अगर कोई अनजान व्यक्ति अचानक जरूरत से ज्यादा प्यार और अपनापन दिखाने लगे, रोज़ यह कहे कि “तुम ही मेरी दुनिया हो”, और कुछ ही दिनों में आपकी जिंदगी का सबसे खास बन जाए, तो सतर्क हो जाइए। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार यह हनी ट्रैप का शुरुआती संकेत हो सकता है। आज के दौर में यह जाल सिर्फ पुरुषों या महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।
देशभर में कई लोग ऐसे मामलों में आर्थिक नुकसान, ब्लैकमेलिंग, सामाजिक बदनामी और यहां तक कि कानूनी पचड़ों में भी फंस चुके हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकतर मामलों की शुरुआत एक साधारण मैसेज या फ्रेंड रिक्वेस्ट से होती है।
क्या है हनी ट्रैप?
हनी ट्रैप केवल अवैध संबंध या अश्लीलता तक सीमित नहीं है। इसका असली मकसद किसी व्यक्ति की भावनाओं, अकेलेपन और भरोसे का फायदा उठाकर उससे पैसा, संवेदनशील जानकारी या निजी सामग्री हासिल करना होता है। अपराधी पहले दोस्ती और सहानुभूति का माहौल बनाते हैं, भरोसा जीतते हैं और जब सामने वाला पूरी तरह जुड़ जाता है, तब ब्लैकमेलिंग या ठगी का खेल शुरू होता है।
कैसे शुरू होता है जाल?
अधिकांश मामलों में शुरुआत फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, डेटिंग ऐप या मैट्रिमोनियल साइट से होती है। आकर्षक प्रोफाइल, शालीन बातचीत और नियमित हालचाल पूछना — धीरे-धीरे व्यक्ति भावनात्मक रूप से जुड़ने लगता है। इसके बाद देर रात वीडियो कॉल, निजी बातचीत और कई बार गुपचुप रिकॉर्डिंग की घटनाएं सामने आती हैं।
कुछ समय बाद किसी बहाने पैसों की मांग शुरू होती है — बीमारी, बिजनेस नुकसान, निवेश का अवसर, विदेश यात्रा या शादी की तैयारी। पहली बार रकम छोटी होती है, लेकिन एक बार पैसा भेजने के बाद मांग लगातार बढ़ती जाती है।
शादी, नौकरी और मॉडलिंग के नाम पर ठगी
मैट्रिमोनियल ऐप के जरिए रिश्ते तय कर शादी से पहले इमरजेंसी बताकर पैसे ऐंठने के मामले भी सामने आए हैं। इसी तरह नौकरी, मॉडलिंग या वेब सीरीज़ में काम दिलाने के नाम पर लोगों को बुलाकर उनकी फोटो या वीडियो के जरिए दबाव बनाया जाता है। बदनामी के डर से कई पीड़ित शिकायत दर्ज नहीं कराते।
सरकारी कर्मचारियों पर भी निशाना
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार सेना, पुलिस और अन्य सरकारी कर्मचारियों को भी हनी ट्रैप का शिकार बनाया गया है। पहले दोस्ती और प्यार, फिर ड्यूटी और लोकेशन जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है।
फंस जाएं तो क्या करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि घबराना या डरकर पैसा भेजना सबसे बड़ी गलती है। इससे अपराधी और हिम्मत पकड़ लेते हैं। यदि कोई व्यक्ति इस तरह के जाल में फंस जाए तो तुरंत ये कदम उठाएं:
- सभी चैट, कॉल डिटेल और लेनदेन के सबूत सुरक्षित रखें।
- एक भी अतिरिक्त पैसा न भेजें।
- तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
- cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
- परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति को पूरी जानकारी दें।
- संबंधित प्रोफाइल को ब्लॉक और रिपोर्ट करें।
सावधानी ही बचाव
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि जो व्यक्ति सच में आपका हित चाहता है, वह आपसे पैसे नहीं मांगेगा और न ही किसी प्रकार का दबाव बनाएगा। अनजान व्यक्ति को निजी फोटो-वीडियो भेजना या वीडियो कॉल पर असावधानी बरतना गंभीर जोखिम साबित हो सकता है।
ऑनलाइन दुनिया में सतर्क रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें और दूसरों को भी जागरूक करें, ताकि हनी ट्रैप जैसे साइबर अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।