मेरठ में कवरेज रोकने की कोशिश का वीडियो वायरल, प्रेस की आज़ादी पर बहस तेज
लखनऊ। रिपोर्टिंग के दौरान एक टीवी पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मेरठ में हुई इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। मामले को प्रेस की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रिपब्लिक भारत न्यूज चैनल के पत्रकार एक संवेदनशील प्रकरण की कवरेज के लिए मौके पर मौजूद थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें रिपोर्टिंग से रोकने की कोशिश की। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की की गई। वायरल वीडियो में पुलिस और पत्रकार के बीच तीखी नोकझोंक साफ तौर पर देखी जा सकती है।
घटना की कड़ी निंदा करते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनुराग सक्सेना ने कहा कि यह घटना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि पत्रकार संविधान से मिले अधिकारों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे, ऐसे में पुलिस का यह रवैया गंभीर चिंता का विषय है। यदि पत्रकारों को सच्चाई सामने लाने से रोका जाएगा तो शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े होंगे।
वहीं, संगठन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आर.सी. श्रीवास्तव ने इसे पूरे मीडिया जगत का अपमान बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया तो संगठन को आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मेरठ की यह घटना अब केवल एक स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रही है। यह मामला देशभर में प्रेस की स्वतंत्रता और पुलिस के व्यवहार को लेकर नई बहस छेड़ रहा है। पत्रकार संगठनों का कहना है कि वे कानून-व्यवस्था में बाधा नहीं बनते, लेकिन सच दिखाने से रोकने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए जर्नलिस्ट काउंसिल ऑफ इंडिया ने गृह मंत्री को पत्र भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।