गोरखपुर में 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही अभिषेक यादव को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। आरोपी के कथित आपराधिक इतिहास, पुलिस भर्ती, निलंबन के बाद सेवा में वापसी और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
उपलब्ध जानकारियों और सोशल मीडिया पर प्रसारित दावों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पुलिस सेवा में आने से पहले भी एक गंभीर आपराधिक मामले में जेल जाने का आरोप लगाया गया है। यह भी दावा किया जा रहा है कि उस समय उसकी पृष्ठभूमि की पर्याप्त जांच नहीं हुई और बाद में उसकी पुलिस विभाग में नियुक्ति हो गई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।
पश्चिम बंगाल में भी लगे थे गंभीर आरोप
बताया जा रहा है कि पुलिस सेवा के दौरान पश्चिम बंगाल प्रवास के समय आरोपी पर एक महिला से छेड़छाड़ का आरोप लगा था। इसके बाद फरवरी 2025 में नदिया जिले में सरकारी ड्यूटी के दौरान एक महिला से दुष्कर्म के मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई। बताया जाता है कि वह लगभग 10 महीने तक जेल में रहा और बाद में अदालत से जमानत मिलने के बाद रिहा हुआ।
जमानत के बाद फिर मिली पुलिस सेवा
सूत्रों के अनुसार, जमानत मिलने के बाद न्यायालय के आदेश पर आरोपी को दोबारा सेवा में लिया गया और उसकी तैनाती डायल-112 में कर दी गई। इसी बिंदु को लेकर अब सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे किसी पुलिसकर्मी को पुनः संवेदनशील जिम्मेदारी कैसे सौंप दी गई।
गोरखपुर की मासूम बनी दरिंदगी का शिकार
आरोप है कि हाल ही में गोरखपुर जिला अस्पताल अपनी बीमार मां को भोजन देने आई 12 वर्षीय बच्ची का आरोपी सिपाही ने कथित रूप से पीछा किया, उसे बहला-फुसलाकर बाइक पर बैठाया और सुनसान स्थान पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसकी हत्या कर शव को नदी में फेंक देने का आरोप है। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है।
व्यवस्था और जवाबदेही पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि यदि किसी पुलिसकर्मी पर पहले से गंभीर आपराधिक आरोप लंबित हों या वह ऐसे मामलों में जेल जा चुका हो, तो उसकी नियुक्ति या सेवा में वापसी के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया कितनी प्रभावी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस सत्यापन, विभागीय जांच और जोखिम मूल्यांकन की प्रक्रिया और अधिक कठोर होनी चाहिए।
मेडिकल के दौरान फूटा लोगों का गुस्सा
आरोपी को मेडिकल परीक्षण के लिए जिला अस्पताल लाए जाने के दौरान भारी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ ने आरोपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उसे अपने हवाले करने की मांग की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की और आरोपी को सुरक्षित अस्पताल से बाहर ले जाया गया।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
घटना के बाद आमजन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी को कठोरतम सजा तथा यदि नियुक्ति और सेवा में वापसी की प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई हो तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
नोट: इस समाचार में आरोपी के पूर्व मामलों से संबंधित विवरण सार्वजनिक रूप से प्रसारित दावों और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित हैं। इन तथ्यों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित जांच एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही मानी जाएगी।

