देश के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई शहरों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच रहा है, जिससे घरों की छतें तपने लगी हैं और कमरों में रहना मुश्किल हो गया है। ऐसे मौसम में लोग राहत पाने के लिए एयर कंडीशनर और कूलर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसके साथ बिजली बिल भी तेजी से बढ़ता है।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति ने बेहद कम खर्च में छत को ठंडा रखने का तरीका बताया है। दावा किया जा रहा है कि इस उपाय से छत का तापमान काफी हद तक कम किया जा सकता है और कमरे के अंदर गर्मी का असर घट सकता है।
क्या है वायरल देसी कूल रूफ तकनीक?
वायरल वीडियो में दिखाई गई तकनीक में छत पर सफेद रिफ्लेक्टिव कोटिंग लगाई जाती है। इस कोटिंग को तैयार करने के लिए चूना, बाइंडर और वॉटरप्रूफिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। दावा है कि यह मिश्रण सूरज की गर्मी को कम अवशोषित करता है और छत को अपेक्षाकृत ठंडा बनाए रखने में मदद करता है।
बताया जा रहा है कि इस मिश्रण को छत पर एक या दो परत में लगाया जाता है, जिससे गर्मी का असर कम महसूस होता है। कम लागत में बड़ी छत को कवर करने का दावा भी वीडियो में किया गया है।
कैसे काम करती है सफेद रिफ्लेक्टिव कोटिंग?
विशेषज्ञों के अनुसार, गहरे रंग की छतें सूर्य की किरणों और विशेष रूप से इन्फ्रारेड हीट को अधिक मात्रा में सोख लेती हैं। इसी वजह से दोपहर के समय छत का तापमान काफी ज्यादा हो जाता है।
जब छत पर सफेद या रिफ्लेक्टिव कोटिंग लगाई जाती है, तो वह सूर्य की रोशनी का बड़ा हिस्सा वापस परावर्तित कर देती है। इससे छत की सतह कम गर्म होती है और घर के अंदर गर्मी का असर कुछ हद तक घट सकता है।
रिसर्च और स्टडीज क्या कहती हैं?
भारत में कई संस्थानों और विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि “कूल रूफ” तकनीक छत की सतह का तापमान कम करने में मदद कर सकती है। शोध के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली रिफ्लेक्टिव कोटिंग छत के तापमान को लगभग 10 से 20 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है।
हालांकि, घर के अंदर वास्तविक तापमान में कमी आमतौर पर इससे काफी कम होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमरे के अंदर तापमान में लगभग 2 से 6 डिग्री सेल्सियस तक राहत मिल सकती है। यह असर घर की बनावट, वेंटिलेशन, इंसुलेशन और दीवारों की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे कुछ बड़े दावों को पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
गर्म इलाकों में मिल सकता है ज्यादा फायदा
दिल्ली, राजस्थान, गुजरात और अन्य अत्यधिक गर्म क्षेत्रों में इस तरह की कूल रूफ तकनीक ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे एयर कंडीशनर का लोड कम हो सकता है और बिजली की बचत भी संभव है।
कुछ सरकारी और शैक्षणिक परियोजनाओं में भी स्कूलों और सार्वजनिक भवनों की छतों पर रिफ्लेक्टिव कोटिंग का इस्तेमाल किया गया है, जहां तापमान में कमी और ऊर्जा बचत जैसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।
कूल रूफ कोटिंग के फायदे
- छत का तापमान कम करने में मदद
- कमरों में गर्मी का असर घट सकता है
- एसी और कूलर पर निर्भरता कम हो सकती है
- बिजली की खपत घटाने में सहायक
- कम लागत में तैयार होने वाला विकल्प
इस तकनीक की सीमाएं भी समझना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू स्तर पर बनाई गई कोटिंग का टिकाऊपन बाजार में मिलने वाली प्रोफेशनल कोटिंग्स जितना मजबूत नहीं हो सकता। बारिश, धूल और मौसम की वजह से इसकी चमक और प्रभाव धीरे-धीरे कम हो सकता है।
इसके अलावा केवल छत पर कोटिंग लगाने से पूरा घर एयर कंडीशनर जैसा ठंडा नहीं हो जाता। घर की दीवारें, खिड़कियां, हवा का प्रवाह और इंसुलेशन भी तापमान को प्रभावित करते हैं।
निष्कर्ष
भीषण गर्मी के बीच कम लागत में छत को ठंडा रखने की यह देसी तकनीक लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। वैज्ञानिक दृष्टि से सफेद रिफ्लेक्टिव कोटिंग गर्मी कम करने में मददगार साबित हो सकती है, लेकिन सोशल मीडिया पर किए जा रहे सभी दावों को पूरी तरह सही मानना उचित नहीं होगा।
यदि सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह उपाय गर्म इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बिजली बचाने और गर्मी कम करने का एक उपयोगी विकल्प बन सकता है।