Gorakhnath Mandir Gorakhpur: गोरखपुर का प्रसिद्ध गोरखनाथ मठ न केवल आध्यात्मिक केंद्र रहा है, बल्कि यहां से निकला आशीर्वाद कई बार राजनीतिक दिशा तय करता दिखा है। पढ़िए किन नेताओं की किस्मत इस मठ के आशीर्वाद से चमकी।
मानीराम के पूर्व विधायक से शुरू हुई परंपरा
मानीराम क्षेत्र से जुड़े पूर्व विधायक स्वर्गीय ओम प्रकाश पासवान की कहानी मठ के प्रभाव की मिसाल मानी जाती है। 1989 में विवादों के दौर में उन्होंने महंत अवैद्यनाथ की शरण ली। महंत के आशीर्वाद से वे हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़े और विधायक बने। बाद में वे समाजवादी पार्टी से भी जुड़े, लेकिन मंदिर से जुड़ाव हमेशा बना रहा।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में असर और गहरा
जब योगी आदित्यनाथ मंदिर की कमान पर आए, तब गोरखनाथ मठ की राजनीतिक भूमिका और मजबूत हुई। 2002 में उन्होंने डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल को हिंदू महासभा के टिकट पर चुनाव लड़ाया, जिन्होंने तत्कालीन मंत्री शिव प्रताप शुक्ला को 20 हजार से अधिक मतों से हराया। यह जीत योगी और गोरखनाथ मंदिर के प्रभाव का प्रतीक बनी।
2007 में कई नेताओं को मिला मंदिर का आशीर्वाद
2007 के विधानसभा चुनाव में कई नेताओं ने गोरखनाथ मंदिर से आशीर्वाद लेकर सफलता पाई, जिनमें प्रमुख नाम हैं:
- अतुल सिंह — रामकोला विधानसभा
- शंभू चौधरी — नेबुआ नौरंगिया
- महंत कौशलेंद्र — तुलसीपुर
ओम प्रकाश पासवान के उत्तराधिकारी कमलेश पासवान
स्व. ओम प्रकाश पासवान के निधन के बाद उनके पुत्र कमलेश पासवान ने भी इसी राह पर चलते हुए राजनीति में कदम रखा। योगी आदित्यनाथ के आशीर्वाद से उन्होंने सफलता हासिल की और आज वे बांसगांव से भाजपा सांसद होने के साथ साथ केंद्रीय राज्यमंत्री भी हैं। वहीं उनके उनके छोटे भाई डॉ विमलेश पासवान भी बांसगांव से विधायक हैं। इसी दौर में विजय बहादुर यादव को भी मानीराम से टिकट मिला और वे विधानसभा पहुंचे।
मठ की छाया हटते ही फीका पड़ा सितारा
ऐसी मान्यता है कि, जिसने गोरखनाथ मंदिर की छाया छोड़ी, उसकी राजनीतिक चमक भी घट गई। विजय बहादुर यादव, शंभू चौधरी और महंत कौशलेंद्र जैसे नेता इसी का उदाहरण हैं। उनके राजनीतिक ग्राफ के गिरने से यह धारणा और मजबूत हुई कि मठ का आशीर्वाद सफलता की कुंजी है।
गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में सिर्फ आस्था का नहीं, बल्कि प्रभाव का भी केंद्र रहा है। मठ से जुड़े नेताओं की यात्रा इस बात की गवाही देती है कि यहां का आशीर्वाद आज भी राजनीतिक समीकरणों को दिशा देने में सक्षम है।