इलाज का खर्च हर साल बढ़ रहा है, और ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस अब जरूरत बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में मेडिकल महंगाई 12 से 14 प्रतिशत के आसपास चल रही है, और इलाज की दरों के बेंचमार्क तथा क्लेम एक्सचेंज जैसे सुधारों पर विचार हो रहा है।
हेल्थ इंश्योरेंस बाजार में तेज उछाल
जनवरी 2026 में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम सालाना आधार पर 27.17 प्रतिशत बढ़कर 5,414.54 करोड़ रुपये रहा। टैक्स में बदलाव और सरकारी योजनाओं के विस्तार ने भी इस बढ़त में भूमिका निभाई।
खास बात यह है कि नई पॉलिसियों की बड़ी हिस्सेदारी अब टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण इलाकों से आ रही है।
IRDAI का रुख और नए बीमा खिलाड़ी
IRDAI जून 2026 से सरल और कम लागत वाली पॉलिसियों तथा बीमा कंपनियों और अस्पतालों के लिए नए परफॉर्मेंस स्कोरकार्ड पर जोर दे रहा है।
बाजार में नए खिलाड़ी भी आए हैं। प्रूडेंशियल HCL हेल्थ इंश्योरेंस को 1 जुलाई 2026 को IRDAI की मंजूरी मिली और वह देश की आठवीं स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर बनी। ज्यादा कंपनियों का मतलब है ज्यादा विकल्प और बेहतर प्रीमियम की तुलना।
मेडिक्लेम पॉलिसी लेते समय इन बातों पर ध्यान दें
- कैशलेस इलाज: देखें कि आपके शहर के प्रमुख अस्पताल कंपनी के नेटवर्क में हैं या नहीं।
- सम इंश्योर्ड: बढ़ती मेडिकल महंगाई को देखते हुए कवर बहुत कम न रखें। जरूरत हो तो सुपर टॉप-अप जोड़ें।
- फैमिली फ्लोटर या इंडिविजुअल: परिवार में बुजुर्ग हों तो अलग पॉलिसी पर विचार करें।
- वेटिंग पीरियड और रूम रेंट लिमिट: ये शर्तें क्लेम की रकम घटा सकती हैं।
- क्लेम सेटलमेंट रेशियो: कंपनी चुनने से पहले इसे जरूर जांचें।
- क्रिटिकल इलनेस कवर: गंभीर बीमारी के खर्च से बचाव के लिए अलग से देखें।
बीमा की बुनियादी जानकारी के लिए हमारा यह लेख भी पढ़ें: हेल्थ इंश्योरेंस क्या है और क्यों जरूरी है।
निष्कर्ष
सुधारों का असर आने में समय लगेगा, लेकिन मेडिक्लेम पॉलिसी का इंतजार महंगा पड़ सकता है। खरीदने या रिन्यू करने से पहले पॉलिसी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें और कई कंपनियों की तुलना करें।
नोट: यह जानकारी सामान्य है, वित्तीय सलाह नहीं। निर्णय से पहले बीमा कंपनी या विशेषज्ञ से पुष्टि करें।

