्मिक शिक्षा ग्रहण की और महंत अवैद्यनाथ के सान्निध्य में रहकर गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर से जुड़ गए। महंत अवैद्यनाथ के मार्गदर्शन में योगी ने न केवल धार्मिक गतिविधियों में बल्कि सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

गोरखपुर, जो कभी अपराधियों और गैंगस्टरों का गढ़ था, वहां योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने धार्मिक और सामाजिक सुधारों के साथ-साथ राजनीतिक सक्रियता भी दिखाई। उनके नेतृत्व में यह क्षेत्र धीरे-धीरे बदलने लगा।

गोरखपुर की राजनीतिक पृष्ठभूमि और अपराध की समस्या

गोरखपुर (Gorakhpur) का राजनीतिक इतिहास काफी जटिल रहा है। 1990 के दशक में यहां के हालात ऐसे थे कि अपराध और हिंसा आम बात थी। राजनीतिक दलों के बीच सत्ता संघर्ष और आपसी लड़ाइयों ने इस क्षेत्र को अस्थिर कर दिया था।

इस दौरान राम जन्मभूमि आंदोलन ने पूरे उत्तर भारत में राजनीतिक माहौल को गहरा प्रभावित किया। राम जन्मभूमि के मुद्दे ने हिंदू राष्ट्रवाद को बल दिया और उसी समय महंत अवैद्यनाथ जैसे धार्मिक नेताओं की भूमिका भी बढ़ी।

योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस संदर्भ में खुद को एक मजबूत हिंदू राष्ट्रवादी नेता के रूप में स्थापित किया। उन्होंने न केवल धार्मिक जनसमूह को संगठित किया, बल्कि राजनीतिक मोर्चे पर भी अपनी पकड़ मजबूत की।

महंत अवैद्यनाथ और योगी आदित्यनाथ का संबंध

महंत अवैद्यनाथ, गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत और एक प्रभावशाली धार्मिक नेता थे, जिन्होंने योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के राजनीतिक करियर की नींव रखी। अवैद्यनाथ ने योगी को अपना उत्तराधिकारी बनाया और उन्हें गोरखपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।

महंत अवैद्यनाथ स्वयं भी राजनीति में सक्रिय रहे और उनके प्रभाव ने योगी के राजनीतिक सफर को गति दी। योगी ने महंत जी के नक्शेकदम पर चलते हुए गोरखपुर (Gorakhpur) की राजनीति को नई दिशा दी।

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक राजनीति: 1990 का दशक

1990 के दशक में उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई अहम घटनाएं हुईं, जिनका योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के उभार पर गहरा प्रभाव पड़ा। उस समय के राष्ट्रपति शासन, मंडल आयोग की सिफारिशें, और तत्कालीन प्रधानमंत्रियों जैसे अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, राजीव गांधी के दौर ने प्रदेश की राजनीति को जटिल बना दिया।

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की हत्या के बाद राजनीतिक स्थिरता में कमी आई, जिससे उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की राजनीति और भी अस्थिर हो गई। इसी बीच योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक और सामाजिक आधार पर अपना जनाधार मजबूत किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन और योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक उदय

राम जन्मभूमि आंदोलन ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। इस आंदोलन ने धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक ताकत में बदल दिया। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई और इसे अपनी राजनीतिक पहचान का आधार बनाया।

उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे को राजनीतिक मंच पर उठाया और हिंदू राष्ट्रवाद की विचारधारा को मजबूती से अपनाया। इस कारण वे उत्तर प्रदेश में बीजेपी के मजबूत चेहरों में से एक बने।

गोरखपुर से मुख्यमंत्री तक: योगी आदित्यनाथ का सफर

गोरखपुर से सांसद बनने के बाद योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लगातार अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। उनके नेतृत्व में गोरखपुर का विकास हुआ, साथ ही सामाजिक सुधारों पर भी जोर दिया गया। वे लगातार 5 बार गोरखपुर सीट से सांसद चुने गए।

2017 में, योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, विकास और धार्मिकता के मुद्दे प्रमुख रहे।

कानून-व्यवस्था में सुधार

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने के लिए योगी सरकार ने कई कदम उठाए। गैंगस्टर और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जिससे प्रदेश में अपराध दर में कमी आई।

धार्मिक और सामाजिक सुधार

धार्मिक स्थलों के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ योगी ने सामाजिक सुधारों पर भी ध्यान दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता और विकास के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।

राजनीतिक क़िस्से: गलतफहमियां और सुधार

राजनीतिक इतिहास में अक्सर गलतफहमियां और भ्रांतियां होती हैं। ऐसे मामलों में सत्य की खोज और सुधार आवश्यक होता है। यह दिखाता है कि राजनीति में तथ्यों की जांच और सही जानकारी का महत्व कितना बड़ा है। योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के राजनीतिक सफर में भी कई बार गलतफहमियां और आलोचनाएं आईं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों से अपनी छवि मजबूत की।

निष्कर्ष: योगी आदित्यनाथ और गोरखपुर की नई पहचान

गोरखपुर, जो कभी अपराध और अस्थिरता का केंद्र था, आज योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नेतृत्व में एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। उनकी धार्मिक जड़ों और राजनीतिक कुशलता ने इस क्षेत्र को न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी बदल दिया है।

योगी का सफर यह दिखाता है कि कैसे एक क्षेत्र की जटिल राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं को समझकर, सही नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति से बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उनकी कहानी न केवल गोरखपुर के लिए प्रेरणा है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और भारत के लिए भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अध्याय है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की भूमिका आज भी चर्चा का विषय बनी हुई है, और उनकी कहानी राजनीतिक क़िस्सों में एक प्रेरणादायक मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।

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प्रख्यात समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह ‘लालू’ बने सामाजिक संस्था मातृ आंचल सेवा संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष https://sanjayrajput.com/2025/05/famous-social-worker-ashwani-kumar-singh-lalu-became-the-state-president-of-social-organization-matr-anchal-seva-sansthan.html https://sanjayrajput.com/2025/05/famous-social-worker-ashwani-kumar-singh-lalu-became-the-state-president-of-social-organization-matr-anchal-seva-sansthan.html#respond Mon, 05 May 2025 10:56:43 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1110 Read more

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गोरखपुर। समाज सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को देखते हुए मूलरूप से गगहा निवासी समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह ‘लालू’ को मातृ आंचल सेवा संस्थान का प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मनोनीत किया गया है।

यह जानकारी देते हुए मातृ आंचल सेवा संस्थान ट्रस्ट की मुख्य ट्रस्टी पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ ने बताया कि उनका ट्रस्ट गरीब और बेसहारा महिलाओं, बच्चों, असहाय मरीजों तथा गौसेवा को समर्पित है। उन्होंने कहा, हमें आशा है कि सक्रिय समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह ‘लालू’ के हमारे ट्रस्ट से जुड़ने से हमारे समाजसेवा के अभियान को और अधिक मजबूती मिलेगी।

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समाजसेवी अश्वनी कुमार सिंह ‘लालू’ को मातृ आंचल सेवा संस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर शाही ग्लोबल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ शिव शंकर शाही, गुरुकुल शिक्षण संस्थान के डॉ बिपिन शाही, गोरखपुर चैरिटेबल ब्लड बैंक के डायरेक्टर अरविंद यादव, एसबी एकेडमी नंदानगर के डायरेक्टर शशांक शेखर सिंह, अभाक्षम के प्रदेश संरक्षक विनोद सिंह, होटल सनशाइन ग्रैंड के प्रोपराइटर कृष्ण बिहारी सिंह, राधिका देवी चैरिटेबल मेमोरियल ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी राघवेंद्र प्रताप सिंह, अभाक्षम के वरिष्ठ महामंत्री राजकुमार सिंह श्रीनेत, युवा नेता सुमित सिंह श्रीनेत, भाजपा के युवा नेता सात्विक सिंह श्रीनेत, एडवोकेट संजय सिंह बघेल, अभाक्षम प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, आरपी सिंह, हरित गोरखपुर अभियान चलने वाले सावन शाही, नशा मुक्ति केंद्र के डायरेक्टर दुर्गेश चंचल, अनुज सिंह कटका, अमन राव, डॉ उमेश सिंह श्रीनेत, रंजीत शाही, उमेश प्रसाद, श्रीकांत यादव, प्रवीण सिंह, पीयूष प्रताप सिंह, डॉ महेश्वर सिंह सहित अन्य लोगों ने बधाई दी है।

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राधिका देवी चैरिटेबल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा भंडारे का हुआ आयोजन https://sanjayrajput.com/2025/02/bhandara-organized-by-radhika-devi-charitable-memorial-trust.html https://sanjayrajput.com/2025/02/bhandara-organized-by-radhika-devi-charitable-memorial-trust.html#respond Thu, 27 Feb 2025 17:08:36 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=1051 Read more

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-माताजी की आठवीं पुण्यतिथि पर गरीबों को भोजन कराया गया

गोरखपुर। राधिका देवी चैरिटेबल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा माताजी की आठवीं पुण्यतिथि पर गुरुवार को एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों गरीबों को भोजन कराया गया।

बता दें कि ‘नर सेवा नारायण सेवा’ के संकल्प के साथ गरीबों की सेवा को समर्पित राधिका देवी चैरिटेबल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष माताजी की पुण्यतिथि पर गरीबों को वस्त्र, फल और भोजन वितरण का कार्य किया जाता है। इसी क्रम में गुरुवार को भंडारे का आयोजन किया गया।

इस दौरान राधिका देवी चैरिटेबल मेमोरियल ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी राघवेंद्र प्रताप सिंह, अश्वनी कुमार सिंह उर्फ लालू सिंह, उग्रसेन सिंह, प्रभात सिंह, आरपी सिंह, उद्देश्य प्रताप शाही, राज बहादुर सिंह, सतीश सिंह, इंद्र कुमार, सुजीत गुप्ता, डीएन यादव, सांसद प्रतिनिधि चंदन पासवान, आनंद, शिवेंद्र प्रताप सिंह, विकास सिंह, नागेंद्र यादव, विनय यादव, विजय यादव, अंशु विश्वकर्मा तथा पार्षद आनंद वर्धन सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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Shriprakash Shukla का Encounter हुआ था या पकड़कर मारा गया था? https://sanjayrajput.com/2024/12/was-shriprakash-shukla-encountered-or-caught-and-killed.html https://sanjayrajput.com/2024/12/was-shriprakash-shukla-encountered-or-caught-and-killed.html#respond Tue, 31 Dec 2024 10:38:17 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=958 Read more

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Shriprakash Shukla Story: श्री प्रकाश शुक्ला एक समय में उत्तर प्रदेश में खौफ पैदा करने वाला नाम था, एक कुख्यात गैंगस्टर जिसके आपराधिक कारनामों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। उसका जीवन और मृत्यु सत्ता, राजनीति और अपराध के एक जटिल जाल की कहानी बयां करती है जो लोगों को आज भी रोमांचित करती है। यह लेख शुक्ला की मौत के इर्द-गिर्द विरोधाभासी कहानियों की पड़ताल करता है, जिसमें आधिकारिक पुलिस कथा और हाल के प्रकाशनों में प्रस्तुत एक वैकल्पिक सिद्धांत पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

श्रीप्रकाश शुक्ला का उदय और शासन

श्री प्रकाश शुक्ला गोरखपुर से था, जहां से उसने आपराधिक दुनिया में अपनी यात्रा शुरू की। मोकामा गिरोह के साथ उसके संबंधों ने उसे तेजी से आगे बढ़ने में मदद की। 1990 के दशक के अंत तक, शुक्ला एक प्रसिद्ध व्यक्ति बन गया थे, जो हाई-प्रोफाइल हत्याओं और जबरन वसूली रैकेट में शामिल थे। उसके शिकार वीरेंद्र शाही (Virendra Shahi) और उपेंद्र विक्रम सिंह जैसे उल्लेखनीय व्यक्ति थे, जिन्होंने शक्तिशाली राजनीतिक संबंधों को भी चुनौती देने की उसकी क्षमता को प्रदर्शित किया।

शुक्ला के कार्यों के महत्वपूर्ण राजनीतिक निहितार्थ थे, जिसने क्षेत्रीय सरकार की स्थिरता को प्रभावित किया। जैसे-जैसे उसकी बदनामी बढ़ती गई, अधिकारियों के बीच उसके द्वारा उत्पन्न खतरे को लेकर चिंताएँ भी बढ़ती गईं।

एसटीएफ का गठन और श्रीप्रकाश शुक्ला की तलाश

शुक्ला के बढ़ते खतरे के जवाब में, विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की स्थापना की गई। इस इकाई का उद्देश्य शुक्ला को पकड़ना या खत्म करना था। प्रमुख सदस्यों में अरुण कुमार, राजेश पांडे और सत्येंद्र वर सिंह शामिल थे, जिन्होंने ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एसटीएफ को शुक्ला का पता लगाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जो लगातार पकड़ से बचता रहा। विभिन्न क्षेत्रों में पैंतरेबाज़ी और संचालन करने की उसकी क्षमता ने उसे एक कठिन लक्ष्य बना दिया।

एनकाउंटर की परस्पर विरोधी कहानियाँ

22 सितंबर, 1998 को, पुलिस ने दावा किया कि गाजियाबाद के इंदिरापुरम में शुक्ला से मुठभेड़ हुई, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। आधिकारिक कहानी में एक सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध ऑपरेशन का विवरण दिया गया है, जिसमें शुक्ला को घेर लिया गया और एक भयंकर मुठभेड़ के दौरान गोली मार दी गई। पुलिस का कहना है कि एक महत्वपूर्ण खतरे को खत्म करने के लिए यह एक आवश्यक कार्रवाई थी।

हालांकि, खोजी पत्रकार संदीप के. पांडे ने अपनी पुस्तक “वर्चस्व” में एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, शुक्ला को मारे जाने से पहले जिंदा पकड़ा गया था, जिससे पता चलता है कि पुलिस की कहानी तथ्य से ज्यादा काल्पनिक हो सकती है। यह विवरण उस दिन की सच्ची घटनाओं के बारे में सवाल उठाता है।

राजनीति और शक्तिशाली संबंधों की भूमिका

शुक्ला के प्रभावशाली राजनेताओं से संबंधों के साक्ष्य उसकी कहानी को जटिल बनाते हैं। आरोपों से पता चलता है कि सत्ता में बैठे लोगों द्वारा संभावित कवर-अप सहित उसके लेन-देन में राजनीतिक हस्तक्षेप की भूमिका हो सकती है। शुक्ला केवल एक अपराधी नहीं था; वह अच्छी तरह से जुड़ा हुआ था और रणनीतिक रूप से तैनात था, जिसके कारण घटनाओं का मंचन किया जा सकता था, जहां उसकी मौत एक सीधी मुठभेड़ नहीं थी।

संभावित कवर-अप के कई कारण हैं, क्योंकि उसका जीवित रहना विभिन्न राजनीतिक हस्तियों को जांच के दायरे में ला सकता था। कहा जाता है कि यदि वो जिंदा पकड़ा जाता तो कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की पोल खुल सकती थी।

अनुत्तरित प्रश्न और कमजोर कड़ियां

आधिकारिक खातों और गवाहों की गवाही में विसंगतियां शुक्ला की मौत के इर्द-गिर्द एक धुंधली तस्वीर बनाती हैं। शुक्ला की उपस्थिति के शुरुआती फोटोग्राफिक साक्ष्य की कमी और पुलिस रिपोर्ट में विसंगतियों जैसे प्रश्न अभी भी अनसुलझे हैं। स्पष्टता की कमी के कारण जनता को उसके मारे जाने की वास्तविक प्रकृति के बारे में आश्चर्य होता है।

विरासत और स्थायी प्रभाव

श्री प्रकाश शुक्ला का उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों पर प्रभाव था। उसके कार्यों और उसके बाद की मुठभेड़ के निहितार्थ उसके जीवन और मृत्यु से परे हैं। वे संगठित अपराध और न्याय प्रणाली की जटिलताओं के खिलाफ कानून प्रवर्तन के चल रहे संघर्षों को उजागर करते हैं।

शुक्ला की मुठभेड़ के इर्द-गिर्द चल रही बहसें इस बात की याद दिलाती हैं कि समाज में सत्ता, भ्रष्टाचार और अपराध किस तरह से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

श्री प्रकाश शुक्ला की मौत के इर्द-गिर्द की कहानियां भारत के आपराधिक परिदृश्य में संघर्ष और साज़िश की एक व्यापक कहानी को दर्शाती हैं। परस्पर विरोधी खातों और अनसुलझे सवालों के साथ, आगे की जांच की आवश्यकता आवश्यक है। जब हम इस सम्मोहक मामले पर विचार करते हैं, तो हमें सत्ता की गतिशीलता की स्थायी प्रकृति और न्याय की निरंतर खोज की याद आती है।

श्री प्रकाश शुक्ला की कहानी सिर्फ एक गैंगस्टर के बारे में नहीं है; यह इस बात का एक मार्मिक उदाहरण है कि कैसे अपराध और राजनीति सड़कों पर और सड़कों से दूर जीवन और नियति को आकार दे सकते हैं।

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अब गोरखपुर में दूध बेचने वालों को लेना होगा Fssai Food License https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html https://sanjayrajput.com/2024/10/milk-seller-fssai-food-license.html#respond Tue, 15 Oct 2024 13:37:45 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=767 Read more

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हमारे देश में दूध एक ऐसा पदार्थ है जिसका सेवन अधिकतर सभी लोगों के द्वारा किया जाता है। इस कारण से भारत में दूध की बिक्री बहुत ज्यादा होती है। लेकिन दिन पर दिन कुछ लोगों के दूध में मिलावट किया जा रहा है और इसकी समस्या समय के साथ बढ़ते ही जा रही है। भारत के उत्तर प्रदेश में दूध में मिलावट समस्या बहुत ज्यादा आ रही है, इसमें गोरखपुर का नाम सबसे ऊपर है। इसके कारण भारतीय खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई गाइडलाइन लागू किया है। इस गाइडलाइन के अंतर्गत दूध विक्रेताओं के लिए आईडी कार्ड जारी किया जाएगा और साथ  ही 500 से अधिक दूध बेचने वाले लोगों को Fssai Food License लेना अनिवार्य होगा।

ऐसे में इस लेख के द्वारा हम आपको बताने वाले हैं कि दूध विक्रेताओं को कौन सा लाइसेंस लेना होगा और साथ ही यह लाइसेंस कैसे मिल सकता है। अगर आप भी इन सभी बातों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लेख को अंत तक पढ़े।

दूध बेचने वालों को क्यों लेना होगा लाइसेंस।

हमारे देश में प्रतिदिन हजारों लीटर की दूध की बिक्री होती है। लेकिन कुछ समय से दूध और दूध से बने उत्पादों की पदार्थ में काफी ज्यादा मिलावट किया जा रहा है। ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने दूध और दूध से बने उत्पादों की शुद्धता को सुनिश्चित करने के लिए कुछ गाइडलाइन जारी किया है, जिसके तहत सभी को आईडी कार्ड या लाइसेंस लेना होगा।

दूध विक्रेताओं को लाइसेंस लेने के लिए इसलिए कहा गया है ताकि सभी लोगों को शुद्ध दूध प्राप्त हो सके। आपको बता दे कि केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने हाल ही में लोकसभा में यह जानकारी दिया था कि उत्तर प्रदेश में दूध में मिलावट सबसे ज्यादा किया जा रहा है, और इसी के बाद से खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस विषय पर तेजी से अपना कार्य शुरू कर दिया है।

दूध में मिलावट की सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश से सामने आ रही है, और गोरखपुर का नाम इसमें सबसे ऊपर है। ऐसे में गोरखपुर के सभी दूध विक्रेताओं को परिचय पत्र यानी आईडी कार्ड जारी करने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा गोरखपुर में मौजूद वैसे दूध विक्रेताओं जो प्रतिदिन 500 लीटर से अधिक दूध की बिक्री करते हैं, उन्हें अब लाइसेंस लेना होगा।

दूध विक्रेताओं को कौन सा लाइसेंस लेना होगा?

आपको बता दे कि शहर के अंदर दूध बेचने वाले दूधियों का परिचय पत्र बनवाया जाएगा, वही परिचय पत्र बनवाने के लिए सभी को ₹100 का भुगतान जमा करना होगा। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा मिलावटी दूध को रोकने के लिए यह पहल किया गया है।

परिचय पत्र के चलते शहर में दूध बेचने वाले लोगों को आसानी से पहचान किया जा सकेगा। इसके अलावा 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले डेयरी संचालकों को खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा Fssai Food License लेना होगा। विभाग द्वारा जारी किया गया गाइडलाइन को पूर्ति करने के लिए कार्य किया जाना शुरू कर दिया गया है।

ऐसे में गोरखपुर के रहने वाले सभी दूध विक्रेताओं को अपना पहचान पत्र बनवाना होगा और 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले डायरी संचालकों को लाइसेंस लेना जरूरी है। अगर दूध विक्रेताओं सरकार के नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

दूध बेचने के लिए Fssai Food License कैसे प्राप्त करें?

अगर आप भी दूध बेचने के बिजनेस में लगे हुए हैं तो आपको सबसे पहले अपना पहचान पत्र यानी आईडी कार्ड बनवाना चाहिए, वहीं अगर आप 500 अधिक लीटर दूध बेचती है तो आपको Fssai Food License लेना अनिवार्य है। ऐसे में बहुत से लोगों की यह समस्या है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है की Fssai Food License कैसे प्राप्त किया जाता है।

इसीलिए हम आपको बता दे कि अगर आपको भी Fssai Food License लेना है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि खाद सुरक्षा विभाग की टीम दूध विक्रेताओं का रजिस्ट्रेशन करने के लिए शिविर आयोजित करने वाली है।

विभाग द्वारा इन शिवरो का आयोजन उसे स्थान पर किया जाएगा जहां सबसे ज्यादा दूध विक्रेता इकट्ठा होते हैं। गोरखपुर में जहां-जहां सबसे ज्यादा दूध विक्रेताएं एकत्रित होते हैं उसी स्थान पर सिविल आयोजित किया जाने वाला है, और यहीं से आप Fssai Food License प्राप्त कर सकते हैं।

पहचान पत्र और लाइसेंस के बिना दूध बेचने पर होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जारी किया गया इस गाइडलाइन को अगर कोई भी व्यक्ति फॉलो नहीं करता है तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आपको बता दे की रजिस्ट्रेशन ना करवाने वाले विक्रेताओं पर सबसे पहले विभाग के द्वारा नोटिस भेजा जाएगा और साथ ही उनके दूध को जप्त कर लिया जाएगा।

अगर इतना होने के बाद भी वह नहीं मानते हैं तो दूध विक्रेताओं के खिलाफ न्यायालय में मामला दर्ज भी कराया जा सकता है। मामला दर्ज करवाने के बाद अगर दूध विक्रेताएं दोषी पाए जाते हैं तो उन पर ₹2,00,000 तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

गोरखपुर के सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा, डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि दुग्ध विक्रेताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए 100 रुपये की फीस तय की गई है। सभी दुग्ध विक्रेताओं को अपना पहचान पत्र साथ में रखना जरूरी होगा।

उन्होंने कहा कि दूध की शुद्धता को लेकर सतर्क न रहने वाले विक्रेताओं की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह कदम लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने और मिलावट को रोकने के लिए उठाए गए हैं। दूध बेचने वालों को साफ-सफाई और गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देना होगा।

यह भी पढ़े :- क्या खाने पीने की चीजों में मिलावट करने वाले किसी हत्यारे से कम हैं?

निष्कर्ष:

हमारे देश में दूध और दूध से बने उत्पादों की डिमांड काफी ज्यादा होती है, लेकिन समय के साथ इन पदार्थों में काफी ज्यादा मिलावट किया जा रहा है, जिसके चलते खाद्य सुरक्षा विभाग कई गाइडलाइन जारी किया है। इस गाइडलाइन के अंतर्गत सभी दूध विक्रेताओं को अपना आईडी कार्ड प्राप्त करना होगा और 500 से अधिक लीटर दूध बेचने वाले को Fssai Food License प्राप्त करना होगा। ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं की Fssai Food License कैसे प्राप्त करें तो इसके लिए ऊपर दिए गए लेख को अंत तक पढ़े। उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया, होगा sanjayrajput.com पर इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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शहीद बंधु सिंह की धरती से हुआ क्षत्रिय एकता का शंखनाद, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की चौरी-चौरा इकाई गठित https://sanjayrajput.com/2024/08/akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha-chaurichaura-unit-formed.html https://sanjayrajput.com/2024/08/akhil-bharatiya-kshatriya-mahasabha-chaurichaura-unit-formed.html#respond Mon, 26 Aug 2024 01:01:15 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=739 Read more

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आज लोग एक एक इंच जमीन के लिए लड़ रहे हैं जबकि हमारे पूर्वजों ने अपनी 565 रियासतें देश की एकता और अखंडता के लिए दान कर दी: लालू सिंह 

आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर देने वाले पूर्वांचल के अमर शहीद बंधु सिंह की धरती चौरी चौरा से क्षत्रिय एकता का शंखनाद किया गया है। संगठन विस्तार के क्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर जिला इकाई अंतर्गत चौरी-चौरा तहसील कार्यकारिणी का गठन रविवार को किया गया।

इस अवसर पर संगठन के गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने मनोनीत पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी सदस्य और पदाधिकारीगण अपने क्षेत्र में सामाजिक कार्य कर अपने कुलवंश को गौरवान्वित करें। इतिहास गवाह है कि क्षत्रियों ने मातृभूमि और देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। आज लोग एक एक इंच जमीन के लिए लड़ रहे हैं जबकि हमारे पूर्वजों ने अपनी 565 रियासतें देश की एकता और अखंडता के लिए दान कर दी थी।

चौरी चौरा तहसील कार्यकारिणी में तहसील अध्यक्ष शिवहरि सिंह, तहसील उपाध्यक्ष पवन कुमार सिंह, वरिष्ठ महामंत्री अखिलेश कुमार सिंह, तहसील मीडिया प्रभारी विनोद कुमार सिंह, तहसील कोषाध्यक्ष सतीश चंद, ब्रह्मपुर ब्लॉक अध्यक्ष शिव नारायण सिंह, मंत्री रवि प्रकाश चंद तथा संगठन मंत्री अरुण कुमार सिंह को बनाया गया है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पूर्वांचल प्रांत प्रदेश अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, गोरखपुर जिलाध्यक्ष लालू सिंह, जिला संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनय चंद, वरिष्ठ महामंत्री राजकुमार सिंह, जिला महामंत्री राजू सिंह नन्हे, जिलाध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ दीपक सिंह, जिला उपाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षा प्रकोष्ठ डॉ. उमेश सिंह सहित चौरी चौरा और गोरखपुर जिला इकाई के सभी लोग उपस्थित रहे।

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अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर की समीक्षा बैठक हुई आयोजित, एकजुट होने का लिया गया संकल्प https://sanjayrajput.com/2024/08/abkm-gorakhpur-meeting-held-in-madhav-lawn.html https://sanjayrajput.com/2024/08/abkm-gorakhpur-meeting-held-in-madhav-lawn.html#respond Sun, 11 Aug 2024 11:49:49 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=709 Read more

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क्षत्रिय एक जाति नहीं धर्म है- लालू सिंह

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर की समीक्षा बैठक रविवार को माधव लॉन में संपन्न हुई। जिसमें संगठन के विस्तार और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पूर्वांचल प्रांत उग्रसेन सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हम अपने समाज के युवाओं का आह्वान करते हैं कि वे आगे आएं और नेतृत्व करें, हम अभिभावक के तौर पर उनके साथ हैं।

बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने कहा कि क्षत्रिय एक जाति नहीं धर्म है। हम समाज के हर शोषित, पीड़ित और दबे कुचले की मदद को हमेशा तैयार हैं। हमारा संगठन स्वास्थ्य शिविर, वृक्षारोपण, रक्तदान, खेलकूद और रोजगार जैसे सामाजिक कार्यों में भी निरंतर सक्रिय है।

बैठक को प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, प्रदेश महामंत्री डॉ. महेश्वर सिंह, मंडल अध्यक्ष आरपी सिंह, वरिष्ठ मंडल उपाध्यक्ष नरेंद्र सिंह, जिला संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, जिलाध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ दीपक सिंह, मंडल महामंत्री मानवेंद्र प्रताप सिंह, संगठन मंत्री युवा प्रकोष्ठ सावन शाही, राघवेंद्र प्रताप सिंह, राजकुमार सिंह, नवीन प्रताप सिंह, आलोक सिंह विशेन आदि ने भी संबोधित किया।

इस समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश संरक्षक कैलाश सिंह, प्रदेश अध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ केपी राव, प्रदेश सचिव संजय कुमार सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षा प्रकोष्ठ डॉ. उमेश सिंह, संजीत सिंह, सुनील सिंह, अनिल सिंह राठौर, कमांडो अजीत सिंह, आलोक सिंह, विजेंद्र सिंह, संगम सिंह, सौरभ चंद कौशिक सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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पं. हरिशंकर तिवारी को लेकर उनके गांव के इस प्रोफेसर ने कह दी ये बात https://sanjayrajput.com/2024/08/harishankar-tiwari-news-in-hindi.html https://sanjayrajput.com/2024/08/harishankar-tiwari-news-in-hindi.html#respond Thu, 08 Aug 2024 14:17:44 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=694 Read more

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Harishankar Tiwari News in Hindi: गोरखपुर में पूर्व मंत्री स्वर्गीय पंडित हरिशंकर तिवारी की 88 वीं जयंती पर 5 अगस्त को उनकी प्रतिमा लगाने के लिए बन रहे चबूतरे को प्रशासन ने कुछ दिनों पूर्व बुलडोजर से गिरा दिया था। जिसके बाद यह मुद्दा गरमा गया।

पूर्वांचल के एक बाहुबली नेता और पूर्व मंत्री स्वर्गीय पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) एक विवादास्पद राजनीतिक व्यक्तित्व रहे हैं। इस लेख में हम इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे, जिसमें मूर्ति स्थापना की पृष्ठभूमि, इसके पीछे के सामाजिक संदेश और इससे जुड़े विवाद शामिल हैं।

पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) का परिचय

पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर में अनेक उतार-चढ़ाव देखे। वे चिल्लूपार विधानसभा से सात बार विधायक रहे और उत्तर प्रदेश की सरकार में मंत्री भी रहे। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अपने बाहुबल और राजनीतिक कूटनीति के माध्यम से अपना साम्राज्य स्थापित किया।

Harishankar Tiwari की पहचान पूर्वांचल के बाहुबलियों में होती थी। उनका नाम अक्सर विवादों में रहा, और उनके कार्यों को लेकर अनेक आरोप भी लगे। उनके नेतृत्व में कई लोगों ने अपने अधिकारों का हनन अनुभव किया, जिससे उनके व्यक्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं।

गौरतलब है कि देश की राजनीति में एक समय ऐसा था जब इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) के खिलाफ जय प्रकाश नारायण (Jai Prakash Narayan) मोर्चा खोले हुए थे. इस दौरान छात्र जेपी के साथ और इंदिरा के खिलाफ विरोध कर रहे थे. लेकिन पूर्वांचल में अलग ही कहानी चल रही थी. पूर्वांचल में माफिया, शक्ति और सत्ता की लड़ाई शुरू हो चुकी थी. यहां के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र कट्टों और बंदूकों की नाल साफ कर रहे थे.

यही वो वक्त था जब पूर्वांचल की राजनीति में हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) की एंट्री होती है. लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं से वंचित इस क्षेत्र के युवाओं की दिलचस्पी किताबों को छोड़ कट्टों और खतरनाक हथियारों में होने लगी.

जेल में रहते हुए हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) चुनाव जीते और साल 1997 से लेकर 2007 तक वे लगातार यूपी में मंत्री बने रहे. वह 22 सालों तक चिल्लूपार सीट से विधायक रहे.

Harishankar Tiwari को केवल 2 बार हार का सामना करना पड़ा. वह पहली बार साल 2007 में और दूसरी बार साल 2012 में चुनाव हारे. भाजपा, सपा, बसपा सभी सरकारों में वे कई मंत्रालयों को संभालते रहे.

मूर्ति स्थापना का मामला

हाल ही में पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) की मूर्ति उनके पैतृक गांव टांडा में स्थापित की जाने वाली थी। हालांकि, प्रशासन ने इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए रोक दिया। इस निर्णय के पीछे 28 वर्ष अमेरिका में रहे उनके गांव के ही निवासी बीएचयू के प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का विरोध था, जिन्होंने प्रशासन को पत्र लिखकर सार्वजनिक जमीन पर इस मूर्ति स्थापना का विरोध किया था।

देखें वीडियो-

https://www.facebook.com/reel/534133808957769?mibextid=rS40aB7S9Ucbxw6v

प्रोफेसर त्रिपाठी का कहना है कि एक अपराधी की मूर्ति लगाकर समाज में गलत संदेश दिया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे युवा पीढ़ी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

प्रशासन की कार्रवाई

प्रशासन ने Harishankar Tiwari की मूर्ति स्थापित करने के लिए बनाए गए चबूतरे को हटाने का निर्णय लिया। यह कार्रवाई प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर की गई। प्रशासन का तर्क था कि यह कार्रवाई नियमों के अनुसार की गई है, और किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन की इस कार्रवाई ने गांव में राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया। कुछ लोग इसे सही मानते हैं, जबकि अन्य इसे राजनीति का एक हिस्सा मानते हैं।

समाज पर मूर्ति के प्रभाव

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का कहना है कि मूर्ति स्थापना का मुद्दा केवल एक मूर्ति लगाने का नहीं है, बल्कि यह समाज में अपराध और राजनीति के संबंधों पर भी प्रकाश डालता है। जब समाज में ऐसे व्यक्तियों की मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, तो यह संदेश जाता है कि अपराधियों को सम्मानित किया जा रहा है।

वे आगे कहते हैं कि इससे युवा पीढ़ी को गलत संदेश मिलता है, और वे इसे अपने आदर्श मानने लगते हैं। यह एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे समाज में नैतिकता का हनन होता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण

राजनीति में हमेशा से ही ऐसे मुद्दों का उपयोग किया जाता रहा है। पंडित हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) की मूर्ति स्थापना का मामला भी राजनीतिक हितों से जुड़ा हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए योगी सरकार पर बदले की भावना से कार्य करने का आरोप लगाया है। यह राजनीतिक खेल समाज में और भी विभाजन पैदा करने का काम कर रहा है।

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का दृष्टिकोण

प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) को आदर्श नहीं मानते। उनका मानना है कि हरिशंकर तिवारी का व्यक्तित्व विवादास्पद रहा है, और उन्हें समाज में आदर्श के रूप में स्थापित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि हरिशंकर तिवारी (Harishankar Tiwari) के खिलाफ उनके पास ठोस प्रमाण हैं, और वे इस बात को साबित करने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि समाज को ऐसे व्यक्तियों से दूरी बनानी चाहिए।

समाज में नैतिकता का संकट

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी का कहना है कि यह मामला एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है। क्या हम ऐसे व्यक्तियों को सम्मानित करना चाहते हैं, जिनका इतिहास विवादास्पद रहा है? समाज में नैतिकता का संकट बढ़ता जा रहा है। जब समाज में अपराधियों को सम्मान दिया जाता है, तो यह युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जाता है।

वे आगे कहते हैं कि समाज को यह समझने की आवश्यकता है कि ऐसे व्यक्तियों की मूर्तियां स्थापित करने से हम किस प्रकार का संदेश भेज रहे हैं। यह केवल एक व्यक्ति की पहचान नहीं, बल्कि समाज की पहचान भी है।

निष्कर्ष

गोरखपुर में पंडित हरिशंकर तिवारी की मूर्ति स्थापना का मामला एक गंभीर मुद्दा है, जो समाज में नैतिकता, राजनीति और अपराध के संबंधों को उजागर करता है। प्रशासन की कार्रवाई और प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी का विरोध यह दर्शाता है कि समाज में अभी भी ऐसे लोग हैं, जो सही और गलत के बीच का अंतर समझते हैं।

प्रोफेसर राजा वशिष्ठ त्रिपाठी कहते हैं कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज में केवल उन व्यक्तियों को सम्मान दिया जाए, जो वास्तव में आदर्श हैं। इसके लिए हमें जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है, ताकि युवा पीढ़ी सही मार्ग पर चल सके।

*Disclaimer– यह लेख प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी द्वारा एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू पर आधारित है, ये लेखक के निजी विचार नहीं हैं।

देखिए प्रोफेसर वशिष्ठ त्रिपाठी का एक न्यूज चैनल को दिया गया इंटरव्यू-

https://youtu.be/3C87g1wyBbM?si=qKlG1jjrPVaa-OL8

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अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में इंटरनेशनल सोतोकान कराटे डू-क्योकाई गोरखपुर के बच्चों का शानदार प्रदर्शन https://sanjayrajput.com/2024/07/gorakhpur-players-won-medals-in-international-karate-championship.html https://sanjayrajput.com/2024/07/gorakhpur-players-won-medals-in-international-karate-championship.html#respond Wed, 31 Jul 2024 06:39:21 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=646 Read more

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अंतर्राष्ट्रीय ओपेन कराटे चैंपियनशिप 26, 27, 28 जुलाई को कोलकाता के नेताजी इनडोर स्टेडियम में आयोजित की गई, जिसमें भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मलेशिया, सऊदी अरब, ईरान आदि देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। 

इस प्रतियोगिता में गोरखपुर जनपद के नगर पंचायत गोला तथा नगर पंचायत बांसगांव के खिलाड़ियों ने भी हिस्सा लिया, जिनका प्रशिक्षण केंद्र इंटरनेशनल सोतोकान कराटे डू-क्योकाई (ISKK) गोरखपुर है।

गोरखपुर के खिलाड़ियों ने कराटे खेल का शानदार प्रदर्शन कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल करते हुए पदकों पर कब्जा किया, जिसमें सीनियर कैटेगरी में आदित्य सिंह तथा शिवांश सिंह ने गोल्ड मेडल, आयुष कुमार सिंह तथा जितेंद्र कुमार ने सिल्वर मेडल, रतन कुमार, आबिद हुसैन, अनमोल राव, सतीश कुमार मौर्य, विशाल भारती तथा मंगेश कुमार ने ब्रोंज मेडल पर कब्जा किया। साथ ही जूनियर कैटेगरी में 11 वर्ष में उदित विश्वकर्मा ने सिल्वर मेडल तथा राज कपूर ने ब्रांच मेडल पर कब्जा किया।

अंतरराष्ट्रीय कराटे के अध्यक्ष प्रेमजीत सेन की अध्यक्षता में और इंटरनेशनल सोतोकान कराटे डू- क्योंकाई (आईएसकेके) के महासचिव तथा राष्ट्रीय कराटे जज तथा राष्ट्रीय कराटे कोच दीपक शाही जो अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा खेलकूद प्रकोष्ठ गोरखपुर के जिलाध्यक्ष भी हैं, उनकी देखरेख में यह अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता संपन्न हुई।

साथ ही कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष आरसी कराटे एसोसिएशन ऑफ इंडिया, कराटे एसोसिएशन ऑफ बंगाल, केएबीके अध्यक्ष और ए ग्रेड के जज और रेफरी एशियन कराटे फेडरेशन और वर्ल्ड कराटे फेडरेशन की देखरेख में यह अंतर्राष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता आयोजित हुई।

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GDA Gorakhpur का खेल: 25 साल पुराने हजारों मकानों को कर दिया अवैध घोषित, खौफ में निवासी https://sanjayrajput.com/2024/07/gda-gorakhpur-mahayojna-2031.html https://sanjayrajput.com/2024/07/gda-gorakhpur-mahayojna-2031.html#respond Tue, 30 Jul 2024 06:22:41 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=639 Read more

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-GDA Gorakhpur ने अपनी महायोजना-2031 में नए बसे मोहल्लों को घोषित किया आवासीय, 25 साल पुरानी कालोनियों को दिखाया हरित क्षेत्र 

-GDA Gorakhpur के गलत फैसले से भूतपूर्व सैनिकों के हजारों मकान अवैध घोषित

-बने हैं 10 हजार से अधिक मकान फिर भी जीडीए की महायोजना-2031 में यहां का लैंड यूज आवासीय नहीं

GDA Gorakhpur Mahayojna 2031: सीएम सिटी गोरखपुर के वार्ड संख्या 7 महादेव झारखंडी टुकड़ा नं. 2 के मोहल्लों आदर्श नगर, गैस गोदाम रोड, प्रज्ञा पुरम, वसुंधरा नगर, साई धाम नगर, सरवन नगर, स्वर्ण सिटी सहित तमाम कॉलोनी जिनका महायोजना-2031 में जीडीए ने लैंड यूज आवासीय के स्थान पर ग्रीन लैंड घोषित कर दिया था, जिसे लेकर स्थानीय लोग बहुत डरे हुए हैं। लोगों को जिंदगी भर की पूंजी लगाकर बने अपने आशियाने को तोड़े जाने का डर चैन से जीने नहीं दे रहा।

इसी सिलसिले में विगत 11 मार्च को स्थानीय लोगों ने सदर सांसद और जीडीए वीसी से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराया था, जिसके बाद जीडीए उपाध्यक्ष द्वारा मौका मुआयना करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 4 माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय नागरिक बहुत अक्रोशित हैं।

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बता दें कि जीडीए की महायोजना 2031 में महादेव झारखंडी टुकड़ा नं.2 के 25 साल पुराने दर्जनों मोहल्लों के आवासीय क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट घोषित किए जाने का विरोध दर्ज करने पर विगत मार्च में जीडीए उपाध्यक्ष द्वारा स्थानीय लोगों को बुलाकर उन्हें आश्वासन दिया गया था कि एक से दो दिनों के अंदर वे स्वयं महादेव झारखंडी टुकड़ा नं 2 के संबंधित मोहल्लों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप देंगे। लेकिन 4 माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी जीडीए ने इस मामले में कोई कदम नहीं उठाया।

गौरतलब है कि महादेव झारखंडी टुकड़ा नं 2 के इन मोहल्लों में लगभग 10 हजार से अधिक मकान भी बन चुके हैं जिनमें अधिकतर मकान 25-30 साल पुराने हैं। उसके बाद भी जीडीए ने महायोजना 2031 में यहां का लैंड यूज आवासीय न करते हुए इसे ग्रीन लैंड घोषित कर दिया है। जबकि महायोजना 2031 में जहां ताल कंदरा है, कुछ भी नहीं बना है वहां का लैंड यूज जीडीए द्वारा आवासीय कर दिया गया है। इसी को लेकर यहां के स्थानीय नागरिक विरोध कर रहे हैं। इस मामले में स्थानीय लोगों ने 1200 आपत्तियां भी दर्ज कराई थी।

इसी के चलते स्थानीय लोगों ने विगत 11 मार्च को बड़ी संख्या में सदर सांसद रवि किशन शुक्ला और जीडीए उपाध्यक्ष को ज्ञापन भी दिया था लेकिन आज 4 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जीडीए ने कोई पहल नहीं की है। जबकि स्थानीय लोग जीडीए द्वारा अपने मकानों के अवैध घोषित किए जाने के कारण बहुत डरे हुए हैं।

बता दें कि गोरखपुर एम्स से सटे इन मोहल्लों में अधिकतर भूतपूर्व सैनिक मकान बनाकर रहते हैं। यहां के अधिकतर मकान वर्ष 1998 से 2000 के बीच ही बन गए थे लेकिन जीडीए ने किस मापदंड के आधार पर इतनी पुरानी कॉलोनियों को अपनी महायोजना 2031 में आवासीय की जगह ग्रीन बेल्ट (हरित क्षेत्र) घोषित कर दिया है ये बात समझ से परे है।

जीडीए द्वारा उनके मोहल्लों को ग्रीन बेल्ट घोषित किए जाने से अक्रोशित स्थानीय लोगों का कहना है कि लगता है ये सौतेला व्यवहार नए विकसित हो रहे इलाकों में प्लाटिंग करा चुके भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है।

इस संबंध में जीडीए गोरखपुर के उपाध्यक्ष (वीसी) आनंद वर्धन का कहना है कि-

Gda vc anand vardhan

“मामला संज्ञान में है। महायोजना-2031 में शामिल करने का प्रयास किया गया था पर कुछ तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया। यहां राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।”

कारण चाहे जो भी हो लेकिन जीडीए के इस एक फैसले से अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर बना लोगों का आशियाना एक ही झटके में अवैध निर्माण घोषित हो चुका है जिसके तोड़े जाने का डर स्थानीय लोगों को चैन से जीने नहीं दे रहा है।

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दीपक सिंह बने अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर के जिलाध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ https://sanjayrajput.com/2024/07/dipak-singh-jiladhyaksh-vyapar-prakosth-of-abkm-gorakhpur.html https://sanjayrajput.com/2024/07/dipak-singh-jiladhyaksh-vyapar-prakosth-of-abkm-gorakhpur.html#respond Fri, 26 Jul 2024 13:03:33 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=590 Read more

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क्षत्रिय समाज को व्यापार में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना होगा क्योंकि यह अर्थ युग है। हमें अपने परिवार के किसी एक व्यक्ति को व्यवसाय में जरूर भेजना होगा: दीपक सिंह

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा गोरखपुर की शुक्रवार को आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी एवं जिला कार्यकारिणी की संयुक्त बैठक में जिलाध्यक्ष एवं संगठन मंत्री की संस्तुति पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष पूर्वांचल प्रांत उग्रसेन सिंह ने बेलघाट निवासी दीपक सिंह को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा व्यापार प्रकोष्ठ का जिलाध्यक्ष मनोनीत किया है।

संयुक्त बैठक में यह तय हुआ कि जल्द से जल्द गोरखपुर जिले व आसपास के क्षेत्रों के सभी क्षत्रियों का डाटा तैयार किया जाए जिसको व्यावहारिक एवं डिजिटल रूप में संग्रहित कर महासभा अपने पास संरक्षित रखेगी।

इस अवसर पर मनोनीत हुए नवनियुक्त जिलाध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ से कहा कि मैं पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपने समाज के हित के लिए कार्य करूंगा। हमारा क्षत्रिय समाज व्यवसाय में काफी पीछे है जो अभी भी जमींदारी के पक्ष में रहता है, इस धारणा को हमें बदलना होगा। क्षत्रिय समाज को व्यापार में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना होगा क्योंकि यह अर्थ युग है। हमें अपने परिवार के किसी एक व्यक्ति को व्यवसाय में जरूर भेजना होगा।

उनकी बातों को सहमति देते हुए जिलाध्यक्ष लालू सिंह ने कहा कि अब आप यथाशीघ्र अपनी कार्यकारिणी का गठन करें। साथ ही उन्हें दायित्व देते हुए कहा कि खजनी तहसील की कार्यकारिणी का गठन भी आप को ही करना है, जिसका संरक्षण भी आप करेंगे।

इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष व्यापार प्रकोष्ठ कुंज बिहारी राव, प्रदेश संगठन मंत्री अरुण सिंह, गोरखपुर मंडल अध्यक्ष आरपी सिंह, जिला महामंत्री राजकुमार सिंह, जिला संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष विनय चंद, राजू सिंह नन्हे, जिला मंत्री संजय सिंह, महामंत्री अनूप सिंह, मंडल अध्यक्ष युवा दीपक चंद, जिलाध्यक्ष युवा सावन शाही, संगठन मंत्री युवा अवधेश सिंह, संजीत सिंह, अमित सिंह, संदीप सिंह, संत विजय सिंह, सुधीर सिंह, चंद्रशेखर सिंह, कुलदीप सिंह इत्यादि लोग उपस्थित रहे।

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भाजपा विधायक को अपनी ही सरकार में किससे है जान का खतरा, जानिए… https://sanjayrajput.com/2024/07/mla-fateh-bahadur-singh-news.html https://sanjayrajput.com/2024/07/mla-fateh-bahadur-singh-news.html#respond Fri, 19 Jul 2024 03:50:57 +0000 https://sanjayrajput.com/?p=500 Read more

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MLA Fateh Bahadur Singh News: उत्तर प्रदेश के कद्दावर भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह ने एक विस्फोटक खुलासा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है और उनके जनपद में कुछ नेता और पुलिस अधिकारी मिले हुए हैं जो इस अपराधी गिरोह को संरक्षण दे रहे हैं। 

यूपी के पूर्व सीएम वीर बहादुर सिंह के बेटे और गोरखपुर जिले की कैंपियरगंज सीट के भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह ने भाजपा के ही कार्यकर्ता से अपनी जान को खतरा बताया। कहा- भाजपा के राजू रंजन चौधरी मेरी हत्या कराना चाहते हैं। इसके लिए 5 करोड़ की सुपारी दे रहे हैं। पुलिस इस साजिश में शामिल है। विधायक और पूर्व सीएम वीर बहादुर सिंह के बेटे ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी को पत्र लिखकर सुरक्षा मांगी है।

इसके बाद भाजपा कार्यकर्ता राजू रंजन भी सामने आया। उसने विधायक से उल्टा अपनी जान को खतरा बताया। कहा- मैं विधायक की नहीं, बल्कि विधायक मेरी हत्या कराना चाहते हैं। सीएम योगी के रहते विधायक लोगों पर फर्जी केस नहीं दर्ज करा पा रहे।

गंभीर आरोप और सीबीआई जांच की मांग

फतेह बहादुर सिंह ने बताया कि 11 दिन पहले उनकी जान को खतरा था और कुछ लोग उनकी हत्या की साजिश रच रहे थे। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखित में सूचित किया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस में कुछ लोग इस अपराधी गिरोह से मिले हुए हैं और उसका संरक्षण कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।

राजनीतिक हत्याओं की श्रृंखला

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक हत्याओं की एक लंबी श्रृंखला रही है। विधायक ओम प्रकाश पासवान, कृष्णानंद राय और फतेह बहादुर सिंह के पिता वीर बहादुर सिंह जैसे नेताओं की हत्या की गई है। ऐसी हत्याएं राज्य में अपराधियों के राज को दर्शाती हैं। अब फतेह बहादुर सिंह का यह आरोप और मांग गंभीर है और इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।

स्थानीय पुलिस और नेताओं की मिली भगत

फतेह बहादुर सिंह का आरोप है कि स्थानीय पुलिस के कुछ अधिकारी इस अपराधी गिरोह से मिले हुए हैं और उसका संरक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि एक थानेदार को रातोरात ट्रांसफर कर दिया गया, जो इस अपराधी से मिलकर चाय-नाश्ता करता था। यह गंभीर आरोप है और इस पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री से भरोसा गंवाया

फतेह बहादुर सिंह ने कहा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इस मामले में लिखित में सूचित किया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह उनका भरोसा गंवाने का कारण बन गया है। वह चाहते हैं कि इस मामले की सीबीआई जांच हो ताकि सच सामने आ सके।

केंद्रीय नेतृत्व से मदद की मांग

फतेह बहादुर सिंह ने अपनी चिंता और मांग को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखकर इस मामले में मदद मांगी है। यह दर्शाता है कि वह राज्य सरकार पर भरोसा नहीं करते और केंद्रीय जांच एजेंसी से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

फतेह बहादुर सिंह का यह आरोप गंभीर है और इस पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। यदि उनके आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उत्तर प्रदेश में अपराधियों के राज और राजनीतिक संरक्षण की पोल खोलेगा। केंद्रीय नेतृत्व को इस मामले में दखल देना चाहिए और सीबीआई जांच कराकर सच्चाई सामने लानी चाहिए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के विधायक फतेह बहादुर जो कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीर बहादुर सिंह के पुत्र भी हैं, अपनी जान पर खतरा बता रहे।

फतेह बहादुर पांच बार के विधायक और दो बार के मंत्री है और गोरखपुर की कैंपियरगंज सीट से विधायक हैं।

आखिरकार कौन है वो जो इस तरह की जुर्रत कर रहा है? वह हत्या की सुपारी उठाने और चंदा इकट्ठा करने वाला कौन है?

अगर भाजपा के विधायक उत्तर प्रदेश में अपनी जान को खतरा बता रहे तो इससे बड़ी चिंता का विषय और क्या हो सकता है?

भाजपा विधायक के आरोपों पर एसएसपी गोरखपुर डॉ. गौरव ग्रोवर और डीएम गोरखपुर कृष्णा करुणेश ने क्या सफाई दी देखिए नीचे दिए गए वीडियो में-

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https://sanjayrajput.com/2024/07/mla-fateh-bahadur-singh-news.html/feed 0 500 MLA Fateh Bahadur Singh के आरोपों के सम्बंध में SSP Gorakhpur गौरव ग्रोवर व DM कृष्णा करुणेश का बयान nonadult
गैंग्स ऑफ गोरखपुर https://sanjayrajput.com/2024/07/gangs-of-gorakhpur.html https://sanjayrajput.com/2024/07/gangs-of-gorakhpur.html#respond Wed, 03 Jul 2024 15:43:00 +0000 Read more

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पूर्वांचल क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक संरचना में गैंगवार और गुटबाजी की एक लंबी परंपरा रही है। इस क्षेत्र में कई ऐसे डॉन और गैंगस्टर उभरे हैं जिन्होंने अपने दबदबे से राज्य की राजनीति को प्रभावित किया है। इन गैंगस्टर्स के पीछे उनके जाति आधारित संरक्षण और राजनीतिक संबंध रहे हैं। इस लेख में हम पूर्वांचल के इन गैंगस्टर्स और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
गोरखपुर: गैंगवार का केंद्र
गोरखपुर जिला पूर्वांचल क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण जिला है। यहां की राजनीति में तीन केंद्र रहे हैं – गोरखनाथ मठ, ब्राह्मण राजनीति का केंद्र ‘हाता’, और क्षत्रिय राजनीति का केंद्र ‘शक्ति सदन’। 
इन तीनों केंद्रों के बीच राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष चलता रहा है। 1970 के दशक में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दो प्रमुख नेता, बलवंत सिंह (ठाकुर) और हरिशंकर तिवारी (ब्राह्मण) के बीच इस संघर्ष ने खूनी रूप ले लिया।
हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही
हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र प्रताप शाही के बीच चला यह गैंगवार 1980 के दशक तक चलता रहा। इस दौरान 50 से अधिक लोगों की हत्याएं हो गईं। तिवारी और शाही दोनों ने अपने-अपने जाति समूहों से राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण प्राप्त किया। इस संघर्ष में कई नेता और गैंगस्टर उभरे, जिनमें से मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह प्रमुख हैं।
श्रीप्रकाश शुक्ला: उत्तर प्रदेश का सबसे खतरनाक गैंगस्टर
इस संघर्ष के बीच एक और गैंगस्टर का उदय हुआ, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश में अपना दबदबा कायम कर लिया। वह था श्री प्रकाश शुक्ला। शुक्ला ने अपनी क्रूरता और हिंसक प्रवृत्ति से पूरे प्रदेश में अपना खौफ फैला दिया। उसने कई नेताओं और बाहुबलियों को मौत के घाट उतार दिया। अंततः 1998 में एक स्पेशल पुलिस टास्क फोर्स (STF) ने उसका सफाया कर दिया।
राजनीतिक संरक्षण और जाति आधारित गुटबाजी
इन गैंगस्टर्स को उनके जाति आधारित संरक्षण और राजनीतिक संबंध मजबूत करते रहे। हरिशंकर तिवारी को कई सरकारों में कैबिनेट मंत्री पद मिलता रहा, जबकि वीरेंद्र शाही और श्री प्रकाश शुक्ला को भी उनकी जाति के नेताओं का समर्थन प्राप्त था। इस प्रकार जाति और राजनीतिक संबंधों ने पूर्वांचल क्षेत्र में गैंगवार और अपराध को बढ़ावा दिया।
मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह: अगले दौर का संघर्ष
वीरेंद्र शाही के बाद पूर्वांचल में ठाकुरों का एक और प्रमुख नेता बृजेश सिंह उभरा। वह और मुख्तार अंसारी के बीच एक नया संघर्ष शुरू हुआ, जो अगले दो दशक से अधिक समय तक चलता रहा। यह संघर्ष भी जाति और राजनीतिक संरक्षण पर ही आधारित था।

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वो दौर जब गोरखपुर था ‘अपराधों की राजधानी’ https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html https://sanjayrajput.com/2020/05/once-upon-time-in-gorakhpur.html#respond Tue, 26 May 2020 12:26:00 +0000 https://sanjayrajput.com/2020/05/26/%e0%a4%b5%e0%a5%8b-%e0%a4%a6%e0%a5%8c%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%96%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0-%e0%a4%a5%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a7/ Read more

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योगी आदित्यनाथ का शहर गोरखपुर आज भले ही विकास का रोल मॉडल बनकर सीएम सिटी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है मगर 1970 के दशक में जब पूरे देश में जेपी आंदोलन जोरों पर था उन दिनों गोरखपुर सिर्फ जातीय संघर्षों, वर्चस्व की लड़ाई और गैंगवार के लिए ही बदनाम हुआ करता था। 
कई नए माफियाओं के उदय की भूमि होने के चलते गोरखपुर को ‘Crime Capital of North India’ कहा जाने लगा था। यहां की छात्र राजनीति भी दो गुटों में बँटी हुई थी और गोरखपुर यूनिवर्सिटी में ब्राह्मण और क्षत्रिय दो गुट हुआ करते थे। इन दोनों गुटों की आपसी रंजिश और मुठभेड़ से गोरखपुर में रोज अपराध की एक नई कहानी लिखी जाती थी।

उस वक्त जब देश भर के छात्र नेता देश को बदलने के जुनून में सड़कों पर आंदोलन करने में जुटे थे। वहीं गोरखपुर के छात्र नेता देशी तमंचे लहराते हुए अपने वर्चस्व को कायम करने में जुटे हुए थे। उस समय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में दो छात्र नेता हुआ करते थे, ठाकुर गुट के रविन्द्र सिंह और ब्राह्मण गुट के हरिशंकर तिवारी। इन दोनों छात्र नेताओं में हमेशा वर्चस्व को लेकर लड़ाई ठनी रहती थी। वो एक ऐसा दौर था जब गोरखपुर यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र न होकर ब्राह्मण-ठाकुर जातीय संघर्ष का अखाड़ा बनकर रह गया था।

इन दोनों गुटों में गोरखपुर यूनिवर्सिटी में अपना-अपना वर्चस्व कायम करने हेतु आए दिन असलहे लहराना, मारपीट और बवाल होते रहते थे। इस बीच ठाकुरों के नेता रविन्द्र सिंह को वीरेंद्र प्रताप शाही नाम का एक नया और तेज तर्रार लड़का मिला जो कि उनकी ही जाति से था। 


यह वो दौर था जब जाति को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती थी। जिले में ब्राह्मण और ठाकुर दोनों गुट अपना-अपना वर्चस्व कायम करने में जुटे रहते थे। और इन दोनों गुटों की आपसी वर्चस्व की लड़ाई ने गोरखपुर का अमन चैन पूरी तरह छीन लिया था। उन दिनों आये दिन गोरखपुर की सड़कों पर मर्डर, फिरौती, रंगबाजी, डकैती का ही तांडव हुआ करता था। 


उन दिनों गोरखपुर के हालात ऐसे हुआ करते थे कि इन दोनों गुटों के लोग दुकान से सामान लेते और दुकानदार द्वारा पैसे मांगने पर गोली मार देते थे। गुंडई का आलम यह था कि यहाँ लोग पेट्रोल भराकर पैसे तक नहीं देते थे और पैसे मांगने पर गोली मार देते थे। ऐसी घटनाएं आम होने लगी थी। फिर इन दोनों गुटों को वर्चस्व के साथ-साथ पैसे की अहमियत भी समझ में आने लगी थी। उसी दौर में रेलवे के स्क्रैप की ठेकेदारी भी मिलने लगी थी और दोनों गुट अब अपने-अपने वर्चस्व का इस्तेमाल करके ठेकेदारी और अन्य कामों में लग गए। 
1980 में हरिशंकर तिवारी ने रेलवे के ठेके में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी।  हरिशंकर तिवारी और वीरेंद्र शाही दोनों ने अपने-अपने गुट को मजबूत करना शुरू कर दिया था। इन दोनों ने अपने-अपनेे संगठित गैंग भी बना लिए थे। उन्हीं दिनों कई बार ऐसा हुआ जब दोनों माफियाओं के बीच जारी वर्चस्व की जंग में पूरा गोरखपुर शहर थर्रा गया था। 
तब पूर्वांचल में रोज कहीं न कहीं गैंगवार में चली गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती रहती थी। आए दिन दोनों गुटों के कुछ लोग मारे जाते थे। साथ ही कई निर्दोष लोग भी मरते थे। इसी दौरान ब्राह्मण-ठाकुर जातीय संघर्ष में लखनऊ और गोरखपुर विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके युवा विधायक रविंद्र सिंह की भी हत्या हो गई।

बताया जाता हैं कि इस घटना के बाद ठाकुरों के गुट ने वीरेंद्र प्रताप शाही को अपना नेता मान लिया। कुछ ही दिनों में वीरेंद्र शाही की तूती बोलने लगी और उन्हें ‘शेरे-पूर्वांचल’ तक कहा जाने लगा। अब गोरखपुर माफियाराज से पूरी तरह रूबरू हो चुका था और सरकारी सिस्टम यहाँ पूरी तरह फेल हो चुका था। इन दोनों गुटों की गैंगवार के चलते गोरखपुर ही नहीं आसपास के जिलों की कानून-व्यवस्था भी पूरी तरह फेल हो गयी थी।
फिर जब दोनों गुटों ने ठेके आदि से खुद को आर्थिक रूप से सक्षम बना लिया तब पूर्वांचल से निकलकर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दोनों गुटों ने अपनी-अपनी एक समानांतर सरकार बना ली। इन लोगों के यहाँ अपनी अपनी बिरादरी के जनता दरबार भी लगने लगे। जमीनी विवाद से लेकर हर तरह के मुद्दे इनके दरबार में आने लगे थे। लोग अपने विवादों के निपटारे के लिए कोर्ट जाने से बेहतर इन माफियाओं के दरबार को समझने लगे थे।


इसी बीच 1985 में गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल ली। उनके लिए प्रदेश संभालने से महत्वपूर्ण माफियाओं को संभालना चुनौती थी। हर एक की निगाह वीर बहादुर सिंह पर ही थी। उन्होेंने इसके लिए गैंगेस्टर एक्ट लाया। लेकिन इन लोगों को सामाजिक स्वीकार्यता मिल चुकी थी। राजनीति में भी इनकी बराबर भागीदारी और स्वीकार्यता मिल चुकी थी। जानकार बताते हैं कि इनकी स्वीकार्यता का ही नतीजा है कि पंडित हरिशंकर तिवारी छह बार तो वीरेंद्र प्रताप शाही दो बार विधायक चुने गए। कानून व्यवस्था को दरबारी बनाने के लिए इन पर अंगुलियां उठी तो न जाने कितने इनके दर पर आकर न्याय पाकर दुआ देते हुए लौटे भी। अलग-अलग क्षेत्रों में दबंग छवि वालों को जनता अपना रहनुमा चुनने लगी। पूर्व विधायक अंबिका सिंह, पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, पूर्व सांसद ओम प्रकाश पासवान, पूर्व सांसद बालेश्वर यादव आदि का उनके क्षेत्रों में प्रभाव बढ़ने के साथ जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों के रहनुमा बन चुके थे।

राजनीति से अपराधियों के गठजोड़ की अपने देश में पुरानी परंपरा है। कहा जाता है किं यदि सौ गुनाह करने के बाद भी कानून की नजरों से बचना हो तो राजनीति का चोला ओढ़ लो। इसी फॉर्मूले को अपनाकर इन दोनों गुटों के माफियाओं ने भी बाद में पैसे के बल पर राजनीति की चादर ओढ़ ली और माफिया से माननीय बन गए। 


फिर 90 के दशक में गोरखपुर के गांव मामखोर के एक शिक्षक का लड़का श्रीप्रकाश शुक्ला सबको पीछे छोड़ते हुए जरायम की दुनिया में तेजी से उभरा। अपनी बहन को छेड़े जाने पर उसने पहली हत्या की और उसके बाद हरिशंकर तिवारी ने उसे बैंकॉक भेजकर उसे पुलिस के हाथों बचाया। अपनी बिरादरी के होने के नाते हरिशंकर तिवारी ने उसे गुनाह की दुनिया में अपने फायदे के लिए एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया। लेकिन महत्वाकांशी श्रीप्रकाश शुक्ला ने गुनाह की दुनिया में तिवारी से बगावत करते हुए AK-47 जैसे असलहों से लैस अपनी अलग गैंग बनाकर पूर्वांचल से बिहार, दिल्ली, ग़ाज़ियाबाद तक अपने खौफ का साम्राज्य फैलाना शुरू कर दिया। अब बिहार के माफिया डॉन और रेलवे के ठेकेदार सूरजभान का भी हाथ श्रीप्रकाश के सिर पर था। 1997 में श्रीप्रकाश शुक्ला ने वीरेंद्र शाही की लखनऊ में गोली मारकर हत्या कर दी। उसका अगला टारगेट माफिया से माननीय बना हरिशंकर तिवारी ही था परन्तु इस बीच उसने सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने के लिए 6 करोड़ की सुपारी ले ली जिसके बाद यूपी एसटीएफ (STF) ने 1998 में श्रीप्रकाश शुक्ला को लखनऊ में एक एनकाउंटर के दौरान मार गिराया। 

वीरेंद्र शाही की हत्या के बाद छोटे-छोटे गिरोह ने अपनी धमक बनानी शुरू कर दी। कुछ ने जरायम की दुनिया में हनक दिखाने के साथ राजनीति में भी कदम रखा। जो सिलसिला आज भी कायम है। कई आज की तारीख में सत्ता के लाभ वाले पद को भी सुशोभित कर रहे हैं।  
क्योंकि हमारे समाज में गुंडों को पूजने का पुराना रिवाज है इसलिए यहाँ लोग जेल से भी चुनाव लड़कर जीत जाते हैं। जब भी कोई माफिया, बाहुबली पैसों के बल पर जोर-शोर से लाव-लश्कर के साथ चुनाव लड़ता है तो वो बम्पर वोटों से जीत हासिल करता है। वहीं जब कोई साधारण और बेदाग छवि वाला आदमी बिना लाव-लश्कर के चुनाव लड़ता है तो उसकी जमानत तक जब्त हो जा्ती है।


योगी आदित्यनाथ के यूपी का सीएम बनने के बाद पूरे प्रदेश से गुंडाराज खत्म हुआ है और प्रदेश के साथ-साथ गोरखपुर में भी चलने वाले छोटे-बड़े गैंग या तो खत्म हो गए हैं या सभी अपराधी और गुंडे भूमिगत हो गए हैं। पहले जहाँ गोरखपुर में आये दिन सरेआम फिरौती, रंगबाजी और लूटपाट आम बात थी वहीं अब कानून व्यवस्था फिर से कायम हुई है। 

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